11-02-2026, 03:16 PM
राजासाहब फ्रेश होने के लिए बाथरूम मे चले गये,तब तक मेनका ने भी कपड़े बदल कर खाने का ऑर्डर दे दिया।
थोड़ी देर मे राजासाहब के आने के बाद दोनो ने साथ मे खाना खाया।अब मेनका काले रंग का ड्रेसिंग गाउन पहने थी और राजासाहब कुर्ते-पायजामा मे थे।
"हम यहा लाउंज मे सो जाएँगे,आप बेड पर सो जाइए।",राजासाहब ने अपनी बहू को कहा।
"जी नही,पलंग बहुत बड़ा है।एक तरफ आप सो जाइए,मैं दूसरी तरफ सो जाऊंगी।"
"पर।" मैत्री की पेशकश
"पर-वॉर कुछ नही।चलिए सो जाइए।दिन भर ज़रा भी आराम नही किया है आपने और यहा लाउंज मे तो आपको बड़ी अच्छी नींद आएगी!।",मेनका बाँह पकड़ कर अपने ससुर को ले गयी और पलंग पर बिठा दिया।,"चलिए,लेट जाइए।",और उनके लेट ते ही उपर से चादर ओढ़ा दी।फिर फ्रिड्ज से एक बॉटल निकाली और ग्लास के साथ उसे राजासाहब के तरफ की साइड टेबल पर रख दिया।,"गुड नाइट।"
"गुड नाइट।",राजासाहब ने अपनी आँखे बंद कर ली।मेनका बाथरूम चली गयी थी।आँखें तो बंद कर ली पर राजासाहब की आँखों मे नींद थी कहा।उन्हे कल रात का वाक़या याद आया जिसके बाद उन्होने अपनी बहू को सोच कर मूठ मारी थी।उन्हे अपने उपर आश्चर्य हो रहा था।जब से उनका बेटा मरा था,सेक्स की ओर उनका ध्यान कभी नही गया था।।।और वो शहर की रखाइलों वाला किस्सा तो उन्होने यूधवीर के विदेश से पढ़ कर लौटने से पहले ही ख़तम कर दिया था।पर इस लड़की ने उनमे फिर वो भूख जगा दी थी।
तभी मेनका बाथरूम से बाहर आई और ड्रेसिंग टेबल के सामने चली गयी,राजासाहब की ओर उसकी पीठ थी और वो उसे देख रहे थे।मनका ने सॅश खोल कर गाउन उतार दिया,नीचे काले रंग की नाइटी थी।
"उफ़फ्फ़,काले लिबास मे तो इसका गोरा रंग और निखर रहा है।।",मेनका ने अपने बाल सवार,बत्ती बुझाई और आकर पलंग पर लेट कर अपने उपर चादर डाल दी।
कमरे मे अंधेरा हो गया और बिल्कुल सन्नाटा च्छा गया।दोनो एक दूसरे की तरफ पीठ कर करवट से लेते हुए थे।बाहर सब शांत था पर दोनो के दिलों मे तूफान मचा हुआ था।राजासाहब का लंड पायजामा मे हरकते कर रहा था और बड़ी मुश्किल से उन्होने उसे काबू मे किया था।मेनका की भी हालत बुरी थी,उसे तो ये हल्की-फुल्की नाइटी भी बहुत ज़्यादा तंग लग रही थी,वो चाह रही थी कि इसे भी उतार दे। उसकी चूत मे खुजली सी होने लगी थी।।
पर किसी तरह दोनो ने अपने दिलों को काबू मे रखा और सोने की कोशिश करने लगे।बहुत सवेरे से जागे होने के कारण और दिन भर की थकान ने असर दिखाया और थोड़ी देर बाद दोनो नींद की गोद मे थे।
क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
थोड़ी देर मे राजासाहब के आने के बाद दोनो ने साथ मे खाना खाया।अब मेनका काले रंग का ड्रेसिंग गाउन पहने थी और राजासाहब कुर्ते-पायजामा मे थे।
"हम यहा लाउंज मे सो जाएँगे,आप बेड पर सो जाइए।",राजासाहब ने अपनी बहू को कहा।
"जी नही,पलंग बहुत बड़ा है।एक तरफ आप सो जाइए,मैं दूसरी तरफ सो जाऊंगी।"
"पर।" मैत्री की पेशकश
"पर-वॉर कुछ नही।चलिए सो जाइए।दिन भर ज़रा भी आराम नही किया है आपने और यहा लाउंज मे तो आपको बड़ी अच्छी नींद आएगी!।",मेनका बाँह पकड़ कर अपने ससुर को ले गयी और पलंग पर बिठा दिया।,"चलिए,लेट जाइए।",और उनके लेट ते ही उपर से चादर ओढ़ा दी।फिर फ्रिड्ज से एक बॉटल निकाली और ग्लास के साथ उसे राजासाहब के तरफ की साइड टेबल पर रख दिया।,"गुड नाइट।"
"गुड नाइट।",राजासाहब ने अपनी आँखे बंद कर ली।मेनका बाथरूम चली गयी थी।आँखें तो बंद कर ली पर राजासाहब की आँखों मे नींद थी कहा।उन्हे कल रात का वाक़या याद आया जिसके बाद उन्होने अपनी बहू को सोच कर मूठ मारी थी।उन्हे अपने उपर आश्चर्य हो रहा था।जब से उनका बेटा मरा था,सेक्स की ओर उनका ध्यान कभी नही गया था।।।और वो शहर की रखाइलों वाला किस्सा तो उन्होने यूधवीर के विदेश से पढ़ कर लौटने से पहले ही ख़तम कर दिया था।पर इस लड़की ने उनमे फिर वो भूख जगा दी थी।
तभी मेनका बाथरूम से बाहर आई और ड्रेसिंग टेबल के सामने चली गयी,राजासाहब की ओर उसकी पीठ थी और वो उसे देख रहे थे।मनका ने सॅश खोल कर गाउन उतार दिया,नीचे काले रंग की नाइटी थी।
"उफ़फ्फ़,काले लिबास मे तो इसका गोरा रंग और निखर रहा है।।",मेनका ने अपने बाल सवार,बत्ती बुझाई और आकर पलंग पर लेट कर अपने उपर चादर डाल दी।
कमरे मे अंधेरा हो गया और बिल्कुल सन्नाटा च्छा गया।दोनो एक दूसरे की तरफ पीठ कर करवट से लेते हुए थे।बाहर सब शांत था पर दोनो के दिलों मे तूफान मचा हुआ था।राजासाहब का लंड पायजामा मे हरकते कर रहा था और बड़ी मुश्किल से उन्होने उसे काबू मे किया था।मेनका की भी हालत बुरी थी,उसे तो ये हल्की-फुल्की नाइटी भी बहुत ज़्यादा तंग लग रही थी,वो चाह रही थी कि इसे भी उतार दे। उसकी चूत मे खुजली सी होने लगी थी।।
पर किसी तरह दोनो ने अपने दिलों को काबू मे रखा और सोने की कोशिश करने लगे।बहुत सवेरे से जागे होने के कारण और दिन भर की थकान ने असर दिखाया और थोड़ी देर बाद दोनो नींद की गोद मे थे।
क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।


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