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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#52
इधर राजू भकाभक लंड पेल रहा था उधर सरिता जोर जोर से उह आह करके चिल्ला रही थीं.


राजू सरिता से बोला- धीरे धीरे चिल्लाइए मालकिन सेठ जी उठ जाएंगे. वो बोली- जागने दो और सुनने दो … मैं तो कहती हूँ चलो मुझे उनके बिस्तर के सामने ले जाकर चोदो. जरा वो भी तो देखे कि एक जवान बीवी की चूत की आग को कैसे ठंडा किया जाता है. साले बुड्ढे के लन में दम तो है नहीं और मुझ से शादी कर के मेरी जिंदगी खराब कर दी.
आअह्ह जोर जोर से राजू आआहह उह … चोद चोद आअह … अगर तू लाला जी के बेटे जैसा न होता तो तुझसे शादी करके तुझे अपना पति बनाकर ज़िन्दगी भर के लिए तेरी रखैल बन जाती!”


राजू बोला- “कोई बात नहीं सेठानी जी...आप जब भी कहोगे मैं आपको चोद दूंगा। जब भी मौका मिलेगा आपको अपना लंड पे बिठा कर ऐसे ही चोदूंगा और आपकी प्यास बुझा दूंगा”

सरिता- आअह उफ्फ राजू… तूने अपनी सेठानी समझ के अब तक मुझे चोदा है ना … अब रांड समझ के चोद


लगभग 20 मिनट की इस ताबड़तोड़ चुदाई के बाद राजू का अब निकलने वाला था. उसने सरिता को सीधा लिटाया और चूत में एक ही झटके में लंड पेल दिया. सरिता स्स्स्स्स्सी ईईईई!’ करके रह गईं.

सरिता की साँसें अब बेकाबू थीं, चेहरा सुर्ख़ और आँखें बंद।वो राजू के सीने से चिपककर काँपते हुए बोली —

“मैं और नहीं रोक सकती…

राजू ने उसकी ठोड़ी उठाई, आँखों में देखा और कसकर अपनी बाँहों में जकड़ लिया और सरिता को दे दनादन चोदने लगा और उसकी चूत के दाने को रगड़ने लगा.


आख़िरकार, एक तेज़ सिसकारी के साथ सरिता झड़ गईं. और राजू की बाँहों में ढह गई —उसकी आँखों में तृप्ति, होंठों पर मुस्कान इस बात की गवाही थे कि राजू ने उसे आज वो सुख दिया था जिसकी चाह शायद वो काई बरसों से कर रही थी! उसके होंठ काँप रहे थे, और बदन पिघलता जा रहा था। वो चरमसुख प्राप्त कर चुकी थी. वो हाँफते हुए फुसफुसाई —

“राजू तू असली मर्द है… तूने ही आज मुझे स्त्री होने का सही सुख दिया है। चुदाई क्या होती है ये मुझे आज पता चला है। ऊपर तो कोई भी चढ़ सकता है लेकिन तूने अपना दमदार हथियार और चुदाई से मेरा तन और मन जीत लिया है

सरिता के झड़ने के बाद कुछ तेज धक्के लगाने के बाद राजू को भी एहसास हुआ की उसका भी माल निकलने वाला था.

उसने सरिता से कहा- मालकिन मेरा आने वाला है! कहाँ निकालू

सरिता बोली “मेरे मुँह में झड़ना … मुझे तेरे लंड के रस का स्वाद चखना है!”

राजू ने झट से अपना लंड सरिता की चूत से निकाला और सरिता के मुँह में दे दिया. सरिता ने जीभ राजू के लंड के टोपे पर घुमाई और थोड़ी देर में राजू के लंड ने सरिता के मुँह में उलटी शुरू कर दी.

ढेर सारा गाढ़ा वीर्य सरिता के मुँह में चला गया. सरिता ने वीर्य की एक-एक बूंद पी ली और चाट-चाट कर पूरे लंड को साफ कर दिया.
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 28-01-2026, 04:42 PM



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