06-02-2026, 05:44 PM
Episode 6: पहला अनुभव
फ्लैशबैक:
सभी लड़के संजय को अपने कंधों पर उठाए हुए रूम नंबर 302 में आए। सभी के सभी नंगे थे।
संजय को नीचे उतारा गया। संजय वहाँ रखी कुर्सी पर बैठा।
"भाइयों, क्या मैं कपड़े पहन लूँ?" संजय ने पूछा।
"नहीं! जब हम सब नंगे हैं तो तुम कैसे पहन सकते हो?" भरत मल्होत्रा ने कहा। "प्रजा नंगी तो राजा भी नंगा ही होना चाहिए।"
"अरे नहीं, मुझे राजा न बनाओ। मुझे अपना दोस्त ही समझो।"
"आज से तुम हम सबके लीडर हो, राजा हो," निशांत चौबे ने कहा। "तुम्हें किसी चीज़ की कमी, कोई प्रॉब्लम नहीं होने देंगे। तुम्हारी समस्या सबकी समस्या होगी, जब तक हम ये इंजीनियरिंग पूरी न कर लें। पढ़ाई पूरी होने के बाद भी यह सम्मान कम न होगा।"
"बोलो सभी दोस्तो," अमर ने ऊँची आवाज़ में कहा।
सबने एक साथ कहा, "संजय हमारा राजा!"
"ठीक है, ठीक है," संजय ने हामी भरते हुए कहा। "जैसा कि इस वक़्त हम सब बिना कपड़ों के हैं, हममें कोई भेदभाव नहीं है। ऐसे ही हम सब हमेशा रहेंगे।"
"वैसे संजय भाई, तुम्हारे औजार का नाप कितना है?" प्रकाश चौहान ने पूछा, जिस पर सभी हँस पड़े।
तभी अनिल पाठक ने कहा, "हाँ, अपने घोड़े का साइज़ बताओ।"
"इसमें बताना क्या," संजय ने कहा। "देख तो रहे ही हो सब।"
"देख तो रहे हैं, पर हम सबका नॉर्मल साइज़ का है। तुम्हारा तो सोता हुआ घोड़ा भी हम से बड़ा है," निशांत ने कहा।
"सच कहूँ तो मैंने आज तक नापकर नहीं देखा," संजय ने कहा।
"आज हम सबके सामने नापकर देख लो," अनिल ने कहा।
"ठीक है," संजय ने कहा।
एक स्केल लाया गया। संजय खड़ा हुआ। स्केल को घोड़े के बेस पर रखा गया, टिप तक लाया गया। संजय का नाप आया 6 इंच।
"संजय भाई, अब खड़ा घोड़ा भी नपवा दो।"
"खड़ा?" संजय ने हड़बड़ाकर कहा। "तुम सबके सामने खड़ा कैसे करूँ? अभी वैसी भावना नहीं आई। मुश्किल है अभी।"
"कोई मुश्किल नहीं है," पीछे से आवाज़ आई। वह आवाज़ थी ध्रुव मेहरा की—संजय का रूममेट।
पर अभी तक संजय को पता नहीं था कि वह उसका रूममेट है।
"मेरे पास एक ऐसी युक्ति है जिससे यह समस्या ख़त्म हो सकती है," ध्रुव ने आगे आते हुए कहा।
"क्या युक्ति है?" निशांत ने पूछा।
"देखते जाओ," ध्रुव ने कहते ही संजय के सामने बैठ गया और संजय के घोड़े को अपने मुँह में भर लिया।
सभी लड़के हैरान होकर एक-दूसरे को देखने लगे।
संजय का घोड़ा ध्रुव के मुँह की गर्मी पाकर फूलने लगा। थोड़ी देर में घोड़ा अपने पूरे शबाब पर आ गया।
"लो, हो गया तैयार, नाप लो इसे," ध्रुव ने घोड़ा मुँह से बाहर निकालकर कहा।
हालाँकि ध्रुव का मन और चूसने का था, पर मौके की नज़ाकत को देखते हुए रुक गया था।
इधर संजय को अपने जीवन में घोड़ा चुसाई का पहला अनुभव हुआ। वह अब तक इस सुख से वंचित था। वह तो यह सोचता था कि इस तरह की बातें तो आदमी और औरत के बीच होती हैं। पर शायद संजय को अभी बहुत कुछ पता चलना बाक़ी था।
ध्रुव के मुँह से निकलते ही घोड़ा उत्तेजना के कारण हिचकोले खाने लगा। संजय के शरीर में आग लगी हुई थी, जिस पर काबू करने की भरपूर कोशिश करने लगा।
तभी अनिल संजय का घोड़ा पकड़कर उसे नापने लगा।
स्केल 8 इंच और 8.5 के बीच की लम्बाई दिखा रहा था।
अनिल बोल पड़ा, "तुम तो लम्बाई के भी उस्ताद निकले! शायद ही इस लम्बाई का इस हॉस्टल में कोई और होगा। काश इसकी मोटाई भी नाप पाता।"
तभी एक लड़का पीछे से बोला, "इसकी मोटाई 5 इंच से कम नहीं है।"
"तुम्हें कैसे पता लगा?" अनिल ने पूछा।
"हमारा बाँस की लकड़ियों का बिज़नेस है। आँखों से ही देखकर हम मोटाई नाप लेते हैं," वह लड़का, जिसका नाम साहिल चौधरी था, बोला। "साला, एक हमारा घोड़ा है जो 5 या 6 इंच का नॉर्मल लम्बाई का है, और मोटाई लम्बाई से आधी। और यह संजय है, जिसका सोता हुआ घोड़ा ही 6 इंच का है। वाह संजय, तुम तो राजा हो, राजा! सचमुच के राजा हो। दिल के भी और घोड़े के भी राजा हो। जिससे भी तुम्हारी शादी होगी, वह बड़ी ख़ुशनसीब होगी। ऐसा घोड़ा पाकर वो धन्य हो जाएगी।"
किसे पता था कि इस हॉस्टल लाइफ़ में संजय को अपनी असली सेक्सुअलिटी का पता चलेगा और उसका जीवन हमेशा के लिए बदल जाएगा।
रात ज़्यादा होने लगी थी। सभी लड़के धीरे-धीरे संजय से हाथ मिलाकर अपने-अपने रूम में जाने लगे।
सब चले गए सिवाय ध्रुव के, क्योंकि रूम नंबर 302 उसका भी था।
संजय ने उसे देखा, जैसे कह रहा हो, 'तुम्हें नहीं जाना?'
ध्रुव समझ गया और बोला, "संजय, मैं ही तुम्हारा रूममेट हूँ।"
संजय चौंका। "रूममेट?"
"हाँ, मुझे हॉस्टल के हॉल में ही पता चला कि तुम मेरे ही रूममेट हो। तुमने अपना परिचय देते हुए सबको अपना रूम नंबर भी बताया था।"
"अच्छा? पर तुमने मेरा घोड़ा क्यों चूसा?"
"इसीलिए कि तुम मेरे ही रूममेट हो, इसीलिए।"
"मुझे समझ नहीं आया। क्या कहना चाहते हो?"
"संजय, मैं गे (Gay) हूँ। तुम्हें बाद में पता चले, उससे अच्छा हो कि अभी से पता हो। इसीलिए अपनी सेक्सुअलिटी ज़ाहिर करने के इरादे से तुम्हारा घोड़ा चूसा, ताकि तुम समझ जाओ। अब तुम्हें यह फ़ैसला करना है कि तुम इस रूम में मेरे साथ रहना चाहते हो या नहीं।"
"गे (Gay) क्या होता है?"
"तुम्हें नहीं पता?"
"नहीं।"
"देखो, मज़ाक मत करो संजय, गे क्या होता है, तुम्हें बिल्कुल भी नहीं पता? अच्छा ठीक है, मैं बताता हूँ। देखो, जिस लड़के को लड़की पसंद हो, उनको स्ट्रेट (Straight) बोला जाता है। इसी तरह जिस लड़के को लड़के पसंद होते हैं, उनको गे (Gay) बोलते हैं। एक तीसरे तरह के लड़के होते हैं, जिनको लड़के और लड़कियों दोनों में इंटरेस्ट होता है, उनको बाय (Bi) बोलते हैं। तुम किस कैटेगरी में हो, संजय?"
संजय सोच में पड़ गया। वह गे है या बाय।
"ध्रुव, मुझे समझ नहीं आ रहा। मैं क्या हूँ। मैं स्ट्रेट हूँ क्योंकि मुझे लड़कियाँ अच्छी लगती हैं। पर गे या बाय का नहीं पता।"
"अच्छा यह बताओ कि जब मैंने तुम्हारा घोड़ा चूसा था, तो तुम्हें कैसा लगा था?"
अचानक से यह सवाल सुनकर संजय झेंप गया।
"बोलो न, कैसा लगा? शायद मैं बता पाऊँ तुम क्या हो।"
"अच्छा लगा था।"
"सिर्फ़ अच्छा लगा था?"
"हाँ।"
तभी ध्रुव झुका और उसने फिर से संजय का घोड़ा मुँह में भर लिया।
संजय बोला, "अरे, यह क्या कर रहे हो ध्रुव!"
ध्रुव रुका नहीं, न ही घोड़ा छोड़ा।
घोड़ा मुँह में फूलने लगा, और संजय आनंद के गोते खाने लगा। इस बार की चुसाई में संजय को और भी मज़ा आ रहा था।
10 मिनट चुसवाने के बाद संजय का घोड़ा उबाल मारने लगा। उसे लगा वो पिघल जाएगा।
अचानक से उसका लावा ध्रुव के मुँह में भर गया, जिसे ध्रुव ने अंदर निगल लिया।
ध्रुव संजय का घोड़ा चूसकर बहुत ख़ुश था, और संजय तो अभी भी आसमान में उड़ रहा था। संजय बिस्तर पर लेट गया। उसका मर्दाना घोड़ा अभी भी फ़ौलाद बनकर खड़ा हुआ था, जो धीरे-धीरे नीचे बैठ रहा था।
ऐसी फीलिंग संजय ने जीवन में पहली बार ली थी।
ध्रुव समझ चुका था। संजय या तो बाय है या सिर्फ़ गे।
संजय स्ट्रेट तो वह बिल्कुल भी नहीं था।
To be connected ....
फ्लैशबैक:
सभी लड़के संजय को अपने कंधों पर उठाए हुए रूम नंबर 302 में आए। सभी के सभी नंगे थे।
संजय को नीचे उतारा गया। संजय वहाँ रखी कुर्सी पर बैठा।
"भाइयों, क्या मैं कपड़े पहन लूँ?" संजय ने पूछा।
"नहीं! जब हम सब नंगे हैं तो तुम कैसे पहन सकते हो?" भरत मल्होत्रा ने कहा। "प्रजा नंगी तो राजा भी नंगा ही होना चाहिए।"
"अरे नहीं, मुझे राजा न बनाओ। मुझे अपना दोस्त ही समझो।"
"आज से तुम हम सबके लीडर हो, राजा हो," निशांत चौबे ने कहा। "तुम्हें किसी चीज़ की कमी, कोई प्रॉब्लम नहीं होने देंगे। तुम्हारी समस्या सबकी समस्या होगी, जब तक हम ये इंजीनियरिंग पूरी न कर लें। पढ़ाई पूरी होने के बाद भी यह सम्मान कम न होगा।"
"बोलो सभी दोस्तो," अमर ने ऊँची आवाज़ में कहा।
सबने एक साथ कहा, "संजय हमारा राजा!"
"ठीक है, ठीक है," संजय ने हामी भरते हुए कहा। "जैसा कि इस वक़्त हम सब बिना कपड़ों के हैं, हममें कोई भेदभाव नहीं है। ऐसे ही हम सब हमेशा रहेंगे।"
"वैसे संजय भाई, तुम्हारे औजार का नाप कितना है?" प्रकाश चौहान ने पूछा, जिस पर सभी हँस पड़े।
तभी अनिल पाठक ने कहा, "हाँ, अपने घोड़े का साइज़ बताओ।"
"इसमें बताना क्या," संजय ने कहा। "देख तो रहे ही हो सब।"
"देख तो रहे हैं, पर हम सबका नॉर्मल साइज़ का है। तुम्हारा तो सोता हुआ घोड़ा भी हम से बड़ा है," निशांत ने कहा।
"सच कहूँ तो मैंने आज तक नापकर नहीं देखा," संजय ने कहा।
"आज हम सबके सामने नापकर देख लो," अनिल ने कहा।
"ठीक है," संजय ने कहा।
एक स्केल लाया गया। संजय खड़ा हुआ। स्केल को घोड़े के बेस पर रखा गया, टिप तक लाया गया। संजय का नाप आया 6 इंच।
"संजय भाई, अब खड़ा घोड़ा भी नपवा दो।"
"खड़ा?" संजय ने हड़बड़ाकर कहा। "तुम सबके सामने खड़ा कैसे करूँ? अभी वैसी भावना नहीं आई। मुश्किल है अभी।"
"कोई मुश्किल नहीं है," पीछे से आवाज़ आई। वह आवाज़ थी ध्रुव मेहरा की—संजय का रूममेट।
पर अभी तक संजय को पता नहीं था कि वह उसका रूममेट है।
"मेरे पास एक ऐसी युक्ति है जिससे यह समस्या ख़त्म हो सकती है," ध्रुव ने आगे आते हुए कहा।
"क्या युक्ति है?" निशांत ने पूछा।
"देखते जाओ," ध्रुव ने कहते ही संजय के सामने बैठ गया और संजय के घोड़े को अपने मुँह में भर लिया।
सभी लड़के हैरान होकर एक-दूसरे को देखने लगे।
संजय का घोड़ा ध्रुव के मुँह की गर्मी पाकर फूलने लगा। थोड़ी देर में घोड़ा अपने पूरे शबाब पर आ गया।
"लो, हो गया तैयार, नाप लो इसे," ध्रुव ने घोड़ा मुँह से बाहर निकालकर कहा।
हालाँकि ध्रुव का मन और चूसने का था, पर मौके की नज़ाकत को देखते हुए रुक गया था।
इधर संजय को अपने जीवन में घोड़ा चुसाई का पहला अनुभव हुआ। वह अब तक इस सुख से वंचित था। वह तो यह सोचता था कि इस तरह की बातें तो आदमी और औरत के बीच होती हैं। पर शायद संजय को अभी बहुत कुछ पता चलना बाक़ी था।
ध्रुव के मुँह से निकलते ही घोड़ा उत्तेजना के कारण हिचकोले खाने लगा। संजय के शरीर में आग लगी हुई थी, जिस पर काबू करने की भरपूर कोशिश करने लगा।
तभी अनिल संजय का घोड़ा पकड़कर उसे नापने लगा।
स्केल 8 इंच और 8.5 के बीच की लम्बाई दिखा रहा था।
अनिल बोल पड़ा, "तुम तो लम्बाई के भी उस्ताद निकले! शायद ही इस लम्बाई का इस हॉस्टल में कोई और होगा। काश इसकी मोटाई भी नाप पाता।"
तभी एक लड़का पीछे से बोला, "इसकी मोटाई 5 इंच से कम नहीं है।"
"तुम्हें कैसे पता लगा?" अनिल ने पूछा।
"हमारा बाँस की लकड़ियों का बिज़नेस है। आँखों से ही देखकर हम मोटाई नाप लेते हैं," वह लड़का, जिसका नाम साहिल चौधरी था, बोला। "साला, एक हमारा घोड़ा है जो 5 या 6 इंच का नॉर्मल लम्बाई का है, और मोटाई लम्बाई से आधी। और यह संजय है, जिसका सोता हुआ घोड़ा ही 6 इंच का है। वाह संजय, तुम तो राजा हो, राजा! सचमुच के राजा हो। दिल के भी और घोड़े के भी राजा हो। जिससे भी तुम्हारी शादी होगी, वह बड़ी ख़ुशनसीब होगी। ऐसा घोड़ा पाकर वो धन्य हो जाएगी।"
किसे पता था कि इस हॉस्टल लाइफ़ में संजय को अपनी असली सेक्सुअलिटी का पता चलेगा और उसका जीवन हमेशा के लिए बदल जाएगा।
रात ज़्यादा होने लगी थी। सभी लड़के धीरे-धीरे संजय से हाथ मिलाकर अपने-अपने रूम में जाने लगे।
सब चले गए सिवाय ध्रुव के, क्योंकि रूम नंबर 302 उसका भी था।
संजय ने उसे देखा, जैसे कह रहा हो, 'तुम्हें नहीं जाना?'
ध्रुव समझ गया और बोला, "संजय, मैं ही तुम्हारा रूममेट हूँ।"
संजय चौंका। "रूममेट?"
"हाँ, मुझे हॉस्टल के हॉल में ही पता चला कि तुम मेरे ही रूममेट हो। तुमने अपना परिचय देते हुए सबको अपना रूम नंबर भी बताया था।"
"अच्छा? पर तुमने मेरा घोड़ा क्यों चूसा?"
"इसीलिए कि तुम मेरे ही रूममेट हो, इसीलिए।"
"मुझे समझ नहीं आया। क्या कहना चाहते हो?"
"संजय, मैं गे (Gay) हूँ। तुम्हें बाद में पता चले, उससे अच्छा हो कि अभी से पता हो। इसीलिए अपनी सेक्सुअलिटी ज़ाहिर करने के इरादे से तुम्हारा घोड़ा चूसा, ताकि तुम समझ जाओ। अब तुम्हें यह फ़ैसला करना है कि तुम इस रूम में मेरे साथ रहना चाहते हो या नहीं।"
"गे (Gay) क्या होता है?"
"तुम्हें नहीं पता?"
"नहीं।"
"देखो, मज़ाक मत करो संजय, गे क्या होता है, तुम्हें बिल्कुल भी नहीं पता? अच्छा ठीक है, मैं बताता हूँ। देखो, जिस लड़के को लड़की पसंद हो, उनको स्ट्रेट (Straight) बोला जाता है। इसी तरह जिस लड़के को लड़के पसंद होते हैं, उनको गे (Gay) बोलते हैं। एक तीसरे तरह के लड़के होते हैं, जिनको लड़के और लड़कियों दोनों में इंटरेस्ट होता है, उनको बाय (Bi) बोलते हैं। तुम किस कैटेगरी में हो, संजय?"
संजय सोच में पड़ गया। वह गे है या बाय।
"ध्रुव, मुझे समझ नहीं आ रहा। मैं क्या हूँ। मैं स्ट्रेट हूँ क्योंकि मुझे लड़कियाँ अच्छी लगती हैं। पर गे या बाय का नहीं पता।"
"अच्छा यह बताओ कि जब मैंने तुम्हारा घोड़ा चूसा था, तो तुम्हें कैसा लगा था?"
अचानक से यह सवाल सुनकर संजय झेंप गया।
"बोलो न, कैसा लगा? शायद मैं बता पाऊँ तुम क्या हो।"
"अच्छा लगा था।"
"सिर्फ़ अच्छा लगा था?"
"हाँ।"
तभी ध्रुव झुका और उसने फिर से संजय का घोड़ा मुँह में भर लिया।
संजय बोला, "अरे, यह क्या कर रहे हो ध्रुव!"
ध्रुव रुका नहीं, न ही घोड़ा छोड़ा।
घोड़ा मुँह में फूलने लगा, और संजय आनंद के गोते खाने लगा। इस बार की चुसाई में संजय को और भी मज़ा आ रहा था।
10 मिनट चुसवाने के बाद संजय का घोड़ा उबाल मारने लगा। उसे लगा वो पिघल जाएगा।
अचानक से उसका लावा ध्रुव के मुँह में भर गया, जिसे ध्रुव ने अंदर निगल लिया।
ध्रुव संजय का घोड़ा चूसकर बहुत ख़ुश था, और संजय तो अभी भी आसमान में उड़ रहा था। संजय बिस्तर पर लेट गया। उसका मर्दाना घोड़ा अभी भी फ़ौलाद बनकर खड़ा हुआ था, जो धीरे-धीरे नीचे बैठ रहा था।
ऐसी फीलिंग संजय ने जीवन में पहली बार ली थी।
ध्रुव समझ चुका था। संजय या तो बाय है या सिर्फ़ गे।
संजय स्ट्रेट तो वह बिल्कुल भी नहीं था।
To be connected ....
✍️निहाल सिंह


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