08-02-2026, 05:40 AM
पुरानी याद
शेर अपने नौकरों वाले क्वार्टर में बिछावन पर चित लेटा हुआ था। छत की ओर घूरते हुए उसका हाथ अब भी अपनी पैंट के ऊपर उस 7 इंच के फौलादी तनाव पर था, जो रुकने का नाम नहीं ले रहा था। बाथरूम का वो नज़ारा उसकी बंद आँखों के पीछे किसी फिल्म की तरह चल रहा था।
उसने करवट बदली और एक ठंडी आह भरते हुए बुदबुदाया, "अरे यार, सिर्फ दूर से देखने में अब वो मज़ा नहीं रहा। शरीर की आग बढ़ती ही जा रही है। जी करता है कि अभी दौड़कर जाऊं और मेमसाह के उस रेशमी बदन को अपने हाथों में भींच लूँ। पर कैसे?"
उसके चेहरे पर गहरी मायूसी और लाचारी छा गई। उसे बाथरूम में सरताज और मीरा की वो आवाज़ें याद आईं जब वे एक-दूसरे के जिस्मों में खोए हुए 'आई लव यू' बोल रहे थे। वह प्यार, वह जुड़ाव... शेर को अंदर तक झकझोर गया।
उसने एक लंबी सांस ली और अपनी बेबसी पर मन ही मन बोला:
"साला, मैं भी क्या सोच रहा हूँ... सरताज के सामने मेरी क्या औकात? कहाँ वो शहर का बड़ा IPS अफसर, रौबदार और ताक़तवर, और कहाँ मैं एक मामूली नौकर। सरताज न सिर्फ ताक़तवर है, बल्कि मेमसाह तो उसके प्यार में अंधी हैं। वो साला उनका सम्मान भी करता है और मेमसाह की आँखों में उसके लिए जो पागलपन है, उसे तोड़ना नामुमकिन है।"
शेर ने खामोशी से छत को घूरा। उसे समझ आ गया कि सरताज को सामाजिक या शारीरिक रूप से पछाड़ना उसके बस की बात नहीं। "मेमसाह के चरित्र में भी कोई खोट नहीं और न ही उस दरोगा में कोई ऐसी कमजोरी है जिसे पकड़कर मैं उन्हें ब्लैकमेल कर सकूँ। दोनों एक-दूसरे के लिए बने हैं... और मैं बस एक सुराख से ताकने वाला कीड़ा बनकर रह गया हूँ।"
तभी, लेटे-लेटे ही उसके दिमाग में एक पुरानी याद बिजली की तरह कौंधी। उसकी आँखों में एक अजीब सी वहशियत और चमक आ गई। उसे याद आया कि सालों पहले शंकर ने भी तो मीरा को अपने वश में करने के लिए उन खास नशीली दवाओं का सहारा लिया था।
शेर के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान फ़ैल गई। वह खुद उन जड़ी-बूटियों का पुराना खिलाड़ी था, उसे पता था कि ऐसी कौन सी खुराक तैयार करनी है जो किसी भी चट्टान जैसी औरत को मोम की तरह पिघला दे।
उसने छत की कड़ियों को घूरते हुए अंधेरे में फुसफुसाकर कहा, "हाँ! मिल गया रास्ता। अगर मेमसाह अपनी मर्जी से इस शेर के पिंजरे में नहीं आएंगी, तो मैं उन्हें उस नशे की दुनिया में खींच लाऊंगा जहाँ होश-ओ-हवास का नामोनिशान नहीं होगा। जो खेल शंकर ने शुरू किया था, उसे ये शेर खत्म करेगा।"
उसने अपनी मुट्ठी को बिस्तर पर पटका और अपने तने हुए अंग को सहलाते हुए बोला, "बस थोड़ा सबर कर ले बेटा... जल्द ही ऐसी दवा तैयार करूँगा कि मेमसाह खुद अपनी वो गुलाबी गुफा लेकर तेरे पास दौड़ती आएंगी। फिर न सरताज याद रहेगा और न कोई वफादारी... बस तू होगा और उनका वो मदहोश कर देने वाला गोरा जिस्म।"
शेर बिस्तर पर लेटा हुआ इन्हीं उलझनों में डूबा था, पर उसका दिमाग अब तेज़ी से पुरानी कड़ियों को जोड़ने लगा। उसने करवट बदली और छत की कड़ियों को घूरते हुए सोचने लगा कि आखिर ये सरताज और मीरा मिले कैसे?
उसे याद आया कि उसका भाई शंकर हमेशा मीरा के बारे में ही बातें करता था, पर उसने कभी सरताज का नाम तक नहीं लिया। फिर अचानक शंकर की मौत हो गई... और उसी के साथ वो सारे वीडियो भी गायब हो गए जिनका डर दिखाकर शंकर मीरा को ब्लैकमेल किया करता था। लॉकर खाली था, सबूत मिट चुके थे।
शेर ने अपनी दाढ़ी खुजलाते हुए बुदबुदाया, "उस वक्त तो मेमसाह आरव की पत्नी थीं। फिर साल भर बाद खबर आई कि आरव एक कार एक्सीडेंट में मारा गया... और 7-8 महीने भी नहीं बीते कि मीरा और सरताज की शादी की खबर उड़ गई।"
उसने ठंडी सांस ली और दबी आवाज़ में बोला, "उस वक्त भी मेरे मन में ये बात आई थी कि अगर कोई एक मर्द मीरा मेमसाह को शंकर के चंगुल से बचा सकता था, तो वो सिर्फ ये सरताज ही हो सकता था। आखिर IPS अफसर है, ताक़त और कानून दोनों इसके हाथ में हैं। साले ने बड़े शातिर तरीके से मेमसाह की ज़िंदगी से काँटे निकाले और खुद उनका राजा बन बैठा।"
शेर को अब समझ आ रहा था कि उसकी टक्कर किसी मामूली इंसान से नहीं, बल्कि उस रक्षक से है जिसने मीरा को नर्क से निकाला था। उसने अपनी मुट्ठी भींची और मन ही मन कहा, "सरताज ने उन्हें बचाया, उन्हें प्यार दिया... इसीलिए मेमसाह उस पर जान छिड़कती हैं। इस किले को भेदना सीधे रास्ते से तो मुमकिन नहीं है। यहाँ सिर्फ दिमाग और वो दवा ही काम आएगी।"
उसकी आँखों में एक बार फिर वही शैतानी चमक लौट आई। "ठीक है दरोगा जी, आपने उन्हें नर्क से निकाला, अब ये शेर उन्हें जन्नत के ऐसे सपने दिखाएगा कि वो होश में रहकर भी आपकी वफादार रहेंगी और नींद में मेरी प्यास बुझाएंगी।"
अगली सुबह, शेर अपने छोटे से क्वार्टर के एक कोने में दुबक कर बैठ गया। उसके सामने कुछ पुरानी जड़ी-बूटियाँ, पिसी हुई जड़ें और एक छोटी सी शीशी पड़ी थी। उसकी आँखें जोश और दरिंदगी से चमक रही थीं। वह बहुत सावधानी से उन चीज़ों को आपस में मिला रहा था, क्योंकि वह जानता था कि एक मामूली सी चूक सारा खेल बिगाड़ सकती है।
उसने एक चुटकी काला चूर्ण मिलाते हुए अपनी भारी आवाज़ में बुदबुदाया:
"हाँ... यही है वो चीज़। इसे पीने के बाद मेमसाह ऐसी गहरी नींद सोएंगी कि बाहर चाहे बिजली कड़क जाए, उनकी आँख नहीं खुलेगी। पर इस दवा का असली जादू तो कुछ और ही है..."
उसने शीशी को हिलाया और उसे रोशनी के सामने रखकर एक कुटिल मुस्कान के साथ कहा, "नींद तो गहरी आएगी ही, पर अंदर ही अंदर हवस की ऐसी आग भड़केगी कि उनका रोम-रोम किसी छुअन के लिए तड़पने लगेगा। और सबसे मज़े की बात तो ये है कि अगर नींद में कोई उन्हें छुएगा, उन्हें प्यार करेगा, तो उन्हें लगेगा कि वो बस एक खूबसूरत और मदहोश कर देने वाला सपना देख रही हैं। सुबह जब जागेंगी, तो शरीर में मीठा दर्द तो होगा, पर याद कुछ नहीं रहेगा।"
शेर ने शीशी का ढक्कन बंद किया और उसे बड़े प्यार से सहलाते हुए बोला, "तैयार हो जा शेर, अब मेमसाह के उस गोरे मांस और गुलाबी होंठों तक पहुँचने का रास्ता साफ़ है। इस दवा के नशे में जब वो चूर होंगी, तब ये 7 इंच का फौलाद उनकी उस रेशमी गुफा की गहराई नापेगा और उन्हें लगेगा कि कोई फरिश्ता उनके सपनों में आकर उन्हें जन्नत की सैर करा रहा है।"
शेर आँखों में केवल हवस नहीं, बल्कि एक गहरी और धूर्त सोच थी। उसने शीशी को हथेली में घुमाते हुए ठंडी साँस भरी। उसे याद आया कि शंकर ने भी यही गलती की थी—जल्दबाजी। शंकर ने सोचा था कि दवा के दम पर वह मेमसाह के बदन को फतह कर लेगा, पर उसे क्या पता था कि सरताज बीच में दीवार बनकर खड़ा हो जाएगा। सरताज ने न सिर्फ मेमसाह को बचाया, बल्कि शंकर को कुत्ते की मौत मार डाला।
शेर ने खुद से बुदबुदाते हुए कहा, "ना भाई, अभी ना... शंकरवा भी अईसे ही बौरा गया रहा। सरताज कोई मामूली पुर्जा नाहीं है, शेर को पहले देखना होगा कि मेमसाह के दिल में पहलवान कितनी गहरी जड़ जमाए बैठा है। जब तक सरताज का पूरा कच्चा-चिट्ठा हाथ ना लग जाए, तब तक 7 इंच का फौलाद म्यान में ही ठीक है।"
शेर कोई कच्चा खिलाड़ी नहीं था। उसे पता था कि जब तक वह सरताज की ताकत और मेमसाह के उसके प्रति लगाव की गहराई नहीं नाप लेता, तब तक हाथ डालना अपनी गर्दन फँसाने जैसा होगा।
उसके दिमाग में अब एक ही बात चल रही थी—मीरा मेमसाह को टटोलना। वह यह देखना चाहता था कि सरताज का नाम सुनते ही उनके चेहरे के भाव कैसे बदलते हैं। क्या वह सिर्फ उनका रक्षक है, या उनकी रूह तक उसकी पहुँच है?
उसने शीशी को छिपा लिया और कमरे से बाहर निकलकर मेमसाह के कमरे की ओर देखने लगा, जैसे वह सही मौके का इंतज़ार कर रहा हो।
Deepak Kapoor
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