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Adultery अनीता सिंह -- किरदार निभाना (Role Play)
समझौते का तीसरा दिन-1

 
अगले दिन की दोपहर, गेस्ट हाउस के भीतर एक अजीब सा मनोवैज्ञानिक युद्ध छिड़ गया था। अनीता ने रात भर सोच-विचार किया था और वह समझ गई थी कि करीम के हाथ और उसकी उंगलियाँ किसी भी झीने कपड़े को मात दे सकती हैं। इसलिए आज उसने 'सुरक्षा' का एक नया रास्ता चुना।

 
उसने अपनी अलमारी से अपनी सबसे पुरानी और सख्त डेनिम जींस निकाली। जींस इतनी टाइट और मोटी थी कि उसे पहनने में भी अनीता को काफी मशक्कत करनी पड़ी। ऊपर से उसने एक मोटा हाई-नेक स्वेटर पहना, जबकि बाहर अच्छी खासी गर्मी थी। उसने जींस के ऊपर एक चौड़ी लेदर की बेल्ट कसी, ताकि करीम की उंगलियों के लिए कोई भी रास्ता न बचे।

 
अनीता (आईने में खुद को देखते हुए): "आज देखती हूँ तुम्हारे काले हाथ क्या करते हैं करीम। जींस की इस मोटी परत और इस सख्त बेल्ट को तुम अपनी उंगलियों से पार नहीं कर पाओगे। आज तुम्हें एक इंच भी मांस नहीं मिलेगा।"

 
वह रसोई में खड़ी खाना बना रही थी, पर उसका रोम-रोम पीछे से आने वाली आहट का इंतज़ार कर रहा था। तभी करीम अंदर आया। उसकी पारखी नज़रों ने तुरंत भाँप लिया कि आज 'मालकिन' ने खुद को अभेद्य किले में कैद कर लिया है।

 
रसोई के सन्नाटे को करीम की भारी आवाज़ ने तोड़ा।
 
करीम: (एक कुटिल मुस्कान के साथ) "मालकिन, आपने तो आज खुद को लोहे की चादर में लपेट लिया है। ई जींस और मोटा स्वेटर... आपको लगता है कि ई हमें रोक लेंगे? पर मालकिन, करीम भी अपनी ज़ुबान का पक्का है। मैंने कहा था कि मैं आपके कपड़े नहीं उतारूँगा, और मैं अपना वादा निभाऊँगा।"

 
अनीता: (सख्ती से) "तो फिर दूरी बनाए रखो करीम। आज वैसे भी 30 मिनट का कोई मतलब नहीं है, इन कपड़ों के पार तुम कुछ महसूस नहीं कर पाओगे।"

 
करीम: "महसूस तो होगा मालकिन... और बहुत गहरा होगा।"

 
अनीता के देखते ही देखते, करीम ने अपनी लुंगी की गाँठ खोल दी और उसे फर्श पर गिरा दिया। अब वह सिर्फ अपनी पुरानी, तंग जाँघिया और पसीने से भीगी हुई बनियान में था। उसकी काली, मांसल और विशाल जाँघें और उसके शरीर की हर नस साफ़ उभर रही थी। जाँघिया के भीतर उसका 10 इंच का विशाल अंग एक भूखे नाग की तरह फड़क रहा था।

 
अनीता का गला सूख गया। उसने कभी करीम को इस तरह लगभग निर्वस्त्र नहीं देखा था। वह बुरी तरह सकपका गई और अपनी आँखें चुराते हुए चिल्लाई।

 
अनीता: "करीम! ये तुम क्या कर रहे हो? तुम अपने कपड़े क्यों उतार रहे हो? यह हमारे समझौते का हिस्सा नहीं है। तुमने मर्यादा लांघ दी है!"

 
करीम ने एक ठंडी और कुटिल मुस्कान दी। उसने बहुत ही सहज भाव से अपनी बनियान को थोड़ा नीचे खींचते हुए जवाब दिया।

 
करीम: "अरे मालकिन, आप तो बेकार में गुस्सा कर रही हैं। समझौते में था कि मैं 'आपके' कपड़े नहीं उतारूँगा, और मैं अपनी जुबान का पक्का हूँ। मैं अपने कपड़ों के साथ क्या करता हूँ, ये मेरी मर्ज़ी है।"

 
अनीता निरुत्तर रह गई। करीम की इस धूर्त दलील ने उसे चुप कर दिया। करीम ने पास पड़ी एक मज़बूत लकड़ी की कुर्सी खींची और रसोई के बीचों-बीच बैठ गया।

 
करीम: (हुकुम भरे लहजे में) "अब बहस छोड़िये और आइये मालकिन... यहाँ बैठिये, हमरी गोद में।"

 
अनीता: "नहीं! ई... समझौते का हिस्सा नहीं है! मैं नहीं आऊँगी!"

 
करीम: "समझौते में ये भी नहीं था कि आप कहाँ बैठेंगी। अब वक़्त जाया मत कीजिये। आइये... चुपचाप।"

 
अनीता काँपते पैरों से आगे बढ़ी। उसने अपनी जींस की सख्ती पर भरोसा किया और करीम की गोद में उसकी जाँघों पर बैठ गई। करीम ने तुरंत अपनी मज़बूत काली बाँहें उसकी कमर के चारों ओर लपेट दीं और उसे अपनी ओर खींच लिया।

 
करीम (अनीता के कान के पास हाँफते हुए): "ई जींस बहुत मोटी है मालकिन... पर ई जो नीचे हमरा 'कालिया' पत्थर जैसा सख्त खड़ा है, ई इस डेनिम की दीवार को भी चीर देगा। महसूस कीजिये इसे।"

 
करीम ने अनीता को थोड़ा और ऊपर उठाया और उसे ठीक अपनी जाँघिया के उस उभरे हुए हिस्से पर टिका दिया। जींस के सख्त कपड़े के बावजूद, अनीता को अपने कूल्हों की दरार के ठीक नीचे उस गरम विशाल लंड का दबाव महसूस हुआ।

 
अनीता: "आह्ह! करीम... उह्ह... ई बहुत... बहुत ज़्यादा है... सिसss... छोड़ो मुझे!"

 
करीम ने अपनी पकड़ और मज़बूत कर ली। उसने अनीता को अपनी गोद में आगे-पीछे हिलाना शुरू किया। जींस का घर्षण और करीम के लंड की कठोरता अनीता के शरीर में बिजली के झटके पैदा कर रही थी।

 
करीम (गर्दन के पास फुसफुसाते हुए): "जींस...? मालकिन, आपको लगता है ये सख्त कपड़ा मुझे रोक लेगा? ये तो और भी अच्छा है, अब मुझे आपके बदन की रगड़ और भी साफ़ महसूस हो रही है। बोलिये, कल रात मालिक ने इस जींस को उतारा या कल भी आप हमारी उंगलियों को ही याद करती रहीं?"

 
अनीता (सिसकते हुए): "चुप करो करीम... उह्ह... तुम बहुत गिर गए हो। राज... राज ने... आह! मेरे स्तन छोड़ो... तुम उन्हें कुचल रहे हो!"

 
करीम के भारी हाथों ने मोटा स्वेटर के ऊपर से ही अनीता के स्तनों पर कब्ज़ा कर लिया था। वह उन्हें इतनी बेरहमी से भींचने लगा कि अनीता का बदन उसकी गोद में तन गया।

 
करीम: "राज साहब ने कल रात कुछ नहीं किया होगा, हमें पता है। उनकी थकान तो बस बहाना है, असली आग तो यहाँ इस रसोई में जल रही है। आह... कितनी टाइट है ये जींस, बिल्कुल आपकी जवानी की तरह।"

 
करीम ने अपना मुँह उसकी गर्दन पर गड़ा दिया और उसे पागलों की तरह चूसने लगा। अनीता उसकी गोद में छटपटा रही थी, लेकिन उसकी हर हरकत उसे करीम के उस कठोर लंड के और भी करीब रगड़ रही थी। डेनिम के कपड़े के बीच होने वाली वह रगड़ अनीता के शरीर में आग लगा रही थी।

 
अनीता (मदहोशी में): "उह्ह... करीम... बस करो... आह! तुम... तुम मुझे पागल कर दोगे... उह्ह... आह्ह!"

 
करीम ने उसका चेहरा अपनी तरफ घुमाया और उसके होंठों पर हमला बोल दिया। वह उसे बहुत ही जंगली तरीके से चूमने लगा। यह सिलसिला पूरे 15 मिनट तक चला। अनीता उसकी गोद में पूरी तरह पस्त हो चुकी थी। 15 मिनट बाद करीम ने अचानक उसे अपनी गोद से उतार दिया।

 
उसने अनीता की आँखों में आँखें डालकर एक नई मांग रख दी।

 
करीम: "अनीता बेटी... कल मैं आपको इस जींस-टॉप में नहीं देखना चाहता। क्या आप कल मेरे लिए 'कॉलेज की ड्रेस' पहन सकती हैं?"

 
अनीता की आँखें फटी की फटी रह गई।

 
अनीता: "क्या? कॉलेज ड्रेस? पागल हो गए हो क्या करीम? हमारे बीच ऐसी कोई बात नहीं हुई थी! मैं यह घटिया काम नहीं करूँगी।"

 
करीम : "कल 'रोल-प्ले' की बारी मेरी है बेटी। कल मैं देखना चाहता हूँ कि मेरी ये मालकिन एक कॉलेज जाने वाली बच्ची के रूप में कैसी लगती है। छोटी फ्रॉक, दो चोटियाँ... उफ़! अगर आप पहनेंगी, तो शायद मेरी रूह की बेचैनी थोड़ी कम हो जाए... वरना आप जानती ही हैं मैं कितनी आग में जल रहा हूँ।"

 
अनीता (चिल्लाते हुए): "मैं नहीं पहनूँगी! यह हमारे समझौते का हिस्सा नहीं था। तुम अपनी हदें पार कर रहे हो करीम, निकल जाओ यहाँ से!"

 
करीम ने एक ठंडी नज़र उस पर डाली और बिना बहस किए, अपनी लुंगी ठीक करते हुए रसोई से बाहर निकल गया।
Deepak Kapoor
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RE: अनीता सिंह -- किरदार निभाना (Role Play) - by Deepak.kapoor - 09-02-2026, 11:04 AM



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