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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#45
लंड चूसते चूसते सरिता ने राजू से कहा- तू ऐसे देखता रहेगा भोसड़ी के, कुछ तू भी तो कर … मादरचोद मुझे चोदने आया है या मेरी आरती उतारने? अब शर्मा मत और मजे दे मुझे!. अब राजू की भी हिम्मत बढ़ गई.

उसने सरिता को लिटाया और उसकी चूत में दो उंगलियाँ घुसा दी और धीरे-धीरे उन्हें अंदर बाहर करने लगा सरिता तो तड़प उठी. ऐसा सुख उसे उसके दोनों पतियों ने किसी ने नहीं दिया था.
राजू ने अपना एक हाथ नीचे किया और सरिता के चूत के दाने को मसलने लगा. सरिता की चूत पहले से गीली हुई पड़ी थी. चूत का दाना मसलने से सरिता और ज़्यादा तड़प उठी .अब तो सरिता राजू का लंड अन्दर लेने के लिए मचल रही थी. उसका धैर्य अब जवाब देना लगा था वो अब चाहती थी राजू जल्दी उसकी तपती चूत में अपना लौड़ा घुसा कर उसकी गर्मी को शांत कर दे. राजू का हाथ पकड़ वो बोली।" बस राजू अब उंगली से और नहीं...मेरी चूत पानी छोड देगी। मैं तेरी उंगली से नहीं तेरे लंड से चुद कर झड़ना चाहती हूँ ! अब और मत तड़पा राजू और अपने लौड़े से मेरी चूत की धुनाई चालू कर दे और इसकी बरसों की प्यास बुझा दे .. और हां इतना लंबा और मोटा लौड़ा मैंने कभी नहीं लिया है अपनी चूत में...जरा आराम से घुसाना धीरे धीरे मेरी चूत में अपना ये हल्लाबी लंड और तेरा लंड लेते हुए शायद मैं चिल्ला दू..लेकिन तू रुकना मत और अगर लालाजी की आंखें खुल जाएं तो इधर बिस्तर के नीचे छिप जाना, बाकी मैं संभाल लूंगी.”


“हां मालकिन..बड़े आराम से घुसाऊंगा अपना लंड। आप चिंता मत करो “ इतना बोल राजू उठ कर सरिता की जांघों के बीच आ गया और अपना लौड़ा सरिता की चूत की फाँको पे रगड़ने लगा.

“मादरचोद अब इसे रगड़ता ही रहेगा या मेरी चूत की ठुकाई चालू करेगा। नीचे चूत में आग लगी पड़ी है। ऐसा लग रहा है जैसे सैकड़ों चींटियाँ काट रही हो... और तुझे मस्ती सूझ रही है”

सरिता ने राजू के लंड को अपने हाथ से अपनी फुद्दी के छेद में फ़िट किया और तभी राजू ने ठोकर मार दी. राजू के लंड का सुपाड़ा सरिता की चूत में बोतल में कॉर्क के जैसा फिट हो गया.. सरिता जैसी पहले से चुदी हुई औरत की भी इतना मोटा सुपाड़ा घुसते ही सरिता हल्की-सी कराह उठीं- आहह्ह! …. आराम से राजू...मैं कहीं भागी नहीं जा रही...पूरी रात है अपनी पास मस्ती के लिए.

राजू ने लंड का सुपाड़ा बाहर निकल के फिर से लंड चूत की गिली फ़ांको पे टिकाया और जोर का धक्का दे दिया. इस बार चूत को चीरते हुए लंड चार इंच अन्दर तक चला गया.

सरिता चीखती हुई बोलीं- साले मादरचोद … आराम से नहीं डाल सकता था क्या?

राजू ने हंस कर सरिता की चुची को सहलाया, उनको होंठों को चूसा और फिर से एक जोरदार धक्का मारा, जिससे राजू का लंड आधे से ज़्यादा घुस गया.लंड के घुसते ही सरिता की चीख निकल पड़ीं- ईईईई मर गई आह …उसकी चीख सुनकर राजू के अन्दर और जोश आ गया. उसने लंड को हल्का-सा बाहर खींचकर एक और जोरदार धक्का मारा, जिससे उसका पूरा लंड अबकी बार सरिता की चूत में समा गया.

सरिता की और जोरदार चीख निकल पड़ी- आआह आह … मर गई आह!!! उसकी आंखों से आंसू आ गए.

राजू ने अपने आपको रोका और सरिता के होंठों को चूमने लगा, साथ ही उसकी चूचियों को चूसने लगा.

इससे सरिता को दर्द में थोड़ा आराम मिल गया.

कुछ मिनट बाद ही सरिता ने अपनी गांड को ऊपर-नीचे हिलाकर राजू को चोदना का इशारा दे दिया. सरिता की गांड के हिलने की वजह से राजू समझ गया कि अब सरिता को चोदना शुरू करना चाहिए. राजू ने सरिता का इशारा पाकर जोर से झटके मारने चालू कर दिये

राजू पूरा लंड सरसराता हुआ सरिता की चूत में अन्दर तक ठोकर मार रहा था.

राजू ने सरिता की एक टांग को अपने कंधे पर रखा और दूसरी को बिस्तर पर ही रहने दिया, फिर धीरे-धीरे धक्के मारने लगा. सरिता को हल्का दर्द के साथ मज़ा भी आ रहा था. वो ‘आह … आह …’ जैसी आवाज़ें निकाल रही थीं.

फिर राजू ने सरिता की दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखा और दोनों हाथों को क्रॉस में एक हाथ से पकड़ लिया और दूसरे हाथ से उसकी चूचियों को सहलाते हुए कभी तेज़-तेज़ तो कभी धीरे-धीरे सरिता की चूत में लंड पेलने लगा.

सरिता भी इस चुदाई का आनन्द लेने लगीं और ‘आहह आहह्ह्ह और तेज़ चोदो मेरी जान!’ जैसी आवाज़ें निकालने लगीं.

कुछ पल बाद राजू ने पोज़ीशन बदली और सरिता को बिना लंड निकाले अपने ऊपर ले लिया.

वो बोला....मल्किन अब आपकी बारी है। आप मेरे ऊपर आके मेरे लंड पर बैठ कर चुदाई करवाओ सरिता उसकी आँखों में शरारत से देखती हुई बोली...वाह राजू। मैं तो सोची थी कि चुदाई के खेल में तू अभी अनाड़ी होगा लेकिन तू तो एक दम शातिर खिलाड़ी है रे..कहां से सिखाया ये सब! सरिता ने राजू को हटाया और नीचे लिटाया.वह उसके लंड के ऊपर चढ़ गई, अपने हाथों से उसका लंड अपनी चूत के ऊपर सैट किया और अन्दर धकेला. सरिता को ऐसा अहसास हुआ मानो वह सातवें आसमान पर पहुंच गयी हो. वह संभल कर और कसके नीचे होकर बैठी तो लंड उसकी बच्चेदानी को छू गया. फिर सरिता ने राजू के दोनों हाथों को अपनी कमर से हटाकर अपनी चूचियों पर रख लिये और अपने हाथों को राजू के सीने पर रखकर उसके लंड पर कूदने लगीं. अब सरिता धीरे धीरे गांड उछालने लगी और राजू को भी गांड उछालने को उकसाती रही. अभी दोनों की चुदाई ने रफ़्तार नहीं पकड़ी थी. सरिता राजू से बोली- हरामी, ऊपर तो बड़ी जोर से पेलम पाल कर रहा था, यहां तेरी क्यों फटी पड़ी है?

राजू ने इस पर सरिता को कमर से पकड़ा और नीचे से एक जोर का धक्का मार कर लंड पेल दिया. आखिर सरिता ने उसकी मर्दानगी को छेड़ा था.

उसने जल्दी ही सरिता की आहें निकाल दीं. सरिता अपनी गांड ऊपर तक उठा कर लंड ले रही थी और राजू भी नीचे से झटके दे दे कर उसकी चूत का बाजा बजा रहा था.

सरिता भूल गयी कि बगल में लालाजी सो रहे हैं. वह राजू को और जोर से करने के लिए उकसा रही थी.

राजू ने स्पीड बढ़ा दी;
कुछ देर बाद राजू ने सरिता को बिस्तर पर घोड़ी बना दिया राजू !सरिता के चूतड़ों से खेलने लगा उसके पीठ को चूमते हुए कमर को चूमा फिर धीरे धीरे उसके चूतड को मसलता हुआ उनके साथ खेलने लगा. उसने फिर लंड पर थोड़ा थूक लगाया और उसकी गांड की गोलाइयों को पकड़ कर एक ही झटके में लंड उसकी चूत में डाल दिया. लंड धीरे धीरे गहराई में घुसता चला गया!

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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 23-01-2026, 05:44 PM



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