08-02-2026, 01:37 PM
थोड़ी देर बाद उसने वैसे ही ओट मे च्छुपकर फिर से अंदर झाँकना शुरू किया, अब उसके ससुर का मुँह उसकी तरफ था पर वो उसे देख नही सकते थे।अब उनके हाथों मे डमबेल थे जिन्हे वो बारी-2 से उपर नीचे कर रहे थे और उनके सीने की मछलीया पसीने से चमक रही थी।मेनका ने उनके चौड़े सीने को देखा और उसे वो सुबह याद आई जब उन्होने उसे गिरने से बचाया था और उसने इसी सीने मे पनाह ली थी।वो मर्दाना खुश्बू फिर उसे महसूस हुई और टांगो के बीच गीलापन बढ़ गया।उनके सीने पे काफ़ी बाल थे और मेनका की निगाहें बालों की लकीर को फॉलो करने लगी जो नीचे जा रही थी और उनके अंडरवेर मे गुम हो गयी थी।मेनका की नज़रे अंडरवेर पर टिक गयी।कितना फूला हुआ था,कितना बड़ा होगा,उसका हाथ साडी से उपर ही उसकी जाँघो के बीच के हिस्से को सहलाने लगा औरथोड़ी ही देर मे उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।
"मालिकन!",कोई नौकर उसे ढूंढता उधर आ रहा था।वो वापस होश मे आई और अपने को सायंत करके आवाज़ की दिशा मे चली गयी।
"कल सुबह ही हमे बॉमबे रवाना होना होगा।जर्मन पार्ट्नर्स से फाइनल राउंड की बात करके डील पे साइन करना है।",राजासाहब अपने चेंबर मे बैठे थे और सामने मेनका,सेशाद्री और 4 स्टाफ मेंबर्ज़ उन्हे सुन रहे थे।
"कल सवेरे 5 बजे कार्स से हम शहर जाएँगे और 6:एक5-6:30 तक हमारा चार्टर्ड प्लेन बॉमबे के लिए तक-ऑफ करेगा जहा हम एक0 बजे तक पहुँचेंगे।मीटिंग एकएक बजे शुरू होगी।कल की रात हम सब वही रुकेंगे और परसों होप्फुली डील साइन कर के वापस आ जाएँगे।"
"सर,मुझे और बाकी मेंबर्ज़ को तो कल ही वापस आना होगा क्यूकी परसो से ऑडिट शुरू होनी है।",सेशाद्री बोले। मैत्री की पेशकश.
"अरे,ये बात तो हमारे दिमाग़ से उतर ही गयी थी।तो ठीक है आप सब शाम को उसी प्लेन से वापस रवाना हो जाइएगा।हम परसों डील साइन कर के वापस आएँगे।दुल्हन हुमारे साथ ही वापस आएँगी"
सारे स्टाफ मेंबर्ज़ बाहर चले गये तो मेनका भी जाने लगी,"मैं महल जाकर अपनी पॅकिंग कर लेती हूँ।"
"हा,ठीक है।",और राजासाहब अपने लॅपटॉप पे फाइल्स चेक करने लगे।
रात करीब एक0 बजे राजासाहब महल पहुँच कर सीढ़िया चढ़ कर अपने कमरे की तरफ जा रहे थे जब वाहा से कुछ आवाज़ें आती सुनाई दी।अंदर जाने पर उन्होने देखा की मेनका एक नौकर के साथ उनके वॉक-इन क्लॉज़ेट से कपड़े निकलवा कर पॅकिंग करवा रही है।
"अरे आपने क्यू तकलीफ़ की दुल्हन?हुमारे नौकर को कह देती। बस 2 ही दीनो के लिए तो जाना है।"
"हा,कह ही देना चाहिए था।सारे कपड़े तो आपके एक जैसे हैं।कोई फ़र्क ही नही है।"
"तो इस उम्र मे हम तरह-2 के कपड़े पहन कर क्या करेंगे?",उन्होने हंसते हुए पूचछा।
"काम करने मे तो आप जवानो को भी मात देते हैं तो कपड़े क्यू बूढो जैसे पहनेंगे। अफ",एक गिरी हुई शर्ट को उठाने के लिए मेनका झुकी तो उसका पल्लू ढालक गया और राजासाहब के सामने उसका बड़ा,मस्त क्लीवेज छलक उठा।वो उनकी नज़रो से बेपरवाह उस शर्ट को तह करने लगी।उसका पेट भी नुमाया हो रहा था और राजासाहब की नज़रे उसके क्लीवेज से फिसल कर उसके चिकने,सपाट पेट के बीचोबीच उसकी गोल नाभि पर टिक गयी।उनका लंड पॅंट के अंदर हरकत मे आने लगा था।
जय भारत
"मालिकन!",कोई नौकर उसे ढूंढता उधर आ रहा था।वो वापस होश मे आई और अपने को सायंत करके आवाज़ की दिशा मे चली गयी।
"कल सुबह ही हमे बॉमबे रवाना होना होगा।जर्मन पार्ट्नर्स से फाइनल राउंड की बात करके डील पे साइन करना है।",राजासाहब अपने चेंबर मे बैठे थे और सामने मेनका,सेशाद्री और 4 स्टाफ मेंबर्ज़ उन्हे सुन रहे थे।
"कल सवेरे 5 बजे कार्स से हम शहर जाएँगे और 6:एक5-6:30 तक हमारा चार्टर्ड प्लेन बॉमबे के लिए तक-ऑफ करेगा जहा हम एक0 बजे तक पहुँचेंगे।मीटिंग एकएक बजे शुरू होगी।कल की रात हम सब वही रुकेंगे और परसों होप्फुली डील साइन कर के वापस आ जाएँगे।"
"सर,मुझे और बाकी मेंबर्ज़ को तो कल ही वापस आना होगा क्यूकी परसो से ऑडिट शुरू होनी है।",सेशाद्री बोले। मैत्री की पेशकश.
"अरे,ये बात तो हमारे दिमाग़ से उतर ही गयी थी।तो ठीक है आप सब शाम को उसी प्लेन से वापस रवाना हो जाइएगा।हम परसों डील साइन कर के वापस आएँगे।दुल्हन हुमारे साथ ही वापस आएँगी"
सारे स्टाफ मेंबर्ज़ बाहर चले गये तो मेनका भी जाने लगी,"मैं महल जाकर अपनी पॅकिंग कर लेती हूँ।"
"हा,ठीक है।",और राजासाहब अपने लॅपटॉप पे फाइल्स चेक करने लगे।
रात करीब एक0 बजे राजासाहब महल पहुँच कर सीढ़िया चढ़ कर अपने कमरे की तरफ जा रहे थे जब वाहा से कुछ आवाज़ें आती सुनाई दी।अंदर जाने पर उन्होने देखा की मेनका एक नौकर के साथ उनके वॉक-इन क्लॉज़ेट से कपड़े निकलवा कर पॅकिंग करवा रही है।
"अरे आपने क्यू तकलीफ़ की दुल्हन?हुमारे नौकर को कह देती। बस 2 ही दीनो के लिए तो जाना है।"
"हा,कह ही देना चाहिए था।सारे कपड़े तो आपके एक जैसे हैं।कोई फ़र्क ही नही है।"
"तो इस उम्र मे हम तरह-2 के कपड़े पहन कर क्या करेंगे?",उन्होने हंसते हुए पूचछा।
"काम करने मे तो आप जवानो को भी मात देते हैं तो कपड़े क्यू बूढो जैसे पहनेंगे। अफ",एक गिरी हुई शर्ट को उठाने के लिए मेनका झुकी तो उसका पल्लू ढालक गया और राजासाहब के सामने उसका बड़ा,मस्त क्लीवेज छलक उठा।वो उनकी नज़रो से बेपरवाह उस शर्ट को तह करने लगी।उसका पेट भी नुमाया हो रहा था और राजासाहब की नज़रे उसके क्लीवेज से फिसल कर उसके चिकने,सपाट पेट के बीचोबीच उसकी गोल नाभि पर टिक गयी।उनका लंड पॅंट के अंदर हरकत मे आने लगा था।
जय भारत


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