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मम्मी के शिकारी पार्ट १ - शादी
#4
मम्मी के शिकारी - पार्ट 2 सुहागरात (पहला राउंड)
मम्मी को अच्छी तरह से तैयार कर लड़कियों ने उन के ब्लाउज , ब्रा ओर पेंटी पर हल्का परफ्यूम छिड़का अब मम्मी वस्त्रों से मैचिंग मेहरून रंग के सेंडिल पहन कर ड्राइवर के साथ अपने दूसरे पति सिद्धार्थ से मिलने उन के बंगले पर चली गई
वहां पहुंच कर ड्राइवर ने गेट की बेल बजाई और चला गया मम्मी अन्दर जा कर ड्राइंग रूम में खड़ी हो गईं जहां सिद्धार्थ उन का इंतजार कर रहे थे, मम्मी के कदम शिथिल हो रहे थे उन के गाल शर्म से सुर्ख हो गए थे पलके झुकी हुई थी और तेजी से चलने वाली सांसों के साथ ब्लाउज में कसे सुडौल उरोज ऊपर नीचे हो रहे थे, सिद्धार्थ सोफे से उठ कर उन के पास आए ओर नाजुक हाथ अपने हाथ से पकड़ कर बोले
सिद्धार्थ - आओ रचना तुम्हारा अपने नए घर में स्वागत हे, बहुत सुंदर हो, मेरी जान की कातिल हुस्न की परी मेरा सौभाग्य हे तुम जैसी हसीना मेरी पत्नी है 
ओर ये कह कर उन्होंने मम्मी को बेताबी से अपनी कठोर बाहों में जकड़ लिए, मम्मी उन की बलिष्ठ बाहों में छुप  गई लंबे चोडे सिद्धार्थ की बलिष्ठ बाहों में उन्होंने पूरी तरह खुद को समर्पित कर दिया उन के सीने की धड़कन बढ़ गई ओर वो सिद्धार्थ से ऐसे चिपक गई जैसे प्रेमिका मुद्दत बाद अपने प्रेमी से मिली हो उन का सिर सिद्धार्थ की चोड़ी छाती से चिपका हुआ था और आंखे बंद थी, होठ कांप रहे थे सिद्धार्थ ने प्यार से उन का सिर उठाया और अपने खुरदुरे होठ मम्मी के रसीले होठों पर रख दिए मम्मी का पूरा शरीर कांप गया और सांस तेजी से चलने लगी, सिद्धार्थ के हाथ उन की कमर ओर उन्नत पिछवाड़े पर  फिर रहे थे मम्मी के सख्त उरोज सिद्धार्थ की चोड़ी छाती से दब रहे थे, वो मम्मी के नाजुक अंगूरी होठों को नजाकत से चूस रहे थे मम्मी के हाथ उन की कमर पर कस गए वो पूरी तरह से उन को सहयोग कर रही थी, तभी सिद्धार्थ ने उन को किसी नाजुक गुड़िया की तरह अपनी गोद में उठा लिया और बेडरूम में जा कर धीरे से पलंग पर लिटा दिया
सिद्धार्थ ने मम्मी की साड़ी खोल दी साथ ही अपना कुर्ता और पजामा भी खोल दिया और पलंग पर मम्मी के सिरहाने आ कर बैठ गए और अपने कठोर हाथों से मम्मी के ब्लाउज में कसे उभारों को सहलाने लगे
सिद्धार्थ - मेरी जान क्या मस्त बूब्स हे तुम्हारे आज तो इन को मसलने का आनंद आ जाएगा रचना मुझे इन का दूध पीना हे पिलाओगी न
मम्मी - जी अब ये आप ही की अमानत हे मसल डालिए इन्हें अपने कठोर हाथों से, निचोड़ लीजिए एक एक बूंद दूध इन से एक अरसे से ये भी किसी मर्द के प्यासे हे 
सिद्धार्थ धीरे धीरे मम्मी के नाजुक होठों पर उंगली फेरते हुए इन के गाल, गला ओर माथे को अपनी खुरदुरी जीभ से चाट रहे थे, मम्मी आनंद के समुद्र में गोते लगा रही थी उन के आंखे बंद थी तभी सिद्धार्थ ने मम्मी के ब्लाउज के बटन धीरे धीरे खोलने शुरू कर दिए एक एक बटन खुलने पर मम्मी के ब्रा में कसे बूब्स सिद्धार्थ को पागल बना रहे थे उन्होंने ब्लाऊज खोल के पलंग से नीचे उछाल दिया और उन के हाथ पेटीकोट के नाडे की तरफ बड़े ओर धीरे से उसे मम्मी की मांसल जांघों से खींच कर उतार दिया अब मम्मी का गोरा गदराया बदन मेहरून रंग की ब्रा पेंटी में सिद्धार्थ के सामने था 
 

कुछ देर वो मंत्र मुग्ध से उन के रूप को का रसपान करते रहे फिर उन्होंने अपना बनियान भी उतार दिया और केवल अंडरवियर में मम्मी के ऊपर आ गए और प्यार से उन का मुंह अपने दोनों हाथों से थाम कर उन के रसीले होठों का रस पीने लगे मम्मी के मुंह से हु हु हु हु की आवाज निकल रही थी जो उन के होठों में दब कर रह गई थी सिद्धार्थ प्यार से उन के बालों में हाथ फेर कर उन की आंखों ओर माथे की बिंदी को चूमते हुए बोले
सिद्धार्थ - रचना डार्लिंग कैसा  लग रहा हे तुम्हे मेरी पत्नी बन कर, मेरा तो जीवन सार्थक हो गया इतनी सुंदर ओर ग़दराये हुए हुस्न की मलिका को पा कर आज तो इस भरपूर जवानी का रस पीने में आनंद आ जाएगा
मम्मी - दबी हुई आवाज में शर्माते हुए बोली आप की पत्नी बनने मेरी कल्पना से भी परे था,  ये जवानी अब आप ही के लिए हे मसल डालिए इसे ऐसा लग रहा है जैसे जन्म जन्म की प्यासी हु। सिद्धार्थ ने मम्मी के नाजुक हाथ को अपने अंडरवर पर रखा , ऊपर से में उन के लन्ड के स्पर्श से मम्मी सिहर उठी 
मम्मी - हाय राम इतना बड़ा है
सिद्धार्थ - मेरी जान अभी तो पूरी तरह से खड़ा भी नहीं हुआ हे तुम को ही करना हे
ओर कहते हुए उन्होंने अपना अंडरवीयर उतार दिया सिद्धार्थ का विशाल शरीर अब नंगा था
सिद्धार्थ - रचना डार्लिंग सहलाओ इसे अपने सुंदर कोमल महंदी लगे हाथों से, अपने रसीले होठों से चूसो इसे
मम्मी -  हाय राम ,मेरे सरताज मैने कभी ये नहीं किया, ऐसा भी होता हे क्या
सिद्धार्थ - मेरी जान तुम्हार पहले पति ने कभी नहीं चुसवाया क्या, साला नामर्द है इतनी सुंदर बीबी हे ओर उसे ढंग से भोगा भी नहीं
मम्मी - उन्होंने तो कभी मेरे पूरे कपड़े भी नहीं उतारे बस साड़ी पेटीकोट उठा कर दो मिनट में अपना काम कर लेते थे
सिद्धार्थ -  जानू अब तुम मेरी पत्नी हो जीवन का असली आनंद क्या होता हे तुम्हे पता चलेगा, पहले नहीं किया तो अब जो  में कहता हूं करो यार
ओर सिद्धार्थ ने मम्मी को घुटनों के बल बिठा दिया और खुद खड़े हो गए और उन के बाल पकड़ कर अपना विशाल लन्ड उन के होठों से लगा कर रगड़ना शुरू कर दिया 
धीरे धीरे मम्मी ने हिचकते हुए लन्ड को अपने हाथों से सहलाना ओर जीभ से चाटना शुरू किया उन की जीभ पूरे लन्ड को चाट रही थी
  
   
कुछ ही देर में सिद्धार्थ का लन्ड पूरी तरह से सख्त हो गया वो करीब नो इंच लंबा ओर चार इंच मोटा था मम्मी तो उस को देख कर सिहर गई
मम्मी - हाय राम इतना बड़ा, में कैसे सहन कर पाऊंगी मर ही जाऊंगी मेरे सरताज
सिद्धार्थ - अभी से घबरा रही हो मेरी जान हमारी सुहागरात हे जान आज इसी दमदार लन्ड  से तुम्हारी चूदाई होगी चिंता मत करो तुम बहुत कीमती हो आराम से चोदूंगा और उन्होंने मम्मी को बिस्तर पर लिटा दिया
अंकल ने मम्मी की चिकनी पीठ पर हाथ डालते हुए ब्रा का हुक खोल दिया और उसे बाहों से उतार के दूर उछाल दिया मम्मी के गोरे गोरे मोटे स्तन स्प्रिंग की तरह उछलकर बाहर आ गए , मोटे मोटे  बूब्स पर भूरे तने हुए निपल कहर ढा रहे थे अंकल की तो आह निकल गई उन्होंने अपने खुरदुरे हाथों से उन को थाम लिया
सिद्धार्थ - आह मेरी जान क्या मस्त बूब्स हे एक दम कड़क हैं ऐसा लगता हे किसी ने छुए ही नहीं हे , अब सब्र नहीं हो रहा जान चलो जन्नत के दर्शन करवा दो अपनी ओर यह कहते हुए उन्होंने मम्मी की पेंटी भी उतार दी अब वो नितांत नंगी सिद्धार्थ के सामने थी शर्म के मारे उन की आंखें बंद थी सांस तेज चल रही थी जिस के साथ उन के उन्नत बूब्स ऊपर नीचे हो रहे थे
  
 
  
अब अंकल  मम्मी के नाजुक शरीर के ऊपर आ गए और उन के  बूब्स को अपने बड़े बड़े हाथों से पकड़ कर निर्दयता से मसलने लगे कभी जोर से दबाते कभी निपल को मसलते कभी दांतों से कटते, मम्मी सिसक रही थी
  
मम्मी - धीरे मसलो मेरे सरताज लग रही हे, कही भागी नहीं जा रही अब ये आप की ही अमानत हे
सिद्धार्थ ने अब मम्मी के पूरे शरीर को सहलाना ओर चूमना शुरू किया उन्होंने मम्मी के हाथों को सिर से ऊपर कर उन की बगल को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया 
 
मम्मी की आनंद से सिसकियां निकल रही थी, अंकल अब उन के पेट पर, नाभि पर अपनी जीभ फिरा रहे थे करीब आधा घंटा उन्होंने मम्मी के शरीर को चूमा और अपने खुरदुरा हाथों से मसला 
अब अंकल मम्मी की टांगों की तरफ आ गए, उन की केले के तने जैसी चिकनी , मोटी ओर प्लम्पी सफेद जांघों को सहलाने लगे हल्के हल्के दांतों से जांघों ओर पिंडलियों को काटते हुए उन के बड़े बड़े हिप्स को सहला रहे थे, अंकल की जीभ मम्मी के मेहंदी लगे पैरों पर फिर रही थी वो उन की उंगलियों को मुंह में ले कर चूस रहे थे पिंडलियों को चूम रहे थे और मम्मी की सिसकियां निकल रही थी, अभी तक अंकल ने मम्मी की चूत को हाथ नहीं लगाया था न ही अपना विशाल लन्ड उन के मुंह में दिया था वो पहले मम्मी को अच्छी तरह से उत्तेजित करना चाहते थे ताकि उन के मन से इस बड़े ओर मोटे लन्ड का भय निकल जाए और  आराम से उन को चोद सके , करीब एक घंटे मम्मी के गुदाज शरीर से खेलने के बाद अब सिद्धार्थ मम्मी को चोदने के लिए तैयार थे
सिद्धार्थ - मेरी जान अब समय हे तुम्हारी चूदाई करने का तैयार हो जाओ और अपना पत्नीव्रत धर्म निभाओ
मम्मी के शरीर में खुरझुरी आ गई वो एक बेहद पतिव्रता ओर धार्मिक स्वभाव की नारी थी किसी परपुरुष के बारे में सोचना भी पाप था लेकिन अब सिद्धार्थ भी उन के पति थे इस लिए लज्जा के बावजूद भी वो पूरी तरह से समर्पित थी अपने इस पति के सामने
मम्मी - मेरे सरताज अब मेरा शरीर ओर जवानी आप की अमानत है जैसा चाहो इसे भोगों, मसलों, कुचलो आप की हर इच्छा मेरे सिर आंखों पर
सिद्धार्थ ने मम्मी की चिकनी, मुलायम ओर पांव रोटी के समान फूली हुई चूत पर हाथ रखा, 
   
मम्मी तो सिहर गई, सिद्धार्थ ने एक हाथ से मम्मी का सिर थाम कर उन के नाजुक होठों को अपने होठों से चूसना शुरू किया दूसरे हाथ की उंगली  चूत को सहला रही थी, अंकल अपनी उंगली मम्मी की चूत की दीवारों के बीच फेर रहे थे, मम्मी आनंद ओर उत्तेजना में चिल्ला रही थी लेकिन उन के होठ अंकल के होठों में दबे होने के कारण हुम हुम की आवाज ही निकल रही थी और चूत पानी छोड़ रही थी, 
अब अंकल ने अपना मुंह मम्मी की चूत पर रख दिया और उसे चूसने लगे, मम्मी ने उत्तेजित हो कर उन के बाल पकड़ लिए और जोर से अंकल का मुंह अपनी चूत पर दबा दिया, उन्होंने कभी ऐसे आनंद की कल्पना भी नहीं की थी 
 
सिद्धार्थ - अच्छा लग रहा हे न मेरी जान
मम्मी - (शर्माते हुए) हा मेरे सरताज ,अब डाल भी दो
सिद्धार्थ - क्या डालूं जान बोलो न
मम्मी आंखें बंद कर धीरे से बोली अपना लन्ड 
सिद्धार्थ - कहां मेरी जान
मम्मी - मेरी चूत में
सिद्धार्थ - फिर क्या करूं डाल कर
मम्मी - (शर्माते हुए) चोदो मुझे
सिद्धार्थ - तुम्हारा पुराना पति कभी ऐसे करता था
मम्मी - नहीं जान वो तो साल में एक बार  पंद्रह दिन के लिए आते हे वो समय उन का अपने रिश्तेदारों से घर जाने में ही निकल जाता हे बस दो या तीन बार ही चोद पाते है वो भी दो तीन मिनट में छूट जाते हैं पूरे कपड़े भी नहीं खोलते मेरे ओर अपने,  लिंग भी इन का बस तीन इंच का हे मुझे लगता था यही होता हे 
सिद्धार्थ - आज तुम्हे बताता हु चूदाई क्या होती हे चलो अपनी टांगे चोडी करो ओर अपनी चूत को दोनों हाथों से खोलो बहुत टाइट है बिल्कुल कुंवारी कन्या जैसी,
अंकल ने मम्मी के पैर चोडे किया और अपने लन्ड का टोपा उन की चूत पर रगड़ना शुरू किया मम्मी तो आनंद ओर घबराहट की मिली जुली फीलिंग से भर गई, सिद्धार्थ ने अपने लन्ड का टोपा जो किसी मोटे आलू के बराबर था धीरे से चूत पर रख दबाना शुरू किया थोड़ा जोर लगाने के बाद एक पक की आवाज हुआ और टोपा कसी हुई चूत में चला गया
  
उई मां, मर गई, उफ्फ निकालो इसे मेरी जान निकल रही हे मम्मी चीख उठी लेकिन सिद्धार्थ अब कहां मानने वाले थे इस पल अब मम्मी का मांसल बदन उन की गिरफ्त में था उन्होंने मम्मी के दोनों बूब्स कस के पकड़ लिये और दांत भींच कर अपना नो इन लंबा ओर चार इंच मोटा लन्ड जोर लगा कर चूत में घुसाना शुरू किया, 
मम्मी दर्द के मारे कराह रही थी अपना सिर इधर उधर पटक रही थी और अंकल को हाथ से धकेलने की कोशिश कर रही थी लेकिन अंकल ने एक शॉट दिया तो उन का आधा लन्ड चूत में घुस गया मम्मी चीख उठी और उन  के आंसू आ गए अब सिद्धार्थ रुके और प्यार से उन के गालों को, माथे को, गले को चूसते हुए अपने हाथों से उन के बालों को , कंधों को ओर बूब्स को सहलाते हुए होठ चूसते हुए बोले मेरी जान अभी तो आधा ही गया हे अभी से घबरा गई अभी तो पूरा अंदर जाना बाकी हे, चूत की चूदाइ तो उस के बाद शुरू होगी , मेरी जान अब आदत डाल लो, अभी तो इसी लन्ड से तुम्हारी कुंवरी गांड़ भी मरूंगा ओर मुंह भी चोदूंगा , आगे बहुत कुछ होगा , मम्मी इस से पहले कुछ बोल पाती सिद्धार्थ ने उन के मेहंदी लगे सुंदर  हाथों में अपने हाथों की उंगलियां फंसा कर बिस्तर पर दबा दिया और  एक जोर का शॉट मारा तो  पूरा लंड मम्मी की कसी हुई चूत को चीरता हुआ जड़ तक अंदर चला गया और आंड मम्मी के कूल्हों पर टकरा गए
    
उई उई उई उई आयाय्यियियाई मर गई मेरी मां प्लीज छोड़ दो मेरी चूत फट गई उफ़ उफ़ उफ़ आह आह आह में मरी, मम्मी पर दर्द की अधिकता से बेहोशी छाने लगी कुछ समय के लिए वो मूर्छित हो गई तभी सिद्धार्थ के फोन की घंटी बजी शिल्पा का फोन था
शिल्पा - क्या हो रहा हे  सनम मेरी सौतन के क्या हाल है प्यार से चोदना उसे यार मेरी बहुत ही प्यारी सहेली हे ओर बहुत नाजुक हे आप तो जानवर बन जाते हो
सिद्धार्थ - हा मेरी जान थैंक्स रचना को मेरे से शादी करने के लिए राजी करने के लिए , अब हमारे खानदान को वारिस मिल जाएगा, थैंक्स सुबह बात करता हु अभी नई पत्नी से सुहागरात मना लूं 
कमसिन मम्मी पलंग पर नंगी सिद्धार्थ के विशाल शरीर के नीचे दबी पड़ी थी उन की टांगे फैली हुई थी कसी हुए चूत में सिद्धार्थ का नो इंच लंबा ओर चार इंच चोडा लंड जड़ तक ठूंसा हुआ था तने हुए बूब्स विशाल के मजबूत हाथों में थे जिन्हें वे जानवरों की तरह मसल रहे थे , मम्मी के सुर्ख गुलाबी होठ सिद्धार्थ के होठों में दबे हुए थे और वो अभी होश में नहीं थी 
    
 वो प्यार से मम्मी के गालों को थपथपाते हुए उन्हें उठाने की कोशिश कर रहे थे मम्मी अब होश में आ रही थी
सिद्धार्थ - मेरी जान उठो न अभी तो सुहाग रात बाकी है
मम्मी पूरी तरह होश में आ चुकी थी, उन को असहाय तकलीफ हो रही थी लेकिन संस्कारों से बंधी पतिव्रता नारी जो पूरी तरह से अपने नए पति सिद्धार्थ के लिए पूरा समर्पण कर चुकी थी बोली
मम्मी - माफ कर दो मेरे सरताज बस थोड़ा सा होश खो गई थी कभी आप जैसे मर्द से पाला नहीं पड़ा था ना, आप की पत्नी होने के नाते मेरा फर्ज आप को खुश रखना हे आप की बाहों में आ कर मैं धन्य हो गई हूं चोदो मुझे लेकिन आराम से अभी मुझे इतने बड़े लंड की आदत नहीं है न
सिद्धार्थ - हा मेरी जान प्यार से ही चोदूंगा तुम्हे, बहुत नाजुक हो यार
अब सिद्धार्थ ने मम्मी की बंगलों के नीचे से हाथ डाल कर उन के कंधों को पकड़ लिया और धीरे धीरे अपने लंड से मम्मी की कसी हुई चूत पर धक्के देने लगे, मम्मी कराह रही थी 
आह आह आह ओह ओह ओह हाय हाय मेरी मां उफ़ उफ़ उफ़
सिद्धार्थ प्यार से उन का गला चूम रहे थे मम्मी के कानों की बालियां अपने मुंह में ले कर चूस रहे थे उन के रसीले होठों को अपने दातों से काट रहे थे लगभग 15 मिनट हल्के धक्कों के बाद मम्मी की कसी चूत अब पानी छोड़ रही थी उन को मीठा मीठा दर्द हो रहा था
सिद्धार्थ - अच्छा लग रहा हे मेरी जान
मम्मी - जी 
सिद्धार्थ - चलो मेरी जान अब असली चूदाई के लिए तैयार हो जाओ
ऐसा कहते हुए उन्होंने अपना लंड एक झटके से चूत से बाहर खींच लिया, चूत पूरी तरह से लंड पर रबर के रिंग की तरह कसी हुई थी ऐसा लगा वो बाहर आ जाएगी, उई उई उई उई उई मां आअआ मर गई मेरे सरताज
सिद्धार्थ उठे और मम्मी के टांगों को पकड़ कर ऊपर उन के कंधों के पास दबा दिया और पलंग से बांध दिया मम्मी दोहरी हो गई उन के पैरों की पाज़ेब उन के कानों को छू रही थी दोनों कूल्हे ऊपर की तरफ थे उस के बीच में उन की फूली हुआ चूत जिस का छेद कुछ खुल गया था और धीरे धीरे वापस अपने ओरिजनल शेप में वापिस जा रहा था अंकल को पागल बना रहा था
 
 
 
अब सिद्धार्थ ने अपना लंड मम्मी की चूत पर रखा ओर उन के दोनों बूब्स कस कर दबोचते हुए बिना समय गंवाए एक ही शॉट में कसी हुई चूत में पूरा डाल दिया
आअआ आईईईई एआईआईएईए उऊयूउफ़फ्फ़फ
मम्मी चीखी लेकिन उस की परवाह न करते हुए जोरदार तरीके से चोदना शुरू किया, अपना लंड वो टोपे तक बाहर करते ओर एक शॉट में चूत में अंदर तक घुसा देते 
ठप ठप ठप ठप ठप ठप, फ़क फंक फंक पक पक पक की आवाज कमरे में गूंज रही थी साथ ही अंकल की जांघों की मम्मी के कूल्हों पर टकराने की आवाज थप थप थप थप थप वातावरण को ओर मादक बना रही थी मम्मी अपनी सिर इधर उधर पटक रही थी उन्होने हाथों से चादर कस कर पकड़ रखी थी, दर्द ओर आनंद की मिली जुली आवाज़ में कराह रही थी
ओ-ओ-ओओओओ उऊ-ऊउद्यउफ़्फ़्फ्फ्फ़ यूयूईईईईई आअआआ आअआआ माअआआआअ 
सिद्धार्थ जानवरों की तरह उन को चोद रहे थे मम्मी की कराहने ओर चीखने की आवाज उन्हें ओर पागल बना रही थी वो बिल्कुल भी रहम नहीं कर रहे थे और बेरहमी से चोदते हुए उन के होठों ओर गालों को काट रहे थे , हर धक्के की साथ पांव की पायल बज रही थी जो अंकल को ओर पागल कर रही थी मम्मी छटपटा रही थी लेकिन पैर बंधे होने की वजह से हिल नहीं सकती थी 
     
करीब आधा घंटा इसी पोजीशन में चोदने के बाद सिद्धार्थ रुके, मम्मी दो बार झड़ चुकी थी लेकिन अंकल के अभी कोई आसार नजर नहीं आ रहे थे उन्होंने अब मम्मी को खोल दिया और खुद पलंग के किनारे पाव नीचे कर बैठ गए ,मम्मी की चूत का रस पी कर लंड ओर मोटा हो गया था
अब सिद्धार्थ ने मम्मी की अपनी गोद में बैठने को कहा मम्मी का मुंह सिद्धार्थ के मुंह की तरफ था उन्होंने अपने लंड पर मम्मी को बिठाया और उन के दोनों हिप्स पकड़ कर जोर का झटका दिया तो पूरा लंड एक झटके में चूत में समा गया जिस का अहसास उन की बच्चेदानी तक हो रहा था 
 
 
मम्मी सिसक रही थी ऐसा आनंद उन्हें कभी नसीब नहीं हुआ था
सिद्धार्थ ने उन को अपनी कठोर बाहों में जकड़ लिया मम्मी के बूब्स उन की छाती से दब रहे थे अंकल के हाथ मम्मी की चीकनी पीठ ओर कुल्हों को मसल रहे थे और कंधों ओर गले पर दांतों से काट रहे थे साथ ही नीचे से झटके दे रहे थे मम्मी भी उन के लन्ड पर उछल रही थी एक घरेलू स्त्री एक रण्डी की तरह उछल उछल कर अपनी चूत चूदवा रही थी सिद्धार्थ उन के एक बूब को मसलते हुए दूसरे को अपने मुंह में ले कर चूस रहे थे और मम्मी मस्ती में आहें भर रही थी
मम्मी - चोदो मेरे सरताज ओर जोर से चोदो आज फाड़ दो मेरी चूत वर्षों से प्यासी हे एक एक बूंद निचोड़ लो मेरे स्तनों से मसल डालो कुचल डालो इन्हें मैं तुम्हारी दासी हु जैसे चाहो भोगों मुझे
सिद्धार्थ - हां मेरी जान तुम्हारी मोटी मोटी मखमली जांघों की बीच जो ये फूली हुई चिकनी चूत हे न मुझे उस ने दीवाना बना दिया है ये मेरे लिए तो बहुत लकी साबित होगी, ओर तुम्हारे जो मोटे मोटे स्तन हे न मन करता हे उन को कुचल डालू मसल डालू खा जाऊं उन्हें
अब अंकल ने मम्मी को गोद से उतार दिया और बोले चलो मेरी जान घोड़ी बन जाओ
मम्मी पलंग पर घुटनों के बल बैठ गई और आगे झुक कर अपना सिर बिस्तरों में छुपा लिया और हाथ अपने सर की तरफ़ कर लेट गई 
 
अंकल ने उन की मोटी मोटी गांड़ को ऊपर कर प्यार से उन पर हाथ फिराते हुए कहा 
 
सिद्धार्थ - मेरी जान तुम्हारी गांड़ मारने में मजा आ जाएगा क्या मस्त कसी हुई है कुंवारी लग रही हे लगता हे तुम्हारे पति ने कभी मारी नहीं है
मम्मी - हां मेरे सरताज चूत ही लगभग कुंवारी थी लगता हे जैसे आज ही उस की सील टूटी हे, मर्द औरत की गांड़ भी मरते हे उन्हें तो पता भी नहीं है प्लीज अभी चूत चोद लो मेरे सरताज
सिद्धार्थ - ठीक है मेरी जान चलो अपने कूल्हे ऊपर करो ,अब अंकल बिस्तर पर मम्मी के पीछे आ गए और प्यार से उन के कूल्हों पर हाथ फेरते हुए लंड को चूत पर रखा ओर एक जोर का शॉट दिया तो पूरा लंड मम्मी की चूत में जड़ तक चला गया
 
 
 
ऊूईई यूयूईईईईई इईईयूयू मेरी मां थोड़ा धीरे करो न मेरे सरताज अभी चूत तुम्हारे लंड के लायक नहीं हे मम्मी बोली
अंकल बोले रचना मेरी जान आज तुम्हारी चूत का भोसड़ा बना दूंगा, मम्मी तो सिहर गई ये सुन कर, अंकल ने मम्मी के दोनों बूब्स पकड़े ओर बिजली की तेजी से उन को चोदना शुरू कर दिया अंकल की जांघें मम्मी के विशाल कूल्हों पर थाप दे रही थी  उन का लंड मम्मी की चूत में पिस्टन की तरह अंदर बाहर हो रहा था 
 
ठप ठप ठप ठप ठप ठप फ़क फंक फंक फंक फंक स्लोप स्लोप स्लोप स्लोप स्लोप की आवाज के साथ ही हर धक्के पर मम्मी के मुंह से निकलने वाली आवाज आह आह आह आह आह आह आह आह अंकल का जोश दुगना कर रही थी मम्मी अब तक तीन बार झड़ चुकी थी करीब 15 मिनिट उन को घोड़ी बना कर चोदने के बाद अब अंकल भी डिस्चार्ज होने को थे उन्होंने अपना लंड निकाल कर मम्मी को मिशनरी पोजीशन में लिटा  दिया उन के कूल्हों के नीचे तकिया लगा कर पैरों को चोडा कर दिया उन की फूली हुई चूत पूरी तरह से लाल हो चुकी थी सिद्धार्थ उस पर हाथ फेरते हुए बोले
  
सिद्धार्थ - रचना जानू मैं अपना वीर्य तुम्हारी रसीली चूत में डालूंगा मुझे एक बच्चा चाहिए शिल्पा से नहीं हो सकता डॉक्टर ने मना कर दिया हे
मम्मी - मेरे सरताज तुम्हारी अमानत हूं मेरा सौभाग्य होगा इस खानदान को वारिस देने का
अब सिद्धार्थ ने मम्मी की टांगों को खोल कर अपना लंड एक झटके में चूत में डाल दिया और उन के दोनों बूब्स कस के दबोच कर जोरदार तरीके से चोदना शुरू किया अंकल की जांघें मम्मी के गुदाज जांघों को बुरी तरह से रौंद रही थी मम्मी सिसकियां लेते हुए अपना सिर इधर उधर पटक रही थी दोनों हाथों से तकिए को कस कर पकड़ा हुआ था  दर्द ओर आनंद से निकलने वाली चीखे पूरे कमरे में गूंज रही थी, अंकल हांफते हुए तेजी से मम्मी को चोद रहे थे मम्मी की चूत पानी छोड़ रही थी जिस से फच फच फच फच का मधुर संगीत पैदा हो रहा था
सिद्धार्थ - आह मेरी जान जा रहा हु मैं समा लो मुझे पूरी तरह अपनी चूत में
उन की टांगे कांप रही थी कस कर उन्होंने अपने लंड को चूत में दबा दिया और मम्मी पर लेट गए उन का शरीर झटके मार रहा था ओर ढेर सारा वीर्य मखमली चूत में भरता जा रहा था अंकल ओर मम्मी के मुंह से आह आह आह की आवाज निकल रही थी फिर निढाल हो कर हांफते हुए अंकल मम्मी पर ढेर हो गए कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे फिर उठ गए और ब्रा उठा कर अपना लंड साफ किया, मम्मी ऐसे ही टांगे फैलाए हुए बिस्तर पर आंख बंद कर पड़ी थी वो भी हाफ रही थी उन के पूरे बदन को अंकल  ने बुरी तरह से मसला था उभारों पर भी मसलने ओर काटने के निशान थे उन की चूत का छेद खुल गया था अंदर की लाली दिख रही थी और उस में से बहुत सारा गाढ़ा गाढ़ा वीर्य निकल रहा था सिद्धार्थ ने उसे भी साफ किया
सिद्धार्थ - उठो मेरी जान वॉशरूम जा कर खुद को साफ कर लो 
मम्मी उठ कर कांपते हुए पैरों से वॉशरूम गई और अच्छी तरह से अपनी चूत को पानी से साफ किया तब तक सिद्धार्थ ने प्लान की गीली चादर हटा कर नई बिछा दी थी 
अब मम्मी वॉशरूम से आई और पेंटी उठा कर पहन ही रही थी कि अंकल ने हाथ पकड़ कर रोक दिया
सिद्धार्थ - नहीं मेरी जान अभी नहीं ऐसे ही मेरी बाहों में आ जाओ
उन्होंने खींच कर मम्मी को अपनी बाहों में भर लिया और बिस्तर पर लेट गए मम्मी गुड़िया की तरह उन की बाहों में सिमट कर सो गई, रात के तीन बज रहे थे अंकल थोड़ी देर आराम कर उठ गए और मम्मी की कमसिन जवानी को निहारते रहे वो प्यार से उन के बदन पर हाथ फेरते हुए मासूम चेहरे की चूम रहे थे , शेष आगे
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मम्मी के शिकारी - पार्ट 2 - by Funeyboy - 11-02-2026, 09:49 PM



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