Thread Rating:
  • 10 Vote(s) - 1.6 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
Incest खेल ससुर बहु का
#54
अगली सुबह दोनो एक-दूसरे से नज़रें चुरा रहे थे,बातें भी बस कम भर हो रही थी।सभी लोग प्लेन मे बैठे और डील के बारे मे चर्चा होने लगी।मेनका अब राजपरिवार की ही नही बल्कि राजकुल ग्रूप की भी एक अहम सदस्य बन गयी थी।सारे ज़रूरी पायंट्स डिसकस किए जा रहे थे और मेनका का पैना दिमाग़ बारीक से बारीक ग़लती को पकड़ कर उसे सही कर रहा था।राजासाहब ने फिर से उसे एक ससुर की नज़रो से देखा।।।यह लड़की अगर ना होती तो शायद आज वो ये डील करने ना जा रहे होते।अपने दर्द को भूल कर मेनका ने केवल उनके परिवार के हित और मान का ध्यान रखा था।


फ्लाइट के बॉमबे पहुँचने तक दोनो बहुत हद तक नॉर्मल हो गये थे और नज़रें चुराना भी बंद कर दिया था।

एकएक बजे जर्मन पार्ट्नर्स एबेरहर्ट कॉरपोरेशन, के ऑफीस मे मीटिंग शुरू हो गयी।2 बजे लंच के लिए मीटिंग को रोका गया पर एक घंटे बाद सभी लोग वापस डील के पायंट्स फाइनल करने मे लग गये।शाम 7 बजे मीटिंग ख़तम हुई,"मिस्टर।सिंग।वी'वे आ डील।",जर्मन पार्ट्नर फ्रॅन्ज़ एबेरहर्ट ने राजासाहब से हाथ मिलाते हुए कहा,"।।और मिसेज़।सिंग,युवर फादर-इन-लॉ हॅज़ नोथिन्ग टू वरी अबौट एज लोंग एज यू आर विथ दा राजकुल ग्रूप।"

तारीफ सुन कर खुशी और शर्म से मेनका के गालों का रंग और गुलाबी हो गया।"लुकिंग फॉर्वर्ड टू वर्क विथ यू।",एबेरहर्ट ने झुकते हुए मेनका से हाथ मिलाया।राजासाहब को अपनी बहू पर बहुत गर्व और प्यार आ रहा था।

थोड़ी देर बाद ये डिसाइड हुआ कि सारे पेपर्स तैय्यार करके कल सवेरे एकएक बजे दोनो पार्टीस उन पर साइन कर ले।सेशाद्री साहब और बाकी स्टाफ के लोग वही से वापसी के लिए एरपोर्ट रवाना हो गये।अब मेनका अपने ससुर के साथ अकेली रह गयी।दोनो कार मे बैठ कर जुहू मे होटेल मेरियट की तरफ चल दिए।

कार की बॅक्सीट पे राजासाहब ने चुप्पी तोड़ी,"अगर आप हमारे साथ नही होती दुल्हन,तो शायद आज हम इस खुशी को महसूस नही कर रहे होते।"

"
अब आप हमे शर्मिंदा कर रहे हैं।एक तरफ तो दुल्हन बोलते हैं और दूसरी तरफ ऐसी फॉरमॅलिटी भरी बातें करते हैं।"

"
नही,दुल्हन।हमे बोलने दीजिए।आपकी जगह कोई भी लड़की होती तो जो आपने झेला है,उसके बाद कभी भी राजपुरा मे नही रहती।हम आपके एहसानो का क़र्ज़।-"

"-
बस!अगर आपने ऐसी बातें की तो मैं ज़रूर राजपुरा छोड़ कर चली जाऊंगी।आप ऐसे क्यू कह रहे हैं,जैसे राजपुरा हमारा घर नही है।",उसने अपने ससुर का हाथ अपने हाथ से दबाया,"राजपुरा हमारा घर है और अपने घर के बारे मे सोचना कोई तारीफ की बात नही।"


जवाब मे राजासाहब बस प्यार भरी निगाहों से उसे देखते रहे।

तभी मेनका चिल्लाई,"ड्राइवर कार ज़रा साइड मे लो। हा..हा..इसी माल मे ले चलो।"

"
अभी शॉपिंग करनी है दुल्हन।हम कल करवा देंगे।अभी होटेल चल कर आराम करते हैं।"

"
नही,शॉपिंग तो अभी ही होगी,चलिए।",मेनका कार से उतरने लगी।

"
आप हो आइए हम यहा केफे मे बैठ कर आपका इंतेज़ार करते हैं।",
माल मे दाखिल होकर राजासाहब ने कहा।


अभी कहानी जारी है बने रहिये
Like Reply


Messages In This Thread
RE: खेल ससुर बहु का - by maitripatel - 09-02-2026, 06:07 PM



Users browsing this thread: 9 Guest(s)