22-01-2026, 01:45 PM
सरिता की आँखों में अब कोई हिचकिचाहट नहीं थी, बस भूख थी जो पूरी तरह राजू की मर्दानगी पर टिकी थीं। वो धीरे से बोली
तेरे अंदर जो ताक़त है, वो मैंने किसी और में कभी महसूस नहीं की। जितने जोश और बेरहमी से तू रिशा को पेल रहा था वही जोश और मर्दंगी मैं भी महसूस करना चाहती हूं
आज मैं इसे पूरी तरह अपना बनाकर ही चैन लूँगी।” इतना कहकर सरिता ने अपने नर्म होंठ राजू के होठों पर रख दिए और अपना हाथ नीचे राजू के अंडरवियर में घुसा उसका लंड पकड़ लिया। उसकी गर्म साँसें राजू को उत्तेजीत कर रही थी. वो राजू के लंड पर हाथ फेरते हुए फुसफुसाई —“तुम्हारा यह जोश… यही तो मुझे चाहिए था। आज रात मैं खुद को पूरी तरह तुम्हारे हवाले कर दूँगी।”
उसकी बातें सुनकर राजू का भी लहू खौल उठा।
वासना के वशीभूत होकर सरिता अपने हाथों से खुद अपने ही मम्मे मसलने लगी. फिर सरिता ने राजू का एक हाथ पकड़ कर अपनी चूची पर रख दिया और बोली...राजू इन्हें अपने हाथों से मसल के देख।
सरिता दो दो मर्दों से चुदी हुई थी. उसके मम्मे रिशा के मुकाबले मांसल थे.
राजू ने झट से सरिता के नरम गोल चूचो को अपने हाथों में दबा लिया और उन्हें बेदर्दी से मसलने लगा। इतने नरम मुलायम चूचे उसने आज तक नहीं देखे थे। धीरे से उसने अपने मुँह में नीचे लिया और सरिता की एक चुची को अपने मुँह में भर लिया और दूसरे हाथ से दूसरी चुची की घुंडी मसलने लगा. उफ्फ्फ..राजू बस ऐसे ही चूस। बड़ा तंग करती है ये कमिनी चुचिया मुझे। आज इनकी सारी अक्कड़ ख़तम कर दे. राजू को भी सरिता की गोलाईया चूसने में बड़ा मजा आ रहा था। कभी वो एक मम्मे को चूसता और कभी दूसरा.
धीरे-धीरे वो मम्मो को चूसता हुआ नीचे की तरफ जाने लगा। सरिता की कमर से होते हुए वो सरिता की नंगी चूत तक जा पाहुंचा.
राजू का एक हाथ पकड़ सरिता ने अपनी चूत के ऊपर रख दिया और बोली देख कैसी गीली हुई पड़ी है तेरी मालिकिन की चूत. एक बार अपनी जीभ से चाट कर इस निगोड़ी चूत का भी रस चख कर देख। देख कैसे पानी बह रही है तेरी मर्दानगी देख कर. सरिता आज खुल कर सेक्स का मजा लेना चाहती थी
राजू का डर भी अब ख़तम हो चूका था। वो समझ चुका था कि रिशा की तरह सरिता भी जवानी की आग में जल रही है और चुदने को बेकरार है . उसने भी और देर ना करते हुए सरिता की टांगों को खोल सरिता की टपकती हुई चूत को अपनी मुट्ठी में भर कर दबा लिया.
सरिता की चूत का मुंह रिशा की चूत से हल्का ज्यादा खुला था लेकिन सरिता की चूत रिशा से ज्यादा फूली हुई और मजेदार लग रही थी. ज्यादा देर ना करते हुए उसने अपने होठों को सरिता की तपती हुई चूत के ऊपर रख दिया... होठों का स्पर्श पाते ही सरिता तड़प उठी। तपती हुई चूत पर राजू की गरम सांसें जैसे आग में घी का काम कर रही थी. राजू की जीभ सरिता की चूत के कामरस से भीगी फाँको पे चलने लगी. कमरे का सन्नाटा अब सिर्फ़ सरिता की कराहों और उन दोनों की तेज चलती हुई साँसों से भर चुका था। सरिता मस्ती से करहाती हुई राजू का सर अपनी चूत पर दबाने लगी.....चाट राजू. चाट …आज इस चूत का सारा रस पी जा.
तेरे अंदर जो ताक़त है, वो मैंने किसी और में कभी महसूस नहीं की। जितने जोश और बेरहमी से तू रिशा को पेल रहा था वही जोश और मर्दंगी मैं भी महसूस करना चाहती हूं
आज मैं इसे पूरी तरह अपना बनाकर ही चैन लूँगी।” इतना कहकर सरिता ने अपने नर्म होंठ राजू के होठों पर रख दिए और अपना हाथ नीचे राजू के अंडरवियर में घुसा उसका लंड पकड़ लिया। उसकी गर्म साँसें राजू को उत्तेजीत कर रही थी. वो राजू के लंड पर हाथ फेरते हुए फुसफुसाई —“तुम्हारा यह जोश… यही तो मुझे चाहिए था। आज रात मैं खुद को पूरी तरह तुम्हारे हवाले कर दूँगी।”
उसकी बातें सुनकर राजू का भी लहू खौल उठा।
वासना के वशीभूत होकर सरिता अपने हाथों से खुद अपने ही मम्मे मसलने लगी. फिर सरिता ने राजू का एक हाथ पकड़ कर अपनी चूची पर रख दिया और बोली...राजू इन्हें अपने हाथों से मसल के देख।
सरिता दो दो मर्दों से चुदी हुई थी. उसके मम्मे रिशा के मुकाबले मांसल थे.
राजू ने झट से सरिता के नरम गोल चूचो को अपने हाथों में दबा लिया और उन्हें बेदर्दी से मसलने लगा। इतने नरम मुलायम चूचे उसने आज तक नहीं देखे थे। धीरे से उसने अपने मुँह में नीचे लिया और सरिता की एक चुची को अपने मुँह में भर लिया और दूसरे हाथ से दूसरी चुची की घुंडी मसलने लगा. उफ्फ्फ..राजू बस ऐसे ही चूस। बड़ा तंग करती है ये कमिनी चुचिया मुझे। आज इनकी सारी अक्कड़ ख़तम कर दे. राजू को भी सरिता की गोलाईया चूसने में बड़ा मजा आ रहा था। कभी वो एक मम्मे को चूसता और कभी दूसरा.
धीरे-धीरे वो मम्मो को चूसता हुआ नीचे की तरफ जाने लगा। सरिता की कमर से होते हुए वो सरिता की नंगी चूत तक जा पाहुंचा.
राजू का एक हाथ पकड़ सरिता ने अपनी चूत के ऊपर रख दिया और बोली देख कैसी गीली हुई पड़ी है तेरी मालिकिन की चूत. एक बार अपनी जीभ से चाट कर इस निगोड़ी चूत का भी रस चख कर देख। देख कैसे पानी बह रही है तेरी मर्दानगी देख कर. सरिता आज खुल कर सेक्स का मजा लेना चाहती थी
राजू का डर भी अब ख़तम हो चूका था। वो समझ चुका था कि रिशा की तरह सरिता भी जवानी की आग में जल रही है और चुदने को बेकरार है . उसने भी और देर ना करते हुए सरिता की टांगों को खोल सरिता की टपकती हुई चूत को अपनी मुट्ठी में भर कर दबा लिया.
सरिता की चूत का मुंह रिशा की चूत से हल्का ज्यादा खुला था लेकिन सरिता की चूत रिशा से ज्यादा फूली हुई और मजेदार लग रही थी. ज्यादा देर ना करते हुए उसने अपने होठों को सरिता की तपती हुई चूत के ऊपर रख दिया... होठों का स्पर्श पाते ही सरिता तड़प उठी। तपती हुई चूत पर राजू की गरम सांसें जैसे आग में घी का काम कर रही थी. राजू की जीभ सरिता की चूत के कामरस से भीगी फाँको पे चलने लगी. कमरे का सन्नाटा अब सिर्फ़ सरिता की कराहों और उन दोनों की तेज चलती हुई साँसों से भर चुका था। सरिता मस्ती से करहाती हुई राजू का सर अपनी चूत पर दबाने लगी.....चाट राजू. चाट …आज इस चूत का सारा रस पी जा.


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