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Misc. Erotica महीन को अपने रंग में रंग दिया
#37
Is पार्ट में आर्यन से क्लोजनेस शुरू — सहेलियों की बातों का असर और आर्यन की हल्की सी नजदीकी

सहेलियों की स्टोरीज सुनने के बाद माहीन का मन पूरी तरह से उलझ चुका था। हर स्टोरी — नेहा की आजादी, प्रिया का Azadi k dikhaya hua sapna फातिमा और रिया का सेक्स का मजा — रात-दिन उसके दिमाग में घूमती रहती। लेकिन अब स्टोरीज खत्म हो गईं थीं, और माहीन सोचती, "अब क्या? ये बातें तो बस शुरुआत थीं...

लेकिन दिल में कुछ बदल रहा है। फ...सल, तुम्हारी याद आ रही है, लेकिन ये जिज्ञासा... रोक नहीं पा रही। क्या मैं इन बातों पर अमल करूँ? या बस सुनकर भूल जाऊँ?" वो ऑफिस में काम करती, लेकिन मन कहीं और होता। सहेलियाँ अब रोज लंच में मिलतीं, लेकिन अब बातें आर्यन पर आ गई थीं। नेहा कहती, "माहीन, आर्यन अच्छा लड़का है। बात करो उससे, शायद दिल हल्का हो।"

माहीन शरमाती, "नहीं... वो तो बस को-वर्कर है। लेकिन... हाँ, अच्छा लगता है बात करके।" दिल में एक हल्की सी उथल-पुथल — आर्यन की मुस्कान याद आती, लेकिन अभी बस हल्की सी फीलिंग, जैसे कोई दूर का आकर्षण। "क्या ये पसंद है? नहीं, बस दोस्ती। फ...सल, मुझे माफ कर दो।"अगले दिन ऑफिस में माहीन अपनी डेस्क पर काम कर रही थी।

आर्यन पास की डेस्क पर था, लेकिन आज वो थोड़ा ज्यादा ध्यान दे रहा था। मीटिंग के बाद आर्यन ने कहा, "माहीन, लंच में चलें? कुछ प्रोजेक्ट की बात कर लें।" माहीन ने हाँ कहा, लेकिन दिल में हल्की सी घबराहट — "बस प्रोजेक्ट की बात... लेकिन क्यों अच्छा लग रहा है?" कैफेटेरिया में बैठे, आर्यन ने कॉफी दी। "माहीन, तुम्हारी सहेलियाँ अच्छी हैं ना? पार्टी के बाद तुम्हारा चेहरा चमक रहा है।" माहीन शरमाकर बोली, "हाँ आर्यन जी... वो बातें करती हैं, दिल हल्का होता है। तुम्हारी वजह से मिलीं वो। शुक्रिया।

" आर्यन मुस्कुराया, "खुशी हुई। अगर कभी उदास हो तो बताना... मैं सुन सकता हूँ।" उसकी आँखों में केयर थी, और माहीन के दिल में हल्की सी फीलिंग जागी — जैसे कोई गर्माहट, लेकिन बहुत हल्की, बस एक पल की। "आर्यन जी... अच्छा इंसान हैं। लेकिन ज्यादा नहीं सोचना। फ...सल, ये बस दोस्ती है।" बातें प्रोजेक्ट पर हुईं, लेकिन बीच में आर्यन ने हल्का सा हाथ छुआ — कॉफी देते हुए। माहीन सिहर गई, लेकिन कुछ नहीं कहा। दिल में हल्की सी लहर — "ये स्पर्श... पार्टी वाले रंग जैसा। लेकिन बस हल्का सा। अ... मुझे माफ करना।"

शाम को घर जाकर माहीन सोचती रही, "आर्यन से बात करके अच्छा लगा... लेकिन क्यों? बस हल्की सी फीलिंग... जैसे कोई दोस्त। ज्यादा नहीं। फ...सल, मैं वफादार हूँ। लेकिन ये सहेलियाँ... और आर्यन... धीरे-धीरे क्या हो रहा है?" वो रोई, लेकिन दिल में एक छोटी सी चमक थी।
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RE: महीन को अपने रंग में रंग दिया - by razaraj2 - 04-02-2026, 10:44 PM



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