10-02-2026, 06:48 PM
(This post was last modified: 12-02-2026, 05:29 PM by rajusethzee. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
मम्मी मुझसे कह तो रही थी लेकिन उनकी नज़र मेरे लण्ड से हट नहीं रही थी .....उनकी नज़र बार बार मेरे लण्ड के खुले हुए गुलाबी सुपाडे की तरफ जा रही थी जिसमे सफ़ेद सफ़ेद परत जमी हुई थी क्यों की कल ही मैंने मुठ मारी थी और साफ़ नहीं किया था .....फिर मैं बोला....
मैं- अब मैं क्या करू आप ही बताओ ......आप खुद ही छू के देख लीजिये ....मेरा ये कितना टाइट हो गया है ....दोपहर से ही इसने मुझे परेशान करके रक्खा है .....
अपनी बात पूरी करके मैंने मम्मी का हाथ पकड़ के अपने लण्ड पे रख दिए और जैसे ही मैंने ऐसा किया एक सेकंड के लिए उन्होंने मेरा लण्ड पकड़ा उसके बाद उन्होंने अपना हाथ मेरे लण्ड से हटा लिया और बोली.....
माँ- अरे पागलराम ये तुम क्या कर रहे हो .......कोई अपने माँ के साथ ऐसा करता है क्या ....तुमको मेरे सामने नंगा खड़े होने में शर्म नहीं आ रही है क्या ह्म्मम्म्म्म चलो जल्दी से अपना कपडा पहन लो ....
मैं - मम्मी इसीलिए मैं आप से ये बात नहीं बता रहा था .......मैं जानता था की आप नहीं समझेंगी ...अब जब मैं आपको अपनी परेशानी बता रहा हु तो आप ऐसा कह रही हैं ह्म्म्मम्म्म्म
माँ - बेटा मैं समझ गई की क्यों तुम परेशान थे लेकिन तुम मेरे सामने इस तरह नंगे खड़े हो मुझे अजीब लग रहा है .......
मैं - क्यों माँ क्यों अजीब लग रहा है आपने तो मुझे बचपन से नंगा देखा है तो फिर ........
माँ- हां बेटा बचपन से देखी हु लेकिन तब तुम बच्चे थे लेकिन अब तुम बड़े हो गए हो इसीलिए मुझे अजीब लग रहा है ह्म्म्मम्म समझा कर बेटा ....
मैं- माँ आपसे एक बात पुछु ...
माँ- हां बोल बेटा ....
मैं- जब आप सुबह नहा के नंगी मेरे सामने आती हैं और मेरे सामने कपडे बदलती है तब आपको अजीब नहीं लगता ........और मैं आपके सामने नंगा खड़ा हु तो आप को अजीब लग रहा है ह्म्म्मम्म
मेरी बात सुन के माँ एक दम शांत हो गई और मुझे देखने लगी कुछ देर एकदम शांत रही ....तभी मैं बोला ....
मैं -बताइये न मम्मी आपने मेरी बात का जवाब नहीं दिया ह्म्म्मम्म
माँ- तुम मेरे बेटे हो इसीलिए अजीब नहीं लगता है और सिर्फ ऊपर के कपडे तेरे सामने बदलती हु तेरे सामने तेरी तरह पूरी नंगी थोड़ी होती हु ......
मैं - सच कहु तो मैंने कई बार आप को नंगा देखा है ........लेकिन मुझे कभी अजीब नहीं लगा क्युकी आप मेरी प्यारी माँ हो ....मैं आपसे बहोत प्यार करता हु मम्मी ......इसीलिए शायद आपसे ऐसे खुल के बाते कर पा रहा हु ह्म्म्मम्म्म्म ..
माँ- बेटा मैं भी तुझसे बहोत प्यार करती हु ......तेरे अलावा मेरा है ही कौन ........तेरे पापा को अपने काम से ही मतलब है या दारु से बस .....उनको देस दुनिया से कोई मतलब नहीं है .......मगर आज जिस तरफ तुमने जवाब दिया था उससे तो मैं डर ही गई थी ......वादा कर आज से तुझे जो भी परेशानी होगी मुझसे जरूर बताएगा ह्म्म्मम्म्म्म
मैं - ठीक है मम्मी मैं वादा करता हु आज के बाद मैं आपसे कोई बात नहीं छुपाऊंगा ......
अपनी बात पूरा करके मैं मम्मी से लिपट गया और उन्हें जोर से गले लगा लिया ......गले लगते ही मम्मी के बड़े बड़े दूध मेरे सीने से दब गए थे जो मुझे अंदर तक महसूस हो रहे थे और और मेरा लण्ड मैक्सी के ऊपर से ही माँ के चूत के आस पास लग रहा था उस पल मम्मी ने बिलकुल परवाह नहीं की ....के मैं उनके सामने नंगा खड़ा हु या मेरा लण्ड उनके चूत के आस पास लग रहा है उस वक़्त माँ भावुक हो गयी थी और गले लग के मेरी पीठ सेहला रही थी .....फिर माँ बोली.....
![[Image: ajxzev.gif]](https://i.ibb.co/MHSPvMG/ajxzev.gif)
माँ- सब ठीक हो जायेगा बेटा ....लेकिन अब तुम मेरे सामने मरने मारने की बात मत करना वरना तुम्हे और मार पड़ेगी .......
मैं - ठीक है मेरी प्यारी माँ अब नहीं कहूंगा ......लेकिन अब आप मुझे मरोगी तो नहीं न हम्म्म्म
माँ- बेटा अब नहीं मरूंगी .......मेरा हाथ गुस्से से उठ गया था अगर मुझे पता होता की तेरे दिमाग में ये सब चल रहा है तो मैं ऐसा नहीं करती ....
मैं - माँ आप मुझसे नाराज़ तो नहीं हो न ......।
माँ- अरे नहीं बेटा मैं तुमसे कैसे नाराज़ हो सकती हु ह्म्मम्म्म्म
मैं- माँ मैं आप से बहुत प्यार करता हु .....एक आप ही हो जो मुझे समझती हैं हम्म्म्म
माँ- मैं भी तुझसे बहोत प्यार करती हु मेरा बच्चा ह्म्म्मम्म
हम दोनों अभी भी गले लगे हुए थे और मेरा लण्ड माँ के चूत के आस पास ही लगा हुआ था फिर माँ मुझसे अलग हुआ .....और अलग होते ही माँ की नज़र मेरे लण्ड पे गई जो की और भी ज्यादा कड़क हो चूका था मेरा लण्ड देखने के बाद माँ ने मुझे देखा और मुझे देख के मुस्कुराने लगी तभी मैं भी माँ को देख के मुस्कुराया और फिर माँ बोली ......
माँ- बेटा अब इसे अंदर कर ले कब तक अपनी माँ के सामने नंगा खड़ा रहेगा ह्म्म्मम्म
फिर मैं तुरंत अपने अंडरवियर को पकड़ के ऊपर किया और अंडरवियर के बाद भी मेरा लण्ड कड़क खड़ा था जिसे मेरी अपने हाथ से सेट करने लगा फिर मैं अंडरवियर के अंदर हाथ डाल के अपने लण्ड को सेट करने लगा ऐसा करते माँ मुझे और मेरे लण्ड को देख रही थी जिस हिसाब से मेरा लंड झटके मार रहा था की माँ नज़र मेरे लण्ड से हटने का नाम नहीं ले रही थी .......फिर माँ बोली.....
माँ - बेटा खाना रक्खा है खा लो ह्म्म्मम्म मैं चलती हु
मैं - मम्मी आप भी मेरे साथ खाओ न ....मैं जानता हु की आप भी अपनी नहीं खाई हैं ह्म्म्मम्म्म्म
माँ मेरी बात मान गई और माँ के साथ मैं नीचे चलने लगा खाना पानी लेने नीचे जाते हुए मुझे यकीन नहीं हो रहा था की माँ से इतना खुल के बाते की और मैं उन्हें अपना लण्ड भी दिखा दिया और ये मेरी और माँ के लिए ये अच्छी शुरुवात थी.........वरना मैं हर बार डर जाता था और कुछ नहीं कर पाता था मगर आज सही आईडिया से मैं इतना आगे बढ़ गया फिर मैं और माँ नीचे से खाना पानी लेके ऊपर आके बैठ गई और मेरा लण्ड अभी भी फुल टाइट था अंडरवियर में जिसे माँ बार बार देखे जा रही थी .......और फिर हम लोग खाना खाने लगे ....खाना कहते वक़्त भी मैं अपने लण्ड को अपने हाथ से सही कर रहा था जिसे माँ देख रही थी .......फिर खाना खा के मैं बेड से उठ गया और माँ भी उठ के बर्तन उठाने लगी तभी मैं माँ के हाथ से बर्तन लेके बेड पे रख दिया और बोला ......
मैं - मम्मी मुझे आपसे एक बात कहनी है हम्म्म्म
माँ- क्या बात करनी है बेटा
मैं- कैसे कहु बस समझ नहीं आ रहा है.......
माँ- बेटा अभी ही हमने इतनी सारी बाते की है ......और तुम अभी भी सोच रहे हो की कैसे कहु ......ह्म्म्मम्म ....जो बोलना है खुल के बोलो बेटा हम्म्म्म
मैं - मम्मी आप नाराज़ तो नहीं होगी न ....
माँ- अब अगर वो बात नहीं बताई तो ज़रूर नाराज़ हो जाउंगी हम्मम्मम्मम्म बता चल जल्दी हम्म
फिर मैंने गहरी सांस ली और बोला......
मैं - मम्मी आप मुझे अपनी पैंटी दे सकती है ......
मरी बात सुन के माँ चौंक गई और बोली .......
माँ- बेटा ये तुम क्या कह रहे हो ......अभी अभी मैं तुमको समझाई की ये गलत है फिर भी तुम ऐसे बात कर रहे हो ह्म्म्मम्म
मैं- मम्मी मैं क्या करू आप देख तो रहीं है न जब से आप मुझसे बात कर रही है तबसे ये खड़ा हुआ है और बैठने का नाम ही नहीं ले रहा है जिससे मुझे दर्द भी हो रहा है .....आप समझ ही नहीं रही हैं ह्म्म्मम्म
माँ- बेटा मैं समझ रही हु .....लेकिन ये सही नहीं है समझा करो जाओ बाथरूम में सुसु कर लो ठीक हो जायेगा ह्म्म्मम्म
मैं - अभी नीचे जब गया था तो सुसु किया तो था उसके बाद से तो और भी हार्ड हो गया है अगर आज दोपहर में शांत कर लेता हो ठीक हो जाता लेकिन उस वक़्त तो आपने मना कर दिया अब बताइये की मैं क्या करू ह्म्मम्म्म्म
मेरी बात सुनके माँ रोने जैसे शक्ल बनाने लगी और मुझे देखने लगी ......फिर मैं उनके पास गया और पास जाते ही मैं अपना लण्ड बाहर निकाल लिया मेरे लण्ड निकालते ही माँ मुझे देखने लगी .......
मैं - देखिये न मम्मी मेरा ये कितना पत्थर जैसा हो गया है जिससे मुझे दर्द हो रहा है आप प्लीज अपनी पैंटी दे दीजिये न जिससे मैं इसे शांत कर सकू हम्म्म्म
मम्मी- हे भगवन .......अब मैं तुझे कैसे समझाऊ की ये सब सही नहीं है मैं तुम्हारी माँ हु और तुमको मेरे सामने ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए और तुम मुझसे पैंटी मांग रहे हो हम्म्म्म
मैं - इसमें गलत क्या है ......मैं आप के साथ कुछ गलत थोड़ी किया हु मैं तो बस आपकी पैंटी मांग रहा हु जिससे मैं अपने खड़े शैतान को शांत कर सकू जैसे रोज़ मैं आपकी पैंटी सूंघ कर करता हु .....बस फर्क इतना है की मैं आपको सब बता दिया और और मैं सामने से आपकी पैंटी मांग रहा हु
माँ- बेटा मैं समझती हु की तुम की दौर से गुजर रहे हो लेकिन ये तुम जो मांग रहे हो वो ठीक नहीं है बेटा समझा करो हम्म्म्म और मुझे लगता है अब यहाँ से जाना चाहिए हम्म्म
मैं- ठीक है मम्मी आप जाओ यहाँ से छोड़ दो मुझे मेरे हाल पर .......मुझे लगता है की अभी आप मुझे समझने की बात कर रहे थे वो सब झूठ है वो सिर्फ आप मेरा दिल रखने के लिए बोल रही थी .......आप बिलकुल नहीं समझती मुझे जाइये यहाँ से ह्म्म्मम्म्म्म
मम्मी से ये बात बोल के अपना लण्ड अंडरवियर में कर लिया और घूम के दूसरी तरफ मुँह करके खड़ा हो गया और अगले ही पल माँ ने मेरे कंधे पे हाथ रक्खा और मुझे घुमा कर मेरी आखों में देखने लगी माँ रोने जैसे शक्ल बनाई हुई थी .....तभी माँ बोल......
माँ- बेटा ऐसा मत बोल की मैं तुम्हे समझती नहीं हु ........मैं तुम्हे अच्छी तरह समझती हु लेकिन जो तू कह रहा है वो ठीक नहीं है .....क्या कभी देखा है किसी माँ को अपने बेटे को पैंटी देते हुए ह्म्मम्म्म्म
मैं - अरे दुनिया में क्या चल रहा है आपको पता नहीं है आज कल आज कल माँ बेटे के बीच बहुत कुछ होता है लेकिन मुझे उससे कुछ लेना देना नहीं है मुझे सिर्फ आपकी पैंटी चाहिए ताकि मैं अपना दर्द कम कर सकू लेकिन रहने दो आप नहीं समझोगी ......
माँ- बेटा समझता क्यों नहीं पैंटी गन्दी होती है उसमे सुसु की बदबू आती है और जो पैंटी मांग रहा है तू .....वो मैं धुल के डाल दी हु ह्म्म्मम्म
मैं - मैं जानता हु की उस पैंटी को आप धुल के तार पे फैलाई हैं देखा मैंने ......
माँ- वही तो तुमसे कह रही हु .....
मैं - मुझे वो पैंटी देदो जो आप अभी पहनी हो ......
मेरी बात सुन के माँ की आखें बड़ी हो गई और मुझे घूरते हुए बोली ......
माँ- ये क्या बोल रहा है तू ........पागल तो नहीं हो गया है हम्म्म
मैं- प्लीज प्लीज प्लीज मम्मी दे दो न अपनी पैंटी प्लीज् प्लीज.........
माँ- बेटा तुम समझते क्यों नहीं मेरी पैंटी बहुत गन्दी है मैं इसे सुबह से पहनी हु .....
मैं - इसी लिए तो मांग रहा हु आपके पैंटी से जो तेज़ महक आती है न उसे सूंघते ही मेरापानी निकल जाता है और मुझे दर्द में आराम मिल जाता है प्लीज दे दीजिये न माँ हम्म्म
माँ- बेटा मेरी पैंटी से सुसु की महक आती है और तू उसे सूंघने को बोल रहा है जो पहले से ही गंदी है हम्म्म्म
मैं - मम्मी प्लीज दे दीजिये न वरना मैं आज रात सो नहीं पाउँगा ......आपको मेरी कसम प्लीज दे दीजिये न हम्म्म्म
मुझे माँ को कसम देते ही माँ अपने माथे पे हाथ रख के बैठ गई ......और मेरा लण्ड अंडर वियर के अंदर से ही उनके सामने झटके मार रहा था
मम्मी दो मिनट बिना कुछ बोले बैठी रही फिर मैं माँ के बगल में गया और उनका हाथ पकड़ा और बोला.....
मैं - मम्मी मैं जानता हु की हमारे बीच ऐसा नहीं होना चाहिए ....लेकिन आप अब मेरे बारे में सब जानती है और मैं जानता हु की आप मुझे समझती है मेरी हालत से वाक़िफ़ है ....मम्मी हमारे बीच ये जो बाते हो रही है वो हमारे बीच ही रहेगी इसके बारे में कभी किसी को पता नहीं चलेगा और वैसे भी आप तो सिर्फ मेरी मदद कर रही है जैसे हर चीज़ो में करती हैं ह्म्म्मम्म इसमें गलत क्या है .....
मेरी बात बड़े ध्यान से मम्मी सुन रही थी और मुझे देखे जा रही थी ......आज एक दिन में हमारे रिश्ते के बीच बहुत कुछ बदल चूका था ..मैं अपनी बात पूरी करके माँ को देखने लगा तभी माँ ने गहरी सांस ली और बोली .......
माँ - ठीक है बेटा ......मैं अपनी पैंटी दे देती हु तुमको .....
मैं माँ के मुँह ये बात सुन के ख़ुशी से उछल पड़ा और माँ को गले लगा लिया ....और बोला ..
मैं - थैंक्यू मम्मी मुझे समझने के लिए ह्म्म्मम्म
मम्मी- वो सब ठीक है बेटा ......लेकिन एक बात का ध्यान रखना ये बात किसी को पता नहीं चलनी चाहिए खासकर पापा को क्यों की अगर उन्हें इस बात की भनक लग गई तू वो हम दोनों की जान ले लेंगे समझे बेटा .....ह्म्म्मम्म
मैं - अरे मम्मी भरोसा रखिये .....ये बात किसी को नहीं पता चलेगी ...वैसे भी पापा अपने काम में ही बिजी रहते है और उनकी पहली बीवी तो दारु है ....आप तो दूसरी हैं ह्म्म्मम्म है की नहीं .....
माँ- हां बेटा बात तो तू सही कह रहा है .....
मम्मी अपनी बात पूरी करके मुझे देख रही रही थी और मैं माँ को देख रहा था हम दोनों के बीच ख़ामोशी छा गई थी .....मै माँ के पैंटी देने का इंतज़ार कर रहा था मगर माँ को शायद शर्म आ रही थी तभी मै बोला .....
मैं- माँ अब तो आप अपनी पैंटी देदो मुझ से अब रहा नहीं जा रहा है ...
मेरी बात को सुन के माँ शर्म से लाल हो गई और फिर माँ खड़ी हो गई और मैं भी माँ के साथ खड़ा हो गया फिर माँ ने अपने मैक्सी नीचे से उठाने लगी मैक्सी ऊपर होते ही माँ की गोरी गोरी टाँगे मेरे सामने थी जिसे देख मेरा लण्ड और भी फनफना रहा था ....और मन कर रहा था की माँ की मैक्सी में घुस जाऊ और उनके गोर गोर जांघ को चुम लू लेकिन मै जल्दी बाज़ी नहीं करना चाहता था फिर मैक्सी ऊपर होते ही माँ ने अपनी पैंटी को पकड़ी और नीचे करके निकाल दी और अपने हाथो में लेके खड़ी थी और मुझे देख रही थी फिर माँ के सामने अपना हाथ किया और माँ ने मुझे अपनी पैंटी देदी ....माँ ने काली कलर की पैंटी पहनी हुई थी ......माँ मुझे पैंटी देने के बाद शर्म से नीचे देखने लगी और मैं तुरंत माँ की पैंटी में चूत वाले हिस्से को देखने लगा ....देखा तो मेरी आखें फटी की फटी रह गई .....मम्मी के पैंटी का चूत वाला हिस्सा बिलकुल गीला था और मैं जानता था की ये सुसु का गीलापन नहीं है .....मम्मी मुझसे नज़ारे नहीं मिला पा रही थी ......फिर मैं अपना लण्ड माँ के सामने ही मसलने लगा अंडरवियर के ऊपर से ही फिर माँ की नज़र मेरे लण्ड पर पड़ी फिर माँ ने मेरे चेहरे की तरफ जैसे देखा मैंने तुरंत उनकी पैंटी नाक पे लगा के सूंघने लगा और अपना लण्ड ज़ोरो से मसलने लगा .......मम्मी के सामने मैं अपना लण्ड मसल रहा था और पैंटी को सूंघ रहा था और माँ मुझे घूर घूर के देख रही थी .....और मै अब बिना शर्म के माँ के सामने ये सब कर रहा था माँ मुझे दो मिनट तक देखती रही फिर बोली .......
![[Image: ajxzl7.gif]](https://i.ibb.co/XrrgbFQM/ajxzl7.gif)
माँ- बेटा अब मैं चलती हु ....तुम जो कर रहे हो उसे करने के बाद पैंटी को छुपा देना कही तुम्हारे पापा न देख ले ठीक है बेटा .....
मैं - आप बेफिक्र रहो माँ पापा को इस बारे में कभी नहीं पता चलेगा ......आप भी आराम करिये और मैं भी इसे शांत करके सो जाऊंगा .....
मेरी बात सुन के माँ को हलकी सी हसीं आगई ......और मैं भी माँ को मुस्कुराते हुए देख के अपना लण्ड मसलते हुए माँ की गीली पैंटी को जोरो से सूंघ रहा था जैसे कोई गुलाब का फूल हो ह्म्मम्म्म्म
मैं- अब मैं क्या करू आप ही बताओ ......आप खुद ही छू के देख लीजिये ....मेरा ये कितना टाइट हो गया है ....दोपहर से ही इसने मुझे परेशान करके रक्खा है .....
अपनी बात पूरी करके मैंने मम्मी का हाथ पकड़ के अपने लण्ड पे रख दिए और जैसे ही मैंने ऐसा किया एक सेकंड के लिए उन्होंने मेरा लण्ड पकड़ा उसके बाद उन्होंने अपना हाथ मेरे लण्ड से हटा लिया और बोली.....
माँ- अरे पागलराम ये तुम क्या कर रहे हो .......कोई अपने माँ के साथ ऐसा करता है क्या ....तुमको मेरे सामने नंगा खड़े होने में शर्म नहीं आ रही है क्या ह्म्मम्म्म्म चलो जल्दी से अपना कपडा पहन लो ....
मैं - मम्मी इसीलिए मैं आप से ये बात नहीं बता रहा था .......मैं जानता था की आप नहीं समझेंगी ...अब जब मैं आपको अपनी परेशानी बता रहा हु तो आप ऐसा कह रही हैं ह्म्म्मम्म्म्म
माँ - बेटा मैं समझ गई की क्यों तुम परेशान थे लेकिन तुम मेरे सामने इस तरह नंगे खड़े हो मुझे अजीब लग रहा है .......
मैं - क्यों माँ क्यों अजीब लग रहा है आपने तो मुझे बचपन से नंगा देखा है तो फिर ........
माँ- हां बेटा बचपन से देखी हु लेकिन तब तुम बच्चे थे लेकिन अब तुम बड़े हो गए हो इसीलिए मुझे अजीब लग रहा है ह्म्म्मम्म समझा कर बेटा ....
मैं- माँ आपसे एक बात पुछु ...
माँ- हां बोल बेटा ....
मैं- जब आप सुबह नहा के नंगी मेरे सामने आती हैं और मेरे सामने कपडे बदलती है तब आपको अजीब नहीं लगता ........और मैं आपके सामने नंगा खड़ा हु तो आप को अजीब लग रहा है ह्म्म्मम्म
मेरी बात सुन के माँ एक दम शांत हो गई और मुझे देखने लगी कुछ देर एकदम शांत रही ....तभी मैं बोला ....
मैं -बताइये न मम्मी आपने मेरी बात का जवाब नहीं दिया ह्म्म्मम्म
माँ- तुम मेरे बेटे हो इसीलिए अजीब नहीं लगता है और सिर्फ ऊपर के कपडे तेरे सामने बदलती हु तेरे सामने तेरी तरह पूरी नंगी थोड़ी होती हु ......
मैं - सच कहु तो मैंने कई बार आप को नंगा देखा है ........लेकिन मुझे कभी अजीब नहीं लगा क्युकी आप मेरी प्यारी माँ हो ....मैं आपसे बहोत प्यार करता हु मम्मी ......इसीलिए शायद आपसे ऐसे खुल के बाते कर पा रहा हु ह्म्म्मम्म्म्म ..
माँ- बेटा मैं भी तुझसे बहोत प्यार करती हु ......तेरे अलावा मेरा है ही कौन ........तेरे पापा को अपने काम से ही मतलब है या दारु से बस .....उनको देस दुनिया से कोई मतलब नहीं है .......मगर आज जिस तरफ तुमने जवाब दिया था उससे तो मैं डर ही गई थी ......वादा कर आज से तुझे जो भी परेशानी होगी मुझसे जरूर बताएगा ह्म्म्मम्म्म्म
मैं - ठीक है मम्मी मैं वादा करता हु आज के बाद मैं आपसे कोई बात नहीं छुपाऊंगा ......
अपनी बात पूरा करके मैं मम्मी से लिपट गया और उन्हें जोर से गले लगा लिया ......गले लगते ही मम्मी के बड़े बड़े दूध मेरे सीने से दब गए थे जो मुझे अंदर तक महसूस हो रहे थे और और मेरा लण्ड मैक्सी के ऊपर से ही माँ के चूत के आस पास लग रहा था उस पल मम्मी ने बिलकुल परवाह नहीं की ....के मैं उनके सामने नंगा खड़ा हु या मेरा लण्ड उनके चूत के आस पास लग रहा है उस वक़्त माँ भावुक हो गयी थी और गले लग के मेरी पीठ सेहला रही थी .....फिर माँ बोली.....
![[Image: ajxzev.gif]](https://i.ibb.co/MHSPvMG/ajxzev.gif)
माँ- सब ठीक हो जायेगा बेटा ....लेकिन अब तुम मेरे सामने मरने मारने की बात मत करना वरना तुम्हे और मार पड़ेगी .......
मैं - ठीक है मेरी प्यारी माँ अब नहीं कहूंगा ......लेकिन अब आप मुझे मरोगी तो नहीं न हम्म्म्म
माँ- बेटा अब नहीं मरूंगी .......मेरा हाथ गुस्से से उठ गया था अगर मुझे पता होता की तेरे दिमाग में ये सब चल रहा है तो मैं ऐसा नहीं करती ....
मैं - माँ आप मुझसे नाराज़ तो नहीं हो न ......।
माँ- अरे नहीं बेटा मैं तुमसे कैसे नाराज़ हो सकती हु ह्म्मम्म्म्म
मैं- माँ मैं आप से बहुत प्यार करता हु .....एक आप ही हो जो मुझे समझती हैं हम्म्म्म
माँ- मैं भी तुझसे बहोत प्यार करती हु मेरा बच्चा ह्म्म्मम्म
हम दोनों अभी भी गले लगे हुए थे और मेरा लण्ड माँ के चूत के आस पास ही लगा हुआ था फिर माँ मुझसे अलग हुआ .....और अलग होते ही माँ की नज़र मेरे लण्ड पे गई जो की और भी ज्यादा कड़क हो चूका था मेरा लण्ड देखने के बाद माँ ने मुझे देखा और मुझे देख के मुस्कुराने लगी तभी मैं भी माँ को देख के मुस्कुराया और फिर माँ बोली ......
माँ- बेटा अब इसे अंदर कर ले कब तक अपनी माँ के सामने नंगा खड़ा रहेगा ह्म्म्मम्म
फिर मैं तुरंत अपने अंडरवियर को पकड़ के ऊपर किया और अंडरवियर के बाद भी मेरा लण्ड कड़क खड़ा था जिसे मेरी अपने हाथ से सेट करने लगा फिर मैं अंडरवियर के अंदर हाथ डाल के अपने लण्ड को सेट करने लगा ऐसा करते माँ मुझे और मेरे लण्ड को देख रही थी जिस हिसाब से मेरा लंड झटके मार रहा था की माँ नज़र मेरे लण्ड से हटने का नाम नहीं ले रही थी .......फिर माँ बोली.....
माँ - बेटा खाना रक्खा है खा लो ह्म्म्मम्म मैं चलती हु
मैं - मम्मी आप भी मेरे साथ खाओ न ....मैं जानता हु की आप भी अपनी नहीं खाई हैं ह्म्म्मम्म्म्म
माँ मेरी बात मान गई और माँ के साथ मैं नीचे चलने लगा खाना पानी लेने नीचे जाते हुए मुझे यकीन नहीं हो रहा था की माँ से इतना खुल के बाते की और मैं उन्हें अपना लण्ड भी दिखा दिया और ये मेरी और माँ के लिए ये अच्छी शुरुवात थी.........वरना मैं हर बार डर जाता था और कुछ नहीं कर पाता था मगर आज सही आईडिया से मैं इतना आगे बढ़ गया फिर मैं और माँ नीचे से खाना पानी लेके ऊपर आके बैठ गई और मेरा लण्ड अभी भी फुल टाइट था अंडरवियर में जिसे माँ बार बार देखे जा रही थी .......और फिर हम लोग खाना खाने लगे ....खाना कहते वक़्त भी मैं अपने लण्ड को अपने हाथ से सही कर रहा था जिसे माँ देख रही थी .......फिर खाना खा के मैं बेड से उठ गया और माँ भी उठ के बर्तन उठाने लगी तभी मैं माँ के हाथ से बर्तन लेके बेड पे रख दिया और बोला ......
मैं - मम्मी मुझे आपसे एक बात कहनी है हम्म्म्म
माँ- क्या बात करनी है बेटा
मैं- कैसे कहु बस समझ नहीं आ रहा है.......
माँ- बेटा अभी ही हमने इतनी सारी बाते की है ......और तुम अभी भी सोच रहे हो की कैसे कहु ......ह्म्म्मम्म ....जो बोलना है खुल के बोलो बेटा हम्म्म्म
मैं - मम्मी आप नाराज़ तो नहीं होगी न ....
माँ- अब अगर वो बात नहीं बताई तो ज़रूर नाराज़ हो जाउंगी हम्मम्मम्मम्म बता चल जल्दी हम्म
फिर मैंने गहरी सांस ली और बोला......
मैं - मम्मी आप मुझे अपनी पैंटी दे सकती है ......
मरी बात सुन के माँ चौंक गई और बोली .......
माँ- बेटा ये तुम क्या कह रहे हो ......अभी अभी मैं तुमको समझाई की ये गलत है फिर भी तुम ऐसे बात कर रहे हो ह्म्म्मम्म
मैं- मम्मी मैं क्या करू आप देख तो रहीं है न जब से आप मुझसे बात कर रही है तबसे ये खड़ा हुआ है और बैठने का नाम ही नहीं ले रहा है जिससे मुझे दर्द भी हो रहा है .....आप समझ ही नहीं रही हैं ह्म्म्मम्म
माँ- बेटा मैं समझ रही हु .....लेकिन ये सही नहीं है समझा करो जाओ बाथरूम में सुसु कर लो ठीक हो जायेगा ह्म्म्मम्म
मैं - अभी नीचे जब गया था तो सुसु किया तो था उसके बाद से तो और भी हार्ड हो गया है अगर आज दोपहर में शांत कर लेता हो ठीक हो जाता लेकिन उस वक़्त तो आपने मना कर दिया अब बताइये की मैं क्या करू ह्म्मम्म्म्म
मेरी बात सुनके माँ रोने जैसे शक्ल बनाने लगी और मुझे देखने लगी ......फिर मैं उनके पास गया और पास जाते ही मैं अपना लण्ड बाहर निकाल लिया मेरे लण्ड निकालते ही माँ मुझे देखने लगी .......
मैं - देखिये न मम्मी मेरा ये कितना पत्थर जैसा हो गया है जिससे मुझे दर्द हो रहा है आप प्लीज अपनी पैंटी दे दीजिये न जिससे मैं इसे शांत कर सकू हम्म्म्म
मम्मी- हे भगवन .......अब मैं तुझे कैसे समझाऊ की ये सब सही नहीं है मैं तुम्हारी माँ हु और तुमको मेरे सामने ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए और तुम मुझसे पैंटी मांग रहे हो हम्म्म्म
मैं - इसमें गलत क्या है ......मैं आप के साथ कुछ गलत थोड़ी किया हु मैं तो बस आपकी पैंटी मांग रहा हु जिससे मैं अपने खड़े शैतान को शांत कर सकू जैसे रोज़ मैं आपकी पैंटी सूंघ कर करता हु .....बस फर्क इतना है की मैं आपको सब बता दिया और और मैं सामने से आपकी पैंटी मांग रहा हु
माँ- बेटा मैं समझती हु की तुम की दौर से गुजर रहे हो लेकिन ये तुम जो मांग रहे हो वो ठीक नहीं है बेटा समझा करो हम्म्म्म और मुझे लगता है अब यहाँ से जाना चाहिए हम्म्म
मैं- ठीक है मम्मी आप जाओ यहाँ से छोड़ दो मुझे मेरे हाल पर .......मुझे लगता है की अभी आप मुझे समझने की बात कर रहे थे वो सब झूठ है वो सिर्फ आप मेरा दिल रखने के लिए बोल रही थी .......आप बिलकुल नहीं समझती मुझे जाइये यहाँ से ह्म्म्मम्म्म्म
मम्मी से ये बात बोल के अपना लण्ड अंडरवियर में कर लिया और घूम के दूसरी तरफ मुँह करके खड़ा हो गया और अगले ही पल माँ ने मेरे कंधे पे हाथ रक्खा और मुझे घुमा कर मेरी आखों में देखने लगी माँ रोने जैसे शक्ल बनाई हुई थी .....तभी माँ बोल......
माँ- बेटा ऐसा मत बोल की मैं तुम्हे समझती नहीं हु ........मैं तुम्हे अच्छी तरह समझती हु लेकिन जो तू कह रहा है वो ठीक नहीं है .....क्या कभी देखा है किसी माँ को अपने बेटे को पैंटी देते हुए ह्म्मम्म्म्म
मैं - अरे दुनिया में क्या चल रहा है आपको पता नहीं है आज कल आज कल माँ बेटे के बीच बहुत कुछ होता है लेकिन मुझे उससे कुछ लेना देना नहीं है मुझे सिर्फ आपकी पैंटी चाहिए ताकि मैं अपना दर्द कम कर सकू लेकिन रहने दो आप नहीं समझोगी ......
माँ- बेटा समझता क्यों नहीं पैंटी गन्दी होती है उसमे सुसु की बदबू आती है और जो पैंटी मांग रहा है तू .....वो मैं धुल के डाल दी हु ह्म्म्मम्म
मैं - मैं जानता हु की उस पैंटी को आप धुल के तार पे फैलाई हैं देखा मैंने ......
माँ- वही तो तुमसे कह रही हु .....
मैं - मुझे वो पैंटी देदो जो आप अभी पहनी हो ......
मेरी बात सुन के माँ की आखें बड़ी हो गई और मुझे घूरते हुए बोली ......
माँ- ये क्या बोल रहा है तू ........पागल तो नहीं हो गया है हम्म्म
मैं- प्लीज प्लीज प्लीज मम्मी दे दो न अपनी पैंटी प्लीज् प्लीज.........
माँ- बेटा तुम समझते क्यों नहीं मेरी पैंटी बहुत गन्दी है मैं इसे सुबह से पहनी हु .....
मैं - इसी लिए तो मांग रहा हु आपके पैंटी से जो तेज़ महक आती है न उसे सूंघते ही मेरापानी निकल जाता है और मुझे दर्द में आराम मिल जाता है प्लीज दे दीजिये न माँ हम्म्म
माँ- बेटा मेरी पैंटी से सुसु की महक आती है और तू उसे सूंघने को बोल रहा है जो पहले से ही गंदी है हम्म्म्म
मैं - मम्मी प्लीज दे दीजिये न वरना मैं आज रात सो नहीं पाउँगा ......आपको मेरी कसम प्लीज दे दीजिये न हम्म्म्म
मुझे माँ को कसम देते ही माँ अपने माथे पे हाथ रख के बैठ गई ......और मेरा लण्ड अंडर वियर के अंदर से ही उनके सामने झटके मार रहा था
मम्मी दो मिनट बिना कुछ बोले बैठी रही फिर मैं माँ के बगल में गया और उनका हाथ पकड़ा और बोला.....
मैं - मम्मी मैं जानता हु की हमारे बीच ऐसा नहीं होना चाहिए ....लेकिन आप अब मेरे बारे में सब जानती है और मैं जानता हु की आप मुझे समझती है मेरी हालत से वाक़िफ़ है ....मम्मी हमारे बीच ये जो बाते हो रही है वो हमारे बीच ही रहेगी इसके बारे में कभी किसी को पता नहीं चलेगा और वैसे भी आप तो सिर्फ मेरी मदद कर रही है जैसे हर चीज़ो में करती हैं ह्म्म्मम्म इसमें गलत क्या है .....
मेरी बात बड़े ध्यान से मम्मी सुन रही थी और मुझे देखे जा रही थी ......आज एक दिन में हमारे रिश्ते के बीच बहुत कुछ बदल चूका था ..मैं अपनी बात पूरी करके माँ को देखने लगा तभी माँ ने गहरी सांस ली और बोली .......
माँ - ठीक है बेटा ......मैं अपनी पैंटी दे देती हु तुमको .....
मैं माँ के मुँह ये बात सुन के ख़ुशी से उछल पड़ा और माँ को गले लगा लिया ....और बोला ..
मैं - थैंक्यू मम्मी मुझे समझने के लिए ह्म्म्मम्म
मम्मी- वो सब ठीक है बेटा ......लेकिन एक बात का ध्यान रखना ये बात किसी को पता नहीं चलनी चाहिए खासकर पापा को क्यों की अगर उन्हें इस बात की भनक लग गई तू वो हम दोनों की जान ले लेंगे समझे बेटा .....ह्म्म्मम्म
मैं - अरे मम्मी भरोसा रखिये .....ये बात किसी को नहीं पता चलेगी ...वैसे भी पापा अपने काम में ही बिजी रहते है और उनकी पहली बीवी तो दारु है ....आप तो दूसरी हैं ह्म्म्मम्म है की नहीं .....
माँ- हां बेटा बात तो तू सही कह रहा है .....
मम्मी अपनी बात पूरी करके मुझे देख रही रही थी और मैं माँ को देख रहा था हम दोनों के बीच ख़ामोशी छा गई थी .....मै माँ के पैंटी देने का इंतज़ार कर रहा था मगर माँ को शायद शर्म आ रही थी तभी मै बोला .....
मैं- माँ अब तो आप अपनी पैंटी देदो मुझ से अब रहा नहीं जा रहा है ...
मेरी बात को सुन के माँ शर्म से लाल हो गई और फिर माँ खड़ी हो गई और मैं भी माँ के साथ खड़ा हो गया फिर माँ ने अपने मैक्सी नीचे से उठाने लगी मैक्सी ऊपर होते ही माँ की गोरी गोरी टाँगे मेरे सामने थी जिसे देख मेरा लण्ड और भी फनफना रहा था ....और मन कर रहा था की माँ की मैक्सी में घुस जाऊ और उनके गोर गोर जांघ को चुम लू लेकिन मै जल्दी बाज़ी नहीं करना चाहता था फिर मैक्सी ऊपर होते ही माँ ने अपनी पैंटी को पकड़ी और नीचे करके निकाल दी और अपने हाथो में लेके खड़ी थी और मुझे देख रही थी फिर माँ के सामने अपना हाथ किया और माँ ने मुझे अपनी पैंटी देदी ....माँ ने काली कलर की पैंटी पहनी हुई थी ......माँ मुझे पैंटी देने के बाद शर्म से नीचे देखने लगी और मैं तुरंत माँ की पैंटी में चूत वाले हिस्से को देखने लगा ....देखा तो मेरी आखें फटी की फटी रह गई .....मम्मी के पैंटी का चूत वाला हिस्सा बिलकुल गीला था और मैं जानता था की ये सुसु का गीलापन नहीं है .....मम्मी मुझसे नज़ारे नहीं मिला पा रही थी ......फिर मैं अपना लण्ड माँ के सामने ही मसलने लगा अंडरवियर के ऊपर से ही फिर माँ की नज़र मेरे लण्ड पर पड़ी फिर माँ ने मेरे चेहरे की तरफ जैसे देखा मैंने तुरंत उनकी पैंटी नाक पे लगा के सूंघने लगा और अपना लण्ड ज़ोरो से मसलने लगा .......मम्मी के सामने मैं अपना लण्ड मसल रहा था और पैंटी को सूंघ रहा था और माँ मुझे घूर घूर के देख रही थी .....और मै अब बिना शर्म के माँ के सामने ये सब कर रहा था माँ मुझे दो मिनट तक देखती रही फिर बोली .......
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माँ- बेटा अब मैं चलती हु ....तुम जो कर रहे हो उसे करने के बाद पैंटी को छुपा देना कही तुम्हारे पापा न देख ले ठीक है बेटा .....
मैं - आप बेफिक्र रहो माँ पापा को इस बारे में कभी नहीं पता चलेगा ......आप भी आराम करिये और मैं भी इसे शांत करके सो जाऊंगा .....
मेरी बात सुन के माँ को हलकी सी हसीं आगई ......और मैं भी माँ को मुस्कुराते हुए देख के अपना लण्ड मसलते हुए माँ की गीली पैंटी को जोरो से सूंघ रहा था जैसे कोई गुलाब का फूल हो ह्म्मम्म्म्म


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