27-01-2026, 02:55 AM
सरताज सिंह का काफिला
घर के बाहर सरताज की काली सरकारी SUV अपनी पूरी धमक के साथ खड़ी थी। नीली बत्ती की चमक और आसपास तैनात दो सुरक्षा गाड़ियाँ—एक सफेद इनोवा आगे और एक पीछे—माहौल को और भी गंभीर बना रही थीं। सरताज अपनी IPS यूनिफॉर्म में किसी फौलाद की तरह लग रहा था। 6'2" का कद, कंधे पर चमकते सितारे और नीली पगड़ी उसके व्यक्तित्व में एक अलग ही रौब भर रही थी।
मीरा ने हल्के गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी, जिसका पल्लू सलीके से कंधे पर टिका था। वह ज्योति को आंटी के पास छोड़कर बाहर आई थी।
जैसे ही वे गाड़ी के करीब पहुँचे, सरकारी ड्राइवर ने फुर्ती से सरताज के लिए पीछे का दरवाज़ा खोल दिया। शेर, जो काफी देर से इसी ताक में था, लपककर दूसरी तरफ बढ़ा ताकि वह मीरा के लिए दरवाज़ा खोल सके। वह बस किसी भी तरह मीरा के जिस्म को करीब से निहारने का मौका ढूँढ रहा था।
शेर: (झुककर, विनम्रता के साथ) "आइये मैडम जी..."
जैसे ही मीरा ने गाड़ी के ऊँचे पायदान पर पैर रखकर अंदर चढ़ने की कोशिश की, साड़ी का एक हिस्सा एक तरफ खिंच गया। शेर की आँखें फटी की फटी रह गईं; उसे वह 'बोनस' मिल गया जिसकी उसने उम्मीद भी नहीं की थी। चढ़ते वक्त ब्लाउज के भीतर से मीरा के चूचियों का वह हिस्सा साफ़ झलक उठा, जो किसी को भी मदहोश करने के लिए काफी था। शेर के दिमाग में बिजली सी कौंधी—ये वही चूचियों थी जिन्हें उसने आज सुबह बाथरूम के उस छेद से पूरी नग्नता और जलाल में देखा था।
उसकी नजरें वहीं नहीं रुकीं; जैसे ही मीरा पूरी तरह सीट पर बैठने के लिए झुकी, उसकी साड़ी के पीछे से उसकी गोल 'गाँड' का उभार भी शेर की नज़रों की जद में आ गया। शेर का गला सूखने लगा और उसके शरीर में एक सिहरन दौड़ गई।
ड्राइवर: (इंजन स्टार्ट करते हुए) साब, निकलें?
सरताज: हाँ, चलो।
काफिला निकलता है। आगे वाली सिक्योरिटी कार लीड करती है, सरताज की SUV बीच में, पीछे वाली कार कवर करती है। सड़क पर ट्रैफिक थोड़ा है, लेकिन काफिला तेजी से आगे बढ़ता है। सरताज मीरा से बात कर रहा है।
मीरा ने सरताज की ओर देखा और उसकी मर्दाना शख्सियत पर फिदा होते हुए धीरे से बोली।
मीरा: (मुस्कुराते हुए) "तुम यूनिफॉर्म में कितने हैंडसम लगते हो, सरताज।"
सरताज के चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान तैर गई। उसने अपनी भारी आवाज़ जवाब दिया।
सरताज: "और तुम इस गुलाबी साड़ी में किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही हो।"
यह कहते हुए सरताज का हाथ धीरे से नीचे की ओर फिसला और साड़ी के फॉल के ठीक नीचे, मीरा के नंगे पेट की मखमली त्वचा पर जाकर टिक गया। स्पर्श की उस गरमाहट ने मीरा के बदन में एक बिजली सी दौड़ा दी। सरताज उसके और करीब झुका और उसके कान के पास अपनी गर्म साँसों के साथ फुसफुसाया, "आज रात का इंतज़ार रहेगा..."
गाड़ी के भीतर का माहौल अचानक कामुकता से भर गया। शेर, जो आगे ड्राइवर के बगल में बैठा था, अपनी नज़रें रियर व्यू मिरर पर गड़ाए हुए था। उसका सांस लेना दूभर हो रहा था क्योंकि वह आईने में पीछे की हर हलचल को साफ़ देख पा रहा था।
तभी, सरताज का हाथ साड़ी के नीचे से और ऊपर की ओर बढ़ा और उसने पूरी मजबूती के साथ मीरा के स्तन को अपनी गिरफ्त में ले लिया। अचानक हुए इस हमले से मीरा सकपका गई। उसने फौरन सरताज का हाथ पीछे धकेला और घबराकर ड्राइवर और शेर की ओर देखा।
मीरा: (दबी हुई आवाज़ में) "सरताज... प्लीज। यहाँ नहीं। कोई देख लेगा।"
शेर ने आईने में यह सब देखा और उसकी पैंट के भीतर उसका लंड पत्थर की तरह सख्त होकर तन गया। उसे अपनी जांघों के बीच एक अजीब सी बेचैनी महसूस होने लगी। उसने एक लंबी और भारी सांस ली, उसकी आँखों में हवस की एक चमक थी।
शेर (मन ही मन): "कास... उन चूचियों पे साब के नहीं, मेरे हाथ होते। मज़ा आ जाता मसलने में।"
गाड़ी सड़क पर दौड़ रही थी, लेकिन शेर का दिमाग अभी भी उसी स्पर्श और उन चूचियों पर अटका हुआ था जिन्हें वह अभी-अभी आईने में देख चुका था।
सरताज: (मीरा के पेट पर हाथ रखकर, धीरे से) बच्चा आज कैसा महसूस हो रहा है? कोई तकलीफ तो नहीं?
मीरा: (हाथ सरताज के हाथ पर रखकर) नहीं... आज अच्छा लग रहा है। वो हल्का-हल्का हिल रहा है। लगता है तुम्हारी आवाज सुनकर खुश हो रहा है।
सरताज: (मुस्कुराते हुए) अच्छा? तो सुन लो बेटा... पापा तुम्हारी मम्मी को बहुत प्यार करते हैं।
शेर: (धीरे से ड्राइवर से, ताकि पीछे न सुने) भैया, चंदन भाई का घर कितनी दूर है?
ड्राइवर: (आगे देखते हुए) बस 20-25 मिनट। साब का काफिला है, रास्ता साफ हो जाता है।
कार चल रही है। आगे वाली सिक्योरिटी कार सायरन बजाती है, ट्रैफिक साइड में हो जाता है। सरताज मीरा से बातें कर रहा है—चंदन की तबीयत, पुरानी यादें, आने वाले बच्चे का नाम। मीरा खुश है, सरताज की गोद में सिर टिकाए।
मीरा: (सरताज से) चंदन को पैसे दोगे न? वो कभी नहीं मांगेगा, लेकिन मदद की जरूरत होगी।
सरताज: (गंभीर होकर) हाँ, मैंने पैसे रख लिया है।
काफिला चंदन के मोहल्ले में दाखिल होता है। सड़क संकरी है, लेकिन आगे वाली सिक्योरिटी कार ने पहले से ही रास्ता साफ करवा लिया है। लोग घरों के बाहर खड़े होकर देखते हैं—IPS अफसर का काफिला आया है। सरकारी SUV धीरे-धीरे रुकती है। आगे वाली कार पहले से पार्क हो चुकी है, पीछे वाली कार भी रुक जाती है। दो सिक्योरिटी गार्ड उतरकर चारों तरफ नजर दौड़ाते हैं।
गाड़ी जैसे ही चंदन के घर के सामने रुकी, ड्राइवर और शेर फुर्ती से बाहर निकले। ड्राइवर ने तेज़ी से घूमकर सरताज की तरफ का दरवाज़ा खोला, जबकि शेर लगभग दौड़ता हुआ मीरा की तरफ पहुँचा। उसका पूरा ध्यान सिर्फ और इस बात पर था कि उतरते वक्त मीरा की देह का कोई हिस्सा उसकी नज़रों के सामने आ जाए।
जैसे ही मीरा ने दरवाज़ा खुलने पर अपना पैर बाहर निकाला, साड़ी थोड़ी ऊपर खिसकी और शेर को उसकी गोरी और चिकनी टांगों की एक झलक मिल गई। लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी।
गाड़ी से नीचे कदम रखते वक्त मीरा की सैंडल की हील गाड़ी के पायदान के फ्रेम में फंस गई। मीरा का संतुलन बिगड़ा और वह सीधे ज़मीन की ओर गिरने ही वाली थी।
शेर: (घबराते हुए पर फुर्ती से) "सावधान मैडम जी!"
शेर ने अपनी लंबी बाहें फुर्ती से फैलाकर मीरा को लड़खड़ाने से बचा लिया, लेकिन इस हड़बड़ाहट में उसका एक हाथ सीधे मीरा के नंगे और कोमल पेट पर जा टिका। गिरने के उस अचानक झटके से मीरा की साड़ी का पल्लू भी कंधों से सरक गया था, जिससे शेर की उंगलियां उसकी मखमली त्वचा की गर्माहट को गहराई से महसूस कर पा रही थीं।
मीरा को पूरी तरह संभालने और गिरने से बचाने के लिए, शेर ने अपना दूसरा हाथ भी आगे बढ़ाया और उसे मीरा के चिकने और नंगे पेट पर मजबूती से जमा दिया। अब उसके दोनों बड़े और खुरदरे हाथ मीरा के उस बेहद नाजुक हिस्से को घेरे हुए थे। उनके शरीर एक-दूसरे के इतने करीब आ गए थे कि सांसों की हलचल साफ महसूस हो रही थी।
शेर की हथेलियों में उस स्पर्श ने एक अजीब सी बेचैनी भर दी। मीरा की त्वचा का रेशमी अहसास उसे उकसा रहा था। उसकी उंगलियों में एक सिहरन दौड़ी और उसका मन हुआ कि वह अपने हाथों को धीरे-धीरे ऊपर की ओर ले जाए और उन उभारों को अपनी गिरफ्त में ले ले जो पल्लू खिसकने की वजह से अब और भी स्पष्ट हो गए थे।
सरताज, जो दूसरी तरफ उतर चुका था, यह नज़ारा देख बिजली की गति से मीरा की ओर लपका। उसके चेहरे पर चिंता भाव था। उसने पलक झपकते ही मीरा को शेर की गिरफ्त से खींच लिया और अपनी मज़बूत बाहों में महफूज़ भर लिया।
सरताज: (घबराहट और फिक्र में डूबकर) "मीरा! तुम ठीक तो हो? कहीं चोट तो नहीं लगी? मेरा तो दिल ही बैठ गया था!"
मीरा ने एक गहरी सांस ली। उसके लिए शेर का वह स्पर्श महज़ एक 'हादसे' जैसा था—जैसे कोई गिरते हुए किसी खंभे या दीवार का सहारा ले लेता है। उसे उस स्पर्श में न कोई सिहरन महसूस हुई, न ही उसका शरीर उस छुअन से उबला। उसका पूरा ध्यान और उसकी पूरी संवेदनाएं तो केवल सरताज की बाहों की गर्माहट में सिमटी हुई थीं। उसने जल्दी से अपना सरकता हुआ पल्लू संभाला और उसे सहजता से लपेट लिया।
मीरा: (हाँफते हुए) "हाँ... मैं ठीक हूँ। लगता है सैंडल की हील दरवाजे के फ्रेम में फंस गई थी। वो तो शुक्र है शेर का, इसने ऐन वक्त पर संभाल लिया वरना मैं तो सीधे मुँह के बल गिरती।"
सरताज ने राहत की सांस ली और शेर की तरफ देखा, जो अभी भी उसी मुद्रा में खड़ा था जैसे उसके हाथों में अभी भी मीरा की त्वचा का एहसास बाकी हो।
सरताज: "शाबाश शेर! तूने आज बड़ी अनहोनी टाल दी। बहुत-बहुत शुक्रिया।"
मीरा: (मुस्कुराते हुए) "थैंक यू, शेर।"
शेर: (विनम्रता का नाटक करते हुए) "अरे नहीं साब, ये तो हमारा फ़र्ज़ था। चलिए, हम सामान अंदर ले चलते हैं।"
शेर ने बस अपना सिर झुका लिया और बैग उठा लिया, लेकिन अंदर ही अंदर वह किसी और ही दुनिया में पहुँच चुका था। जिन उंगलियों ने अभी-अभी मीरा के चिकने, नंगे पेट को भींचा था, उनमें अब भी एक अजीब सी झनझनाहट हो रही थी—जैसे कोई बिजली का करंट उसकी रगों में दौड़ गया हो। वह उन चंद सेकंड्स को अपने दिमाग में बार-बार 'रिवाइंड' कर रहा था। उसकी आँखों के सामने बार-बार वही दृश्य घूम रहा था—मीरा का पल्लू सरकना, उसका गोरा पेट, और उसकी अपनी हथेलियों का उस चिकने, नंगे पेट पर मजबूती से जम जाना।
शेर ने अपनी मुट्ठी जोर से भींची, जैसे वह उस छुअन को अपनी हथेलियों में हमेशा के लिए कैद कर लेना चाहता हो। उसे याद आ रहा था कि मीरा का बदन कितना गर्म और उसकी त्वचा कितनी मुलायम थी। उसके मन में एक हूक सी उठी—काश सरताज दो पल और देर से आता। काश वह अपनी उंगलियों को थोड़ा और ऊपर ले जा पाता। उन उभरते हुए जिस्मानी नजारों को छूने की जो तड़प उसके भीतर उठी थी, वह अब एक प्यास बन चुकी थी।
उसके चेहरे पर एक अजीब सी चमक थी, क्योंकि आज उसने वह पा लिया था —मीरा का सीधा स्पर्श।
सरताज: (सिर हिलाकर) हाँ शेर, चलो।
वे तीनों चंदन के छोटे से घर की ओर बढ़ते हैं। दरवाजा खुला है। चंदन अंदर बिस्तर पर लेटा है, कमजोर लेकिन मुस्कुराता हुआ। उसकी पत्नी दरवाजे पर खड़ी है।
चंदन: (बिस्तर से उठने की कोशिश करते हुए, हैरान होकर) सरताज साब? मीरा बीबी? और शेर भी? अरे वाह... इतना बड़ा काफिला मेरे लिए?
सरताज: (अंदर जाकर, चंदन के कंधे पर हाथ रखते हुए) अरे चंदन, उठने की कोशिश मत कर। हम बस तेरे हाल-चाल पूछने आए हैं। डॉक्टर ने क्या कहा? दवाईयां ले रहा है?
चंदन: (कमजोर मुस्कान के साथ) साब... आप आए, बस यही काफी है। हाँ, दवाईयां चल रही हैं। थोड़ा बेहतर हूं। लेकिन आप... इतनी सिक्योरिटी के साथ?
सरताज: (हंसते हुए) आदत है यार। काम का बोझ। लेकिन आज सिर्फ दोस्त के घर आया हूं।
मीरा: (चंदन के पास बैठकर, प्यार से) चंदन जी, आप जल्दी ठीक हो जाइए। घर की जिम्मेदारी बहुत है। शेर अच्छे से संभाल रहा है, लेकिन आपका होना जरूरी है।
चंदन: (मीरा को देखकर, आंखें नम) मीरा बीबी... आपका आशीर्वाद है। और शेर... तूने तो मेरी जगह ले ली। धन्यवाद भाई।
सरताज: "वैसे चंदन, तेरा ये भाई शेर बड़ा फुर्तीला है। आज अगर ये नहीं होता, तो बड़ा अनर्थ हो जाता। गाड़ी से उतरते वक्त मीरा का संतुलन बिगड़ गया था, वह तो शुक्र है शेर का कि इसने ऐन वक्त पर इसे गिरने से बचा लिया।"
मीरा: (मुस्कुराते हुए और बात को आगे बढ़ाते हुए) "हाँ चंदन जी, सरताज सही कह रहे हैं। मेरी सैंडल की हील फंस गई थी और मैं बस गिरने ही वाली थी। थैंक यू शेर, तुमने आज मुझे बहुत बड़ी चोट से बचा लिया।"
चंदन ने गर्व और कृतज्ञता से शेर की ओर देखा।
चंदन: "मीरा बीबी... आपका आशीर्वाद है। और शेर... तूने तो सच में मेरा सीना चौड़ा कर दिया। मेरा भाई बनकर तूने मेरी जगह ले ली। धन्यवाद भाई।"
शेर ने बड़े ही विनम्र भाव से सिर झुका लिया, जैसे कोई वफादार सेवक हो। लेकिन उसके भीतर वासना का एक सैलाब उमड़ रहा था। उसे चन्दन की बातें खोखली लग रही थीं।
शेर के मन की बात: जगह? तू क्या मेरी जगह की बात कर रहा है चन्दन... जगह तो मैं मीरा की चूत में बनाना चाहता हूँ, सरताज की जगह! तेरे भाईचारे की मुझे परवाह नहीं, मुझे तो बस उस रेशमी बदन का स्वाद चाहिए जिसे मैंने अभी कुछ पल पहले अपनी बाहों में महसूस किया था।
शेर की उंगलियों में अभी भी मीरा के उस नंगे, मुलायम पेट का अहसास ज़िंदा था, और उसका मन बस उस पल को पूरी तरह जीने के लिए बेताब था।
शेर: (सिर झुकाकर, विनम्र) चंदन भाई... आप फिकर मत करो। मैं सब संभाल रहा हूं। आप बस ठीक हो जाओ।
शेर के मन की बात: अरे चंदन... तू बस थोड़े दिन और वहीं पड़ा रह। यहाँ मैं मीरा को और मीरा के इस कयामत भरे बदन को पूरी तरह संभाल रहा हूँ... और यकीन मान, बहुत अच्छे से संभाल रहा हूँ।
सरताज: (लिफाफा चंदन के हाथ में थमाते हुए) "ये ले चंदन... दवाइयों के लिए और घर के छोटे-मोटे खर्चों के लिए है।"
चंदन की आँखें भर आईं, उसने कांपते हाथों से उस लिफाफे को देखा। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या कहे।
चंदन: (रुंधे हुए गले से, भावुक होकर) "साब... ये... मैं... इतना एहसान कैसे..."
सरताज ने फौरन चंदन के कंधे पर हाथ रखा और बड़ी सादगी से मुस्कुराया।
सरताज: (अपनत्व भरे लहजे में) "बस चंदन, अब और कुछ मत कहना। मैंने तुझे हमेशा अपने परिवार का हिस्सा माना है, बिलकुल एक फैमिली मेंबर की तरह। और अपनों से कोई 'ना' नहीं सुनता। रख ले इसे।"
मीरा: (चंदन की पत्नी से बात करते हुए) भाभी जी, आप भी परेशान मत होना। हम सब साथ हैं।
तभी मीरा ने महसूस किया कि उसकी सैंडल की हील अभी भी थोड़ी लचक रही है। वह एक तरफ झुककर उसे देखने लगी। शेर तुरंत फर्श पर मीरा के पैरों के पास झुककर बैठ गया।
शेर: "मैडम जी, लगता है पायदान में फंसने से हील टेढ़ी हो गई है। आप कहें तो हम देख लें?"
उसने बड़े ही हक से मीरा का कोमल पैर अपने हाथ में लिया। उसकी उंगलियाँ मीरा के मखमली टखनों को छू रही थीं और उसकी नज़रें साड़ी के नीचे से झलकती मीरा की गोरी पिंडलियों पर जमी थीं। सैंडल ठीक करने के बहाने उसने अपनी हथेली को मीरा के तलवे के पास हल्के से रगड़ा, जिससे मीरा के बदन में एक सिहरन दौड़ गई।
शेर: (धीमी आवाज़ में) "बस हो गया मैडम जी... अब आप बेफिक्र होकर चल सकती हैं।"
कुछ देर बातें होती हैं। पुरानी यादें, हंसी-मजाक। शेर चुपचाप खड़ा है, लेकिन उसकी नजरें मीरा पर टिकी हैं—साड़ी का पल्लू हल्का सरका है, मीरा उसे ठीक करती है।
सरताज: (घड़ी देखकर) ठीक है चंदन, अब हमें निकलना है। मैं ऑफिस जा रहा हूं। मीरा और शेर वापस घर जाएंगे। तू आराम कर। जल्दी ठीक हो जा।
चंदन: (हाथ जोड़कर) साब... शुक्रिया। मीरा बीबी... आपका भी। शेर... तू संभाल लेना सब।
शेर: (मुस्कुराकर) जी भाई... आप फिकर मत करो।
चंदन के घर से बाहर निकलते ही सरताज की सुरक्षा का घेरा फिर से सक्रिय हो गया। काली SUV और पीछे तैनात इनोवा के गार्ड मुस्तैद हो गए। सरताज ने मीरा का हाथ थाम रखा था, और शेर उनके पीछे-पीछे चल रहा था।
सरताज: (मीरा की आँखों में देखते हुए) "अब तुम शेर के साथ घर लौट जाओ। मुझे कुछ ज़रूरी फाइल्स देखनी हैं, इसलिए मैं ऑफिस से सीधा घर आऊँगा।"
मीरा: (मुस्कुराते हुए सरताज के करीब आई और उसके गाल पर एक हल्का सा प्यार भरा चुंबन दिया) "ठीक है। अपना ख्याल रखना और तुम भी जल्दी आना... मैं इंतज़ार करूँगी।"
सरताज: (उसके माथे को चूमते हुए) "हाँ मेरी जान।"
गाड़ी के पास पहुँचते ही सरताज ने खुद आगे बढ़कर मीरा के लिए पिछला दरवाज़ा खोला। शेर, जो बगल में खड़ा होकर मीरा को फिर से ऊपर चढ़ते हुए 'उस' खास कोण से निहारने की ताक में था, इस बार नाकाम रहा। सरताज का 6'2" का चौड़ा और भारी जिस्म शेर और मीरा के बीच एक दीवार की तरह खड़ा हो गया।
शेर ने तिरछी निगाहों से देखने की कोशिश की, लेकिन सरताज की वर्दी वाले चौड़े कंधों ने उसका पूरा नज़ारा रोक दिया था। उसे न तो साड़ी के सरकने का कोई नज़ारा दिखा और न ही मीरा की देह की कोई झलक। सरताज ने बड़े ही सलीके से मीरा को अंदर बिठाया और खुद दरवाज़ा मजबूती से बंद कर दिया।
शेर मन ही मन कुढ़ कर रह गया, "धत तेरे की... साब ने सारा खेल बिगाड़ दिया।"
सरताज अपनी मुख्य SUV में नहीं बैठा; उसने ड्राइवर को इशारा किया और खुद आगे खड़ी सिक्योरिटी वाली इनोवा में सवार हो गया ताकि वह सीधे ऑफिस जा सके। अब बड़ी सरकारी SUV में केवल मीरा, शेर और ड्राइवर रह गए थे।
मीरा पीछे की सीट पर अकेली बैठी थी, और शेर ड्राइवर के बगल वाली अगली सीट पर जा बैठा।
शेर: (ड्राइवर से धीरे से) भैया, घर चलें?
ड्राइवर: हाँ...।
गाड़ी तेज़ी से सड़क पर दौड़ रही थी। पीछे वाली सिक्योरिटी कार अब भी साथ थी, लेकिन आगे वाली सुरक्षा हट चुकी थी। मीरा पीछे की सीट पर शांत बैठी खिड़की से बाहर देख रही थी, जबकि शेर का पूरा ध्यान रियर व्यू मिरर पर था।
आईने में उसे मीरा की साड़ी का वह हल्का गुलाबी पल्लू और उसकी कमर का वह मदहोश कर देने वाला मोड़ साफ़ नज़र आ रहा था। शेर का हाथ अभी भी उस स्पर्श से झनझना रहा था जब उसने कुछ देर पहले मीरा के नंगे पेट को छुआ था। उसे याद आ रहा था कि वह त्वचा कितनी रेशमी और मखमली थी। उसका मन कर रहा था कि काश वह पल कभी खत्म न होता।
उसकी हवस एक बार फिर उफान मार रही थी, लेकिन तभी उसे सरताज की वह गरजती हुई आवाज़ और उनका खौफनाक चेहरा याद आ गया—"मैं सिख हूँ!" शेर ने डर के मारे पल भर के लिए अपनी नज़रें झुका लीं, लेकिन उसका ज़हरीला दिमाग शांत नहीं हुआ।
मीरा: (सहज आवाज़ में) "शेर, चंदन जी को देखकर ऐसा लगा कि वो काफी हद तक ठीक हो चुके हैं। उम्मीद है कि वो जल्द ही काम पर लौट आएंगे।"
शेर ने आईने में फिर से मीरा की आँखों में झाँका। उसकी आवाज़ में मिठास थी, पर दिमाग में ज़हर।
शेर: "जी मेमसाब... बहुत जल्द। चंदन भाई के वापस आने से घर की रौनक लौट आएगी।"
शेर के मन की बात: साला, ये तो मेरे लिए बुरी खबर है। उसके वापस आने से पहले मुझे तेज़ी से हाथ-पाँव मारने होंगे। इससे पहले कि वो यहाँ आकर टाँग अड़ाए, मुझे जल्दी से मेमसाब के बदन को चखना है... इस रेशमी जिस्म का सुख भोगना है।
गाड़ी की रफ्तार के साथ शेर की हिम्मत भी बढ़ने लगी। उसने धीरे से पीछे मुड़कर मीरा की ओर देखा। उसकी नज़रें मीरा की आँखों से फिसलकर उसके ब्लाउज़ में कसे हुए उन चुचियों पर जा टिकीं, जिन्हें वह सुबह ही पूरी नग्नता में देख चुका था।
शेर: "मीरा मैडम... अगर हम बुरा न कहें तो एक बात पूछें?"
मीरा ने खिड़की से नज़र हटाई और शेर की तरफ देखा, "क्या बात है शेर? पूछो।"
शेर: (अपनी नज़रों से मीरा की देह को स्कैन करते हुए) "मैडम जी... क्या आपको पता है कि आने वाला बच्चा लड़का है या लड़की?"
मीरा: "नहीं शेर, हमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। बस बच्चा सेहतमंद होना चाहिए।"
मीरा ने मुस्कुराते हुए अपने पेट पर हाथ रखा—वही हिस्सा जिसे कुछ ही देर पहले शेर ने अपनी सख्त उंगलियों से भींचा था। वह अनजाने में ही अपने नंगे पेट को सहला रही थी, जैसे अपनी कोख में पल रहे बच्चे की नब्ज और उसकी हलचल को महसूस करने की कोशिश कर रही हो। उसे इस बात का रत्ती भर भी इल्म नहीं था कि उसकी यह ममता भरी हरकत शेर के लिए किसी आग में घी डालने जैसी थी।
शेर की निगाहें भूखे भेड़िए की तरह मीरा के उस बेपर्दा हिस्से पर गड़ गई थीं। पल्लू के हट जाने से अब उसके सामने मीरा का गोरा और चिकना पेट पूरी तरह नुमाया था। जब मीरा की उंगलियां अपनी मखमली त्वचा पर धीरे-धीरे घूम रही थीं, तो शेर को ऐसा लगा मानो वह उंगलियां मीरा की नहीं, बल्कि उसकी अपनी हों। उसके लिए यह किसी 'बोनस' से कम नहीं था—बिना किसी रुकावट के उस नज़ारे को जी भर कर देखना, जिसका स्पर्श अभी भी उसकी हथेलियों में सुलग रहा था।
शेर: (एक गहरी और भारी सांस लेते हुए) "सच कहें मैडम... आपको देखकर कोई कह ही नहीं सकता कि आप तीन महीने की प्रेग्नेंट हैं। आप अभी भी उतनी ही जवान और खूबसूरत लगती हैं।"
मीरा ने शरमाते हुए, "अरे, तुम भी न शेर... कुछ भी कहते हो।"
मीरा को अचानक अहसास हुआ कि बातचीत के दौरान उसका पल्लू काफी खिसक गया है और उसका पेट नुमाया हो रहा है। उसे थोड़ा अटपटा लगा, और एक हल्की सी झेंप के साथ उसने तुरंत अपना हाथ बढ़ाकर साड़ी के पल्लू को ठीक किया। उसने पल्लू को खींचकर अपने बदन को पूरी तरह ढका और मर्यादा बहाल की।
घर पहुँचते ही शेर ने फुर्ती से उतरकर मीरा के लिए दरवाज़ा खोला। इस बार वह कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता था। जैसे ही मीरा उतरने लगी, शेर ने बड़ी शालीनता का नाटक करते हुए अपना हाथ आगे बढ़ा दिया।
शेर: "मैडम जी, हमारा हाथ पकड़ लीजिए। आप अभी गिरने से बची हैं, हम फिर से कोई रिस्क नहीं ले सकते। आपकी और छोटे साब (बच्चे) की सलामती हमारे लिए सबसे पहले है।"
मीरा ने उसकी बात मान ली और शेर का हाथ थामकर गाड़ी से नीचे उतरने लगी। जैसे ही उसने अपना पैर पायदान पर रखा, उसकी साड़ी काफी ऊपर तक खिंच गई, जिससे शेर को उसकी गोरी और सुडौल टांगों का पूरा दीदार हुआ। शेर की साँसें भारी होने लगीं।
उतरते वक्त, मीरा थोड़ा आगे की ओर झुकी, जिससे साड़ी का पल्लू ढीला होकर एक तरफ लटक गया। शेर की आँखों के ठीक सामने मीरा के चुचियों का साइड व्यू था, जो ब्लाउज़ में कसकर अपनी पूरी गोलाई दिखा रहे थे। और ठीक उसके नीचे, उसका वह नंगा पेट और गहरी नाभि साफ़ झलक रही थी, जिसे शेर ने कुछ देर पहले ही महसूस किया था। धूप की रोशनी में मीरा की त्वचा और भी ज़्यादा चमक रही थी।
शेर का जी किया कि वह हाथ न छोड़े, लेकिन उसे खुद पर काबू पाना था।
मीरा: "शुक्रिया शेर। तुम वाकई बहुत ख्याल रखते हो।"
शेर: (दबे हुए स्वर में, नज़रें नीची किए हुए) "जी मेमसाब...।"
मीरा मुस्कुराते हुए अपने सैंडल की खट-खट के साथ अंदर चली गई। शेर वहीं खड़ा उसे पीछे से निहारता रहा—उसकी कमर का वह बल और साड़ी के नीचे से उभरती उसकी गाँड की हरकत। सरताज की वर्दी, उसकी रिवॉल्वर और उसकी कड़क आवाज़ शेर के दिमाग में एक पल के लिए कौंधी, लेकिन मीरा की देह का वह नज़ारा उस डर पर भारी पड़ रहा था।
शेर (मन ही मन): ‘सरताज साब... आप मीरा की हिफाजत करते रहो। लेकिन वो मेरी आंखों में पहले से कैद है। अब बस मौका चाहिए... एक अकेला मौका।’
Deepak Kapoor
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