10-02-2026, 06:33 PM
एपिसोड 8: नीरज की जान आफत में
फ्लैशबैक continue
नीरज का सपना आज पूरा होने वाला था। संजय, सेक्स पावर की दवा और शराब के कॉकटेल के कारण अनियंत्रित वासना की आग में जल रहा था। तभी नीरज ने उसे बिस्तर पर लेटने को कहा और ख़ुद अपने भी कपड़े उतारने लगा। कमरे में हल्की रोशनी कर वह संजय के पास आया।
संजय के बदन से लिपट गया। नीरज आज उसे पा लेना चाहता था। उसने संजय के होठों पर किस करना शुरू कर दिया। संजय को शराब के नशे में उसे यूँ लग रहा था जैसे वह नीरज के साथ नहीं, ध्रुव के साथ हो।
नीरज के होठों का स्पर्श उसे ध्रुव का एहसास करा रहा था, जिससे उसका प्रतिरोध पूरी तरह ख़त्म हो गया।
नीरज ने संजय को लिटा दिया और संजय का घोड़ा पकड़कर अपनी गुफा के छेद पर रखा। नीरज ने कमर को ज़ोर से हिलाया और घच्च से घोड़े को जड़ तक अंदर गुफा में सरका लिया।
विशालकाय घोड़े के अंदर जाते ही सीनियर नीरज की आँखें निकल गईं। हालाँकि वह अभ्यस्त था, लेकिन संजय का 8.5 इंच का नया और फौलादी घोड़ा उसकी कल्पना से भी कहीं ज़्यादा बड़ा था।
"आहहह... माफ़ कर देना राजीव...!" नीरज ने दर्द और अविश्वास में चीख़ मारी।
संजय, जो अब तक अपने होश खो चुका था, उसे लगा कि उसे अपने भीतर की आग बुझाने के लिए कुछ चाहिए। उसने नीरज को घोड़ा अंदर घुसाए देखा और अचानक उसके शरीर में एक जंगली ताक़त का संचार हुआ।
उसने नीरज के बाल पकड़े और उसे नीचे दबाकर ठुकाई शुरू कर दी।
संजय को पहला अनुभव हो रहा था। उसे पता नहीं था कि यह धीमा या तेज़ करना है। वह सिर्फ़ अपनी पूरी जवानी की ताक़त से नीरज को चोदे जा रहा था। उसके धक्के इतने ज़ोरदार और गहरे थे कि नीरज का दम घुटने लगा।
"आहहह! प्लीज़, धीरे... धीरे संजय!" नीरज दर्द में रोने लगा। उसे अब मज़ा नहीं, सिर्फ़ यातना मिल रही थी। दवा के असर में संजय रुक नहीं रहा था।
संजय ने एक के बाद एक घातक धक्के दिए। सीनियर नीरज की गुफा अंदर से फट गई। संजय के घोड़े पर ख़ून लगने लगा।
करीब दो घंटे से पहले संजय ने रुकने का नाम नहीं लिया। उसके शरीर में दवा के कारण थकान का नामोनिशान नहीं था। नीरज का शरीर दर्द के मारे काँप रहा था। वह चीख़ना चाहता था, पर उसकी आवाज़ गले में ही घुट गई।
अंतिम धक्के के साथ, नीरज का शरीर अचेत हो गया। उसके होश उड़ गए थे।
संजय को स्खलन नहीं हुआ था, क्योंकि वह दवा के कारण घंटों तक चलता रह सकता था, लेकिन नीरज के शरीर का निर्जीव होना देखकर उसके अवचेतन मन को लगा कि काम पूरा हो गया है। वह नीरज के ऊपर से लुढ़का और फ़र्श पर ही अचेत अवस्था में बैठ गया।
उसके घोड़े पर नीरज के ख़ून का मिश्रण लगा था। उसका पहला अनुभव, बेहोश नीरज के साथ समाप्त हुआ।
तभी ध्रुव ने नीरज के रूम का दरवाज़ा खोला।
(ध्रुव संजय को ढूँढ रहा था। उसे कहीं भी संजय नहीं मिल रहा था। तभी किसी ने कहा कि दो घंटे पहले नीरज के रूम की तरफ़ जाते दिखाई दिया था।)
कांड का खुलासा
जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला। सामने बिस्तर पर नीरज नंगा पड़ा हुआ था। शायद वह बेहोश था।
और संजय नशे में अपना घोड़ा पकड़े नीचे फ़र्श पर बैठा था। उसके घोड़े पर भी ख़ून लगा हुआ था।
ध्रुव ने सारा नज़ारा देखा तो दंग रह गया। उसने जल्दी से राजीव को बुलाना ही ठीक समझा।
राजीव आया और नीरज के लिए एक डॉक्टर भी लेकर आया। उसने संजय के घोड़े का भी चेक लिया।
संजय के घोड़े की सील टूटी थी, पर नीरज की हालत ठीक नहीं थी।
संजय ने इतनी ज़बरदस्त ठुकाई की थी नीरज की! वह बेहोश हो गया, उसकी गुफा का हलवा बन गया। इतना ख़ून निकला, जितना पहली बार भी नहीं निकला था।
तब तक पूरे हॉस्टल के लड़कों को पता चल चुका था कि संजय ने नीरज की ठुकाई करके उसे बेहोश कर दिया।
ध्रुव संजय को नंगा ही पकड़कर अपने कमरे में ले जाने लगा। वह जहाँ भी जाता, हर लड़का संजय! संजय! का गुणगान करता।
रूम में आकर नंगा ही संजय अपने बिस्तर पर सो गया। ध्रुव बस उसे अंडरवियर ही पहना पाया। पूरे कपड़े पहना पाना ध्रुव के बस की बात नहीं थी।
सुबह का सच
अगले दिन सबकी चर्चा का विषय संजय और नीरज की ठुकाई के बारे में थी। संजय अभी भी अपने रूम में बिस्तर पर पड़ा सो रहा था। ध्रुव उसी के पास बैठा था।
तभी उसके रूम में राजीव आया। उसने ध्रुव को देखा।
"तुम यहाँ?"
"हाँ, यह मेरा ही रूम है। मैं हूँ संजय का रूममेट," ध्रुव ने खड़े होते हुए कहा।
"तुम जानते हो तुम्हारे रूममेट की हालत कैसे हुई? इसने क्या कांड किया है कल रात?"
"हाँ, मुझे पता है। कल रात में संजय ने किसी को उसकी औकात बताई है।"
"वाह, रूममेट हो तो ऐसा! साले, तू भी तो चिकना माल है, तुझे तो मैं चाखूँगा किसी दिन।"
"वैसे, जब संजय उठे तो मुझे कॉल करना। मुझे इससे कुछ बात करनी है। इसका भी पॉइंट ऑफ़ व्यू जानना है कल रात के बारे में," राजीव ने आगे कहा।
"वैसे, मैंने रात का मामला दबा दिया है। ऊपर तक बात नहीं पहुँची। आख़िर वार्डन भी तो अपना ही आदमी है। उसे भी तो पूरे साल अपन ही माल सप्लाई करते हैं।"
राजीव किस माल की सप्लाई की बात कर रहा था, ध्रुव अच्छी तरह समझ गया था।
राजीव के जाने के बाद ध्रुव गुनगुना पानी लेकर आया और संजय का घोड़ा निकालकर उसे गुनगुने पानी से धोकर उस पर दर्द वाली क्रीम लगा दी।
संजय करीब 10 बजे सोकर उठा। उसका सर अभी भी दर्द कर रहा था और उसके घोड़े में भी भयंकर दर्द था।
उसने ध्रुव को देखा और कहा, "क्या हुआ मुझे? मेरे घोड़े में इतना दर्द क्यों है? सिर भी घूम रहा है।"
"कुछ नहीं हुआ, थोड़ा आराम करो, ठीक हो जाएगा," ध्रुव ने कहा। "मैं तुम्हारे लिए चाय बनाकर लाता हूँ। तब तक तुम फ्रेश हो जाओ, और हाँ, मैंने तुम्हारे घोड़े पर दवाई लगाई है, अभी उसे मत धोना।"
यह कहकर ध्रुव चला गया।
उसके जाने के बाद संजय याद करने लगा कि रात में क्या हुआ था। उसे सिर्फ़ इतना याद आया कि वह नीरज के सामने कपड़े खोल रहा था। उसके बाद ,क्या हुआ उसे याद नहीं आ रहा था। जब ज़्यादा कुछ याद न आया तो वह उठा और फ्रेश होने चला गया।
दोपहर में राजीव फिर से आया। साथ में वार्डन भी था। रात की बातें शुरू हुईं: क्या हुआ था, कैसे हुआ था, सब कुछ।
संजय ने बताया कि वह नीरज के कहने पर बर्थडे पार्टी में गया था।
"पर कल तो किसी की बर्थडे पार्टी नहीं थी," राजीव ने कहा।
"नहीं, कल नीरज ने कहा था किसी की बर्थडे पार्टी है। मुझे ख़ास बुलाया था, और मुझे थोड़ी-सी शराब पिलाई। उसके बाद मुझे ऐसा नशा चढ़ा कि मेरे पूरे बदन में आग लग गई।"
अब राजीव को पूरी कहानी समझ आ गई थी।
"यह नीरज की हमेशा वाली ट्रिक है," राजीव ने सोचा, "जिसे वह उन लड़कों पर आज़माता है जो नए-नए लौंडे बने हों। पर शायद उसने संजय पर यह ट्रिक करके ग़लती कर दी। संजय तो वैसे ही था—असली मर्द! उसे सेक्स पावर बढ़ाने वाली दवा देकर नीरज ने संजय को चलता-फिरता हैवान बना दिया। बिना दवाई के संजय घंटे तक चोदने की ताक़त रखता था, दवाई के असर में संजय ने नीरज को पूरे 2 घंटे तक लगातार चोदा था, और ऐसा चोदा कि वह अभी भी बेहोश है हॉस्पिटल में।"
राजीव बोला, "संजय, अब तुम आराम करो। हम फिर मिलते हैं। किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो बोलना।"
राजीव जाते-जाते ध्रुव पर निगाह डालता गया।
ध्रुव ने भी राजीव की निगाह अपने बदन पर महसूस की, जैसे कह रहा हो—"तुम्हें बहुत जल्दी चखूँगा।"
आगे क्या होगा?
क्या राजीव ध्रुव को सच में चख पाएगा?
या संजय दीवार बनकर ध्रुव की हिफ़ाज़त करेगा?
संजय और ध्रुव कब एक हो पाएँगे?
टू बी कंटिन्यूड...
फ्लैशबैक continue
नीरज का सपना आज पूरा होने वाला था। संजय, सेक्स पावर की दवा और शराब के कॉकटेल के कारण अनियंत्रित वासना की आग में जल रहा था। तभी नीरज ने उसे बिस्तर पर लेटने को कहा और ख़ुद अपने भी कपड़े उतारने लगा। कमरे में हल्की रोशनी कर वह संजय के पास आया।
संजय के बदन से लिपट गया। नीरज आज उसे पा लेना चाहता था। उसने संजय के होठों पर किस करना शुरू कर दिया। संजय को शराब के नशे में उसे यूँ लग रहा था जैसे वह नीरज के साथ नहीं, ध्रुव के साथ हो।
नीरज के होठों का स्पर्श उसे ध्रुव का एहसास करा रहा था, जिससे उसका प्रतिरोध पूरी तरह ख़त्म हो गया।
नीरज ने संजय को लिटा दिया और संजय का घोड़ा पकड़कर अपनी गुफा के छेद पर रखा। नीरज ने कमर को ज़ोर से हिलाया और घच्च से घोड़े को जड़ तक अंदर गुफा में सरका लिया।
विशालकाय घोड़े के अंदर जाते ही सीनियर नीरज की आँखें निकल गईं। हालाँकि वह अभ्यस्त था, लेकिन संजय का 8.5 इंच का नया और फौलादी घोड़ा उसकी कल्पना से भी कहीं ज़्यादा बड़ा था।
"आहहह... माफ़ कर देना राजीव...!" नीरज ने दर्द और अविश्वास में चीख़ मारी।
संजय, जो अब तक अपने होश खो चुका था, उसे लगा कि उसे अपने भीतर की आग बुझाने के लिए कुछ चाहिए। उसने नीरज को घोड़ा अंदर घुसाए देखा और अचानक उसके शरीर में एक जंगली ताक़त का संचार हुआ।
उसने नीरज के बाल पकड़े और उसे नीचे दबाकर ठुकाई शुरू कर दी।
संजय को पहला अनुभव हो रहा था। उसे पता नहीं था कि यह धीमा या तेज़ करना है। वह सिर्फ़ अपनी पूरी जवानी की ताक़त से नीरज को चोदे जा रहा था। उसके धक्के इतने ज़ोरदार और गहरे थे कि नीरज का दम घुटने लगा।
"आहहह! प्लीज़, धीरे... धीरे संजय!" नीरज दर्द में रोने लगा। उसे अब मज़ा नहीं, सिर्फ़ यातना मिल रही थी। दवा के असर में संजय रुक नहीं रहा था।
संजय ने एक के बाद एक घातक धक्के दिए। सीनियर नीरज की गुफा अंदर से फट गई। संजय के घोड़े पर ख़ून लगने लगा।
करीब दो घंटे से पहले संजय ने रुकने का नाम नहीं लिया। उसके शरीर में दवा के कारण थकान का नामोनिशान नहीं था। नीरज का शरीर दर्द के मारे काँप रहा था। वह चीख़ना चाहता था, पर उसकी आवाज़ गले में ही घुट गई।
अंतिम धक्के के साथ, नीरज का शरीर अचेत हो गया। उसके होश उड़ गए थे।
संजय को स्खलन नहीं हुआ था, क्योंकि वह दवा के कारण घंटों तक चलता रह सकता था, लेकिन नीरज के शरीर का निर्जीव होना देखकर उसके अवचेतन मन को लगा कि काम पूरा हो गया है। वह नीरज के ऊपर से लुढ़का और फ़र्श पर ही अचेत अवस्था में बैठ गया।
उसके घोड़े पर नीरज के ख़ून का मिश्रण लगा था। उसका पहला अनुभव, बेहोश नीरज के साथ समाप्त हुआ।
तभी ध्रुव ने नीरज के रूम का दरवाज़ा खोला।
(ध्रुव संजय को ढूँढ रहा था। उसे कहीं भी संजय नहीं मिल रहा था। तभी किसी ने कहा कि दो घंटे पहले नीरज के रूम की तरफ़ जाते दिखाई दिया था।)
कांड का खुलासा
जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला। सामने बिस्तर पर नीरज नंगा पड़ा हुआ था। शायद वह बेहोश था।
और संजय नशे में अपना घोड़ा पकड़े नीचे फ़र्श पर बैठा था। उसके घोड़े पर भी ख़ून लगा हुआ था।
ध्रुव ने सारा नज़ारा देखा तो दंग रह गया। उसने जल्दी से राजीव को बुलाना ही ठीक समझा।
राजीव आया और नीरज के लिए एक डॉक्टर भी लेकर आया। उसने संजय के घोड़े का भी चेक लिया।
संजय के घोड़े की सील टूटी थी, पर नीरज की हालत ठीक नहीं थी।
संजय ने इतनी ज़बरदस्त ठुकाई की थी नीरज की! वह बेहोश हो गया, उसकी गुफा का हलवा बन गया। इतना ख़ून निकला, जितना पहली बार भी नहीं निकला था।
तब तक पूरे हॉस्टल के लड़कों को पता चल चुका था कि संजय ने नीरज की ठुकाई करके उसे बेहोश कर दिया।
ध्रुव संजय को नंगा ही पकड़कर अपने कमरे में ले जाने लगा। वह जहाँ भी जाता, हर लड़का संजय! संजय! का गुणगान करता।
रूम में आकर नंगा ही संजय अपने बिस्तर पर सो गया। ध्रुव बस उसे अंडरवियर ही पहना पाया। पूरे कपड़े पहना पाना ध्रुव के बस की बात नहीं थी।
सुबह का सच
अगले दिन सबकी चर्चा का विषय संजय और नीरज की ठुकाई के बारे में थी। संजय अभी भी अपने रूम में बिस्तर पर पड़ा सो रहा था। ध्रुव उसी के पास बैठा था।
तभी उसके रूम में राजीव आया। उसने ध्रुव को देखा।
"तुम यहाँ?"
"हाँ, यह मेरा ही रूम है। मैं हूँ संजय का रूममेट," ध्रुव ने खड़े होते हुए कहा।
"तुम जानते हो तुम्हारे रूममेट की हालत कैसे हुई? इसने क्या कांड किया है कल रात?"
"हाँ, मुझे पता है। कल रात में संजय ने किसी को उसकी औकात बताई है।"
"वाह, रूममेट हो तो ऐसा! साले, तू भी तो चिकना माल है, तुझे तो मैं चाखूँगा किसी दिन।"
"वैसे, जब संजय उठे तो मुझे कॉल करना। मुझे इससे कुछ बात करनी है। इसका भी पॉइंट ऑफ़ व्यू जानना है कल रात के बारे में," राजीव ने आगे कहा।
"वैसे, मैंने रात का मामला दबा दिया है। ऊपर तक बात नहीं पहुँची। आख़िर वार्डन भी तो अपना ही आदमी है। उसे भी तो पूरे साल अपन ही माल सप्लाई करते हैं।"
राजीव किस माल की सप्लाई की बात कर रहा था, ध्रुव अच्छी तरह समझ गया था।
राजीव के जाने के बाद ध्रुव गुनगुना पानी लेकर आया और संजय का घोड़ा निकालकर उसे गुनगुने पानी से धोकर उस पर दर्द वाली क्रीम लगा दी।
संजय करीब 10 बजे सोकर उठा। उसका सर अभी भी दर्द कर रहा था और उसके घोड़े में भी भयंकर दर्द था।
उसने ध्रुव को देखा और कहा, "क्या हुआ मुझे? मेरे घोड़े में इतना दर्द क्यों है? सिर भी घूम रहा है।"
"कुछ नहीं हुआ, थोड़ा आराम करो, ठीक हो जाएगा," ध्रुव ने कहा। "मैं तुम्हारे लिए चाय बनाकर लाता हूँ। तब तक तुम फ्रेश हो जाओ, और हाँ, मैंने तुम्हारे घोड़े पर दवाई लगाई है, अभी उसे मत धोना।"
यह कहकर ध्रुव चला गया।
उसके जाने के बाद संजय याद करने लगा कि रात में क्या हुआ था। उसे सिर्फ़ इतना याद आया कि वह नीरज के सामने कपड़े खोल रहा था। उसके बाद ,क्या हुआ उसे याद नहीं आ रहा था। जब ज़्यादा कुछ याद न आया तो वह उठा और फ्रेश होने चला गया।
दोपहर में राजीव फिर से आया। साथ में वार्डन भी था। रात की बातें शुरू हुईं: क्या हुआ था, कैसे हुआ था, सब कुछ।
संजय ने बताया कि वह नीरज के कहने पर बर्थडे पार्टी में गया था।
"पर कल तो किसी की बर्थडे पार्टी नहीं थी," राजीव ने कहा।
"नहीं, कल नीरज ने कहा था किसी की बर्थडे पार्टी है। मुझे ख़ास बुलाया था, और मुझे थोड़ी-सी शराब पिलाई। उसके बाद मुझे ऐसा नशा चढ़ा कि मेरे पूरे बदन में आग लग गई।"
अब राजीव को पूरी कहानी समझ आ गई थी।
"यह नीरज की हमेशा वाली ट्रिक है," राजीव ने सोचा, "जिसे वह उन लड़कों पर आज़माता है जो नए-नए लौंडे बने हों। पर शायद उसने संजय पर यह ट्रिक करके ग़लती कर दी। संजय तो वैसे ही था—असली मर्द! उसे सेक्स पावर बढ़ाने वाली दवा देकर नीरज ने संजय को चलता-फिरता हैवान बना दिया। बिना दवाई के संजय घंटे तक चोदने की ताक़त रखता था, दवाई के असर में संजय ने नीरज को पूरे 2 घंटे तक लगातार चोदा था, और ऐसा चोदा कि वह अभी भी बेहोश है हॉस्पिटल में।"
राजीव बोला, "संजय, अब तुम आराम करो। हम फिर मिलते हैं। किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो बोलना।"
राजीव जाते-जाते ध्रुव पर निगाह डालता गया।
ध्रुव ने भी राजीव की निगाह अपने बदन पर महसूस की, जैसे कह रहा हो—"तुम्हें बहुत जल्दी चखूँगा।"
आगे क्या होगा?
क्या राजीव ध्रुव को सच में चख पाएगा?
या संजय दीवार बनकर ध्रुव की हिफ़ाज़त करेगा?
संजय और ध्रुव कब एक हो पाएँगे?
टू बी कंटिन्यूड...
✍️निहाल सिंह


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