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Incest खेल ससुर बहु का
#47
"काम करने मे तो आप जवानो को भी मात देते हैं तो कपड़े क्यू बूढो जैसे पहनेंगे। अफ",एक गिरी हुई शर्ट को उठाने के लिए मेनका झुकी तो उसका पल्लू ढालक गया और राजासाहब के सामने उसका बड़ा,मस्त क्लीवेज छलक उठा।वो उनकी नज़रो से बेपरवाह उस शर्ट को तह करने लगी।उसका पेट भी नुमाया हो रहा था और राजासाहब की नज़रे उसके क्लीवेज से फिसल कर उसके चिकने,सपाट पेट के बीचोबीच उसकी गोल नाभि पर टिक गयी।उनका लंड पॅंट के अंदर हरकत मे आने लगा था।


अब आआगे........


तभी मेनका पलटी और क्लॉज़ेट के अंदर जाने लगी,जैसे ही राजासाहब ने साडी मे कसी अपनी बहू की टाइट गांड को देखा उनका लंड पूरा खड़ा हो गया और पॅंट से निकलने को च्चटपटाने लगा।

"
खाना तैय्यार है हुज़ूर।",एक नौकर ने दरवाज़े पे आके कहा।

"
हम अभी आते हैं", कह कर राजासाहब तेज़ी से मुड़े और बाथरूम मे चले गये।


खाने के टेबल पर दोनो मे कुछ खास बात नही हुई।थोड़ी देर बाद सारा स्टाफ भी अपने कमरों को चला गया।

"
गुड नाइट,पिताजी।आप भी जाकर सो जाइए।कल बहुत सवेरे उठना है",मेनका ने पहली सीढ़ी पर पैर रखा कि ना जाने कैसे उसका पैर मूड गया और वो गिर पड़ी।

"
अरे संभाल के दुल्हन,चलिए, उठिए",राजासाहब उसे सहारा देकर उठाने लगे पर मेनका दर्द से कराह उठी,"आउच”! पैर सीधा रखने मे दर्द होता है"

"
अच्छा,",राजासाहब उसके पैर को देखने लगे,टखने मे मोच आई थी,"हम, कमरे मे चल कर इसका इलाज करते हैं।खड़े होने की कोशिश कीजिए।"

"
नही हो रहा,बहुत दर्द है।"मेनका दर्द से परेशान हो बोली।
मैत्री की लेखनी

"
ओके",राजासाहब ने उसकी दाई बाँह अपने गले मे डाली और उसे अपनी गोद मे उठा लिया। शर्म के मारे मेनका के गाल और लाल हो गये।राजासाहब सीढ़ियाँ चढ़ने लगे।वो उसकी तरफ नही देख रहे थे। पर वोही मर्दाना खुश्बू मेनका को महसूस हुई,अपने ससुर के गले मे बाँह डाले मेनका को बहुत अच्छा लग रहा था।उसे उन्होने ऐसे उठा रखा था जैसे उसका वजन ही ना हो।कमरे तक पहुँचने मे ना तो वो हांफे ना ही पसीने की एक भी बूँद उनके माथे पे छल्कि"।इस उम्र भी इतनी ताक़त",मेनका तो उनकी फिटनेस की कायल हो गयी।


कमरे मे पहुँच कर उन्होने मेनका को पलंग पे ऐसे लिटाया जैसे किसी फूल को रख रहे हैं।फिर उसके ड्रेसर से एक बॉम लेकर आए और उसकी तरफ पीठ करके उसके पाओं के पास बैठ गये।साडी थोड़ी सी उपर खिसका कर उसके टखने को देखने लगे,"।”उफ़फ्फ़, कितनी कोमल है।" राजासाहब उसके टखने को सहलाने लगे। मेनका की आँखें मूंद गयी।उसे बहुत अच्छा लग रहा था।

"
जब हम फुटबॉल खेलते थे तो ऐसी चोट बड़ी आम थी।",उन्होने वैसे ही सहलाना जारी रखा।

"
ह्म्म।",मेनका बस इतना ही कह पाई।


और तभी राजासाहब ने उसके टखने को अपने दोनो हाथों मे पकड़ कर एक झटका दिया। मैत्री की पेशकश

"
औउउ,छ्च!",मेनका उठ कर बैठ गयी और दर्द से तड़प कर पीछे से उसने अपने ससुर को पकड़ लिया और उसका सर उनकी पीठ से जा लगा।"बस ठीक हो गया।",कह कर वो उसके टखने पर बॉम की मालिश करने लगे।मेनका वैसे ही अपने ससुर से सटी रही।राजासाहब भी मालिश करते-2 उसके पैर को सहलाने लगे।दोनो को एक दूसरे का स्पर्श बहुत अच्छा लग रहा था।राजासाहब का हाथ अपनी बहू के टखने से उपर आने लगा। मेनका भी आँखें बंद कर इस लम्हे का लुत्फ़ उठा रही थी।

"
टॅनन्न्न!",महल के बड़े घारियल मे एक2 बाज गये थे।दोनो चौंक कर अलग हो गये।

"
आराम कीजिए दुल्हन।सुबह तक दर्द ठीक हो जाएगा।",कहकर बिना उसकी तरफ़ देखे वो वापस अपने कमरे मे आ गये।उनका लंड पायजामा मे पूरा खड़ा था। उन्होने उसे उतार फेंका और अपना लंड तेज़ी से हिलाने लगे।


मेनका तो जल रही थी। राजासाहब ने उसके अंदर वो आग भड़काई थी जो आज से पहले उसने कभी महसूस ना की थी।उसने अपनी नाइटी अपने बदन से अलग की और बगल मे पड़े एक बड़े तकिये से चिपक कर अपनी चूत उस पे रगड़ने लगी।


आज के लिए बस इतना ही

 
फिर मिलते है एक नए अपडेट के साथ।
 
तब तक के लिए मैत्री की तरफ से।
 
।। जय भारत ।।
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RE: खेल ससुर बहु का - by maitripatel - 08-02-2026, 01:49 PM



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