Yesterday, 07:14 AM
अहमद के साथ वो पहली मुलाकात के बाद से शिवानी का मन दो टुकड़ों में बंट गया था। दिन में प्रिंस के साथ वो हँसती, उसके गले लगती, उसके साथ प्लान बनाती – शादी की तारीख, घर, बच्चे। प्रिंस की आँखों में वो प्यार देखकर उसका दिल पिघल जाता। प्रिंस उसे “जान” कहकर पुकारता, उसके माथे पर किस करता, और कहता, “तुम मेरी पूरी दुनिया हो, शिवानी। कभी मत छोड़ना मुझे।” हर बार शिवानी का गला रुँध जाता। वो सोचती, “प्रिंस… मैं तुम्हें कितना प्यार करती हूँ… फिर भी…”
रात होते ही अहमद की यादें आ घेरतीं। उसकी दाढ़ी की रगड़, उसकी गहरी आवाज में “अल्लाह की कसम” कहना, वो इंटरफेथ का निषिद्ध रोमांच – सब कुछ शिवानी को खींचता। लेकिन साथ ही अपराधबोध भी। वो आईने के सामने खड़ी होकर खुद से बात करती, “शिवानी… तू क्या कर रही है? प्रिंस ने तुझे कभी धोखा नहीं दिया। वो तेरे लिए सब कुछ छोड़ सकता है। और तू… एक गलती से अपनी जिंदगी बर्बाद कर रही है?”
एक शाम प्रिंस ने सरप्राइज दिया। फ्लैट में कैंडल लाइट डिनर। टेबल पर फूल, शिवानी का पसंदीदा खाना। प्रिंस घुटनों पर बैठ गया, एक छोटी सी रिंग हाथ में। “शिवानी… अगले महीने शादी फाइनल कर लें? मैं इंतजार नहीं कर पा रहा। तुम्हारे बिना… अधूरा लगता हूँ।” शिवानी की आँखों में आँसू आ गए। वो रिंग देख रही थी – सिंपल, लेकिन प्रिंस की सच्ची मोहब्बत से भरी। उसने हाँ कहा, लेकिन दिल में तूफान था। प्रिंस ने उसे गले लगाया, “क्यों रो रही हो, जान?” शिवानी ने बहाना बनाया, “खुशी के आँसू… बस।”
उसी रात, जब प्रिंस सो गया, शिवानी फोन उठाकर अहमद को मैसेज किया: “नहीं मिलना चाहिए अब। ये गलत है। मैं प्रिंस से शादी करने वाली हूँ।” अहमद का रिप्लाई तुरंत आया: “शिवानी… मैं समझता हूँ। लेकिन क्या तुम सच में खुश हो? या बस डर रही हो? मैं तुम्हें जबरदस्ती नहीं रखूँगा… लेकिन वो रातें… वो सिहरन… वो सब झूठ नहीं था।”
शिवानी का दिल टूट रहा था। वो बेड पर लेटी रोने लगी। एक तरफ प्रिंस – जो उसका बचपन का सपना था, उसकी सुरक्षा, उसका घर। दूसरी तरफ अहमद – जो उसकी आत्मा को छूता था, जो उसे वो आजादी देता था जो वो कभी महसूस नहीं कर पाई। वो सोचती, “अगर प्रिंस को पता चला तो? वो टूट जाएगा। मैं उसे मार डालूँगी। लेकिन अगर मैं अहमद को छोड़ दूँ… तो क्या मैं कभी खुद को माफ कर पाऊँगी?”
अगले दिन अहमद ने दुकान पर बुलाया। शिवानी नहीं जाना चाहती थी, लेकिन पैर खुद-ब-खुद वहाँ पहुँच गए। दुकान बंद थी। अहमद ने दरवाजा खोला। अंदर अगरबत्ती जल रही थी, कुरान की आयतें दीवार पर। अहमद ने उसे देखा, आँखें नम। “शिवानी… मैंने सोचा था मैं तुम्हें भूल जाऊँगा। लेकिन नहीं हो पा रहा।” शिवानी रो पड़ी, “अहमद… मैं प्रिंस को धोखा नहीं देना चाहती। वो मेरा सब कुछ है। लेकिन तुम… तुम्हारे बिना भी अधूरा लगता है। मैं क्या करूँ?”
अहमद ने उसे बाहों में लिया। इस बार कोई जुनून नहीं – बस गहरा दर्द। वो दोनों बैठे रहे, एक-दूसरे को गले लगाए। अहमद बोला, “मैं ,., हूँ… तुम *। हमारा मिलना समाज कभी मंजूर नहीं करेगा। लेकिन दिल… दिल तो नहीं मानता। अगर तुम कहो तो मैं चला जाऊँगा पटना से। तुम्हारी खुशी सबसे जरूरी है।”
शिवानी ने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया। “नहीं… मत जाओ। मैं… मैं कन्फ्यूज हूँ।” उनकी नजरें मिलीं। धीरे से चुंबन हुआ – इस बार जुनून से ज्यादा दर्द भरा। अहमद ने उसकी साड़ी नहीं उतारी। बस उसे सहलाया, जैसे वो आखिरी बार हो। शिवानी रोते हुए बोली, “अहमद… अगर मैं प्रिंस से शादी कर लूँ… तो क्या तुम मुझे भूल जाओगे?” अहमद ने कहा, “नहीं… लेकिन मैं तुम्हें कभी परेशान नहीं करूँगा। तुम्हारी खुशी… बस यही दुआ करूँगा।”
शिवानी घर लौटी। प्रिंस इंतजार कर रहा था। “कहाँ थी इतनी देर?” शिवानी ने झूठ बोला, “दुकान गई थी कुछ सामान लेने।” प्रिंस ने उसे गले लगाया। शिवानी की आँखों से आँसू गिरे। प्रिंस ने पूछा, “क्या हुआ?” शिवानी ने कहा, “कुछ नहीं… बस तुम्हें बहुत मिस कर रही थी।” लेकिन अंदर से वो चीख रही थी – “प्रिंस… मुझे माफ कर दो… मैं तुम्हें प्यार करती हूँ… लेकिन मेरा दिल दो जगहों पर है।”
रात को प्रिंस ने उसे प्यार से छुआ। धीरे-धीरे, रोमांटिक। शिवानी ने आँखें बंद कीं, लेकिन मन में अहमद की तस्वीर। वो प्रिंस के साथ थी, लेकिन उसका दिल कहीं और। प्रिंस ने कहा, “शिवानी… तुम आज कुछ अलग लग रही हो। सब ठीक है न?” शिवानी ने मुस्कुरा कर कहा, “हाँ… बस थक गई हूँ।”
अगले कुछ दिन शिवानी ने अहमद से दूरी बनाई। लेकिन हर बार जब प्रिंस उसे “आई लव यू” कहता, उसका अपराधबोध बढ़ता। वो सोचती, “मैं दो लोगों को दुख दे रही हूँ। प्रिंस को धोखा… अहमद को इंतजार। मैं कौन सी लड़की हूँ?” एक रात वो अकेले गंगा घाट पर गई। बैठी रही, रोती रही। “भगवान… मुझे रास्ता दिखाओ। मैं किसे चुनूँ? या दोनों को खो दूँ?”
फिर अचानक फोन बजा – अहमद का। “शिवानी… मैं जा रहा हूँ पटना से। कल सुबह ट्रेन है। बस… एक बार मिल लो। आखिरी बार।” शिवानी का दिल धड़क उठा। वो जानती थी – अगर वो मिली तो शायद वापस न लौट पाए। लेकिन अगर नहीं मिली… तो शायद हमेशा पछताएगी।
उस रात वो प्रिंस से कहा, “कल सुबह जल्दी शिफ्ट है।” प्रिंस ने किस किया, “ठीक है, जान। सेफली जाना।” शिवानी रो पड़ी – प्रिंस को पता नहीं था कि ये शायद आखिरी किस हो।
रात होते ही अहमद की यादें आ घेरतीं। उसकी दाढ़ी की रगड़, उसकी गहरी आवाज में “अल्लाह की कसम” कहना, वो इंटरफेथ का निषिद्ध रोमांच – सब कुछ शिवानी को खींचता। लेकिन साथ ही अपराधबोध भी। वो आईने के सामने खड़ी होकर खुद से बात करती, “शिवानी… तू क्या कर रही है? प्रिंस ने तुझे कभी धोखा नहीं दिया। वो तेरे लिए सब कुछ छोड़ सकता है। और तू… एक गलती से अपनी जिंदगी बर्बाद कर रही है?”
एक शाम प्रिंस ने सरप्राइज दिया। फ्लैट में कैंडल लाइट डिनर। टेबल पर फूल, शिवानी का पसंदीदा खाना। प्रिंस घुटनों पर बैठ गया, एक छोटी सी रिंग हाथ में। “शिवानी… अगले महीने शादी फाइनल कर लें? मैं इंतजार नहीं कर पा रहा। तुम्हारे बिना… अधूरा लगता हूँ।” शिवानी की आँखों में आँसू आ गए। वो रिंग देख रही थी – सिंपल, लेकिन प्रिंस की सच्ची मोहब्बत से भरी। उसने हाँ कहा, लेकिन दिल में तूफान था। प्रिंस ने उसे गले लगाया, “क्यों रो रही हो, जान?” शिवानी ने बहाना बनाया, “खुशी के आँसू… बस।”
उसी रात, जब प्रिंस सो गया, शिवानी फोन उठाकर अहमद को मैसेज किया: “नहीं मिलना चाहिए अब। ये गलत है। मैं प्रिंस से शादी करने वाली हूँ।” अहमद का रिप्लाई तुरंत आया: “शिवानी… मैं समझता हूँ। लेकिन क्या तुम सच में खुश हो? या बस डर रही हो? मैं तुम्हें जबरदस्ती नहीं रखूँगा… लेकिन वो रातें… वो सिहरन… वो सब झूठ नहीं था।”
शिवानी का दिल टूट रहा था। वो बेड पर लेटी रोने लगी। एक तरफ प्रिंस – जो उसका बचपन का सपना था, उसकी सुरक्षा, उसका घर। दूसरी तरफ अहमद – जो उसकी आत्मा को छूता था, जो उसे वो आजादी देता था जो वो कभी महसूस नहीं कर पाई। वो सोचती, “अगर प्रिंस को पता चला तो? वो टूट जाएगा। मैं उसे मार डालूँगी। लेकिन अगर मैं अहमद को छोड़ दूँ… तो क्या मैं कभी खुद को माफ कर पाऊँगी?”
अगले दिन अहमद ने दुकान पर बुलाया। शिवानी नहीं जाना चाहती थी, लेकिन पैर खुद-ब-खुद वहाँ पहुँच गए। दुकान बंद थी। अहमद ने दरवाजा खोला। अंदर अगरबत्ती जल रही थी, कुरान की आयतें दीवार पर। अहमद ने उसे देखा, आँखें नम। “शिवानी… मैंने सोचा था मैं तुम्हें भूल जाऊँगा। लेकिन नहीं हो पा रहा।” शिवानी रो पड़ी, “अहमद… मैं प्रिंस को धोखा नहीं देना चाहती। वो मेरा सब कुछ है। लेकिन तुम… तुम्हारे बिना भी अधूरा लगता है। मैं क्या करूँ?”
अहमद ने उसे बाहों में लिया। इस बार कोई जुनून नहीं – बस गहरा दर्द। वो दोनों बैठे रहे, एक-दूसरे को गले लगाए। अहमद बोला, “मैं ,., हूँ… तुम *। हमारा मिलना समाज कभी मंजूर नहीं करेगा। लेकिन दिल… दिल तो नहीं मानता। अगर तुम कहो तो मैं चला जाऊँगा पटना से। तुम्हारी खुशी सबसे जरूरी है।”
शिवानी ने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया। “नहीं… मत जाओ। मैं… मैं कन्फ्यूज हूँ।” उनकी नजरें मिलीं। धीरे से चुंबन हुआ – इस बार जुनून से ज्यादा दर्द भरा। अहमद ने उसकी साड़ी नहीं उतारी। बस उसे सहलाया, जैसे वो आखिरी बार हो। शिवानी रोते हुए बोली, “अहमद… अगर मैं प्रिंस से शादी कर लूँ… तो क्या तुम मुझे भूल जाओगे?” अहमद ने कहा, “नहीं… लेकिन मैं तुम्हें कभी परेशान नहीं करूँगा। तुम्हारी खुशी… बस यही दुआ करूँगा।”
शिवानी घर लौटी। प्रिंस इंतजार कर रहा था। “कहाँ थी इतनी देर?” शिवानी ने झूठ बोला, “दुकान गई थी कुछ सामान लेने।” प्रिंस ने उसे गले लगाया। शिवानी की आँखों से आँसू गिरे। प्रिंस ने पूछा, “क्या हुआ?” शिवानी ने कहा, “कुछ नहीं… बस तुम्हें बहुत मिस कर रही थी।” लेकिन अंदर से वो चीख रही थी – “प्रिंस… मुझे माफ कर दो… मैं तुम्हें प्यार करती हूँ… लेकिन मेरा दिल दो जगहों पर है।”
रात को प्रिंस ने उसे प्यार से छुआ। धीरे-धीरे, रोमांटिक। शिवानी ने आँखें बंद कीं, लेकिन मन में अहमद की तस्वीर। वो प्रिंस के साथ थी, लेकिन उसका दिल कहीं और। प्रिंस ने कहा, “शिवानी… तुम आज कुछ अलग लग रही हो। सब ठीक है न?” शिवानी ने मुस्कुरा कर कहा, “हाँ… बस थक गई हूँ।”
अगले कुछ दिन शिवानी ने अहमद से दूरी बनाई। लेकिन हर बार जब प्रिंस उसे “आई लव यू” कहता, उसका अपराधबोध बढ़ता। वो सोचती, “मैं दो लोगों को दुख दे रही हूँ। प्रिंस को धोखा… अहमद को इंतजार। मैं कौन सी लड़की हूँ?” एक रात वो अकेले गंगा घाट पर गई। बैठी रही, रोती रही। “भगवान… मुझे रास्ता दिखाओ। मैं किसे चुनूँ? या दोनों को खो दूँ?”
फिर अचानक फोन बजा – अहमद का। “शिवानी… मैं जा रहा हूँ पटना से। कल सुबह ट्रेन है। बस… एक बार मिल लो। आखिरी बार।” शिवानी का दिल धड़क उठा। वो जानती थी – अगर वो मिली तो शायद वापस न लौट पाए। लेकिन अगर नहीं मिली… तो शायद हमेशा पछताएगी।
उस रात वो प्रिंस से कहा, “कल सुबह जल्दी शिफ्ट है।” प्रिंस ने किस किया, “ठीक है, जान। सेफली जाना।” शिवानी रो पड़ी – प्रिंस को पता नहीं था कि ये शायद आखिरी किस हो।


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