28-01-2026, 02:48 PM
थोडा और आगे.......
"डॉक्टर साहब,आप ही हमे रास्ता दिखाएँ।"
"राजासाहब,हमे एक वीक का समय दीजिए। हम आपको बेस्ट सेंटर्स की लिस्ट दे देंगे।
"कह कर दोनो पति-पत्नी जाने के लिए उठ गये,
"कुंवर को अपनी ग़लती का एहसास है कि नही पता नही।राजासाहब आपको उनसे बात करके थेरपी के लिए तैय्यर करना होगा और अगर इस बीच आप उन्हे ड्रग्स लेते पाए तो रोके मत वरना कहीं वो फिर वाय्लेंट होकर किसिको या खुद को नुकसान ना पहुँचा ले।"
शाम को मेनका अपने हॉस्पिटल रूम मे अकेली थी।वो उठी और बाथरूम मे गयी,अपना चेहरा धोया और शीशे मे देखा,एक रात मे ही उसकी दुनिया उथल-पुथल हो गयी थी,
"आख़िर क्यू हुआ ऐसा? उसकी अपनी कमज़ोरी की वजह से।
"जवाब उसके अंदर से ही आया,
"नही अब वो ऐसे नही रहेगी।अपनी ज़िंदगी के फ़ैसले वो खुद लेगी।उसकी मर्ज़ी के बिना अब उस से कोई भी कुछ भी नही करवा सकता।"
उसने कमरे मे लौटकर डॉक्टर लता को बुलाया।
"बोलिए,कुँवारानी।"
"डॉक्टर आंटी,हमे कॉंट्रॅसेप्टिव पिल्स के बारे मे बताएँ।"
"कुँवारानी।"
"जी आंटी,हम नही चाहते कि हमारे पति की ग़लतियों का खामियाज़ा हमे भुगतना पड़े।"
"जी,कुँवारानी।",और वो उसे समझने लगी।
पर मेनक को उन गोलियों की ज़रूरत नही पड़ी क्यूकी इसके बाद सब कुछ बड़ी तेज़ी से हुआ। डॉक्टर साहब ने बॅंगलुर के पास देवनहल्ली मे डॉक्टर पुरन्दारे के रिहेब सेंटर को रेकमेंड किया। राजा यशवीर और राजा अर्जन विश्वा को वाहा अड्मिट करा आए।इस पूरे समय मे मेनका अपनी मा के साथ महल मे थी।पता नही राजासाहब ने विश्वा को जाने के लिए कैसे मनाया।बिज़नेस पे कोई बुरा असर ना पड़े इसके लिए पहले जर्मन पार्ट्नर्स को पूरी बात बताई गयी और फिर एक प्रेस रिलीस दी गयी।राजासाहब ने इस मुसीबत का भी बड़ी समझदारी से सामना किया था।
पर बात पूरी दुनिया के सामने खुलने से पहले उनके दुश्मन को पता चल गयी थी।
जब्बार सोफे पे नंगा बैठा था और उसकी गोद मे मलिका भी।मलिका के हाथ मे बियर की बॉटल थी जिस से उसने एक घूँट भरा और फिर जब्बार को पिलाया।उसके दूसरे हाथ मे जब्बार का लंड था जिसे वो हिला रही थी।थोड़ी ही देर मे लंड पूरा खड़ा हो गया,तब मलिका जब्बार की तरफ पीठ करके उसकी गोद मे उसके लंड पर बैठ गयी।उसने अपनी दाई बाँह उसके गले मे इस तरह डाल दी कि जब्बार का मुँह उसकी दाई चूची से आ लगा।जब्बार ने उसका निपल मुँह मे लेकर काट लिया। मैत्री की पेशकश.
"ऊओ...व्व",मलिका ने बाल पकड़ कर उसका सिर अपने सीने से अलग किया और मुँह मे बची हुई बियर उडेल दी और फिर बॉटल को दूसरे सोफे पर फेक दिया।जब्बार ने बियर अपने हलाक से नीचे उतरी और फिर अपना मुँह मलिका की छाती से चिपका दिया।उसका बाया हाथ उसकी रखैल के बाए उरोज़ को बेरहमी से मसल रहा था तो दाया हाथ उसकी लंड भरी चूत के दाने को।मलिका जोश से पागल होकर लंड पे ज़ोर-2 से कूद रही थी।
"एयेए आहह आअहह अहहह!",वो मज़े से चिल्ला रही थी,"ऊ...ईईई....",ज़ोर की चीख के साथ वो जब्बार के उपर लेट गयी और उसके कान मे अपनी जीभ फिराने लगी।वो झड़ने के बहुत करीब थी।।और 5-6 धक्कों के बाद एक और आह के साथ उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।जब्बार ने भी नीचे से 3-4 धक्के लगाए और मलिका की चूत को अपने वीर्या से भर दिया।दोनो सोफे की पीठ पे उसी पोज़िशन मे टिक कर अपनी साँस संभालने लगे कि तभी मलिका का सेल बज उठा।मलिका ने वैसे ही टेबल से फ़ोन उठा कर अपने कान से लगाया,"हेलो,बोलिए बत्रा साब।"
थोड़ी देर के बाद उसने फ़ोन रखा और वैसे ही जब्बार की गोद मे बैठे हुए उसे सारी बात बताई।
"क्या?",जब्बार ने उसे सोफे पर एक तरफ धकेला और अपना सिकुदा लंड उसकी चूत मे से निकाल कर खड़ा हो गया।
उसने उस एक नंबर वाले मोबाइल से कल्लन को फ़ोन कर के सारी बात बताई,"सुनो,राजा ज़रूर पता लगाएगा कि उसके बेटे को ये लत लगी कैसे और इसके लिए सबसे पहले उस इंसान को ढूंदेगा जो उसके बेटे तक ड्रग्स पहुँचाता था।इसलिए तुम अब उंड़र-ग्राउंड हो जाओ। फ़िक्र मत करना,तुम्हारे पैसे तुम्हे मिल जाएँगे।",
औरउसने फोन बंद कर के वापस लेटी हुई मलिका की टाँगों के बीच बैठ कर अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। मैत्री द्वारा निर्मित.
जब पोलीस हॉस्पिटल मे मेनका का बयान लेने आई तो राजासाहब की बात ना मानते हुए मेनका ने वही फिसल कर गिरने वाली कहानी बताई।राजासाहब के पूच्छने पर उसने कहा कि विश्वा को उसके किए की सज़ा मिल रही है फिर दुनिया को सच बताकर परिवार को और बेइज़्ज़त क्यू करें।
जहाँ इस बात ने राजासाहब के दिल मे मेनका के लिए और इज़्ज़त भर दी वही मेनका भी राजासाहब की ईमानदारी से प्रभावित हुए बिना नही रह सकी।पूरे मामले मे उन्हे सिर्फ़ मेनका की चिंता थी,उनका बेटा गुनेहगर था और उसे बचाने के लिए वो बिल्कुल तैय्यार नही थे-उनका बस चलता तो विश्वा जैल मे होता।उसके पिता और डॉक्टर्स के समझने पर ही वो उसे जैल के बजाय रिहेब मे भेजने को तैय्यार हुए थे।
आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ तब तक के लिए मैत्री की तरफ से......
।। जय भारत ।।
"डॉक्टर साहब,आप ही हमे रास्ता दिखाएँ।"
"राजासाहब,हमे एक वीक का समय दीजिए। हम आपको बेस्ट सेंटर्स की लिस्ट दे देंगे।
"कह कर दोनो पति-पत्नी जाने के लिए उठ गये,
"कुंवर को अपनी ग़लती का एहसास है कि नही पता नही।राजासाहब आपको उनसे बात करके थेरपी के लिए तैय्यर करना होगा और अगर इस बीच आप उन्हे ड्रग्स लेते पाए तो रोके मत वरना कहीं वो फिर वाय्लेंट होकर किसिको या खुद को नुकसान ना पहुँचा ले।"
शाम को मेनका अपने हॉस्पिटल रूम मे अकेली थी।वो उठी और बाथरूम मे गयी,अपना चेहरा धोया और शीशे मे देखा,एक रात मे ही उसकी दुनिया उथल-पुथल हो गयी थी,
"आख़िर क्यू हुआ ऐसा? उसकी अपनी कमज़ोरी की वजह से।
"जवाब उसके अंदर से ही आया,
"नही अब वो ऐसे नही रहेगी।अपनी ज़िंदगी के फ़ैसले वो खुद लेगी।उसकी मर्ज़ी के बिना अब उस से कोई भी कुछ भी नही करवा सकता।"
उसने कमरे मे लौटकर डॉक्टर लता को बुलाया।
"बोलिए,कुँवारानी।"
"डॉक्टर आंटी,हमे कॉंट्रॅसेप्टिव पिल्स के बारे मे बताएँ।"
"कुँवारानी।"
"जी आंटी,हम नही चाहते कि हमारे पति की ग़लतियों का खामियाज़ा हमे भुगतना पड़े।"
"जी,कुँवारानी।",और वो उसे समझने लगी।
पर मेनक को उन गोलियों की ज़रूरत नही पड़ी क्यूकी इसके बाद सब कुछ बड़ी तेज़ी से हुआ। डॉक्टर साहब ने बॅंगलुर के पास देवनहल्ली मे डॉक्टर पुरन्दारे के रिहेब सेंटर को रेकमेंड किया। राजा यशवीर और राजा अर्जन विश्वा को वाहा अड्मिट करा आए।इस पूरे समय मे मेनका अपनी मा के साथ महल मे थी।पता नही राजासाहब ने विश्वा को जाने के लिए कैसे मनाया।बिज़नेस पे कोई बुरा असर ना पड़े इसके लिए पहले जर्मन पार्ट्नर्स को पूरी बात बताई गयी और फिर एक प्रेस रिलीस दी गयी।राजासाहब ने इस मुसीबत का भी बड़ी समझदारी से सामना किया था।
पर बात पूरी दुनिया के सामने खुलने से पहले उनके दुश्मन को पता चल गयी थी।
जब्बार सोफे पे नंगा बैठा था और उसकी गोद मे मलिका भी।मलिका के हाथ मे बियर की बॉटल थी जिस से उसने एक घूँट भरा और फिर जब्बार को पिलाया।उसके दूसरे हाथ मे जब्बार का लंड था जिसे वो हिला रही थी।थोड़ी ही देर मे लंड पूरा खड़ा हो गया,तब मलिका जब्बार की तरफ पीठ करके उसकी गोद मे उसके लंड पर बैठ गयी।उसने अपनी दाई बाँह उसके गले मे इस तरह डाल दी कि जब्बार का मुँह उसकी दाई चूची से आ लगा।जब्बार ने उसका निपल मुँह मे लेकर काट लिया। मैत्री की पेशकश.
"ऊओ...व्व",मलिका ने बाल पकड़ कर उसका सिर अपने सीने से अलग किया और मुँह मे बची हुई बियर उडेल दी और फिर बॉटल को दूसरे सोफे पर फेक दिया।जब्बार ने बियर अपने हलाक से नीचे उतरी और फिर अपना मुँह मलिका की छाती से चिपका दिया।उसका बाया हाथ उसकी रखैल के बाए उरोज़ को बेरहमी से मसल रहा था तो दाया हाथ उसकी लंड भरी चूत के दाने को।मलिका जोश से पागल होकर लंड पे ज़ोर-2 से कूद रही थी।
"एयेए आहह आअहह अहहह!",वो मज़े से चिल्ला रही थी,"ऊ...ईईई....",ज़ोर की चीख के साथ वो जब्बार के उपर लेट गयी और उसके कान मे अपनी जीभ फिराने लगी।वो झड़ने के बहुत करीब थी।।और 5-6 धक्कों के बाद एक और आह के साथ उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।जब्बार ने भी नीचे से 3-4 धक्के लगाए और मलिका की चूत को अपने वीर्या से भर दिया।दोनो सोफे की पीठ पे उसी पोज़िशन मे टिक कर अपनी साँस संभालने लगे कि तभी मलिका का सेल बज उठा।मलिका ने वैसे ही टेबल से फ़ोन उठा कर अपने कान से लगाया,"हेलो,बोलिए बत्रा साब।"
थोड़ी देर के बाद उसने फ़ोन रखा और वैसे ही जब्बार की गोद मे बैठे हुए उसे सारी बात बताई।
"क्या?",जब्बार ने उसे सोफे पर एक तरफ धकेला और अपना सिकुदा लंड उसकी चूत मे से निकाल कर खड़ा हो गया।
उसने उस एक नंबर वाले मोबाइल से कल्लन को फ़ोन कर के सारी बात बताई,"सुनो,राजा ज़रूर पता लगाएगा कि उसके बेटे को ये लत लगी कैसे और इसके लिए सबसे पहले उस इंसान को ढूंदेगा जो उसके बेटे तक ड्रग्स पहुँचाता था।इसलिए तुम अब उंड़र-ग्राउंड हो जाओ। फ़िक्र मत करना,तुम्हारे पैसे तुम्हे मिल जाएँगे।",
औरउसने फोन बंद कर के वापस लेटी हुई मलिका की टाँगों के बीच बैठ कर अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। मैत्री द्वारा निर्मित.
जब पोलीस हॉस्पिटल मे मेनका का बयान लेने आई तो राजासाहब की बात ना मानते हुए मेनका ने वही फिसल कर गिरने वाली कहानी बताई।राजासाहब के पूच्छने पर उसने कहा कि विश्वा को उसके किए की सज़ा मिल रही है फिर दुनिया को सच बताकर परिवार को और बेइज़्ज़त क्यू करें।
जहाँ इस बात ने राजासाहब के दिल मे मेनका के लिए और इज़्ज़त भर दी वही मेनका भी राजासाहब की ईमानदारी से प्रभावित हुए बिना नही रह सकी।पूरे मामले मे उन्हे सिर्फ़ मेनका की चिंता थी,उनका बेटा गुनेहगर था और उसे बचाने के लिए वो बिल्कुल तैय्यार नही थे-उनका बस चलता तो विश्वा जैल मे होता।उसके पिता और डॉक्टर्स के समझने पर ही वो उसे जैल के बजाय रिहेब मे भेजने को तैय्यार हुए थे।
आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ तब तक के लिए मैत्री की तरफ से......
।। जय भारत ।।


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