एपिसोड 7: संजय का शिकार
Flashback continue
संजय घोड़े की चुसाई के आनंद में बिस्तर पर लेटा-लेटा ही सो गया। ध्रुव अपने बिस्तर पर बैठा हुआ उसे ही देखे जा रहा था। उसे लगा साक्षात् कामदेव गहरी नींद में हों।
संजय को देखते-देखते ध्रुव भी सो गया।
अगले दिन कॉलेज का पहला दिन था। क्लासेज कुछ ख़ास नहीं हुईं। कॉलेज में सभी, कल हॉस्टल में हुई घटना की चर्चा कर रहे थे।
कहीं दूर नीरज अपनी योजना असफल होता देख बहुत हताश था, पर राजीव की वजह से कुछ कर भी नहीं पाया। परंतु ऐसा नहीं था कि वह कुछ करेगा भी नहीं। उसके पास ग्रुप डिवीज़न वाली लिस्ट थी, उस लिस्ट से उसने अपनी गुप्त योजना बनानी शुरू कर दी थी। उस लिस्ट में संजय का भी नाम था।
संजय अभी-अभी रूम में आया ही था। ध्रुव रूम पर नहीं था। संजय ने राहत की साँस ली, क्योंकि कल रात के बाद वह ध्रुव से नज़र नहीं मिला पा रहा था। क्लास में जब-जब वह ध्रुव को देखता, तो संजय को ध्रुव के मुँह में अपना घोड़ा नज़र आता। ऐसी ही हालत ध्रुव की भी थी। उसे सिर्फ़ संजय का घोड़ा ही नज़र आता।
संजय पर अजीब ख़ुमार हावी था। वह ध्रुव से मिलना भी चाहता था, उससे दूर भी रहना चाहता था।
ध्रुव आया। ध्रुव नॉर्मल दिख ज़रूर रहा था, पर था नहीं।
संजय बोला, "ध्रुव, कैसे हो?"
"ठीक हूँ, और तुम?"
"मैं भी," संजय ने आगे कहा, "खाने का टाइम हो गया है, मेस में चलें?"
"हाँ, चलो।"
दोनों मेस गए और खाना भी साथ में खाया। उस वक़्त मेस में सिर्फ़ वे ही दोनों थे, वहाँ और कोई नहीं था।
वापस लौटते समय संजय ध्रुव से बोला, "ध्रुव, तुमने बताया नहीं, मैं स्ट्रेट हूँ या गे? तुमने कहा था कि मैं बता सकता हूँ, मैं क्या हूँ।"
"पता तो चल गया है, परंतु मैं अभी सही से नहीं कह सकता, मैं ग़लत भी हो सकता हूँ। पूरी तरह से जानने के लिए मुझे तुमसे और बातें करनी पड़ेंगी। तुम्हारी फ़ीलिंग जाननी पड़ेगी।"
"तो ठीक है, पूछो क्या और पूछना है।"
"कुछ ख़ास नहीं, तुमसे नॉर्मल ही बातें करनी हैं। कुछ बातें तुम्हारे बारे में, कुछ तुम्हारी फ़ैमिली के बारे में, कुछ दोस्तों की, कुछ तुम्हारी कॉलेज लाइफ़ की। अगर मैं कहूँ कि तुम्हारे बारे में सब कुछ—चाहे वो बात ख़ास हो, चाहे कोई आम बात ही क्यूँ न हो।"
"समझा नहीं।"
"बस इतना ही—जितनी हम बातें करेंगे, उतना ही क्लीयर होगा।"
"तो चलो बातें करते हैं," संजय ने बड़ी मासूमियत से कहा।
रूम पर आने के बाद दोनों एक ही बिस्तर पर हो लिए और ढेरों बातें करने लगे। दोनों सुबह 3 बजे तक बातें करते रहे। और बातें करते-करते साथ में ही सो गए।
ध्रुव जो पहले ठीक सो रहा था, अब उसने करवट बदली और अपना सर संजय की छाती पर रखकर सो गया। उधर थोड़ी देर बाद संजय ने भी करवट बदली और अबकी बार उसने ध्रुव को बाहों में भर लिया। दोनों एक-दूसरे को बाहों में लिए चिपक कर सो गए।
सुबह 10 बजे दोनों एक साथ जगे। दोनों ने एक-दूसरे को अपनी बाहों में देखा और उसी वक़्त ध्रुव ने संजय के गालों पर किस करके गुड मॉर्निंग कहा।
संजय को ध्रुव में अजीब-सा खिंचाव महसूस होने लगा था। उसे ध्रुव का साथ अब अच्छा लगने लगा था। ध्रुव के गुलाबी होठ, उसके गोरे गाल, उसकी मस्त गोल-गोल गुफा उसे भाने लगी थी।
संजय ख़ुद समझने लगा था कि उसे अब लड़कों में भी दिलचस्पी होने लगी है। उसका मस्त घोड़ा अब ध्रुव के नाम पर खड़ा होने लगा था।
दूसरी तरफ़ नीरज भी संजय पर डोरे डालने लगा था। नीरज चाहता था कितनी जल्दी वह संजय का घोड़ा अपनी गहराई में ले ले।
एक शाम की बात है। हॉस्टल में किसी की जन्मदिन की पार्टी थी। उस शाम को नीरज ने संजय को भी उस पार्टी में आने को कहा।
उस पार्टी में सिर्फ़ दारू और नॉन-वेज था। संजय नॉन-वेज तो क्या दारू भी नहीं पीता था तब तक। नीरज ने कहा, "नॉन-वेज मत खाओ, पर पार्टी का सम्मान करते हुए छोटा-सा पैग तो पी ही सकता है।"
इस पर उसने नही कहा।
पर नीरज नहीं माना, और एक छोटा-सा पैग बनाकर चुपके से एक पाउडर की पुड़िया मिलाकर संजय को पिला दिया।
दारू से संजय को नशा चढ़ गया। संजय को अपने पर काबू ख़त्म होने लगा।
तभी संजय को ख़तरा महसूस होने लगा और वह अपने रूम में जाने लगा।
नीरज ने पूछा, "कहाँ जा रहे हो?"
संजय ने कहा, "मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा है, इसीलिए रूम में जा रहा हूँ।"
"चलो, मैं छोड़ देता हूँ, तुम कहीं गिर न जाओ।"
उसने संजय को बाहों से पकड़ा और नीरज उसको लेकर चल पड़ा।
थोड़ी देर बाद संजय नीरज के रूम में था।
संजय ने रूम देखकर कहा, "नीरज, यह मेरा रूम नहीं है।"
"नहीं, तुम नशे में हो इसलिए तुम्हें ऐसा लग रहा है। यह तुम्हारा ही रूम है। मैं थोड़ी देर तुम्हारे साथ ही हूँ, ताकि तुम्हें कोई दिक़्क़त न हो।"
फिर अचानक से संजय बोला, "नीरज, मुझे गर्मी लग रही है। ऐसा लग रहा है मेरे बदन में आग लगी हुई है।"
नीरज समझ गया कि अब वक़्त आ गया है। उस पुड़िया का असर शुरू हो चुका था। संजय का घोड़ा फूलकर मोटा सरिया बन गया।
नीरज ने कहा, "संजय, ऐसा पहली बार दारू पीने पर होता है। जल्दी से अपनी शर्ट उतार दो।"
संजय ने शर्ट उतार दी।
"नीरज, अभी भी राहत नहीं हुई।"
"तो, लोअर भी उतार दो।"
संजय ने बिना कुछ सोचे लोअर भी उतार दिया। अब संजय सिर्फ़ ब्लैक ब्रीफ़ में था, जिसमें संजय का घोड़ा मुश्किल से समा पा रहा था। संजय के घोड़े का मुंड हल्का-सा अंडरवियर के बाहर था।
"नीरज, यह अंडरवियर भी मुझे आग में जलती हुई महसूस हो रही है। मुझे समझ नहीं आ रहा मेरे साथ क्या हो रहा है।"
नीरज ने ख़ुद अपने हाथ से संजय की अंडरवियर उतार दी।
अब संजय कामदेव के रूप में नीरज के सामने खड़ा था। संजय का 8 इंची घोड़ा हिचकोले खाता नीरज की आँखों के सामने था।
नीरज की आँखें चमक गईं। हालाँकि राजीव और संजय के घोड़े एक जैसे थे, पर संजय का घोड़ा राजीव से कहीं ज़्यादा सुंदर और रसीला लग रहा था। ऊपर से संजय के घोड़े ने आज तक चुदाई का स्वाद चखा भी नहीं था।
पर शायद संजय को चुदाई का अनुभव मिलने वाला था, और उसका पहला शिकार नीरज होने वाला था।
क्या नीरज संजय को चुदाई का पहला अनुभव करवा पाएगा?
क्या संजय नीरज की चुदाई कर पाएगा, या फिर उसे ध्रुव की याद आएगी?
क्या ध्रुव को इस होने वाली चुदाई कांड के बारे में पता चल पाएगा?
जानना दिलचस्प रहेगा।
टू बी कंटिन्यूड...
कहानी अब चरम सीमा पर है।
Flashback continue
संजय घोड़े की चुसाई के आनंद में बिस्तर पर लेटा-लेटा ही सो गया। ध्रुव अपने बिस्तर पर बैठा हुआ उसे ही देखे जा रहा था। उसे लगा साक्षात् कामदेव गहरी नींद में हों।
संजय को देखते-देखते ध्रुव भी सो गया।
अगले दिन कॉलेज का पहला दिन था। क्लासेज कुछ ख़ास नहीं हुईं। कॉलेज में सभी, कल हॉस्टल में हुई घटना की चर्चा कर रहे थे।
कहीं दूर नीरज अपनी योजना असफल होता देख बहुत हताश था, पर राजीव की वजह से कुछ कर भी नहीं पाया। परंतु ऐसा नहीं था कि वह कुछ करेगा भी नहीं। उसके पास ग्रुप डिवीज़न वाली लिस्ट थी, उस लिस्ट से उसने अपनी गुप्त योजना बनानी शुरू कर दी थी। उस लिस्ट में संजय का भी नाम था।
संजय अभी-अभी रूम में आया ही था। ध्रुव रूम पर नहीं था। संजय ने राहत की साँस ली, क्योंकि कल रात के बाद वह ध्रुव से नज़र नहीं मिला पा रहा था। क्लास में जब-जब वह ध्रुव को देखता, तो संजय को ध्रुव के मुँह में अपना घोड़ा नज़र आता। ऐसी ही हालत ध्रुव की भी थी। उसे सिर्फ़ संजय का घोड़ा ही नज़र आता।
संजय पर अजीब ख़ुमार हावी था। वह ध्रुव से मिलना भी चाहता था, उससे दूर भी रहना चाहता था।
ध्रुव आया। ध्रुव नॉर्मल दिख ज़रूर रहा था, पर था नहीं।
संजय बोला, "ध्रुव, कैसे हो?"
"ठीक हूँ, और तुम?"
"मैं भी," संजय ने आगे कहा, "खाने का टाइम हो गया है, मेस में चलें?"
"हाँ, चलो।"
दोनों मेस गए और खाना भी साथ में खाया। उस वक़्त मेस में सिर्फ़ वे ही दोनों थे, वहाँ और कोई नहीं था।
वापस लौटते समय संजय ध्रुव से बोला, "ध्रुव, तुमने बताया नहीं, मैं स्ट्रेट हूँ या गे? तुमने कहा था कि मैं बता सकता हूँ, मैं क्या हूँ।"
"पता तो चल गया है, परंतु मैं अभी सही से नहीं कह सकता, मैं ग़लत भी हो सकता हूँ। पूरी तरह से जानने के लिए मुझे तुमसे और बातें करनी पड़ेंगी। तुम्हारी फ़ीलिंग जाननी पड़ेगी।"
"तो ठीक है, पूछो क्या और पूछना है।"
"कुछ ख़ास नहीं, तुमसे नॉर्मल ही बातें करनी हैं। कुछ बातें तुम्हारे बारे में, कुछ तुम्हारी फ़ैमिली के बारे में, कुछ दोस्तों की, कुछ तुम्हारी कॉलेज लाइफ़ की। अगर मैं कहूँ कि तुम्हारे बारे में सब कुछ—चाहे वो बात ख़ास हो, चाहे कोई आम बात ही क्यूँ न हो।"
"समझा नहीं।"
"बस इतना ही—जितनी हम बातें करेंगे, उतना ही क्लीयर होगा।"
"तो चलो बातें करते हैं," संजय ने बड़ी मासूमियत से कहा।
रूम पर आने के बाद दोनों एक ही बिस्तर पर हो लिए और ढेरों बातें करने लगे। दोनों सुबह 3 बजे तक बातें करते रहे। और बातें करते-करते साथ में ही सो गए।
ध्रुव जो पहले ठीक सो रहा था, अब उसने करवट बदली और अपना सर संजय की छाती पर रखकर सो गया। उधर थोड़ी देर बाद संजय ने भी करवट बदली और अबकी बार उसने ध्रुव को बाहों में भर लिया। दोनों एक-दूसरे को बाहों में लिए चिपक कर सो गए।
सुबह 10 बजे दोनों एक साथ जगे। दोनों ने एक-दूसरे को अपनी बाहों में देखा और उसी वक़्त ध्रुव ने संजय के गालों पर किस करके गुड मॉर्निंग कहा।
संजय को ध्रुव में अजीब-सा खिंचाव महसूस होने लगा था। उसे ध्रुव का साथ अब अच्छा लगने लगा था। ध्रुव के गुलाबी होठ, उसके गोरे गाल, उसकी मस्त गोल-गोल गुफा उसे भाने लगी थी।
संजय ख़ुद समझने लगा था कि उसे अब लड़कों में भी दिलचस्पी होने लगी है। उसका मस्त घोड़ा अब ध्रुव के नाम पर खड़ा होने लगा था।
दूसरी तरफ़ नीरज भी संजय पर डोरे डालने लगा था। नीरज चाहता था कितनी जल्दी वह संजय का घोड़ा अपनी गहराई में ले ले।
एक शाम की बात है। हॉस्टल में किसी की जन्मदिन की पार्टी थी। उस शाम को नीरज ने संजय को भी उस पार्टी में आने को कहा।
उस पार्टी में सिर्फ़ दारू और नॉन-वेज था। संजय नॉन-वेज तो क्या दारू भी नहीं पीता था तब तक। नीरज ने कहा, "नॉन-वेज मत खाओ, पर पार्टी का सम्मान करते हुए छोटा-सा पैग तो पी ही सकता है।"
इस पर उसने नही कहा।
पर नीरज नहीं माना, और एक छोटा-सा पैग बनाकर चुपके से एक पाउडर की पुड़िया मिलाकर संजय को पिला दिया।
दारू से संजय को नशा चढ़ गया। संजय को अपने पर काबू ख़त्म होने लगा।
तभी संजय को ख़तरा महसूस होने लगा और वह अपने रूम में जाने लगा।
नीरज ने पूछा, "कहाँ जा रहे हो?"
संजय ने कहा, "मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा है, इसीलिए रूम में जा रहा हूँ।"
"चलो, मैं छोड़ देता हूँ, तुम कहीं गिर न जाओ।"
उसने संजय को बाहों से पकड़ा और नीरज उसको लेकर चल पड़ा।
थोड़ी देर बाद संजय नीरज के रूम में था।
संजय ने रूम देखकर कहा, "नीरज, यह मेरा रूम नहीं है।"
"नहीं, तुम नशे में हो इसलिए तुम्हें ऐसा लग रहा है। यह तुम्हारा ही रूम है। मैं थोड़ी देर तुम्हारे साथ ही हूँ, ताकि तुम्हें कोई दिक़्क़त न हो।"
फिर अचानक से संजय बोला, "नीरज, मुझे गर्मी लग रही है। ऐसा लग रहा है मेरे बदन में आग लगी हुई है।"
नीरज समझ गया कि अब वक़्त आ गया है। उस पुड़िया का असर शुरू हो चुका था। संजय का घोड़ा फूलकर मोटा सरिया बन गया।
नीरज ने कहा, "संजय, ऐसा पहली बार दारू पीने पर होता है। जल्दी से अपनी शर्ट उतार दो।"
संजय ने शर्ट उतार दी।
"नीरज, अभी भी राहत नहीं हुई।"
"तो, लोअर भी उतार दो।"
संजय ने बिना कुछ सोचे लोअर भी उतार दिया। अब संजय सिर्फ़ ब्लैक ब्रीफ़ में था, जिसमें संजय का घोड़ा मुश्किल से समा पा रहा था। संजय के घोड़े का मुंड हल्का-सा अंडरवियर के बाहर था।
"नीरज, यह अंडरवियर भी मुझे आग में जलती हुई महसूस हो रही है। मुझे समझ नहीं आ रहा मेरे साथ क्या हो रहा है।"
नीरज ने ख़ुद अपने हाथ से संजय की अंडरवियर उतार दी।
अब संजय कामदेव के रूप में नीरज के सामने खड़ा था। संजय का 8 इंची घोड़ा हिचकोले खाता नीरज की आँखों के सामने था।
नीरज की आँखें चमक गईं। हालाँकि राजीव और संजय के घोड़े एक जैसे थे, पर संजय का घोड़ा राजीव से कहीं ज़्यादा सुंदर और रसीला लग रहा था। ऊपर से संजय के घोड़े ने आज तक चुदाई का स्वाद चखा भी नहीं था।
पर शायद संजय को चुदाई का अनुभव मिलने वाला था, और उसका पहला शिकार नीरज होने वाला था।
क्या नीरज संजय को चुदाई का पहला अनुभव करवा पाएगा?
क्या संजय नीरज की चुदाई कर पाएगा, या फिर उसे ध्रुव की याद आएगी?
क्या ध्रुव को इस होने वाली चुदाई कांड के बारे में पता चल पाएगा?
जानना दिलचस्प रहेगा।
टू बी कंटिन्यूड...
कहानी अब चरम सीमा पर है।
✍️निहाल सिंह


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)