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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#51
सरिता की गांड की गोलाई देखकर राजू से रहा नहीं गया और सरिता की गांड पर 8-10 तमाचे जड़ दिए ‘चट्ट चट्ट.’ सरिता ‘आह्ह्ह आहह …’ करने लगीं. सरिता का दो बार पानी निकल चुका था, जिससे उसकी चूत चिकनी हो गई थी और लंड आसानी से अन्दर-बाहर होने लगा.
राजू ने सरिता के लंबे बालों को एक हाथ से पकड़ा और दूसरा हाथ उसकी कमर पर रख जोर के झटके मार मार के लंड उसकी चूत में लंड पेलने लगा. सरिता भी अपनी चूत को आगे-पीछे करके राजू से चुदने लगीं और बोलने लगीं- हां मेरे राजा … आह ऐसे ही तेज़-तेज़ चोदो मुझे आज … मेरी चूत का भर्ता बना दो … साली बहुत तंग करती है मुझे … आहहह आआह ईई … स्स्स्स्स् … हां ऐसे ही चोदो मेरे राजा!’

[Image: cvc-30.jpg]
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 28-01-2026, 04:36 PM



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