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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#64
सरिता ने हाथ बढ़ाया और राजू का लौड़ा पकड़ लिया। गरम गरम लौड़ा पकड़ उसे लगा जैसा कोई गरम लोहे की छड़ पकड़ ली हो. उसकी आँखों में देखते हुए उसने लंड की चमड़ी को पीछे सरकया और टोपा बाहर निकाल दिया फिर ज्यादा देर ना करते हुए टोपे पर अपनी जीभ चला दी. राजू की सिस्की निकल गयी. गाँव की बहुत से औरतों ने राजू का लौड़ा पहले भी चूसा था लेकिन सरिता की बात ही कुछ और थी. वो पूरा लौड़ा मुँह में लेकर चूसती थी और लंड के नीचे लटक रहे टट्टे भी साथ में चाटती थी.

राजू बिस्तर पर बैठ गया और सरिता उसकी टांगो के बीच बैठ कर पूरा लौड़ा मुँह में घुसा कर चूसने लगी. इस बीच राजू उसके बालों से खेल रहा था और अपनी कमर उठा कर उसके गले तक लंड पेल रहा था। सरिता के मुंह से गों गों की आवाज आ रही थी. रिशा ज्यादा देर वहां और ना रुक सकी और अपने कमरे में अपने सारे कपड़े उतर नंगी हो गई और चूत को मसलने लगी.. अपनी सास का ऐसा रंडीपना देख उसको विश्वास नहीं हो रहा था. किचन में जा वो एक मोटा सा खीरा उठा लाई और उसको अपनी चूत में पेल दिया। पांच सात मिनट में उसका पानी निकल गया। जब थोड़ा शांत हुई तो सोचने लगी कि वो राजू को अब कैसे उसके बिस्तर तक लाया जाए.
उधर राजू सरिता का सर पकड़ कर धक्के लगा कर सरिता के मुँह में लंड पेल रहा था. जब उसे लगा कि अब वो और ज्यादा देर सरिता की चुसाई के आगे टिक नहीं पाएगा तो उसने सरिता के मुंह से लौड़ा बाहर निकाल दिया और सरिता को उठाकर बिस्तर पर पटक दिया. सरिता की टांगो को पकड़ उसने अपने कंधों पर रखा और चूत के मुहाने पे लौड़ा रख जोर का धक्का मार दिया.. सरसराता हुआ लौड़ा चूत के अंदर घुस गया और सीधा बच्चेदानी पे ठोकर मार दी. सरिता के मुँह से आह निकल गई.



सरिता.. “जरा आराम से राजू...तेरा लौड़ा कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा है”

राजू..मालिकिन आपको भी तो लंबा और मोटा ही पसंद है ना?


सरिता.."हां राजू पसंद तो है लेकिन तेरा ये लौड़ा मेरी चूत का भोसड़ा बना देगा और फिर तेरे लालाजी को पता चल जाएगा तो मुसीबत हो जाएगी!
राजू..लालाजी तो अब बुड्ढे हो गए हैं। आप अभी जवान हो और कोई तगड़ा मर्द ही आपकी प्यास बुझा सकता है। इसलिए तड़पने से बेहतर है मेरा साथ दो और चुदाई का मजा लो. सरिता की चूत काफी पानी छोड़ रही थी और राजू का लौड़ा गपा गप चूत की धुनाई कर रहा था


कुछ समय बाद सरिता ने राजू को बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उसके लंड पर बैठ कर चुदवाने लगी चूत पर बजते हुए हर धक्के के साथ सरिता के गले में लटका मंगलसूत्र उसकी चुचियों के बीच झूल रहा था और इन अद्भुत क्षणों का गवाह बन रहा था.

इसी बीच सरिता एक बार छूट चुकी थी लेकिन राजू के धक्के अभी भी जारी थे.

दोनों की कमर लय में एक दूसरे के साथ थिरकती जा रही थी और मुंह से काम वासना की आहें निकल रही थी।

सरिता ने अपनी बाहों को के राजू गले में डाल कर सहारा लिया और खुद को संतुलित किया।

राजू ने सरिता के होंठों को अपने कब्जे में लेकर उन्हें चूसना शुरू कर दिया।
नीचे उसका औजार सरिता की मुनिया की खुदाई करता जा रहा था। आज राजू का लिंग अलग ही तरह का तनाव और आकार लिए हुए था। उसका सुपारा टमाटर जैसा फूला हुआ था और उस नसें खुरदरापन लिए फूली हुई थी जिसकी वजह से योनि में रगड़ बढ़ गई थी.
उनका सुपारा जब बच्चेदानी पर ठोकर मारता तो सरिता को मीठा मीठा दर्द होता।





सरिता की योनि तो अब झरना बन चुकी थी जिससे लगातार योनि रस बहता जा रहा था.




राजू के लिंग की रगड़ और धक्के की स्पीड इतनी ज्यादा थी कि ज्यादा समय तक सरिता इस आनन्द को झेल नहीं पाई और सरिता की योनि से फव्वारा फूट पड़ा।

झड़ने के बाद सरिता की योनि ढीली पड़ गई लेकिन राजू अभी भी धक्के लगाते जा रहा था. राजू ने एक बार फिर से सरिता को बिस्तर पर लिटा दिया और चुदाई चालू कर दी!

सरिता ने अपनी दोनों टांगे कैंची की तरह राजू की कमर पर लपेट ली और फिर खुद को उसके हवाले कर दिया।

राजू ने सरिता के नितम्बों पर हाथ लगाया और उनके सहारे सरिता को उठा उठा कर धक्के लगाने लगा



उसके हर धक्के से सरिता के बदन में कम्पन पैदा हो जाती

और उसके कंगन और पायल आवाज करने लगते।

सरिता की आंखें आनन्द के मारे बंद हो गई थी और मुंह से जोर जोर की आवाजें आ रही थी।

करीब दस मिनट और चोदने और दो बार सरिता को स्खलित करने के बाद राजू की जवानी अपने चरम पर पहुंच गई और उसने सरिता की चूत को अपने वीर्य से सराबोर कर दिया।

वो किसी जोंक की तरह सरिता से चिपक गया और अपने लिंग का एक एक हिस्सा योनि की गहराई में उतार दिया।

सरिता की योनि उनके लिंग का गर्मागर्म वीर्य पाकर सिकुड़ गई.

जब उसने अपना लिंग बाहर निकाल लिया तो उसका वीर्य सरिता के कामरस के साथ मिक्स होकर चूत के दरवाजे से बहने लगा.
सरिता ने पहले उंगली से वीर्य को उठाया और मजे से चाट गई, फिर टिशू पेपर से खुद को साफ किया।

सरिता अब तक दो बार झड़ी थी इसीलिए उसकी भी सांसें राजू की तरह ही तेज हो गई थी।
वह बेड पे लेट गई और खुद को संभालने लगी।

10 मिनट बाद जब सरिता का जिस्म जरा संभल गया तो वो राजू की तरफ मुंह कर उसकी छाती पर हाथ फेरने लगी.

सरिता..”गधा जैसा लंड है तेरा और घोड़ा जैसी ताकत. मुझ जैसी औरत की तू जान निकल देता है। कोई नई बयाही या कुंवारी लड़की तो तेरा लंड झेल नहीं पाएगी”

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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 31-01-2026, 10:00 AM



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