06-02-2026, 08:43 PM
एक दिन चाचा के ऑफिस के लिए निकल जाने के बाद घर के कंपाउंड में चाची पौधों को पानी दे रही थी. मौसम साफ़ और ख़ुशमिज़ाज़ था... मेरा नाश्ता हो गया था और अपने कमरे में खिड़की के पास खड़ा सिगरेट ले रहा था. उस लड़ाई वाले घटना को करीब एक सप्ताह - दस दिन बीत गया था और चाचा अब भी उसी दुकान से हर दूसरे दिन मिठाई या कुछ नमकीन वगैरह ले आते हैं. निश्चिंतता की बात ये है की इतने दिनों में वे दोनों लड़के चाचा वहाँ उस दुकान में या दुकान के आसपास नहीं दिखे.
पर मैं मन ही मन उन लड़कों के तरफ़ से किसी भी अप्रिय घटना के लिए प्रस्तुत रहने लगा था. कुछ लफंगे चोट खाए हिंसक जानवर की भाँति होते हैं, पलट कर वार ज़रूर करते हैं.
खिड़की से बाहर धुआँ उड़ाता हुआ मैं अपने भविष्य के बारे में सोच रहा था. पता नहीं ग्रेजुएशन के बाद क्या होगा..? कब तक मुझे यहाँ, इस घर में रहना होगा. हालाँकि यहाँ एक अगर चाची को छोड़ दिया जाए तो चाहे चाचा हो या इनके बच्चे, ट्यूशन पढ़ने वाले बच्चे, युवा हों या उनके माँ - बाप, घरवाले, हर किसी से मुझे लाड़ - प्यार, विश्वास मिला है. चाची के व्यवहार में थोड़ी नरमी आयी है बस, पूरी तरह से बदली नहीं है.
इसी तरह की कई सारी बातें सोचते - सोचते मेरी नज़र खिड़की से नीचे आँगन में पौधों को पानी देते चाची पे गयी. मेरे उलट पौधों को झुक कर पानी दे रही थी चाची… फलस्वरूप, लो - कट ब्लाउज में झाँकती उनकी पीठ और कमर मेरे सामने थी. कमर से नीचे उनकी उभरी गाँड़ पे नज़रें टिक गयीं. दो सेकंड उनके गाँड़ को देखा नहीं की मेरे कमर के नीचे हलचल शुरू हो गई!
क्या मस्त गोल, सुडौल गांड़ पाई है चाची ने… चाचा की तो बल्ले - बल्ले हो जाती होगी.
वैसे, चाचा से जिस प्रकार के मूल विचार उभरते - निकलते रहते हैं; उससे लगता नहीं की एक मिशनरी छोड़ कर और कोई पोजीशन करते होंगे.
आह! काश ऐसी ही गोल गाँड़ कम से कम छूने भर के लिए मिल जाए मुझे!!
अभी मैं चाची के सुडौल गाँड़ जैसी एक गाँड़ की अपने लंड पे उछालने की कल्पना कर ही रहा था की अचानक मेरी नज़र हमारे ग्रिल गेट के उस पार गुजरती सड़क पे गई जहां चार लड़के खड़े थे. ये चारों लड़के हमारे घर के सामने से गुज़र रहे थे की उनमें से एक लड़के की नज़र घर का मुख्य गेट जोकि ग्रिल का है उससे होते हुए भीतर आंगन में पौधों को पानी देती चाची पे पड़ी.. वह लड़का तुरंत रूक कर उनको देखने लगा. उसे यूँ अचानक से रूक कर सामने वाले घर की ओर देखता देख कर बाकी भी उसके पास आ कर हमारे घर की ओर देखने लगे और देखते ही सब के सब मानो वहीं जड़ हो गए --- मुँह खुला का खुला रह गया --- आँखें और चौड़ी हो गईं!
मैं अपने कमरे की खिड़की से लड़कों की हालत देख कर पहले तो हँसा और फिर तुरंत ही सजग हो कर ये सोच कर उत्सुकता बढ़ी की इन सालों ने ऐसा क्या देख लिया की इनकी ये जड़वत -स्थिति हो गई..? मैं लड़कों की स्थिति से ज़्यादा उन लड़कों को लेकर फ़िक्रमंद हो गया क्योंकि उन चार लड़कों में से दो उन्हीं लौंडों के मुखड़े थे जिनमें से एक को कुछ दिन पहले अपने मुक्के का स्वाद चखाया था... कदाचित ये महज संयोग ही होगा की आज ही इन दोनों को यहाँ होना था.
खैर, मैं तुरंत कमरे से निकल कर पीछे वाले दरवाज़े से घर के बाहर आ कर एक बड़ा -सा चक्कर लगा कर उन्हीं लड़कों के पीछे आ कर खड़ा हो गया और उन लड़कों के देखने वाली दिशा में नज़र गड़ाया --- और फिर मैंने भी जो देखा वो देख कर जान ही हलक को आ गई! दिल भी शायद कंफ्यूज हो गया की उसे ज़ोर - ज़ोर से धड़कना है या धकड़ना ही बंद कर देना है?!
मैंने वो देखा जिसे देखने की चाह हमारे उम्र के हर लौंडे को रहती है... और वो भी अगर खास कर के किसी विवाहित या मैच्योर आयु की महिला के हो तो बात ही क्या..?!
थोड़ी दूरी बना कर उन लड़कों के पीछे से मैंने देखा की चाची का पल्लू अपनी जगह से हट गया है... इतना हट गया है की लगभग मान सकते हैं की सीने पर से गिर गया है और घोर आश्चर्य की बात तो यह है की उनको देख कर लग रहा है कि उनको इस बारे में बिल्कुल भी ध्यान नहीं है. वह अपने में मगन रहते हुए कभी पौधों को पानी दे रही है तो कभी किसी पौधे को हाथ से छू - छू कर देखने लगती है. वह जितना टाइम उस पोजीशन में रहती, उनके V -कट ब्लाउज से दूध की दोनों थैलियाँ बाहर छलकी हुई रहतीं और फलस्वरूप एक बहुत ही सुंदर, आकर्षक, गहरी, लम्बी -सी क्लीवेज का निर्माण भी हो रहा था.
ऐसे दृश्य तो हर आयु के मर्दजात में अत्यंत लोकप्रिय होते हैं!
"शशशssss.... क्या माल है यार!"
"हाँ, भाई... ऊपर से लेकर नीचे, आगे - पीछे... एकदम भरी हुई है."
"काश, एक बार छूने को मिल जाती...!"
"हाँ यार.... देख के ही खड़ा हो गया है... छूने को मिलता तो पता नहीं क्या होता?"
"होता क्या, इतना भरा हुआ जिस्म सामने से अधनंगा देखते ही हमारा पूरा माल निकल जाता.."
"अरे माल क्या निकलता.. माल का पूरा ज्वालामुखी ही फट पड़ता यार!"
"ज़्यादा कुछ समझ तो नहीं आ रहा है इतनी दूर से लेकिन इतना कह सकता हूँ की इसके होंठ पतले हैं..."
"तो...?!"
"तो ये की ज़रा सोच के देख, जब हमारा अपना मुँह में लेगी तब क्या ही जबरदस्त फील आएगी!"
"हा हा हा हा हा..." इस बात पे सब हँसने लगे.
तभी चौथे ने कहा,
"अबे तुम लोग मुँह में लेने - देने की क्या बात कर रहे हो... उन दूध की टंकियों को देखो ज़रा.. इनके बीच में अपना लंड देने भर से ही ज्वालामुखी निकलवा देगी साली."
"अबे हाँ यार, एकदम पॉइंट वाला बात बोला तू." बाकी तीनों ने हाँ में हाँ मिलाया.
"और इसका चेहरा देख... क्या मस्त गोल है न."
"हाँ भाई.. गाल ही क्या मस्त फूले हुए से हैं... इन गालों को तो चाट - चाट कर दाँतों से हल्का काटने में मज़ा ही आ जाएगा!"
"और गले के आसपास का एरिया देख... कंधों को देख... इतनी भरी हुई है की ब्लाउज तो मानो कंधे के माँस में धँसी जा रही है."
"हम्म, भरी तो है.. लेकिन भारी नहीं है."
"एकदम सौ टका बात कही है भाई तूने।"
तभी तीसरा बोला,
"तुम लोगों ने एक और ख़ास बात नोट नहीं किया."
"क्या??"
"गौर से इसकी चूचियों को देखो…."
"अबे यार, तब से तो वही देख रहे हैं."
"हाँ बे, वही तो देख रहे हैं."
"पर तुम लोग वो नहीं देख रहे जो मैं देख रहा हूँ."
"ऐसा क्या देख रहा है बे...?!"
"चूचियों की गहराई देख रहे हो..?"
"हाँ..?"
"और उसका मंगलसूत्र..?"
"हम्म…. तो..?"
"सोच यार... जब ये घोड़ी बनती होगी तब क्या ही सीन बनता होगा..!"
"तू बता..."
"क्या बताऊँ.. बस, ये सोच की तू इसकी चब्बी गाँड़ को पीछे से थपकी दे रहा है.. ज़ोर - ज़ोर से और ये 'आह' 'आह' कर रही है... इसके ये फूली हुई, बड़ी चूचियाँ लटक रही हैं और चूचियों के साथ ही साथ इसकी पवित्रता की निशानी, इसके सती - सावित्री होने का गवाह ये मँगलसूत्र भी लटक रहा है और हर धक्के पे आगे - पीछे डोल रहा है..."
इतना सुनते ही बाकी तीनों लड़के एक साथ आहें भर उठे...
"आहहहsss…अबे हाँ यार....."
दो ने तो वहीं अपना - अपना लंड पैंट के ऊपर से पकड़ कर मसल दिया. तीसरा अपने सीने पे हाथ रख कर सहलाने लगा और चौथा अपने दोनों हाथ पैंट के पॉकेट में डाल कर ऐसे किया जिससे समझ में आ गया की अंदर से लंड पकड़ रखा है.
तभी न जाने ऐसा क्या हुआ की चाची को पीछे मुड़ना पड़ा.. और उनके ऐसा करते ही साड़ी में ढकी उनकी मस्त गोल गाँड़ हमारे सामने आ गयी! और तो और वो कुछ यूँ झुकी की उनका कमर तक का हिस्सा नीचे और गाँड़ ऊपर की ओर पूरा उठा गया!!
ये नज़ारा देख कर उन लड़कों की क्या बात करूँ; खुद मेरी हालत दिल के एक्स्ट्रा तेज़ गति से धड़कना चालू कर देने के कारण मरने जैसी हो गई.
बाकी उन चारों लड़कों के हालत भी कुछ सही नहीं थे. उनको देखते ही मैंने तय किया की मुझे अब थोड़ा साइड हो जाना चाहिए नहीं तो पकड़े जाने का भी पूरा चाँस है.
मेरा ये निर्णय बहुत सही साबित हुआ क्योंकि जैसे मैं कुछ कदम पीछे हटा उन चारों में से किसी ने सीटी मार दी और एकाध गाड़ियों के आते - जाते शोर में भी चाची को यह सुनाई दी गयी. वह तुरंत पलट कर देखी --- गेट के उस पार चार लड़कों को अपनी तरफ़ देखता हुआ पा कर चाची पहले घर को देखी, फिर पौधों को और फिर अपने शरीर पर नज़र दौड़ाई. जैसे ही अपने सीने को पल्लू से हीन देखी; झट से सीधी हो पल्लू को सही की और एकाध पौधे पर नाम मात्र का पानी दे कर जल्दी से घर में घुस गई.
ऐसा होते ही उन लड़कों के मुँह से हताशा के डूबे स्वर एक साथ निकले… बेचारे सुनहरे दृश्य को अधिक समय तक देख जो नहीं पाए. बाकी के तीन लड़के उस चौथे वाले को गुस्से से देखा और जम कर उसे खरी - खोटी सुनाते हुए साथ में चले गए.
लड़कों का बाद में क्या हाल हुआ होगा ये कौन जाने… मुझे उस बात में कोई इंटरेस्ट नहीं था. मेरी हालत तो ऐसी खूबसूरत, सँस्कारी महिला के अंदर छुपे एक कामदेवी का साक्षात्कार होने भर से ही बहुत बुरी हो गई थी. मैं दौड़ कर अंदर गया और कमरे का दरवाज़ा लगा कर सीधे अटैच्ड बाथरूम में घुसा और अब तक बीते पूरे दृश्य को याद कर - कर के हिलाने लगा.
किसी महिला को याद कर के गिराया गया मेरा वो पहला माल मुझे ताउम्र याद रहेगा.
रात को मैंने गौर किया की अपने कमरे में चाची चाचा से किसी विषय पर बड़ी गंभीरता से कोई बात कर रही है... कोई बात बहुत अच्छे से बता रही है और चाचा भी उत्तर में 'हम्म, हम्म' कर रहे हैं.
कमरे के अंदर से आती चाची की दबी आवाज़ से मैं इतना तो समझ ही गया की वह दिन में बीती घटना की शिकायत चाचा से कर रही है... और इस बारे में चाचा सिवाय सुनने के अलावा कर भी क्या सकते हैं..? वो शायद खुद मन ही मन कह रहे होंगे की साली तू है ही ऐसी कमाल की बम की तुझे 3-4 लड़के क्या, मोहल्ला क्या... पूरा बाजार देखता होगा!
वैसे बहुत पहले अपने किसी दोस्त या शायद अपने ही उम्र के किसी लड़के से सुन रखा था की आजकल कई पति ऐसे भी होते हैं जो अपनी बीवी की खूबसूरती दूसरे के सामने दिखा कर या दूसरों को अपनी बीवी को घूरते देख कर बहुत हॉर्नी हो जाते हैं.... और सब से ज़्यादा मज़ा तो तब आता है जब इनकी बीवी ही अपने पतियों को ऐसे किसी इंसान या घटना के बारे में बताती हैं.
इस बात का ख्याल आते ही मैं ये सोचने को मजबूर हो गया की क्या मेरे चाचा भी ऐसे ही एक 'मर्द' हो सकते हैं...?
जारी है....
पर मैं मन ही मन उन लड़कों के तरफ़ से किसी भी अप्रिय घटना के लिए प्रस्तुत रहने लगा था. कुछ लफंगे चोट खाए हिंसक जानवर की भाँति होते हैं, पलट कर वार ज़रूर करते हैं.
खिड़की से बाहर धुआँ उड़ाता हुआ मैं अपने भविष्य के बारे में सोच रहा था. पता नहीं ग्रेजुएशन के बाद क्या होगा..? कब तक मुझे यहाँ, इस घर में रहना होगा. हालाँकि यहाँ एक अगर चाची को छोड़ दिया जाए तो चाहे चाचा हो या इनके बच्चे, ट्यूशन पढ़ने वाले बच्चे, युवा हों या उनके माँ - बाप, घरवाले, हर किसी से मुझे लाड़ - प्यार, विश्वास मिला है. चाची के व्यवहार में थोड़ी नरमी आयी है बस, पूरी तरह से बदली नहीं है.
इसी तरह की कई सारी बातें सोचते - सोचते मेरी नज़र खिड़की से नीचे आँगन में पौधों को पानी देते चाची पे गयी. मेरे उलट पौधों को झुक कर पानी दे रही थी चाची… फलस्वरूप, लो - कट ब्लाउज में झाँकती उनकी पीठ और कमर मेरे सामने थी. कमर से नीचे उनकी उभरी गाँड़ पे नज़रें टिक गयीं. दो सेकंड उनके गाँड़ को देखा नहीं की मेरे कमर के नीचे हलचल शुरू हो गई!
क्या मस्त गोल, सुडौल गांड़ पाई है चाची ने… चाचा की तो बल्ले - बल्ले हो जाती होगी.
वैसे, चाचा से जिस प्रकार के मूल विचार उभरते - निकलते रहते हैं; उससे लगता नहीं की एक मिशनरी छोड़ कर और कोई पोजीशन करते होंगे.
आह! काश ऐसी ही गोल गाँड़ कम से कम छूने भर के लिए मिल जाए मुझे!!
अभी मैं चाची के सुडौल गाँड़ जैसी एक गाँड़ की अपने लंड पे उछालने की कल्पना कर ही रहा था की अचानक मेरी नज़र हमारे ग्रिल गेट के उस पार गुजरती सड़क पे गई जहां चार लड़के खड़े थे. ये चारों लड़के हमारे घर के सामने से गुज़र रहे थे की उनमें से एक लड़के की नज़र घर का मुख्य गेट जोकि ग्रिल का है उससे होते हुए भीतर आंगन में पौधों को पानी देती चाची पे पड़ी.. वह लड़का तुरंत रूक कर उनको देखने लगा. उसे यूँ अचानक से रूक कर सामने वाले घर की ओर देखता देख कर बाकी भी उसके पास आ कर हमारे घर की ओर देखने लगे और देखते ही सब के सब मानो वहीं जड़ हो गए --- मुँह खुला का खुला रह गया --- आँखें और चौड़ी हो गईं!
मैं अपने कमरे की खिड़की से लड़कों की हालत देख कर पहले तो हँसा और फिर तुरंत ही सजग हो कर ये सोच कर उत्सुकता बढ़ी की इन सालों ने ऐसा क्या देख लिया की इनकी ये जड़वत -स्थिति हो गई..? मैं लड़कों की स्थिति से ज़्यादा उन लड़कों को लेकर फ़िक्रमंद हो गया क्योंकि उन चार लड़कों में से दो उन्हीं लौंडों के मुखड़े थे जिनमें से एक को कुछ दिन पहले अपने मुक्के का स्वाद चखाया था... कदाचित ये महज संयोग ही होगा की आज ही इन दोनों को यहाँ होना था.
खैर, मैं तुरंत कमरे से निकल कर पीछे वाले दरवाज़े से घर के बाहर आ कर एक बड़ा -सा चक्कर लगा कर उन्हीं लड़कों के पीछे आ कर खड़ा हो गया और उन लड़कों के देखने वाली दिशा में नज़र गड़ाया --- और फिर मैंने भी जो देखा वो देख कर जान ही हलक को आ गई! दिल भी शायद कंफ्यूज हो गया की उसे ज़ोर - ज़ोर से धड़कना है या धकड़ना ही बंद कर देना है?!
मैंने वो देखा जिसे देखने की चाह हमारे उम्र के हर लौंडे को रहती है... और वो भी अगर खास कर के किसी विवाहित या मैच्योर आयु की महिला के हो तो बात ही क्या..?!
थोड़ी दूरी बना कर उन लड़कों के पीछे से मैंने देखा की चाची का पल्लू अपनी जगह से हट गया है... इतना हट गया है की लगभग मान सकते हैं की सीने पर से गिर गया है और घोर आश्चर्य की बात तो यह है की उनको देख कर लग रहा है कि उनको इस बारे में बिल्कुल भी ध्यान नहीं है. वह अपने में मगन रहते हुए कभी पौधों को पानी दे रही है तो कभी किसी पौधे को हाथ से छू - छू कर देखने लगती है. वह जितना टाइम उस पोजीशन में रहती, उनके V -कट ब्लाउज से दूध की दोनों थैलियाँ बाहर छलकी हुई रहतीं और फलस्वरूप एक बहुत ही सुंदर, आकर्षक, गहरी, लम्बी -सी क्लीवेज का निर्माण भी हो रहा था.
ऐसे दृश्य तो हर आयु के मर्दजात में अत्यंत लोकप्रिय होते हैं!
"शशशssss.... क्या माल है यार!"
"हाँ, भाई... ऊपर से लेकर नीचे, आगे - पीछे... एकदम भरी हुई है."
"काश, एक बार छूने को मिल जाती...!"
"हाँ यार.... देख के ही खड़ा हो गया है... छूने को मिलता तो पता नहीं क्या होता?"
"होता क्या, इतना भरा हुआ जिस्म सामने से अधनंगा देखते ही हमारा पूरा माल निकल जाता.."
"अरे माल क्या निकलता.. माल का पूरा ज्वालामुखी ही फट पड़ता यार!"
"ज़्यादा कुछ समझ तो नहीं आ रहा है इतनी दूर से लेकिन इतना कह सकता हूँ की इसके होंठ पतले हैं..."
"तो...?!"
"तो ये की ज़रा सोच के देख, जब हमारा अपना मुँह में लेगी तब क्या ही जबरदस्त फील आएगी!"
"हा हा हा हा हा..." इस बात पे सब हँसने लगे.
तभी चौथे ने कहा,
"अबे तुम लोग मुँह में लेने - देने की क्या बात कर रहे हो... उन दूध की टंकियों को देखो ज़रा.. इनके बीच में अपना लंड देने भर से ही ज्वालामुखी निकलवा देगी साली."
"अबे हाँ यार, एकदम पॉइंट वाला बात बोला तू." बाकी तीनों ने हाँ में हाँ मिलाया.
"और इसका चेहरा देख... क्या मस्त गोल है न."
"हाँ भाई.. गाल ही क्या मस्त फूले हुए से हैं... इन गालों को तो चाट - चाट कर दाँतों से हल्का काटने में मज़ा ही आ जाएगा!"
"और गले के आसपास का एरिया देख... कंधों को देख... इतनी भरी हुई है की ब्लाउज तो मानो कंधे के माँस में धँसी जा रही है."
"हम्म, भरी तो है.. लेकिन भारी नहीं है."
"एकदम सौ टका बात कही है भाई तूने।"
तभी तीसरा बोला,
"तुम लोगों ने एक और ख़ास बात नोट नहीं किया."
"क्या??"
"गौर से इसकी चूचियों को देखो…."
"अबे यार, तब से तो वही देख रहे हैं."
"हाँ बे, वही तो देख रहे हैं."
"पर तुम लोग वो नहीं देख रहे जो मैं देख रहा हूँ."
"ऐसा क्या देख रहा है बे...?!"
"चूचियों की गहराई देख रहे हो..?"
"हाँ..?"
"और उसका मंगलसूत्र..?"
"हम्म…. तो..?"
"सोच यार... जब ये घोड़ी बनती होगी तब क्या ही सीन बनता होगा..!"
"तू बता..."
"क्या बताऊँ.. बस, ये सोच की तू इसकी चब्बी गाँड़ को पीछे से थपकी दे रहा है.. ज़ोर - ज़ोर से और ये 'आह' 'आह' कर रही है... इसके ये फूली हुई, बड़ी चूचियाँ लटक रही हैं और चूचियों के साथ ही साथ इसकी पवित्रता की निशानी, इसके सती - सावित्री होने का गवाह ये मँगलसूत्र भी लटक रहा है और हर धक्के पे आगे - पीछे डोल रहा है..."
इतना सुनते ही बाकी तीनों लड़के एक साथ आहें भर उठे...
"आहहहsss…अबे हाँ यार....."
दो ने तो वहीं अपना - अपना लंड पैंट के ऊपर से पकड़ कर मसल दिया. तीसरा अपने सीने पे हाथ रख कर सहलाने लगा और चौथा अपने दोनों हाथ पैंट के पॉकेट में डाल कर ऐसे किया जिससे समझ में आ गया की अंदर से लंड पकड़ रखा है.
तभी न जाने ऐसा क्या हुआ की चाची को पीछे मुड़ना पड़ा.. और उनके ऐसा करते ही साड़ी में ढकी उनकी मस्त गोल गाँड़ हमारे सामने आ गयी! और तो और वो कुछ यूँ झुकी की उनका कमर तक का हिस्सा नीचे और गाँड़ ऊपर की ओर पूरा उठा गया!!
ये नज़ारा देख कर उन लड़कों की क्या बात करूँ; खुद मेरी हालत दिल के एक्स्ट्रा तेज़ गति से धड़कना चालू कर देने के कारण मरने जैसी हो गई.
बाकी उन चारों लड़कों के हालत भी कुछ सही नहीं थे. उनको देखते ही मैंने तय किया की मुझे अब थोड़ा साइड हो जाना चाहिए नहीं तो पकड़े जाने का भी पूरा चाँस है.
मेरा ये निर्णय बहुत सही साबित हुआ क्योंकि जैसे मैं कुछ कदम पीछे हटा उन चारों में से किसी ने सीटी मार दी और एकाध गाड़ियों के आते - जाते शोर में भी चाची को यह सुनाई दी गयी. वह तुरंत पलट कर देखी --- गेट के उस पार चार लड़कों को अपनी तरफ़ देखता हुआ पा कर चाची पहले घर को देखी, फिर पौधों को और फिर अपने शरीर पर नज़र दौड़ाई. जैसे ही अपने सीने को पल्लू से हीन देखी; झट से सीधी हो पल्लू को सही की और एकाध पौधे पर नाम मात्र का पानी दे कर जल्दी से घर में घुस गई.
ऐसा होते ही उन लड़कों के मुँह से हताशा के डूबे स्वर एक साथ निकले… बेचारे सुनहरे दृश्य को अधिक समय तक देख जो नहीं पाए. बाकी के तीन लड़के उस चौथे वाले को गुस्से से देखा और जम कर उसे खरी - खोटी सुनाते हुए साथ में चले गए.
लड़कों का बाद में क्या हाल हुआ होगा ये कौन जाने… मुझे उस बात में कोई इंटरेस्ट नहीं था. मेरी हालत तो ऐसी खूबसूरत, सँस्कारी महिला के अंदर छुपे एक कामदेवी का साक्षात्कार होने भर से ही बहुत बुरी हो गई थी. मैं दौड़ कर अंदर गया और कमरे का दरवाज़ा लगा कर सीधे अटैच्ड बाथरूम में घुसा और अब तक बीते पूरे दृश्य को याद कर - कर के हिलाने लगा.
किसी महिला को याद कर के गिराया गया मेरा वो पहला माल मुझे ताउम्र याद रहेगा.
रात को मैंने गौर किया की अपने कमरे में चाची चाचा से किसी विषय पर बड़ी गंभीरता से कोई बात कर रही है... कोई बात बहुत अच्छे से बता रही है और चाचा भी उत्तर में 'हम्म, हम्म' कर रहे हैं.
कमरे के अंदर से आती चाची की दबी आवाज़ से मैं इतना तो समझ ही गया की वह दिन में बीती घटना की शिकायत चाचा से कर रही है... और इस बारे में चाचा सिवाय सुनने के अलावा कर भी क्या सकते हैं..? वो शायद खुद मन ही मन कह रहे होंगे की साली तू है ही ऐसी कमाल की बम की तुझे 3-4 लड़के क्या, मोहल्ला क्या... पूरा बाजार देखता होगा!
वैसे बहुत पहले अपने किसी दोस्त या शायद अपने ही उम्र के किसी लड़के से सुन रखा था की आजकल कई पति ऐसे भी होते हैं जो अपनी बीवी की खूबसूरती दूसरे के सामने दिखा कर या दूसरों को अपनी बीवी को घूरते देख कर बहुत हॉर्नी हो जाते हैं.... और सब से ज़्यादा मज़ा तो तब आता है जब इनकी बीवी ही अपने पतियों को ऐसे किसी इंसान या घटना के बारे में बताती हैं.
इस बात का ख्याल आते ही मैं ये सोचने को मजबूर हो गया की क्या मेरे चाचा भी ऐसे ही एक 'मर्द' हो सकते हैं...?
जारी है....


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