31-01-2026, 09:41 AM
रिशा ने जाने अंजाने उसे वो दे दिया था जिसकी कल्पना सरिता ने कभी नहीं की थी !लाला की कमज़ोरी के कारण उसने एक दो बार बाहर मुँह मारने का सोचा भी था लेकिन डर के मारे वो ऐसा कुछ कर नहीं पाई। जो भी ऐशो आराम पैसा इज्जत उसे यहां मिल रही थी वो सब एक नए लंड के कारण खतरे में नहीं पड़ सकती थी और सरिता वो जोखिम कभी भी लेना नहीं चाहती थी. अब राजू का लंड मिल जाने के बाद उसे चुदाई का भरपुर सुख मिल रहा था . राजू जैसा जोशीला और जवान मर्द एक तगड़े लंड का मालिक था और अपने मालिकिन की जम कर चुदाई कर रहा था और सब से बड़ी बात यह है कि घर की बात घर में ही रह गई थी। किसी तरह का कोई खतरा नहीं !!
बस बेचारी रिशा अपनी बेवकूफी पर गुस्सा हो रही थी। क्यो उसने राजू का राज़ सरिता को बताया। अब तक रिशा सिर्फ एक बार ही राजू के लंड का स्वाद चख पाई थी..दूसरी रात तो सरिता राजू को छीन के ले गई थी और तब से अब तक सिर्फ सरिता ही राजू के लंड की स्वाद चख पाई थी. एक दो बार रिशा ने सरिता से अपनी चूत की आग राजू से चुदवा कर मिटाने की बात करी लेकिन सरिता हमेशा ये बोल के चुप करवा देती कि जवान छोरा है...कहीं कुछ बक ना दे। पहले मुझे अच्छे से उसे काबू में कर लेने दे फिर हम दोनों मिलकर ऐश करेंगे. लेकिन सरिता की ये बात रिशा को पच नहीं रही थी..यहां वो लंड के लिए तड़प रही थी और वहां सरिता अब तो जब मौका मिलता है राजू को कमरे में खींच कर ले जाती.
एक दिन रिशा थोड़ा देर से उठ कर जब किचन की तरफ आई तो जो उसने देखा उसे पांव वहीं रुक गए। उसकी सास किचन में काम कर रही थी और राजू सरिता के पीछे खड़ा अपने लंड का दबाव सरिता की गांड पर बना कर खड़ा था और उसके दोनों हाथ आगे से ब्लाउज के अंदर घुसे हुए थे और सरिता की चुची को मसल रहे थे.
देखने से ही पता चल रहा था कि सरिता और राजू अब इस खेल में काफी आगे निकल चुके हैं।
सरिता.. "राजू छोड़ दो मुझे !कोई देख लेगा तो मुसीबत हो जाएगी"
राजू" कौन देखेगा मालिकिन..सेठ जी तो कब से दुकान पे चले गए और भाभी शायद अभी सोई पड़ी होगी"इतना बोल राजू ने सरिता को अपनी गोद में उठा लिया
सरिता.." नहीं राजू... रिशा अभी आती ही होगी। उसने हमें ऐसे देख लिया तो मुसीबत हो जाएगी और वैसे भी तूने कल रात ही तो दो बार मेरी चूत मारी है और अब सुबह सुबह तेरा लंड खड़ा हो गया है"
राजू....”क्या करु मालिकिन. आपकी चूत है ही किसी कुंवारी लौडिया जैसी। जितनी बार भी चोदता हूँ एक अलग ही मजा आता है”. इतना बोल राजू ने सरिता के ब्लाउज के हुक खोल दिया और ब्रा के ऊपर से उसकी चूची और गर्दन को चूमने लगा
राजू.... “मालिकिन आप कब से मुझे अपनी गांड देने का वादा कर रही हैं। आज तो आप इस साड़ी में कयामत ढा रही हो.. आपकी बाहर को निकली हुई गांड देख कर ही मेरा लौड़ा खड़ा हो गया है आप कहें तो यहीं पर साड़ी उठा कर अपना लौड़ा पेल दूं गांड में”
सरिता" पागल मत बन राजू। रिशा अभी यहां आती ही होगी। तू एक काम कर। तू अपने कमरे में वापस जा। मैं रिशा को कोई बहाना कर बाहर भेजती हूं और फिर तेरे पास आती हूं। आज मार लेना मेरी गांड!
राजू" ठीक है मालिकिन मैं अभी जाता हूं लेकिन जल्दी आ जाना आप”। इतना बोल राजू वहां से निकल जाता है और तभी रिशा किचन में प्रवेश करती है।
रिशा "दीदी राजू आज दुकान पर नहीं गया क्या ?
सरिता.." नहीं उसकी तबीयत कुछ ठीक नहीं है तो मैंने उसको अपने कमरे में आराम करने को बोला है। अभी थोड़ी देर में मैं उसके लिए काड़ा बना कर दे आऊंगी।
रिशा..लगता है दीदी आप कुछ ज्यादा ही मेहनत करवा रही है राजू से
सरिता..अंजान बनते हुए..अरे नहीं। कल कुछ ज्यादा गर्मी थी तो कहीं उल्टा सीधा खाने से तबियत बिगड गई होगी
रिशा.."दीदी आप कहो तो मैं उसको काड़ा बना कर दे आती हूं
सरिता.." नहीं बहू तो एक काम कर तू आज मंदिर हो आ और वापीस आते हुए बाजार से थोड़ी सब्जी और राशन ले आना। तब तक मैं दोपहर का खाना भी बना लूंगी.
रिशा: राशन तो कल ले आऊंगी दीदी..अगर आपको ठीक लगे तो आते हुए मेरी एक सहेली है उसके पास कुछ समय बिता कर आ जाउ। काफ़ी दिन से बोल रही है। रिशा ने ये जानबूझ कर बोला ताकि सरिता को लगे कि उसको ज्यादा टाइम लगेगा वापस आने में।
सरिता: हां हां क्यू नहीं बहू. तू आराम से अपनी सहेली से मिल कर आ जाना। मैं यहां सब संभाल लूंगी
इतना बोल रिशा वहां से निकल पड़ी और घर के पिछवाड़े बने एक पेड़ के पीछे छुप कर देखने लगी कि आखिर उन दोनों के बीच क्या चल रहा है।
रिशा के निकलते ही सरिता चुपचाप पिछले दरवाजे से राजू के कमरे की तरफ चल पड़ी। सरिता के जाते ही रिशा वहां से निकली और राजू के कमरे के बाहर दबे पांव पहुंच गई
एक छोटी सी खिड़की थोड़ी सी खुली थी जहां से रिशा को अंदर का नजारा साफ दिख रहा था। उसने देखा की राजू ने उसकी सास को अपनी बाहों में दबोच लिया था और दोनों एक दूसरे के होठों को चूस रहे थे. कुछ देर सरिता के होंठ चूसने के बाद राजू ने सरिता को दीवार के साथ लगा दिया और उसकी साड़ी उसकी जांघों तक सरका कर पैंटी के ऊपर से ही सरिता की चूत को दबा लिया
सरिता...क्यो राजू आज यहीं खड़े खड़े ही चोद देगा क्या मुझे? इतना बोल सरिता ने राजू को बिस्तर पर धकेल दिया और उसके ऊपर सवार हो गई.
बस बेचारी रिशा अपनी बेवकूफी पर गुस्सा हो रही थी। क्यो उसने राजू का राज़ सरिता को बताया। अब तक रिशा सिर्फ एक बार ही राजू के लंड का स्वाद चख पाई थी..दूसरी रात तो सरिता राजू को छीन के ले गई थी और तब से अब तक सिर्फ सरिता ही राजू के लंड की स्वाद चख पाई थी. एक दो बार रिशा ने सरिता से अपनी चूत की आग राजू से चुदवा कर मिटाने की बात करी लेकिन सरिता हमेशा ये बोल के चुप करवा देती कि जवान छोरा है...कहीं कुछ बक ना दे। पहले मुझे अच्छे से उसे काबू में कर लेने दे फिर हम दोनों मिलकर ऐश करेंगे. लेकिन सरिता की ये बात रिशा को पच नहीं रही थी..यहां वो लंड के लिए तड़प रही थी और वहां सरिता अब तो जब मौका मिलता है राजू को कमरे में खींच कर ले जाती.
एक दिन रिशा थोड़ा देर से उठ कर जब किचन की तरफ आई तो जो उसने देखा उसे पांव वहीं रुक गए। उसकी सास किचन में काम कर रही थी और राजू सरिता के पीछे खड़ा अपने लंड का दबाव सरिता की गांड पर बना कर खड़ा था और उसके दोनों हाथ आगे से ब्लाउज के अंदर घुसे हुए थे और सरिता की चुची को मसल रहे थे.
देखने से ही पता चल रहा था कि सरिता और राजू अब इस खेल में काफी आगे निकल चुके हैं।
सरिता.. "राजू छोड़ दो मुझे !कोई देख लेगा तो मुसीबत हो जाएगी"
राजू" कौन देखेगा मालिकिन..सेठ जी तो कब से दुकान पे चले गए और भाभी शायद अभी सोई पड़ी होगी"इतना बोल राजू ने सरिता को अपनी गोद में उठा लिया
सरिता.." नहीं राजू... रिशा अभी आती ही होगी। उसने हमें ऐसे देख लिया तो मुसीबत हो जाएगी और वैसे भी तूने कल रात ही तो दो बार मेरी चूत मारी है और अब सुबह सुबह तेरा लंड खड़ा हो गया है"
राजू....”क्या करु मालिकिन. आपकी चूत है ही किसी कुंवारी लौडिया जैसी। जितनी बार भी चोदता हूँ एक अलग ही मजा आता है”. इतना बोल राजू ने सरिता के ब्लाउज के हुक खोल दिया और ब्रा के ऊपर से उसकी चूची और गर्दन को चूमने लगा
राजू.... “मालिकिन आप कब से मुझे अपनी गांड देने का वादा कर रही हैं। आज तो आप इस साड़ी में कयामत ढा रही हो.. आपकी बाहर को निकली हुई गांड देख कर ही मेरा लौड़ा खड़ा हो गया है आप कहें तो यहीं पर साड़ी उठा कर अपना लौड़ा पेल दूं गांड में”
सरिता" पागल मत बन राजू। रिशा अभी यहां आती ही होगी। तू एक काम कर। तू अपने कमरे में वापस जा। मैं रिशा को कोई बहाना कर बाहर भेजती हूं और फिर तेरे पास आती हूं। आज मार लेना मेरी गांड!
राजू" ठीक है मालिकिन मैं अभी जाता हूं लेकिन जल्दी आ जाना आप”। इतना बोल राजू वहां से निकल जाता है और तभी रिशा किचन में प्रवेश करती है।
रिशा "दीदी राजू आज दुकान पर नहीं गया क्या ?
सरिता.." नहीं उसकी तबीयत कुछ ठीक नहीं है तो मैंने उसको अपने कमरे में आराम करने को बोला है। अभी थोड़ी देर में मैं उसके लिए काड़ा बना कर दे आऊंगी।
रिशा..लगता है दीदी आप कुछ ज्यादा ही मेहनत करवा रही है राजू से
सरिता..अंजान बनते हुए..अरे नहीं। कल कुछ ज्यादा गर्मी थी तो कहीं उल्टा सीधा खाने से तबियत बिगड गई होगी
रिशा.."दीदी आप कहो तो मैं उसको काड़ा बना कर दे आती हूं
सरिता.." नहीं बहू तो एक काम कर तू आज मंदिर हो आ और वापीस आते हुए बाजार से थोड़ी सब्जी और राशन ले आना। तब तक मैं दोपहर का खाना भी बना लूंगी.
रिशा: राशन तो कल ले आऊंगी दीदी..अगर आपको ठीक लगे तो आते हुए मेरी एक सहेली है उसके पास कुछ समय बिता कर आ जाउ। काफ़ी दिन से बोल रही है। रिशा ने ये जानबूझ कर बोला ताकि सरिता को लगे कि उसको ज्यादा टाइम लगेगा वापस आने में।
सरिता: हां हां क्यू नहीं बहू. तू आराम से अपनी सहेली से मिल कर आ जाना। मैं यहां सब संभाल लूंगी
इतना बोल रिशा वहां से निकल पड़ी और घर के पिछवाड़े बने एक पेड़ के पीछे छुप कर देखने लगी कि आखिर उन दोनों के बीच क्या चल रहा है।
रिशा के निकलते ही सरिता चुपचाप पिछले दरवाजे से राजू के कमरे की तरफ चल पड़ी। सरिता के जाते ही रिशा वहां से निकली और राजू के कमरे के बाहर दबे पांव पहुंच गई
एक छोटी सी खिड़की थोड़ी सी खुली थी जहां से रिशा को अंदर का नजारा साफ दिख रहा था। उसने देखा की राजू ने उसकी सास को अपनी बाहों में दबोच लिया था और दोनों एक दूसरे के होठों को चूस रहे थे. कुछ देर सरिता के होंठ चूसने के बाद राजू ने सरिता को दीवार के साथ लगा दिया और उसकी साड़ी उसकी जांघों तक सरका कर पैंटी के ऊपर से ही सरिता की चूत को दबा लिया
सरिता...क्यो राजू आज यहीं खड़े खड़े ही चोद देगा क्या मुझे? इतना बोल सरिता ने राजू को बिस्तर पर धकेल दिया और उसके ऊपर सवार हो गई.


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