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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#43
अब आगे…
दस पंद्रह मिनट तक सरिता की चूत की अच्छे से चुसाई करने के बाद राजू उठ खड़ा हुआ. राजू ने अपना अंडरवियर उतारा और बिस्तर पर सरिता के पास जाकर बैठ गया. उसने सरिता का हाथ पकड़ के अपने लंड पर रख दिया. सरिता ने लंड को पकड़ा और देखने लगी! राजू का लंड इतने करीब से देख कर सरिता मुंह खुला का खुला ही रह गया. दस इंच लम्बा लंड देख कर सरिता डर ही गई. सरिता उसका लंड पकड़ बोली- “हे भगवान ये क्या है. ये किसी इंसान का लंड है या किसी गधे का. अब समझ में आया कि रिशा तेरे से चुद क्यों गयी! क्या जवान और शानदार लंड है तेरा. तू तो किसी अधेड़ उम्र की औरत की चूत की भी धज्जिया उड़ा देगा... रिशा तो बेचारी अभी नई ब्याही है।”
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 23-01-2026, 05:39 PM



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