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शिवानी और प्रिंस की कहानी – अगला भाग (रोमांटिक टेंशन के साथ)
शादी का प्रस्ताव हो चुका था, लेकिन प्रिंस ने कहा, “शिवानी, हम अभी शादी नहीं करेंगे। पहले कुछ महीने सिर्फ हम दोनों… एक-दूसरे को और गहराई से जानेंगे। हर पल में वो टेंशन, वो इंतजार, वो आग… जो हमें बाँधे रखे।” शिवानी की आँखें चमक उठीं। वो जानती थी कि प्रिंस क्या कहना चाहता है – वो चाहता था कि उनका प्यार सिर्फ शारीरिक न हो, बल्कि वो दिल की गहराइयों तक की चाहत, वो अनकही बातें, वो नजरों का खेल… सब कुछ और तीव्र हो जाए।
एक शाम प्रिंस ने शिवानी को मैसेज किया: “आज शाम 7 बजे गंगा घाट पर मिलो। लाल साड़ी पहनना। और… कोई अंडरगारमेंट मत पहनना।” शिवानी का दिल धड़क उठा। वो शर्मा गई, लेकिन उसकी बॉडी में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। वो तैयार हुई – वो लाल साड़ी जो उसकी कमर को इतना खूबसूरत बनाती थी, ब्लाउज टाइट, पल्लू हल्का सा पारदर्शी। अंदर कुछ नहीं। वो घाट पर पहुँची। सूर्यास्त हो रहा था, गंगा की लहरें सुनहरी हो रही थीं। प्रिंस पहले से वहाँ था, सफेद कुर्ता-पायजामा में, हाथ में एक छोटा सा फूलों का गुलदस्ता।
जैसे ही शिवानी पास आई, प्रिंस ने उसे देखा। उसकी नजरें शिवानी की आँखों में टिक गईं। कोई बात नहीं हुई। बस नजरें मिलीं। शिवानी की साँसें तेज हो गईं। प्रिंस धीरे से उसके पास आया, इतना पास कि उनकी साँसें एक हो गईं। लेकिन छुआ नहीं। बस इतना करीब कि शिवानी को उसकी बॉडी की गर्मी महसूस हो रही थी। “शिवानी…” प्रिंस की आवाज भारी थी, “तुम आज कितनी खूबसूरत लग रही हो… मैं तुम्हें देखकर… सहन नहीं कर पा रहा।” शिवानी ने नजरें झुका लीं, लेकिन होंठों पर मुस्कान थी। “प्रिंस… तुम भी… तुम्हारी आँखें मुझे… पागल कर रही हैं।”
प्रिंस ने उसका हाथ पकड़ा, उँगलियाँ आपस में फंसाईं। वो दोनों घाट की सीढ़ियों पर बैठ गए। सूरज डूब रहा था। प्रिंस ने धीरे से शिवानी के कंधे पर हाथ रखा। शिवानी का शरीर सिहर उठा। वो जानती थी कि अंदर कुछ नहीं है, और साड़ी का पल्लू हवा में उड़ रहा था। प्रिंस की नजरें उसकी छाती पर गईं – वो उभार साफ दिख रहे थे। प्रिंस की साँसें रुक गईं। “शिवानी… तुमने… सच में…” वो बोला, आवाज काँप रही थी। शिवानी ने शरमाते हुए कहा, “तुम्हारे लिए… सब कुछ तुम्हारे लिए। लेकिन… आज सिर्फ देखो… छुओ मत।”
ये टेंशन… वो इंतजार… दोनों को मार रहा था। प्रिंस का हाथ शिवानी की कमर पर गया, लेकिन सिर्फ छुआ, दबाया नहीं। शिवानी की सिसकी निकल गई, “प्रिंस… मत तड़पाओ… मैं जल रही हूँ।” प्रिंस ने उसके कान में फुसफुसाया, “मैं भी… लेकिन आज रुकेंगे। ये इंतजार… हमें और करीब लाएगा।” वो दोनों घंटों वहाँ बैठे रहे, बस नजरें मिलाते, हाथ थामे, कभी-कभी होंठ इतने करीब कि साँसें मिल जाएँ, लेकिन किस नहीं किया।
घर लौटते वक्त कार में भी यही हुआ। प्रिंस ड्राइव कर रहा था, शिवानी पास बैठी। उसने अपना हाथ प्रिंस की जाँघ पर रख दिया। प्रिंस का शरीर सख्त हो गया। “शिवानी… मत करो… ड्राइव नहीं कर पाऊँगा।” शिवानी ने शरारत से कहा, “तो रुक जाओ ना… कहीं सुनसान जगह पर।” प्रिंस ने कार एक अंधेरी गली में रोकी। अब दोनों एक-दूसरे की ओर मुड़े। नजरें मिलीं – आग लग गई। प्रिंस ने शिवानी का चेहरा अपने हाथों में लिया, लेकिन फिर भी किस नहीं किया। बस नाकें रगड़ीं, होंठ इतने करीब कि छूने को तैयार। शिवानी की आँखें बंद हो गईं, “प्रिंस… प्लीज…” प्रिंस बोला, “नहीं… अभी नहीं। घर चलो। वहाँ… सब कुछ होगा।”
फ्लैट में पहुँचते ही दरवाजा बंद हुआ। रोशनी मंद। प्रिंस ने शिवानी को दीवार से सटाया। अब टेंशन चरम पर था। प्रिंस की आँखें शिवानी की आँखों में डूबी हुईं। “शिवानी… आज मैं तुम्हें… इतना चाहता हूँ कि… दर्द हो रहा है।” शिवानी ने उसके होंठों पर उँगली रखी, “तो ले लो… सब कुछ। लेकिन पहले… मुझे महसूस कराओ… कितना पागल हो तुम मेरे लिए।”
प्रिंस ने धीरे-धीरे साड़ी का पल्लू सरकाया। शिवानी की छाती नंगी हो गई। उसके निप्पल्स सख्त, गुलाबी। प्रिंस ने बस देखा, छुआ नहीं। शिवानी तड़प उठी, “प्रिंस… छुओ ना…” प्रिंस ने मुस्कुरा कर कहा, “इंतजार करो… जैसे मैं कर रहा हूँ।” फिर धीरे से उसकी कमर पकड़ी, साड़ी नीचे सरकाई। शिवानी पूरी नंगी हो गई। उसकी चूत गीली, चमक रही थी। प्रिंस घुटनों पर बैठ गया, लेकिन सिर्फ साँसें उस पर छोड़ीं – गर्म साँसें। शिवानी चीख उठी, “आह… प्रिंस… मत तड़पाओ… मैं मर जाऊँगी।”
प्रिंस उठा, खुद के कपड़े उतारे। उसका लंड खड़ा, नसें फूली हुईं। शिवानी ने देखा, उसकी आँखें फैल गईं। वो हाथ बढ़ाने लगी, लेकिन प्रिंस ने रोका। “नहीं… पहले मुझे देखो… कितना तुम्हारे लिए तैयार हूँ।” वो दोनों बेड पर लेटे, एक-दूसरे के सामने, लेकिन छुए नहीं। बस नजरें। शिवानी की साँसें तेज, प्रिंस की भी। आखिरकार, टेंशन टूटा। प्रिंस ने शिवानी को अपनी बाहों में खींचा। अब चुंबन – गहरा, जंगली। जीभें आपस में लड़ रही थीं। प्रिंस ने उसके स्तनों को दबाया, निप्पल्स चूसे। शिवानी चिल्लाई, “आह… हाँ… अब… सब कुछ…”
प्रिंस ने उसे लिटाया, टाँगें फैलाईं। लंड चूत पर रगड़ा – लेकिन अंदर नहीं डाला। शिवानी रोने लगी, “प्रिंस… प्लीज… डालो… सहन नहीं होता।” प्रिंस ने फुसफुसाया, “ये टेंशन… यही तो हमारा प्यार है।” फिर धीरे से अंदर गया। शिवानी का शरीर काँप उठा। धक्के धीमे, लेकिन गहरे। हर धक्के में वो टेंशन और बढ़ता। शिवानी चीख रही थी, “प्रिंस… जोर से… अब रुको मत… फाड़ दो मुझे…” प्रिंस ने स्पीड बढ़ाई, जोरदार धक्के। कमरा उनकी सिसकारियों से भर गया।
डॉगी स्टाइल में, प्रिंस पीछे से, बाल पकड़े। शिवानी की गांड थप्पड़ खा रही थी। “तेरी ये आँखें… जब तड़पती हैं… मुझे पागल कर देती हैं,” प्रिंस बोला। शिवानी बोली, “तो पागल कर दो… पूरी रात…” वो दोनों घंटों चुदाई करते रहे – कभी धीमे, टेंशन बनाते, कभी जंगली। अंत में प्रिंस अंदर झड़ा, शिवानी भी झड़ गई। दोनों थक कर लेटे, लेकिन आँखों में अभी भी वो चमक – वो रोमांटिक टेंशन जो कभी खत्म नहीं होने वाला।
अगली सुबह, शिवानी प्रिंस की छाती पर सिर रखे बोली, “प्रिंस… ये इंतजार… ये टेंशन… हमें हमेशा जिंदा रखेगा।” प्रिंस ने किस किया, “हाँ… और हर बार… और गहरा होगा।”
(कहानी जारी रहेगी…)
शादी का प्रस्ताव हो चुका था, लेकिन प्रिंस ने कहा, “शिवानी, हम अभी शादी नहीं करेंगे। पहले कुछ महीने सिर्फ हम दोनों… एक-दूसरे को और गहराई से जानेंगे। हर पल में वो टेंशन, वो इंतजार, वो आग… जो हमें बाँधे रखे।” शिवानी की आँखें चमक उठीं। वो जानती थी कि प्रिंस क्या कहना चाहता है – वो चाहता था कि उनका प्यार सिर्फ शारीरिक न हो, बल्कि वो दिल की गहराइयों तक की चाहत, वो अनकही बातें, वो नजरों का खेल… सब कुछ और तीव्र हो जाए।
एक शाम प्रिंस ने शिवानी को मैसेज किया: “आज शाम 7 बजे गंगा घाट पर मिलो। लाल साड़ी पहनना। और… कोई अंडरगारमेंट मत पहनना।” शिवानी का दिल धड़क उठा। वो शर्मा गई, लेकिन उसकी बॉडी में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। वो तैयार हुई – वो लाल साड़ी जो उसकी कमर को इतना खूबसूरत बनाती थी, ब्लाउज टाइट, पल्लू हल्का सा पारदर्शी। अंदर कुछ नहीं। वो घाट पर पहुँची। सूर्यास्त हो रहा था, गंगा की लहरें सुनहरी हो रही थीं। प्रिंस पहले से वहाँ था, सफेद कुर्ता-पायजामा में, हाथ में एक छोटा सा फूलों का गुलदस्ता।
जैसे ही शिवानी पास आई, प्रिंस ने उसे देखा। उसकी नजरें शिवानी की आँखों में टिक गईं। कोई बात नहीं हुई। बस नजरें मिलीं। शिवानी की साँसें तेज हो गईं। प्रिंस धीरे से उसके पास आया, इतना पास कि उनकी साँसें एक हो गईं। लेकिन छुआ नहीं। बस इतना करीब कि शिवानी को उसकी बॉडी की गर्मी महसूस हो रही थी। “शिवानी…” प्रिंस की आवाज भारी थी, “तुम आज कितनी खूबसूरत लग रही हो… मैं तुम्हें देखकर… सहन नहीं कर पा रहा।” शिवानी ने नजरें झुका लीं, लेकिन होंठों पर मुस्कान थी। “प्रिंस… तुम भी… तुम्हारी आँखें मुझे… पागल कर रही हैं।”
प्रिंस ने उसका हाथ पकड़ा, उँगलियाँ आपस में फंसाईं। वो दोनों घाट की सीढ़ियों पर बैठ गए। सूरज डूब रहा था। प्रिंस ने धीरे से शिवानी के कंधे पर हाथ रखा। शिवानी का शरीर सिहर उठा। वो जानती थी कि अंदर कुछ नहीं है, और साड़ी का पल्लू हवा में उड़ रहा था। प्रिंस की नजरें उसकी छाती पर गईं – वो उभार साफ दिख रहे थे। प्रिंस की साँसें रुक गईं। “शिवानी… तुमने… सच में…” वो बोला, आवाज काँप रही थी। शिवानी ने शरमाते हुए कहा, “तुम्हारे लिए… सब कुछ तुम्हारे लिए। लेकिन… आज सिर्फ देखो… छुओ मत।”
ये टेंशन… वो इंतजार… दोनों को मार रहा था। प्रिंस का हाथ शिवानी की कमर पर गया, लेकिन सिर्फ छुआ, दबाया नहीं। शिवानी की सिसकी निकल गई, “प्रिंस… मत तड़पाओ… मैं जल रही हूँ।” प्रिंस ने उसके कान में फुसफुसाया, “मैं भी… लेकिन आज रुकेंगे। ये इंतजार… हमें और करीब लाएगा।” वो दोनों घंटों वहाँ बैठे रहे, बस नजरें मिलाते, हाथ थामे, कभी-कभी होंठ इतने करीब कि साँसें मिल जाएँ, लेकिन किस नहीं किया।
घर लौटते वक्त कार में भी यही हुआ। प्रिंस ड्राइव कर रहा था, शिवानी पास बैठी। उसने अपना हाथ प्रिंस की जाँघ पर रख दिया। प्रिंस का शरीर सख्त हो गया। “शिवानी… मत करो… ड्राइव नहीं कर पाऊँगा।” शिवानी ने शरारत से कहा, “तो रुक जाओ ना… कहीं सुनसान जगह पर।” प्रिंस ने कार एक अंधेरी गली में रोकी। अब दोनों एक-दूसरे की ओर मुड़े। नजरें मिलीं – आग लग गई। प्रिंस ने शिवानी का चेहरा अपने हाथों में लिया, लेकिन फिर भी किस नहीं किया। बस नाकें रगड़ीं, होंठ इतने करीब कि छूने को तैयार। शिवानी की आँखें बंद हो गईं, “प्रिंस… प्लीज…” प्रिंस बोला, “नहीं… अभी नहीं। घर चलो। वहाँ… सब कुछ होगा।”
फ्लैट में पहुँचते ही दरवाजा बंद हुआ। रोशनी मंद। प्रिंस ने शिवानी को दीवार से सटाया। अब टेंशन चरम पर था। प्रिंस की आँखें शिवानी की आँखों में डूबी हुईं। “शिवानी… आज मैं तुम्हें… इतना चाहता हूँ कि… दर्द हो रहा है।” शिवानी ने उसके होंठों पर उँगली रखी, “तो ले लो… सब कुछ। लेकिन पहले… मुझे महसूस कराओ… कितना पागल हो तुम मेरे लिए।”
प्रिंस ने धीरे-धीरे साड़ी का पल्लू सरकाया। शिवानी की छाती नंगी हो गई। उसके निप्पल्स सख्त, गुलाबी। प्रिंस ने बस देखा, छुआ नहीं। शिवानी तड़प उठी, “प्रिंस… छुओ ना…” प्रिंस ने मुस्कुरा कर कहा, “इंतजार करो… जैसे मैं कर रहा हूँ।” फिर धीरे से उसकी कमर पकड़ी, साड़ी नीचे सरकाई। शिवानी पूरी नंगी हो गई। उसकी चूत गीली, चमक रही थी। प्रिंस घुटनों पर बैठ गया, लेकिन सिर्फ साँसें उस पर छोड़ीं – गर्म साँसें। शिवानी चीख उठी, “आह… प्रिंस… मत तड़पाओ… मैं मर जाऊँगी।”
प्रिंस उठा, खुद के कपड़े उतारे। उसका लंड खड़ा, नसें फूली हुईं। शिवानी ने देखा, उसकी आँखें फैल गईं। वो हाथ बढ़ाने लगी, लेकिन प्रिंस ने रोका। “नहीं… पहले मुझे देखो… कितना तुम्हारे लिए तैयार हूँ।” वो दोनों बेड पर लेटे, एक-दूसरे के सामने, लेकिन छुए नहीं। बस नजरें। शिवानी की साँसें तेज, प्रिंस की भी। आखिरकार, टेंशन टूटा। प्रिंस ने शिवानी को अपनी बाहों में खींचा। अब चुंबन – गहरा, जंगली। जीभें आपस में लड़ रही थीं। प्रिंस ने उसके स्तनों को दबाया, निप्पल्स चूसे। शिवानी चिल्लाई, “आह… हाँ… अब… सब कुछ…”
प्रिंस ने उसे लिटाया, टाँगें फैलाईं। लंड चूत पर रगड़ा – लेकिन अंदर नहीं डाला। शिवानी रोने लगी, “प्रिंस… प्लीज… डालो… सहन नहीं होता।” प्रिंस ने फुसफुसाया, “ये टेंशन… यही तो हमारा प्यार है।” फिर धीरे से अंदर गया। शिवानी का शरीर काँप उठा। धक्के धीमे, लेकिन गहरे। हर धक्के में वो टेंशन और बढ़ता। शिवानी चीख रही थी, “प्रिंस… जोर से… अब रुको मत… फाड़ दो मुझे…” प्रिंस ने स्पीड बढ़ाई, जोरदार धक्के। कमरा उनकी सिसकारियों से भर गया।
डॉगी स्टाइल में, प्रिंस पीछे से, बाल पकड़े। शिवानी की गांड थप्पड़ खा रही थी। “तेरी ये आँखें… जब तड़पती हैं… मुझे पागल कर देती हैं,” प्रिंस बोला। शिवानी बोली, “तो पागल कर दो… पूरी रात…” वो दोनों घंटों चुदाई करते रहे – कभी धीमे, टेंशन बनाते, कभी जंगली। अंत में प्रिंस अंदर झड़ा, शिवानी भी झड़ गई। दोनों थक कर लेटे, लेकिन आँखों में अभी भी वो चमक – वो रोमांटिक टेंशन जो कभी खत्म नहीं होने वाला।
अगली सुबह, शिवानी प्रिंस की छाती पर सिर रखे बोली, “प्रिंस… ये इंतजार… ये टेंशन… हमें हमेशा जिंदा रखेगा।” प्रिंस ने किस किया, “हाँ… और हर बार… और गहरा होगा।”
(कहानी जारी रहेगी…)


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