19-01-2026, 11:18 PM
पार्ट 3: पार्टी का पहला स्पर्श और सहेलियों की शुरुआत Holi पार्टी ऑफिस में जोरों पर थी। संगीत बज रहा था — होली के गाने, जो माहीन के कानों में पहली बार इतने जोर से गूंज रहे थे। लोग रंग लगाते, हंसते, डांस करते। माहीन कोने में खड़ी थी, हाथ में एक गिलास ठंडाई का, जो आर्यन ने स्पेशल उसके लिए बनाई थी — बिना कुछ मिलाए।
उसका दिल अभी भी उथल-पुथल में था। गाल पर लगा गुलाल अभी भी गर्म लग रहा था — आर्यन का स्पर्श जैसे त्वचा पर रुक गया हो। वो सोचती, "ये क्या हो रहा है? बस एक रंग, लेकिन दिल क्यों इतना तेज धड़क रहा?
Faisal, अगर तुम्हें पता चला तो क्या सोचोगे? मैंने कुछ गलत तो नहीं किया... बस एक टच। लेकिन ****** मुझे माफ करना। मैं घर जाकर ***** पढ़ूंगी, सब ठीक हो जाएगा।" उसकी आँखें नम हो गईं। पार्टी की खुशी में वो खुद को अकेला महसूस कर रही थी — जैसे सब खुश हैं, लेकिन वो बीच में फंसी है, दो दुनिया के बीच। एक तरफ उसकी पाकीजगी, फैमिली, मजहब; दूसरी तरफ ये नई सी आजादी की झलक। "क्या ये आजादी है?
या गुनाह की शुरुआत? फ...सल, तुम दूर हो, लेकिन तुम्हारी याद मुझे रोक रही है। लेकिन ये स्पर्श... क्यों अच्छा लगा?" उसकी छाती भारी हो गई, और वो मन ही मन रो रही थी, लेकिन बाहर से मुस्कुराती रही।
दिल में गिल्ट की लहर — "***** मैं क्या कर रही हूँ? घर लौटकर माफी मांगूंगी।"आर्यन पास आया, उसके चेहरे पर मुस्कान। "माहीन, एंजॉय कर रही हो? देखो, सब कितने खुश हैं। होली का मतलब ही है — पुरानी बातें भूलकर नई शुरुआत।
" माहीन ने सिर झुका लिया। "आर्यन जी, अच्छा लग रहा है... लेकिन दिल भारी है। घर याद आ रहा है, फ...सल याद आ रहे हैं। क्या मैं यहां होनी चाहिए? क्या ये सब मेरे लिए है?"
आर्यन का दिल पिघला। वो सोचता, "माहीन इतनी ईमानदार है। उसकी उदासी मुझे चुभती है। काश मैं उसे दिखा पाता कि जिंदगी में रंग कितने जरूरी हैं। लेकिन धीरे-धीरे... वो तैयार नहीं अभी।
उसके दिल का दर्द... मैं समझता हूँ, मेरा भी ब्रेकअप हुआ था।" वो बोला, "माहीन, उदास मत हो। चलो, मैं तुम्हें इंट्रोड्यूस करवाता हूँ कुछ सहेलियों से। वो तुम्हें कंपनी देंगी, शायद दिल हल्का हो जाए।
"आर्यन उसे ले गया एक ग्रुप की तरफ — चार लड़कियाँ खड़ी थीं, हंसती-बातें करतीं। पहली थी प्रिया — 26 साल की, ऑफिस में जूनियर डेवलपर। लंबे बाल, मॉडर्न ड्रेस में, लेकिन ट्रेडिशनल ज्वेलरी पहने। दूसरी नेहा — 28 साल की, सिंगल, बहुत ओपन-माइंडेड, वेस्टर्न कपड़ों में,
जो पार्टी में रंग से सनी थी।
3rd फातिमा — 27 साल की, माहीन जैसी ही, लेकिन थोड़ी ज्यादा सोशल, दुपट्टा सिर पर लेकिन स्टाइलिश तरीके से।
चौथी रिया — 25 साल की, ,., बैकग्राउंड लेकिन बहुत ओपन — छोटे बाल, जींस-टॉप में, फातिमा की क्लोज फ्रेंड।
आर्यन ने इंट्रोड्यूस किया, "ये माहीन है, हमारी टीम की। माहीन, ये प्रिया, नेहा, फातिमा और रिया।"प्रिया ने मुस्कुराकर हाथ मिलाया। "हाय माहीन! पहली बार होली पार्टी में? मैं तो हर साल आती हूँ। होली में कितना मजा है — रंग लगाना, डांस करना। मेरे घर में तो पूजा होती है, भ...वान को रंग चढ़ाते हैं। हि** धर्म में ऐसे त्योहार औरतों को आजादी देते हैं — कोई सख्ती नहीं, बस खुशी और भक्ति।"
माहीन चौंकी — "भ...वान? आजादी? मतलब?" प्रिया हंसी, "हाँ, हमारे H**** धर्म में। जैसे देवी-देवता हमें सिखाते हैं कि जिंदगी रंगों से भरी हो। लेकिन अभी पार्टी है, बाद में बताऊंगी डिटेल्स।
तुम्हारा गाल पर रंग अच्छा लग रहा है!" माहीन शरमा गई, लेकिन प्रिया की बातों में एक अजीब सी जिज्ञासा जगी। "धर्म... क्या वो सच में आजादी देता है? मेरे मजहब में तो... लेकिन सुनकर अच्छा लगा। क्या मैं कभी जान सकती हूँ?"
नेहा ने गुलाल लगाते हुए कहा, "अरे माहीन, रिलैक्स! जिंदगी में थोड़ी आजादी लेनी चाहिए। मैं तो कहती हूँ, शादी के बाद भी फन करो। जैसे हॉट लगना, सेक्सी फील करना। हिजाब के नीचे भी तुम हॉट हो, थोड़ा मेकअप ट्राई करो, टाइट कपड़े।
शौहर दूर हैं, तो क्या? खुद को एंजॉय करो। सेक्सी बनने में क्या बुराई? मजा आता है जब लोग नजरें घुमाकर देखें।"
माहीन की आँखें फैल गईं — "सेक्सी बनने? नेहा, ये... गुनाह है। फ...सल क्या कहेंगे?" लेकिन अंदर से एक सिहरन हुई। वो सोचती, "क्या मैं कभी ऐसी बन सकती हूँ? हॉट... सेक्सी। फ...सल तो कभी नहीं कहते। लेकिन... कैसा लगता होगा? क्या आजादी यही है?"
फातिमा, जो माहीन जैसी ही थी, ने गले लगाया। "माहीन, मैं समझती हूँ। मैं भी thumari wali हूँ, लेकिन थोड़ी ओपन हो गई हूँ। आजादी लेनी पड़ती है। और सेक्स के मजों के बारे में... वो तो अलग दुनिया है। मैं
ने ट्राई किया है — zina Kiya h ***** से।"
माहीन चौंकी, "फातिमा, तुम... ***** से? कैसा लगा? डिटेल में...?" फातिमा फुसफुसाई, "हाँ, मजा? जैसे बॉडी में आग लग जाती है।
पहली बार स्पर्श — उँगलियाँ गर्दन पर, फिर दूध दबाए, निप्पल चूसे। नीचे... चूत पर जीभ, गीला कर दिया। फिर Special लंड घुसा — मोटा, जो भर देता है। दर्द पहले, फिर मजा — झड़ना, चीखना। हलाल छोड़कर हराम, लेकिन वो खुशी... स्वर्ग mil jata h H***** लड़के अलग — कोई बंदिश नहीं, बस प्यार। लेकिन धीरे-धीरे ट्राई करो।"
रिया ने आँख मारकर कहा, "माहीन, मैं भी मु**** हूँ, लेकिन अब ओपन। आजादी मतलब — खुद चुनना। मैंने हिं**** बॉयफ्रेंड से सेक्स किया — वाह, क्या मजा! डिटेल? वो छूता तो बिजली दौड़ती। दूध मसलता, गांड पर थप्पड़। चूत में उँगलियाँ, फिर special लंड — 8 इंच, जो अंदर तक जाता। मजा? जैसे बॉडी काँपती, ऑर्गैज्म बार-बार।
हिं**** से रिलेशन — कोई गुनाह नहीं लगता, बस फ्रीडम। तुम ट्राई करो, शौहर दूर हैं।"
माहीन का चेहरा लाल हो गया, बदन गरम। "रिया, फातिमा... इतनी डिटेल? दर्द? मजा? Faisal माफ करना। लेकिन... क्यों अच्छा लग रहा है? क्या मैं भी...?"माहीन थोड़ी देर और रुकी। सहेलियाँ हंसाती रहीं —
प्रिया ने फेस्टिवल्स की छोटी स्टोरी सुनाई, नेहा ने आजादी की बातें, फातिमा और रिया ने सेक्स के हल्के मजों का। लेकिन माहीन का मन आर्यन पर अटका था — वो दूर से देखकर मुस्कुरा रहा था। "आर्यन जी... तुम्हारी वजह से ये हुआ। लेकिन अच्छा लग रहा है। फ...सल, मुझे माफ कर दो। मैं बस दोस्त बना रही हूँ।" घर जाते वक्त माहीन रोई। "Faisal क्या मैं बदल रही हूँ? ये सहेलियाँ... धीरे-धीरे बेहका रही हैं। लेकिन जिज्ञासा... रोक नहीं पा रही
उसका दिल अभी भी उथल-पुथल में था। गाल पर लगा गुलाल अभी भी गर्म लग रहा था — आर्यन का स्पर्श जैसे त्वचा पर रुक गया हो। वो सोचती, "ये क्या हो रहा है? बस एक रंग, लेकिन दिल क्यों इतना तेज धड़क रहा?
Faisal, अगर तुम्हें पता चला तो क्या सोचोगे? मैंने कुछ गलत तो नहीं किया... बस एक टच। लेकिन ****** मुझे माफ करना। मैं घर जाकर ***** पढ़ूंगी, सब ठीक हो जाएगा।" उसकी आँखें नम हो गईं। पार्टी की खुशी में वो खुद को अकेला महसूस कर रही थी — जैसे सब खुश हैं, लेकिन वो बीच में फंसी है, दो दुनिया के बीच। एक तरफ उसकी पाकीजगी, फैमिली, मजहब; दूसरी तरफ ये नई सी आजादी की झलक। "क्या ये आजादी है?
या गुनाह की शुरुआत? फ...सल, तुम दूर हो, लेकिन तुम्हारी याद मुझे रोक रही है। लेकिन ये स्पर्श... क्यों अच्छा लगा?" उसकी छाती भारी हो गई, और वो मन ही मन रो रही थी, लेकिन बाहर से मुस्कुराती रही।
दिल में गिल्ट की लहर — "***** मैं क्या कर रही हूँ? घर लौटकर माफी मांगूंगी।"आर्यन पास आया, उसके चेहरे पर मुस्कान। "माहीन, एंजॉय कर रही हो? देखो, सब कितने खुश हैं। होली का मतलब ही है — पुरानी बातें भूलकर नई शुरुआत।
" माहीन ने सिर झुका लिया। "आर्यन जी, अच्छा लग रहा है... लेकिन दिल भारी है। घर याद आ रहा है, फ...सल याद आ रहे हैं। क्या मैं यहां होनी चाहिए? क्या ये सब मेरे लिए है?"
आर्यन का दिल पिघला। वो सोचता, "माहीन इतनी ईमानदार है। उसकी उदासी मुझे चुभती है। काश मैं उसे दिखा पाता कि जिंदगी में रंग कितने जरूरी हैं। लेकिन धीरे-धीरे... वो तैयार नहीं अभी।
उसके दिल का दर्द... मैं समझता हूँ, मेरा भी ब्रेकअप हुआ था।" वो बोला, "माहीन, उदास मत हो। चलो, मैं तुम्हें इंट्रोड्यूस करवाता हूँ कुछ सहेलियों से। वो तुम्हें कंपनी देंगी, शायद दिल हल्का हो जाए।
"आर्यन उसे ले गया एक ग्रुप की तरफ — चार लड़कियाँ खड़ी थीं, हंसती-बातें करतीं। पहली थी प्रिया — 26 साल की, ऑफिस में जूनियर डेवलपर। लंबे बाल, मॉडर्न ड्रेस में, लेकिन ट्रेडिशनल ज्वेलरी पहने। दूसरी नेहा — 28 साल की, सिंगल, बहुत ओपन-माइंडेड, वेस्टर्न कपड़ों में,
जो पार्टी में रंग से सनी थी।
3rd फातिमा — 27 साल की, माहीन जैसी ही, लेकिन थोड़ी ज्यादा सोशल, दुपट्टा सिर पर लेकिन स्टाइलिश तरीके से।
चौथी रिया — 25 साल की, ,., बैकग्राउंड लेकिन बहुत ओपन — छोटे बाल, जींस-टॉप में, फातिमा की क्लोज फ्रेंड।
आर्यन ने इंट्रोड्यूस किया, "ये माहीन है, हमारी टीम की। माहीन, ये प्रिया, नेहा, फातिमा और रिया।"प्रिया ने मुस्कुराकर हाथ मिलाया। "हाय माहीन! पहली बार होली पार्टी में? मैं तो हर साल आती हूँ। होली में कितना मजा है — रंग लगाना, डांस करना। मेरे घर में तो पूजा होती है, भ...वान को रंग चढ़ाते हैं। हि** धर्म में ऐसे त्योहार औरतों को आजादी देते हैं — कोई सख्ती नहीं, बस खुशी और भक्ति।"
माहीन चौंकी — "भ...वान? आजादी? मतलब?" प्रिया हंसी, "हाँ, हमारे H**** धर्म में। जैसे देवी-देवता हमें सिखाते हैं कि जिंदगी रंगों से भरी हो। लेकिन अभी पार्टी है, बाद में बताऊंगी डिटेल्स।
तुम्हारा गाल पर रंग अच्छा लग रहा है!" माहीन शरमा गई, लेकिन प्रिया की बातों में एक अजीब सी जिज्ञासा जगी। "धर्म... क्या वो सच में आजादी देता है? मेरे मजहब में तो... लेकिन सुनकर अच्छा लगा। क्या मैं कभी जान सकती हूँ?"
नेहा ने गुलाल लगाते हुए कहा, "अरे माहीन, रिलैक्स! जिंदगी में थोड़ी आजादी लेनी चाहिए। मैं तो कहती हूँ, शादी के बाद भी फन करो। जैसे हॉट लगना, सेक्सी फील करना। हिजाब के नीचे भी तुम हॉट हो, थोड़ा मेकअप ट्राई करो, टाइट कपड़े।
शौहर दूर हैं, तो क्या? खुद को एंजॉय करो। सेक्सी बनने में क्या बुराई? मजा आता है जब लोग नजरें घुमाकर देखें।"
माहीन की आँखें फैल गईं — "सेक्सी बनने? नेहा, ये... गुनाह है। फ...सल क्या कहेंगे?" लेकिन अंदर से एक सिहरन हुई। वो सोचती, "क्या मैं कभी ऐसी बन सकती हूँ? हॉट... सेक्सी। फ...सल तो कभी नहीं कहते। लेकिन... कैसा लगता होगा? क्या आजादी यही है?"
फातिमा, जो माहीन जैसी ही थी, ने गले लगाया। "माहीन, मैं समझती हूँ। मैं भी thumari wali हूँ, लेकिन थोड़ी ओपन हो गई हूँ। आजादी लेनी पड़ती है। और सेक्स के मजों के बारे में... वो तो अलग दुनिया है। मैं
ने ट्राई किया है — zina Kiya h ***** से।"
माहीन चौंकी, "फातिमा, तुम... ***** से? कैसा लगा? डिटेल में...?" फातिमा फुसफुसाई, "हाँ, मजा? जैसे बॉडी में आग लग जाती है।
पहली बार स्पर्श — उँगलियाँ गर्दन पर, फिर दूध दबाए, निप्पल चूसे। नीचे... चूत पर जीभ, गीला कर दिया। फिर Special लंड घुसा — मोटा, जो भर देता है। दर्द पहले, फिर मजा — झड़ना, चीखना। हलाल छोड़कर हराम, लेकिन वो खुशी... स्वर्ग mil jata h H***** लड़के अलग — कोई बंदिश नहीं, बस प्यार। लेकिन धीरे-धीरे ट्राई करो।"
रिया ने आँख मारकर कहा, "माहीन, मैं भी मु**** हूँ, लेकिन अब ओपन। आजादी मतलब — खुद चुनना। मैंने हिं**** बॉयफ्रेंड से सेक्स किया — वाह, क्या मजा! डिटेल? वो छूता तो बिजली दौड़ती। दूध मसलता, गांड पर थप्पड़। चूत में उँगलियाँ, फिर special लंड — 8 इंच, जो अंदर तक जाता। मजा? जैसे बॉडी काँपती, ऑर्गैज्म बार-बार।
हिं**** से रिलेशन — कोई गुनाह नहीं लगता, बस फ्रीडम। तुम ट्राई करो, शौहर दूर हैं।"
माहीन का चेहरा लाल हो गया, बदन गरम। "रिया, फातिमा... इतनी डिटेल? दर्द? मजा? Faisal माफ करना। लेकिन... क्यों अच्छा लग रहा है? क्या मैं भी...?"माहीन थोड़ी देर और रुकी। सहेलियाँ हंसाती रहीं —
प्रिया ने फेस्टिवल्स की छोटी स्टोरी सुनाई, नेहा ने आजादी की बातें, फातिमा और रिया ने सेक्स के हल्के मजों का। लेकिन माहीन का मन आर्यन पर अटका था — वो दूर से देखकर मुस्कुरा रहा था। "आर्यन जी... तुम्हारी वजह से ये हुआ। लेकिन अच्छा लग रहा है। फ...सल, मुझे माफ कर दो। मैं बस दोस्त बना रही हूँ।" घर जाते वक्त माहीन रोई। "Faisal क्या मैं बदल रही हूँ? ये सहेलियाँ... धीरे-धीरे बेहका रही हैं। लेकिन जिज्ञासा... रोक नहीं पा रही


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