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Misc. Erotica महीन को अपने रंग में रंग दिया
#12
पार्ट 4: सहेलियों की बातों का असर और नेहा की स्टोरी

)होली पार्टी से लौटकर माहीन का मन शांत नहीं था। घर पहुंचते ही उसने दरवाजा बंद किया और बेड पर गिर पड़ी। आँखें बंद करके वो सहेलियों की बातें याद करने लगी — नेहा की आजादी वाली बातें, प्रिया का dhaर्म का जिक्र, फातिमा और रिया की सेक्स के मजों वाली डिटेल्स। "ये क्या सुन लिया मैंने?
नेहा कह रही थी हॉट बनो, सेक्सी फील करो... क्या मतलब? मैं तो कभी सोचती भी नहीं। लेकिन... कैसा लगता होगा? क्या मैं भी कभी खुद को ऐसे देख सकती हूँ — हॉट, सेक्सी, आजाद?
फ...सल, तुम दूर हो, लेकिन तुम्हारी याद मुझे रोक रही है। लेकिन ये बातें... क्यों दिल छू रही हैं?" उसकी साँसें तेज हो गईं, आँखों में आँसू आ गए। फातिमा की वो फुसफुसाहट याद आई — "हिं**** लड़के से ट्राई किया... हलाल छोड़कर हराम, लेकिन वो खुशी... स्वर्ग।"

माहीन सिहर गई, बदन में एक अजीब सी गर्माहट, लेकिन साथ में गिल्ट की लहर। Faisal मुझे माफ करना। ये गुनाह है। लेकिन क्यों मन नहीं मान रहा? रिया की बातें — हिं**** से रिलेशन, कोई बंदिश नहीं, बॉडी काँपती, ऑर्गैज्म बार-बार। क्या फ...सल के साथ भी ऐसा होता? नहीं, वो तो बस नॉर्मल... लेकिन ये डिटेल्स... क्यों जिज्ञासा बढ़ रही है? क्या मैं कमजोर हूँ? या अकेलापन मुझे तोड़ रहा है?" उसका दिल तेज धड़क रहा था, छाती में दर्द सा।

प्रिया की बातें — "***** धर्म में औरतें देवी हैं, कोई सख्ती नहीं।" माहीन सोचती, "क्या मेरे मजहब में ऐसी आजादी नहीं? मैं क्यों बंधी हूँ? फ...सल, अगर तुम यहां होते तो शायद ये ख्यालात नहीं आते। लेकिन अब... क्या ये सहेलियाँ सही हैं? धीरे-धीरे ट्राई करो... लेकिन मैं? क्या मैं बदल सकती हूँ? Upperwale मुझे ताकत दो, लेकिन ये भावनाएँ... जैसे दिल रो रहा है, लेकिन साथ में एक नई उम्मीद जाग रही है।"

रात भर वो करवटें बदलती रही, गिल्ट, उदासी, और उत्सुकता के बीच। आँसू बहते रहे — "फ...सल, सॉरी। मैं बस सुन रही हूँ, लेकिन ये बातें... मुझे बदल रही हैं।

"अगले दिन ऑफिस में माहीन थकी हुई पहुंची, आँखें सूजी हुईं। लंच टाइम में सहेलियाँ फिर मिलीं — कैफेटेरिया में
। नेहा ने देखते ही कहा, "माहीन, कल की बातें सोची? आजादी, हॉट बनना? लगता है रात भर रोई हो... दिल भारी है?" माहीन की आँखें फिर नम हो गईं। "हाँ नेहा... पूरी रात सोचती रही। उदास हो गई। फ...सल की याद, गिल्ट... लेकिन तुम्हारी बातें... जिज्ञासा बढ़ा रही हैं। डिटेल में नहीं समझी। बताओ ना, एक-एक करके। तुम्हारी स्टोरी से शुरू करो।"

सहेलियाँ हंस पड़ीं, लेकिन नेहा ने गंभीर होकर चाय का सिप लिया और शुरू की, "ठीक है, सुनो मेरी स्टोरी।

Note sabhi saheliyon ki story shorts m bateyi jayegi kyunki Focus Maheen pr bna rhe

ये सिर्फ सेक्स की नहीं, भावनाओं की भी है। मैं 22 साल की थी, कॉलेज में। दिल टूटा हुआ था — पहला ब्रेकअप, उदासी में डूबी। लगता था जिंदगी खत्म। तभी मिला वो — अमीर, हैंडसम बॉयफ्रेंड। पहली बार किसी ने मुझे देखा जैसे मैं स्पेशल हूँ। पहली डेट पर पार्क में ले गया। बातें की — मेरे दर्द सुने, गले लगाया। स्पर्श से बॉडी में बिजली दौड़ी, दिल रोया लेकिन खुशी से। फिर किस — होंट मिले, जीभ अंदर घुसी, चूसते हुए। मैं काँप गई, आँसू आ गए — उदासी भूल गई। घर जाकर पहली बार खुद को छुआ — चूत पर उँगली फेरी, गीली हो गई। निप्पल मसले, सिसकारी निकली। मजा? जैसे दिल का दर्द बाहर निकल रहा हो। लेकिन भावुकता... जैसे कोई मुझे पूरा कर रहा है। फिर अगली मीटिंग में होटल ले गया। कमरे में घुसते ही गले लगाया, रोते हुए। 'तुम हॉट हो,' बोला। कपड़े उतारे — धीरे-धीरे, हर इंच को चूमते।

मेरे दूध देखकर आँखों में प्यार — चूसे, दबाए जोर से, निप्पल काटे हल्के से। दर्द हुआ, लेकिन मीठा दर्द — जैसे मेरी उदासी मिट रही हो। फिर नीचे — जीभ फेरी क्लिट पर, चाटा लंबे समय तक, उँगली अंदर-बाहर। मैं चीखी, रोई, झड़ी दो बार — आँसू खुशी के। दिल कह रहा था, 'ये आजादी है, कोई बंदिश नहीं।' फिर N kat लंड दिखाया — 7 इंच, मोटा, chamri वाली। मैंने मुँह में लिया — चूसा धीरे-धीरे, जीभ से चाटा, गला तक ठोंका। उल्टी आई, लेकिन मजा आया — जैसे मैं कंट्रोल में हूँ। फिर चूत में घुसाया — पहली बार दर्द, जैसे फट रही हूँ, खून निकला, रोई जोर से।

लेकिन वो रुका, गले लगाया, 'प्यार करता हूँ' बोला। फिर धीरे-धीरे ठोंकना शुरू — अंदर-बाहर, स्पीड बढ़ाई। मिशनरी में दूध चूसते, फिर डॉगी में गांड पर थप्पड़ मारते, जोर से धक्के। मैं बोली, 'जोर से! मेरा दर्द निकालो!' वो घुमा-घुमाकर चोदा — साइड से, ऊपर से, हर एंगल। मजा? जैसे बॉडी जल रही, लेकिन मीठी आग — चूत गीली, लंड स्लाइड करता, ऑर्गैज्म बार-बार, काँपती रही। अंत में मुँह में झड़ा — गर्म वीर्य, निगला मैंने, आँसू बहते रहे खुशी के।

वो रात... उदासी मिटी, आजादी मिली। अब मैं सेक्सी बन गई — टाइट ड्रेस, मेकअप, हर रात अलग लड़के। लेकिन वो पहली बार... भावुक था, जैसे दिल जुड़ गया। आजादी यही है — कोई गुनाह नहीं, बस बॉडी और दिल की जरूरत। तुम ट्राई करो, माहीन। हिजाब उतारो, हॉट बनो। शौहर दूर हैं, क्या पता कितना मजा आए, कितनी उदासी मिटे।" नेहा की आँखें नम हो गईं, जैसे यादें ताजा हो गईं।माहीन सुनकर काँप गई, आँसू बहने लगे — "नेहा, इतनी डिटेल... भावुक... दर्द, मजा, प्यार? मैं... रो रही हूँ। लेकिन अगली स्टोरी?" नेहा हंसी, "एक पार्ट में एक। कल प्रिया की सुनना।" माहीन का मन और उलझ गया। नेहा की स्टोरी बार-बार याद आ रही थी — "किस, चूसना, ठोंकना, ऑर्गैज्म... क्या मैं भी? Ammi रोक lo लेकिन... जिज्ञासा। Faisal सॉरी। धीरे-धीरे... देखती हूँ
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RE: महीन को अपने रंग में रंग दिया - by razaraj2 - 19-01-2026, 11:31 PM



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