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- शादी का प्रस्ताव और रोमांटिक टेंशन के बाद शिवानी और प्रिंस का रिश्ता और गहरा हो गया था। लेकिन पटना की जिंदगी में कभी-कभी अनजाने मोड़ आ जाते हैं। एक दिन शिवानी की कॉफी शॉप में एक नया ग्राहक आया – नाम था अहमद। 28 साल का, लंबा कद, घनी दाढ़ी, गहरी आँखें, और वो सफेद कुर्ता-पायजामा जो उसे और आकर्षक बनाता था। वो ,., था, पटना के पुराने इलाके से, एक छोटी सी ज्वेलरी शॉप चलाता था। वो रोज आता, ब्लैक कॉफी माँगता, और शिवानी से हल्की-फुल्की बातें करता।
एक शाम बारिश हो रही थी। प्रिंस कंपनी में लेट हो गया था। अहमद आया, शिवानी का शिफ्ट खत्म होने वाला था। “बारिश में भीगोगी? मैं ड्रॉप कर दूँ?” अहमद ने पूछा। शिवानी ने हाँ कह दिया – दिल में एक अजीब सा थ्रिल। कार में बैठे, रास्ता लंबा लग रहा था। अहमद ने रेडियो पर कोई पुराना गाना लगाया – “चाँदनी रातें…” शिवानी की साड़ी भीग गई थी, ब्लाउज से उसकी सेक्सी फिगर साफ झलक रही थी। अहमद की नजरें बार-बार उस पर जा रही थीं।
“शिवानी… तुम बहुत खूबसूरत हो,” अहमद ने धीरे से कहा। शिवानी शर्मा गई, “अहमद भाई… ऐसा मत कहो।” लेकिन उसकी आवाज में वो डर और उत्सुकता दोनों थी। अहमद ने कार एक सुनसान जगह पर रोकी – गंगा के किनारे, जहाँ कोई नहीं था। बारिश की बूँदें कार की छत पर गिर रही थीं। अहमद ने शिवानी का हाथ पकड़ा। “मैं जानता हूँ तुम किसी और की हो… लेकिन ये दिल… रुक नहीं रहा।” शिवानी ने हाथ नहीं छुड़ाया। उसकी साँसें तेज हो गईं।
अहमद ने धीरे से उसका चेहरा अपनी ओर किया। उनकी नजरें मिलीं – वो इंटरफेथ थ्रिल, वो निषिद्ध आकर्षण, वो डर कि कहीं कोई देख न ले। शिवानी की आँखें बंद हो गईं। अहमद ने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। चुंबन धीमा, लेकिन गहरा। शिवानी का शरीर सिहर उठा। अहमद की दाढ़ी उसके गालों पर रगड़ रही थी – एक नई सेंसेशन। शिवानी ने खुद को रोकने की कोशिश की, लेकिन उसके हाथ अहमद की छाती पर चले गए।
“अहमद… ये गलत है… प्रिंस…” शिवानी फुसफुसाई। अहमद बोला, “जानती हो ना… ये गलत होना ही इसे इतना रोमांचक बनाता है। * लड़की… ,., लड़का… पटना की गलियों में छिपकर…” वो बातें सुनकर शिवानी की बॉडी में आग लग गई। अहमद ने उसकी साड़ी का पल्लू सरकाया। ब्लाउज गीला था, निप्पल्स सख्त दिख रहे थे। अहमद ने ब्लाउज के हुक खोले, उसके स्तनों को हाथों में लिया। “अल्लाह… कितनी नरम…” वो बोला। शिवानी सिसकारी, “आह… अहमद… धीरे…”
अहमद ने उसे कार की सीट पर लिटाया। बारिश की आवाज के बीच उसने शिवानी की साड़ी ऊपर की। पैंटी गीली थी। अहमद ने उसे उतारा, अपनी जीभ से चाटना शुरू किया। शिवानी चीख उठी, “उफ्फ… अहमद… ये… पहली बार किसी और के साथ…” थ्रिल और बढ़ गया – प्रिंस को छुपाकर ये सब। अहमद का लंड पैंट में सख्त हो चुका था। शिवानी ने उसे निकाला – मोटा, लंबा, नसें फूली हुईं। “अहमद… इतना बड़ा…” वो बोली।
अहमद ने धीरे से अंदर डाला। शिवानी की चूत टाइट थी, वो दर्द और मजा दोनों महसूस कर रही थी। “आह… अहमद… जोर से… ये पाप… ये मजा…” अहमद धक्के मारने लगा – जोरदार, लेकिन कंट्रोल्ड। कार हिल रही थी। शिवानी की छाती उछल रही थी, वो अहमद की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी। “फक मी… जैसे कोई ,., राजा अपनी * रानी को…” शिवानी चिल्लाई। अहमद ने स्पीड बढ़ाई, “तेरी चूत… मेरे लिए बनी है… अल्लाह की कसम…”
डॉगी स्टाइल में अहमद ने उसे पकड़ा। शिवानी की गांड ऊपर, अहमद पीछे से पेल रहा था। वो उसके बाल खींच रहा था, गांड पर थप्पड़ मार रहा था। “ये इंटरफेथ… ये थ्रिल… कभी खत्म नहीं होना चाहिए,” अहमद बोला। शिवानी झड़ गई – उसकी चूत से पानी निकला। अहमद भी अंदर झड़ गया, गरम स्पर्म भर दिया।
बारिश थम गई। दोनों साँसें लेते हुए लेटे। शिवानी बोली, “अहमद… ये सिर्फ एक बार… प्रिंस को पता नहीं चलना चाहिए।” अहमद ने मुस्कुरा कर कहा, “जान… ये शुरूआत है। हर बार… और गहरा थ्रिल।”
घर लौटकर शिवानी प्रिंस के साथ लेटी, लेकिन मन में अहमद की यादें। प्रिंस ने उसे गले लगाया, “कहाँ थी इतनी देर?” शिवानी मुस्कुराई, “बारिश में… बस थोड़ी देर।” लेकिन उसकी आँखों में वो नया राज था – इंटरफेथ का राज, जो अब उसकी जिंदगी में नई आग लगा रहा था।
कुछ दिनों बाद अहमद ने मैसेज किया: “कल रात… मेरी दुकान पर आना। बंद रहती है… सिर्फ हम दोनों।” शिवानी का दिल धड़का। प्रिंस को बहाना बनाकर वो गई। दुकान के पीछे कमरे में अहमद इंतजार कर रहा था। रोशनी मंद, अगरबत्ती की खुशबू। अहमद ने उसे बाहों में लिया। इस बार कोई रुकावट नहीं – वो पूरी रात चुदाई करते रहे। अहमद ने उसे नमाज पढ़ने के बाद छुआ – वो थ्रिल और बढ़ गया। शिवानी बोली, “अहमद… तेरे साथ… सब कुछ नया लगता है… धर्म, संस्कृति… सब मिक्स हो जाता है।”
अहमद ने उसे दीवार से सटाकर पेला, “तेरी ये बॉडी… मेरे लिए हलाल हो गई है।” शिवानी चीखी, “हाँ… ले ले मुझे… पूरी तरह।” रात भर नए-नए पोज – कभी मिशनरी, कभी राइडिंग, कभी स्टैंडिंग। अहमद ने उसके मुँह में भी डाला, शिवानी ने चूसा जैसे कोई सबसे कीमती चीज हो।
सुबह होने से पहले शिवानी लौटी। प्रिंस सो रहा था। लेकिन अब शिवानी की जिंदगी में दो आगें – प्रिंस का जुनून और अहमद का इंटरफेथ थ्रिल। वो दोनों राज रख रही थी, लेकिन हर मुलाकात में वो आग और भड़क रही थी। पटना की गलियों में छिपा ये राज… कभी बाहर आएगा या हमेशा छिपा रहेगा?
(कहानी जारी रहेगी…)


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