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Misc. Erotica महीन को अपने रंग में रंग दिया
#39
पार्क की मुलाकातमूवी वाली शाम के बाद माहीन की रातें और भी बेचैन हो गई थीं।

वो पॉपकॉर्न का इंसिडेंट, वो हल्का सा टच, आर्यन का स्पर्श — सब कुछ उसके दिमाग में घूमता रहता। अगली सुबह वो उठी तो आँखें सूजी हुई थीं, दिल भारी। Faisal मुझे माफ करना... मैं ऑफिस नहीं जाऊंगी आज। वो सब सहेलियाँ, आर्यन जी... मैं क्या कर रही हूँ? फ...सल, तुम्हें धोखा दे रही हूँ। गुनाह... हराम... मैं कैसे एक गैर मर्द के इतना करीब गई? चूत गीली हो गई थी उस टच से... कैसे? मैं रंडी नहीं हूँ, मैं तुम्हारी wafadar begaumहूँ!"

Wo रोने लगी, बेड पर ही सिसकियाँ लेती रही। ऑफिस को मैसेज किया — "बीमार हूँ, आज नहीं आ सकती।" लेकिन मन में अफसोस की आग जल रही थी। "कल की फिल्म... वो सीन, वो टच... मैंने क्यों नहीं रोका? सहेलियाँ ने जानबूझकर अकेला छोड़ दिया, लेकिन मैं क्यों नहीं उठी? फ...सल, अगर तुम जानोगे तो क्या सोचोगे? मैं रो रही हूँ, दिल टूट रहा है। तौबा... मैं तौबा करती हूँ। कभी नहीं होगा ऐसा।"

, लेकिन बीच में रोना आ गया — "upper Wale मुझे सजा दे दो। मैं कमजोर हूँ, अकेलापन ने मुझे तोड़ दिया। लेकिन अब नहीं... मैं घर में रहूंगी, तुम्हारी याद में जीऊंगी।" पूरा दिन वो रोती रही, खाना नहीं खाया, बस बेड पर लेटी अफसोस करती। दिल में गिल्ट इतना गहरा कि साँसें भारी हो गईं — "कैसे कर सकती हूँ मैं? गैर मर्द का स्पर्श... और मजा आया? नहीं, गुनाह है।

फ...सल, सॉरी... मैं तुम्हारी नहीं रही अब।"ऑफिस में आर्यन को माहीन की गैरहाजिरी का पता चला। वो चिंतित हो गया — "माहीन नहीं आई? कल मूवी में सब ठीक था... शायद बीमार। लेकिन वो उदास लग रही थी।" सहेलियों से पूछा, नेहा ने कहा, "बीमार है शायद। लेकिन तुम चेक करो ना।" आर्यन ने माहीन को मैसेज किया — "माहीन, आज नहीं आई? सब ठीक है?

अगर कोई दिक्कत हो तो बताओ।" माहीन ने देखा लेकिन जवाब नहीं दिया, दिल में डर — "नहीं... बात नहीं करनी। गुनाह बढ़ेगा।" लेकिन आर्यन ने फोन किया। माहीन ने काँपते हाथों से उठाया, "हेलो... आर्यन जी?" आर्यन की आवाज चिंतित थी, "माहीन, सब ठीक? बीमार हो? शाम को पार्क में मिलो ना... बात कर लेंगे। बस 10 मिनट। मैं वेट करूंगा।" माहीन ने मना करने की कोशिश की, "नहीं... मैं ठीक हूँ।"

लेकिन आर्यन ने इंसिस्ट किया, "प्लीज, दोस्त की तरह। पार्क में, सुरक्षित जगह। अगर नहीं आई तो मैं चिंता करूंगा।" माहीन का दिल डूबा — "क्यों? लेकिन अगर नहीं गई तो वो और मैसेज करेगा... ठीक है, बस बात करके लौट आऊंगी। फ...सल, सॉरी... लेकिन बस मिलकर कह दूंगी कि दूर रहो।" वो तैयार हुई, हिजाब ठीक से पहना, और शाम को पार्क पहुंची। दिल तेज धड़क रहा था, आँखें नम — "ये क्या कर रही हूँ? घर पर रहना था। लेकिन अब... बस कह दूंगी सच्चाई।"पार्क में आर्यन बेंच पर वेट कर रहा tha

।Mahin को देखकर मुस्कुराया, लेकिन माहीन का चेहरा उदास था। वो पास बैठी, लेकिन दूरी बनाकर। "आर्यन जी... मैं... मैं बीमार नहीं थी। बस... कल की शाम से परेशान हूँ।" आर्यन ने चिंता से पूछा, "क्या हुआ? मूवी में कुछ गलत लगा?" माहीन की आँखें भर आईं, वो रोने लगी — "आर्यन जी... मैं ऐसी नहीं हूँ। मैं एक शादीशुदा औरत हूँ, फ...सल की वफादार। कल वो टच, वो closeness... गुनाह है

। मैं आजादी के बारे में सोचकर गलत कर रही हूँ। सहेलियाँ कहती हैं आजादी लो, लेकिन ये धोखा है। मैं अपने पति की प्रतिपालक हूँ, उनकी अमानत। कैसे गैर मर्द के इतना करीब आई? मैं रो रही हूँ, अफसोस हो रहा है। अ...ह से डर लग रहा है। मुझे माफ कर दो, लेकिन अब नहीं मिलूंगी।" उसकी आवाज काँप रही थी, सिसकियाँ निकल रही थीं। दिल में तूफान — "फ...सल, सॉरी... मैंने गुनाह किया। लेकिन अब तौबा।" आर्यन ने गंभीर होकर कहा, "माहीन, रुको।

तुम कुछ भी गलत नहीं कर रही हो। आजादी मतलब धोखा नहीं — खुद को खुश रखना है। तुम्हारा शौहर दूर हैं, तुम अकेली हो। दोस्ती में क्या बुराई? कल का इंसिडेंट इत्तफाक था, कोई इंटेंशन नहीं। * धर्म में, या किसी भी में, आजादी मतलब अपनी खुशी चुनना। तुम्हें कोई सजा नहीं मिलेगी, बस जियो। तुम अच्छी इंसान हो, बस थोड़ा रिलैक्स करो।" उसने हाथ नहीं छुआ, बस बातों से समझाया — "देखो, जिंदगी में बदलाव आते हैं। आजादी लो, लेकिन दिल से।


तुम गुनाह नहीं कर रही, बस जी रही हो।" माहीन रोती रही, लेकिन आर्यन की बातें दिल को छू गईं — "क्या सही कह रहा है? लेकिन फ...सल... नहीं, मैं नहीं मानूंगी।" वो बोली, "शुक्रिया... लेकिन मुझे जाना है।" और रोते हुए घर लौट गई।घर पहुंचकर गिल्ट और बढ़ गया — "आर्यन जी की बातें... आजादी जस्टिफाई कर रहे थे। लेकिन मैं? गुनाह है। फ...सल, सॉरी। मैं रो रही हूँ, दिल टूट रहा है। तौबा... तौबा।" वो रोती रही,
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RE: महीन को अपने रंग में रंग दिया - by razaraj2 - 04-02-2026, 10:55 PM



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