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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#53
सुबह सरिता और रिशा दोनों आमने सामने हुई तो मुस्कुरा उठी. रिशा अपनी सास को छेड़ती हुई बोली..'' क्या बात है दीदी..कल रात आपके कमरे से करहाने की आवाज आ रही थी जैसे कोई भयंकर पीड़ा में हो

सरिता भी चुटकी लेते हुए बोली...हां बहू...जो चिंटा कल रात ऊपर तेरे कमरे में तुझको काट रहा था वही शायद मेरे ऊपर भी चढ़ गया था सरिता की बात सुन रिशा और सरिता दोनों हंसने लगी

रिशा: दीदी कैसा लगा राजू का लंड? मजा तो खूब आया होगा और ज्यादा दर्द तो नहीं दिया।

सरिता: अरे पुछ मत रिशा. तू सही कह रही थी. लाजवाब लंड है कमीने का. अंदर तक चोट करता है और हद से ज्यादा मजा देता है। बदन का एक अंग ढीला कर दिया है। ऐसे दर्द के लिए ही तो हम औरतें तरसती हैं

सास बहू जुगाड़ मिलने से बहुत खुश थीं.

सरिता ने रिशा से कहा कि रिशा तू राजू को ऐसा दिखाना, जिससे उसे पता नहीं चल पाए कि मैंने उसे माफ़ कर दिया या नहीं … और तू जब भी राजू को चुदाई के लिए बुलाये तो मुझको पहले बता दे.

रिशा ने हां कह दी.

सरिता आगे बोली- इसी तरह जब मैं बुलाऊंगी, तो तुझको बता दूँगी. राजू को हमेशा एक दूसरे का डर बना रहना चाहिए. अब तुमसे क्या छुपा है .:बढ़ती उमर के साथ जिस्म की भूख भी बढ़ती जा रही है,आज उमर के इस पड़ाव में आ चुकी हूँ जहां धन दौलत,मान सम्मान बेहद छोटी चीजें लगने लगी है। अब बस एक ही चीज की चाहत है वो है"चरमसुख"

इस तरह से सास बहू दोनों को घर में एक ऐसा मजबूत लंड मिल गया था, जो उनके काबू में आया हुआ सांड था. दोनों उससे अपनी अपनी चूत की प्यास बुझवा लेतीं और मजे से रहतीं.
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 28-01-2026, 04:44 PM



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