11-02-2026, 12:16 AM
(This post was last modified: 12-02-2026, 05:39 PM by rajusethzee. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
मैं - मम्मी आप डर क्यों रहीं हैं ह्म्मम्म्म्म घर पे आपके और मेरे अलावा कोई नहीं है .....
माँ- बेटा लेकिन कोई भी आ सकता है न अभी जैसे काम वाली या कोई पोस्टमैन या कोई रिस्तेदार......समझा इसीलिए दिन में नहीं .....वैसे तूने अंडरवियर नहीं पहनी है क्या .....
मैं - मम्मी पहना था कालेज से आके निकाल दिया था
मम्मी- क्यों निकाल क्यों दिए थे हम्म्म
मैं - अरे माँ मेरा लण्ड इतना टाइट था की उसका सूपड़ा अपने अपने अंडरवियर के बाहर निकलने लगा था फिर वो कच्छे में दब के रगड़ने लगता है इसीलिए परेशानी होती है और ऊपर से लोअर भी पहनना पड़ता है तो और परेशानी होती है इसी लिए निकाल दिया था .......
मम्मी- बेटा तू धारी दार कच्छा पहना कर जैसे तेरे पापा पहनते है वो ढीला भी होता है और हल्का भी होता है उससे तुझे परेशानी नहीं होगी ......
मैं- नहीं माँ वो नाड़े वाला कच्छा मुझे नहीं पसंद है उसका नाडा ही फस जाता है ....आपने एक बार देखा तो की पापा का नाडा फस गया था तो वो उसे काट दिए थे .....
मेरी बात सुन के माँ हसने लगी और मै भी हसने लगा हां हां हां ......
मैं- मम्मी क्या मुझे बीमारी तो नहीं होगी न ......की मेरा लण्ड बार बार खड़ा हो जाता है ....एक बार डॉक्टर को दिखा लू क्या ह्म्मम्म्म्म
मम्मी- नहीं बेटा तुझे कोई बीमारी नहीं है तू डॉक्टर के पास जायेगा तो वो कुछ न कुछ बता के तुझसे पैसे ले लेंगे जो ठीक नहीं है ......
मै- तो मां ये हमेशा क्या खड़ा रहता है हां........
माँ- बेटा तू बड़ा हो गया है और तेरी उम्र में ये सब होना आम बात है इसीलिए हमारे ज़माने में लड़को की जल्दी शादी कर देते थे ताकि उन्हें हर तरह का सुख मिले हम्म्म्म अगर तू उस ज़माने का होता तो दो बच्चो का बाप होता ......
मैं- हां मम्मी अब ज़माना बदल गया है लड़किया आपने पसंद से शादी कर रही है .......और शादी भी अब थोड़ी उम्र के बाद ही होती है तभी लड़किया गर्लफ्रेंड बनके अपना काम चलाती है .......मगर मेरी ऐसी किस्मत कहा ..मैंने तो आज तक किसी लड़की को नंगा भी नहीं देखा हु आप के अलावा ........
माँ मेरी बात सुन के मुझे देखने लगी .....तभी डोरबेल बजी और कोई माँ की दोस्त आई थी फिर वो लोग बाते करने लगे और मैं आपने कमरे में चला गया और रात का खाना खाके वो मम्मी की दोस्त चली गई .....लेकिन मेरा लण्ड था की शांत ही नहीं हो रहा था फिर 10 बजने का इंतज़ार करने लगा क्यों की पापा 10 बजे तक सो जाते है फिर मैं धीरे से माँ के पास गया और उनसे पानी की बोतल लाने को बोला फिर मैं अपने रूम में आगया थोड़ी देर में माँ भी मेरे रूम में आगई तो देखी की मेरा लण्ड अंडरवियर में फुदक रहा है ये देखते हुए पानी की बोतल टेबल पे रख के जाने लगी की तभी मैं माँ के सामने आगया और ....
मैं- माँ आप कहा जा रही हो .......इसी देखो न कितना बुरा हाल है इसका बैठने का नाम ही नहीं ले रहा है ......
माँ- हां बेटा इसे तो मैं सुबह से देख रही हु लेकिन कर भी क्या सकती हु जैसे तैसे शांत करके सो जा .......
मैं - माँ आपके आने से पहले यही कर रहा था लेकिन शांत नहीं हो रहा है .......
माँ- अरे बेटा अब मैं क्या करू ........बोल ......
मैं - आप अपनी पैंटी देदो न .......ताकि मैं इसे शांत करलु ....
माँ- तू पागल हो गया है क्या बेटा .....ये गलत बात है बेटा तुझे मैं कैसे समझाऊं अब ह्म्म्मम्म
मैं- क्यों माँ कल तो आप अपनी पैंटी देदी थी फिर आज क्यों ......
माँ- बेटा कल तेरी ज़िद से देदी थी लेकिन अब मैं रोज़ रोज़ नहीं दे पाऊँगी समझा कर बेटा मै तेरी माँ हु माँ ह्म्म्मम्म
मैं - आप ही बताओ अब मैं क्या करू कैसे शांत करू अपने लण्ड को इसमें मुझे इतना दर्द हो रहा है की आप को क्या बताऊ आप पैंटी दे दोगी तो मैं अपने लण्ड को शांत कर लूंगा और इससे मेरा दर्द भी काम हो जायेगा ........प्लीज माँ देदो न ह्म्मम्म्म्म
फिर मेरी ज़िद से माँ ने अपने पैंटी निकाल दी और मेरे हाथ में देदी फिर मैं उसे सूंघने लगा और अपने लण्ड को मसलने लगा जिसे माँ बड़े ध्यान से देख रही थी और दो मिनट बाद चली गई .......फिर मैं अक्सर दो तीन दिन में माँ की पैंटी मांग लेता और उनकी चूत की खुसबू से मदहोश हो जाता था ........
माँ- बेटा लेकिन कोई भी आ सकता है न अभी जैसे काम वाली या कोई पोस्टमैन या कोई रिस्तेदार......समझा इसीलिए दिन में नहीं .....वैसे तूने अंडरवियर नहीं पहनी है क्या .....
मैं - मम्मी पहना था कालेज से आके निकाल दिया था
मम्मी- क्यों निकाल क्यों दिए थे हम्म्म
मैं - अरे माँ मेरा लण्ड इतना टाइट था की उसका सूपड़ा अपने अपने अंडरवियर के बाहर निकलने लगा था फिर वो कच्छे में दब के रगड़ने लगता है इसीलिए परेशानी होती है और ऊपर से लोअर भी पहनना पड़ता है तो और परेशानी होती है इसी लिए निकाल दिया था .......
मम्मी- बेटा तू धारी दार कच्छा पहना कर जैसे तेरे पापा पहनते है वो ढीला भी होता है और हल्का भी होता है उससे तुझे परेशानी नहीं होगी ......
मैं- नहीं माँ वो नाड़े वाला कच्छा मुझे नहीं पसंद है उसका नाडा ही फस जाता है ....आपने एक बार देखा तो की पापा का नाडा फस गया था तो वो उसे काट दिए थे .....
मेरी बात सुन के माँ हसने लगी और मै भी हसने लगा हां हां हां ......
मैं- मम्मी क्या मुझे बीमारी तो नहीं होगी न ......की मेरा लण्ड बार बार खड़ा हो जाता है ....एक बार डॉक्टर को दिखा लू क्या ह्म्मम्म्म्म
मम्मी- नहीं बेटा तुझे कोई बीमारी नहीं है तू डॉक्टर के पास जायेगा तो वो कुछ न कुछ बता के तुझसे पैसे ले लेंगे जो ठीक नहीं है ......
मै- तो मां ये हमेशा क्या खड़ा रहता है हां........
माँ- बेटा तू बड़ा हो गया है और तेरी उम्र में ये सब होना आम बात है इसीलिए हमारे ज़माने में लड़को की जल्दी शादी कर देते थे ताकि उन्हें हर तरह का सुख मिले हम्म्म्म अगर तू उस ज़माने का होता तो दो बच्चो का बाप होता ......
मैं- हां मम्मी अब ज़माना बदल गया है लड़किया आपने पसंद से शादी कर रही है .......और शादी भी अब थोड़ी उम्र के बाद ही होती है तभी लड़किया गर्लफ्रेंड बनके अपना काम चलाती है .......मगर मेरी ऐसी किस्मत कहा ..मैंने तो आज तक किसी लड़की को नंगा भी नहीं देखा हु आप के अलावा ........
माँ मेरी बात सुन के मुझे देखने लगी .....तभी डोरबेल बजी और कोई माँ की दोस्त आई थी फिर वो लोग बाते करने लगे और मैं आपने कमरे में चला गया और रात का खाना खाके वो मम्मी की दोस्त चली गई .....लेकिन मेरा लण्ड था की शांत ही नहीं हो रहा था फिर 10 बजने का इंतज़ार करने लगा क्यों की पापा 10 बजे तक सो जाते है फिर मैं धीरे से माँ के पास गया और उनसे पानी की बोतल लाने को बोला फिर मैं अपने रूम में आगया थोड़ी देर में माँ भी मेरे रूम में आगई तो देखी की मेरा लण्ड अंडरवियर में फुदक रहा है ये देखते हुए पानी की बोतल टेबल पे रख के जाने लगी की तभी मैं माँ के सामने आगया और ....
मैं- माँ आप कहा जा रही हो .......इसी देखो न कितना बुरा हाल है इसका बैठने का नाम ही नहीं ले रहा है ......
माँ- हां बेटा इसे तो मैं सुबह से देख रही हु लेकिन कर भी क्या सकती हु जैसे तैसे शांत करके सो जा .......
मैं - माँ आपके आने से पहले यही कर रहा था लेकिन शांत नहीं हो रहा है .......
माँ- अरे बेटा अब मैं क्या करू ........बोल ......
मैं - आप अपनी पैंटी देदो न .......ताकि मैं इसे शांत करलु ....
माँ- तू पागल हो गया है क्या बेटा .....ये गलत बात है बेटा तुझे मैं कैसे समझाऊं अब ह्म्म्मम्म
मैं- क्यों माँ कल तो आप अपनी पैंटी देदी थी फिर आज क्यों ......
माँ- बेटा कल तेरी ज़िद से देदी थी लेकिन अब मैं रोज़ रोज़ नहीं दे पाऊँगी समझा कर बेटा मै तेरी माँ हु माँ ह्म्म्मम्म
मैं - आप ही बताओ अब मैं क्या करू कैसे शांत करू अपने लण्ड को इसमें मुझे इतना दर्द हो रहा है की आप को क्या बताऊ आप पैंटी दे दोगी तो मैं अपने लण्ड को शांत कर लूंगा और इससे मेरा दर्द भी काम हो जायेगा ........प्लीज माँ देदो न ह्म्मम्म्म्म
फिर मेरी ज़िद से माँ ने अपने पैंटी निकाल दी और मेरे हाथ में देदी फिर मैं उसे सूंघने लगा और अपने लण्ड को मसलने लगा जिसे माँ बड़े ध्यान से देख रही थी और दो मिनट बाद चली गई .......फिर मैं अक्सर दो तीन दिन में माँ की पैंटी मांग लेता और उनकी चूत की खुसबू से मदहोश हो जाता था ........


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