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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#66
इतना बोल सरिता ने हाथ नीचे कर राजू का लौड़ा पकड़ लिया। हाथ लगते ही राजू का लंड फिर से कुनमुनाने लगा।

सरिता...”हे भगवान. ये तो फिर से तन गया. नहीं राजू मैं अब और नहीं झेल पाऊंगी..वैसे भी रिशा कभी भी वापस आ सकती है”

राजू..अभी तो भाभी को वापस आने में काफी वक्त है और फिर आपने आज अपनी गांड देने का वादा किया था. आप जल्दी से बिस्तर पर घोड़ी बन जाओ..

जाब राजू ने सरिता को घोड़ी बनाने को कहा तो सरिता भी समझ गई कि आज राजू गांड का उद्घाटन कर के ही मानेगा. वक्त बर्बाद ना करते हुए वो जल्दी से बिस्तर पर घुटने रख के झुक गई.



घोड़ी बनी सरिता की उभरी हुई गांड देख राजू के मुँह में पानी आ गया . राजू ने सरिता के बाल पकड़ कर उनको पोनीटेल की तरह से बांध दिया और फिर उसकी गांड पर दो तीन बार जोर से चपत लगाई।
सरिता मदहोशी में इस दर्द का मजा लेने लगी।

राजू ने अपने हाथ सरिता की गांड पर फेरने शुरू कर दिए और फिर गांड की दरार में अपनी उंगलियां घुमाने लगा. राजू का सरिता की गांड में उंगली करना उसको बहुत उत्तेजित कर रहा था।

राजू की उंगली सरिता की गांड में हलचल मचाने लगी, और वो धीरे धीरे अपनी गांड को अंदर की तरफ भींचने लगी।

अचानक वो हुआ जिसकी उसको जरा भी उम्मीद नहीं थी।

राजू की उंगली गांड में घुसने लगी तो सरिता चीखी- आआह … मादरचोद ये क्या कर रहा है, दर्द होता है मुझे, मेरी गांड में उंगली मत कर राजा..

लेकिन राजू ने सरिता की एक नहीं सुनी और अपनी बीच की पूरी उंगली गांड में घुसा दी।

सरिता दर्द और जलन से सिसकी लेने लगी- , राजू प्लीज निकाल लो इसे, बहुत दर्द हो रहा है! प्लीज मान जा, मैं ये नहीं कर पाऊंगी।
राजू- “डरो मत मालिकिन मैं इतनी आराम से करूंगा की दर्द नहीं बल्कि मजा आयेगा”।

सरिता जानती थी कि आज राजू उसकी गांड मारे बिना नहीं मानेगा

सरिता...राजू मुझे पता है तेरी नज़र अब मेरी गांड पर है..लेकिन मेरी गांड मारने से पहले अपना लौड़ा तेल से अच्छे से चिकना कर ले और थोड़ा तेल मेरी गांड में भी उड़ेल दे ताकि तेरा लौड़ा लेने में ज्यादा दर्द न हो

राजू ने पास रखी तेल की शीशी से कुछ तेल सरिता की गांड में उड़ेल दिया और थोड़ा सा तेल अपने लंड पे मल लिया. फिर उसने अपना लंड सरिता की गांड के छेद पर टिका दिया अपना लन सरिता की कुंवारी गांड में डालने लगा पहले धक्के में तो लौड़ा फिसल गया लेकिन राजू ने फिर से लौड़ा गांड के छेद पर सेट किया और अबकी बार गांड के छल्ले को पार करने में सफल हो गया.
सरिता के चेहरे पर दर्द के भाव थे।
वो होंठों को भींचे किसी तरह अपनी सिसकी रोक कर लेटी थी।


राजू ने एक हाथ से उसकी चोटी पकड़ी और फिर धीरे धीरे उसकी पीठ पर किस करने लगा और जितना लौड़ा अंदर घुसा था उसको ही अंदर बाहर करने लगा. सरिता का थोड़ा दर्द कम हुआ तो वो भी अपनी गांड को पीछे ढकेल लंड का स्वाद लेने लगी

राजू ने अचानक से एक धक्का लगाया और आधा लिंग सरिता की गांड में जा घुसा- हाय दईया … मर गई मैं!



सरिता के मुंह से यही आह निकली तो राजू ने फिर से एक धक्का लगाया.
इस बार सरिता दर्द से चीख उठी और इसी के साथ राजू का पूरा लंड गांड में घुस गया।

सरिता की आंखें दर्द के मारे भर आई और होंठ कांपने लगे।
उसके मुंह से एक घुटी हुई आह निकली- हाय माँ. राजू बहुत दर्द हो रहा है।

लेकिन मर्द अपनी हवस मिटाने के लिए औरत को हमेशा दर्द देता आया है।

राजू पर सरिता की सिसकी का कोई असर नहीं पड़ा।

सरिता की गांड अंदर की तरफ सिकुड़ गई और राजू के लंड को पूरी ताकत से भींच लिया।
सरिता को ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई मोटा गर्म लोहे का रॉड उसकी गांड में घुसा हुआ हो।

राजू को सरिता की गांड की कसावट की वजह से धक्के लगाने में दिक्कत पेश आ रही थी- मालिकिन अपनी गांड को ढीला करो वरना धक्के कैसे लगाऊंगा।
सरिता सुबकती हुई बोली- राजू मुझसे नहीं हो पाएगा..प्लीज इसको निकाल ले और जितना चाहे मेरी चूत मार ले

राजू- ठीक है मालिकिन निकाल लूंगा लेकिन इसे ढीला करो तभी तो निकलेगा।

राजू की बात सुनकर सरिता ने गांड को ढीला छोड़ दिया।

राजू ने अपना लंड बाहर खींचना शुरू किया और जैसे ही सुपारा गांड के छल्ले के पास पहुंचा, उसने पूरे जोर से सरिता की गांड में अपना लंड दोबारा उतार दिया।



सरिता के मुंह से दर्द भरी चीख निकल पड़ी और उसने बिस्तर पर पड़े तकिये से अपनी चीख दबाने की नाकाम कोशिश की

थोड़ी देर बाद जब सरिता का दर्द कम हुआ तो वो मस्ती से करहाने लगी

सरिता.."राजू ..पहली बार मैंने अपनी कुंवारी चूत अपने पति को दी थी और आज अपनी कुंवारी गांड मैंने तेरे को दे दी है..एक तरह से अब तू भी मेरा पति है। मेरे अपने पति से ज्यादा अब ये चूत और गांड पर तेरा हक है”

इधर राजू धीरे धीरे कर के सरिता गांड को चोदने लगा और अपना एक अंगूठा उसके मुंह में और अपनी उंगली से उसकी योनि को सहलाने लगे।
राजू का हर धक्का अब सरिता के जिस्म में दर्द के साथ साथ मजे की लहर भी उत्पन्न करने लगा।

उसकी गांड को पहली बार लंड का स्वाद मिला था।

सरिता को दर्द और मजा दोनों का मिला-जुला एहसास हो रहा था.

सरिता के नये हरजाई खसम राजू ने सरिता की गांड पर अपने मोटे लौड़े से जो मेहनत की थी,उसी का नतीजा था कि सरिता मस्ती के सागर में गोते खा रही थी

सरिता की जुबान मुँह से बाहर आ गई और कंठ से दबी हुई आवाज निकल गई ‘उओह्ह्ह उह्ह साले हरामी आह फाड़ दे साले आह राजू मेरी जान क्या पेला है तूने आह.’

राजू मजे से एक शॉट और मारता हुआ बोला- अभी सही बोल रही है कुतिया आह ले बहन की लवड़ी, लंड का मजा ले!


राजू के मुँह से ये भद्दी गलियाँ भी आज सरिता को अच्छी लग रही थी

‘आह सच में राजू तेरे इन झटकों में जन्नत नज़र आ गई … आह ले चलो अपनी इस घोड़ी को चाँद पर आह.’

राजू सरिता की चुची मसलता हुआ धीमे धीमे चोदने लगा.

सरिता ने उसे गुस्सा दिलाने के लिए बोला- “क्या हुआ मादरचोद… कहीं थक तो नहीं गया?”


राजू ..”हम थकते नहीं रानी … थका देते हैं. आज दिन भर तुझे घोड़ी बनाकर तेरी गांड का भोसड़ा बना दूंगा साली रंडी! “

इतना कह कर उसने दो चार तेज झटके मार दिए.
उन झटकों से सरिता की दर्द और आनन्द भरी मीठी आवाजें निकलने लगीं ‘वाआह्हह आह हाय हुउई उम्ममा … आई.’

सरिता की अंगड़ाइयां और खुला मुँह राजू को और उत्तेजित किए जा रहे थे, ये उसके झटकों की तेजी में साफ नजर आ रहा था. पूरा कमरा धक धक पक पक की आवाज से गूंज रहा था.

अब उसके दोनों हाथ सरिता की मुसम्मियों को पकड़ कर उसकी चुदाई में सहायक बने हुए थे.

उसके झटकों की मार से सरिता की कमर हवा में उठ उठ जा रही थी और लंड गांड की गहराई तक खोदे जा रहा था.



करीब आधा घंटा तक राजू ने सरिता को खूब ठोका.

राजू के इस आधा घंटा के हड्डी तोड़ गांड फाड़ अभियान ने सरिता को स्वर्ग में पहुंचा दिया था. वो समझ गई थी सिर्फ उसकी जवानी सही मर्द के हाथ में है.

राजू अब अपना रस छोड़ने वाला लग रहा था, उसके तेज होते धक्के इस बात का सबूत थे.

कुछ ही झटकों में सरिता को एक तेज और गर्म धार मेरे पेट तक महसूस हुई. राजू ने झट से लंड सरिता की गांड से निकाला अपना और सारा माल सीधा सरिता के चेहरे और बूब्स पर टपका दिया.


अब दिन के एक बज चुके थे और रिशा के वापस आने का समय भी हो चुका था लेकिन राजू का मन अभी नहीं भरा था उसके लंड का तनाव सरिता की बजाने के लिए वापस रेडी था.

राजू..”मालिकिन अगर मजा आया तो एक राउंड और हो जाए?”

सरिता..”राजू मजा तो बहुत आया पर अभी एक और राउंड के लिए वक्त नहीं है “

राजू.. ठीक है मालिकिन लेकिन आज रात को आपका चूत और गांड दोनों चोदूंगा


सरिता: बोल तो ऐसा रहा है जैसे मेरे मना करने पे तू मान जाएगा ..रात को आ जाना कमरे में..मेरी चूत और गांड तेरे लंड के लिए त्यार मिलेगी इतना बोल दोनों ने अपने कपड़े पहने और सरिता हल्का सा लड़खड़ाती हुई राजू के कमरे से निकल गई l
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 31-01-2026, 10:10 AM



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