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Incest खेल ससुर बहु का
#42
जहाँ इस बात ने राजासाहब के दिल मे मेनका के लिए और इज़्ज़त भर दी वही मेनका भी राजासाहब की ईमानदारी से प्रभावित हुए बिना नही रह सकी।पूरे मामले मे उन्हे सिर्फ़ मेनका की चिंता थी,उनका बेटा गुनेहगर था और उसे बचाने के लिए वो बिल्कुल तैय्यार नही थे-उनका बस चलता तो विश्वा जैल मे होता।उसके पिता और डॉक्टर्स के समझने पर ही वो उसे जैल के बजाय रिहेब मे भेजने को तैय्यार हुए थे।

अब आगे......

जब राजासाहब बॅंगलुर से वापस आए तो मेनका की मा ने उसे अपने साथ ले जाने की इजाज़त माँगी,राजासाहब फ़ौरन तैय्यार हो गये पर मेनका अपने ससुर को अकेला छोड़ कर जाने को बिल्कुल तैय्यार नही हुई।लाख समझाने पर भी वो नही मानी और राजासाहब के कहेने पर उसने बोला,"अपने घर को छोड़कर मैं कही नही जाऊंगी।"


राजासाहब सवेरे नाश्ते की टेबल पर यही सब सोच रहे थे कि मेनका नौकर के हाथ से डिश लेकर उन्हे परोसने लगी,"पिताजी,एक बात पूछे?"

"हा,दुल्हन।"

"क्या हम ऑफीस आ सकते हैं?"

"बिल्कुल,दुल्हन।इसमे पूच्छने वाली क्या बात है?आपका अपना ऑफीस है।"

"आप समझे नही।हम ऑफीस जाय्न करने की बात कर रहे हैं।"


राजासाहब थोड़े परेशान दिखे,"दुल्हन महल और ऑफीस दोनो की ज़िम्मेदारी कहीं आप को।"

"-मुझे एक बार ट्राइ तो करने दीजिए,प्लीज़!"
मैत्री पटेल निर्मित[b][/b]

"ओके,कल से चलिए हमारे साथ।"

"कल से नही,आज से प्लीज़!",मेनका बच्चों की तरह मचलते हुए बोली।

"ठीक है,जाकर रेडी हो जाइए।",राजासाहब हंसते हुए बोले।

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"कल्लन,जल्दी पता लगाओ कि आख़िर राजा ने अपने लौंडे को कहा भेजा है।प्रेस रिलीस क्या अपने ऑफीस मे भी साले ने रिहेब सेंटर का नाम नही बताया है!",जब्बार बिस्तर पर अढ़लेता फोन पे बात कर रहा था,मलिका की चौड़ी गांड उसकी आँखों के सामने लहरा रही थी,वो घुटनो के बल बैठी थी और उसका मुँह जब्बार के लंड पे उपर-नीचे हो रहा था।

"डॉन'ट वरी,जब तक विश्वा का पता नही लगा लेता,मैं चैन से नही बैठूँगा।",और फोन कट गया।

जब्बार ने फोन किनारे रखा और हाथ बढ़कर मलिका की कमर जकड़ते हुए उसे अपने उपर ले लिया,अब उसकी चिकनी चूत उसकी आँखों के सामने थी और दोनो 69 पोज़िशन मे आ गये थे।

उसने अपने दाँत उसकी गांड की एक फाँक मे गाड़ाते हुए पूचछा,"बत्रा को भी कुछ नही पता चला?"

"
उउन्ण..हु..उँ",मलिका चिहुनकि और उसके लंड भरे मुँह से सिर्फ़ इतना ही निकला।जब्बार ज़ोर से उसकी चूत चाटने लगा।


जब्बार ने उसकी कमर पे अपनी पकड़ और मज़बूत कर दी,"राजा की औलाद बर्बादी की कगार से वापस आ जाए,ऐसा मैं कभी नही होने दूँगा।",औरउसने अपना मुँह उसकी चूत मे घुसा दिया और अपनी जीभ से उसे चोदने लगा।मलिका ने भी अपनी चूसने की स्पीड बढ़ा दी और दोनो अपने क्लाइमॅक्स की ओर बढ़ने लगे।

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कुछ ही दीनो मे मेनका ने ऑफीस का सारा काम समझ लिया।विश्वा के जाने के बाद जो जगह खाली हुई थी,उसे उसने बखूबी भर दिया था।ज़िम्मेदारी बढ़ने के बावजूद महल के काम-काज पर उसने ज़रा भी असर नही पड़ने दिया था।अब वो पहले से ज़्यादा खुश नज़र आती थी। बस एक प्राब्लम थी,उस हादसे के बाद से रात को उसे बुरे सपने आने लगे थे और अक्सर बीच मे ही उसकी नींद टूट जाती थी।


उस सुबह भी वो सपने की वजह से जल्दी उठ गयी तो उसने सोचा की नौकरों से थोडा काम ही निपट वाया जाए।रात के खाने के बाद महल का सारा स्टाफ महल के कॉम्पोन्ड मे बने अपने क्वॉर्टर्स मे चला जाता था और सुबह महल के अंदर से हुक्म आने पर ही अंदर जाता था।मेनका ने इंटरकम से अंदर आने का ऑर्डर दिया और बटन दबा कर सारे एलेक्ट्रॉनिक लॉक्स खोल दिए।थोड़ी ही देर मे महल के अंदर रोज़मर्रा की चहल-पहल होने लगी।

ऐसे ही किसी काम से मेनका अकेली ही उस हिस्से मे पहुँची जहा जिम था,उसने जिम की सफाई कल ही करने का ऑर्डर दिया था और उसी का मुआयना करने आई थी।

जिम के अंदर कदम रखते ही उसका मुँह खुला रह गया। सामने राजासाहब उसकी तरफ पीठ करके वेट ट्रैनिंग कर रहे थे-केवल एक अंडरवेर मे।वो उनके गथिले बदन को देखने लगी।मज़बूत कंधे और विशाल बाहें जब वेट उपर उठाती थी तो एक-एक मसल का शेप साफ़ दिखाई देता था,नीचे बिल्कुल सीधी पीठ,पतली कमर और नीचे पुष्ट गांड। मेनका को टाँगों के बीच गीलापन महसूस हुआ और ऐसा लगा जैसे की पैरों मे जान ही ना हो।उसने दीवार को पकड़ कर सहारा लिया पर तभी राजासाहब पीछे घूमने लगे तो वो उसी दीवार की ओट मे हो गयी।


जारी रहेगा
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RE: खेल ससुर बहु का - by maitripatel - 08-02-2026, 01:30 PM



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