17-01-2026, 08:32 PM
(This post was last modified: 23-05-2026, 01:06 PM by razaraj2. Edited 4 times in total. Edited 4 times in total.)
भाग 13: बढ़ती प्यास और गुप्त योजनाराहुल के मन में आयशा की छवि अब हर पल घूमती रहती थी।
हर सुबह वो ऑफिस आता, अपनी डेस्क पर बैठता, लेकिन उसकी आंखें आयशा के केबिन की तरफ जातीं।
उसका दिल कहता, "वो... वो मेरी होनी चाहिए।"
पिछले हफ्तों की लेट नाइट्स, कार ड्रॉप्स, हल्के स्पर्श – सबने उसकी प्यास को और भड़का दिया था। राहुल अब हर मीटिंग में आयशा को घूरता – उसके चेहरे की मुस्कान, होंठों की हल्की हरकत, बुर्के के नीचे छिपे कर्व्स।
"ये स्तन... कितने भरे होंगे, दबाने पर कैसा फील होगा," वो कल्पना करता, उसके अनकट लंड में हलचल होती, सख्त हो जाता।
ऑफिस में वो आयशा के पास जाता, बहाना बनाकर – "ये फाइल देखो," कहकर करीब आता, उसकी खुशबू सूंघता।
आयशा की खुशबू – हल्की, मिट्टी सी, जो राहुल को पागल कर देती। एक दिन मीटिंग में – राहुल प्रेजेंट कर रहा था, आयशा नोट्स ले रही थी।
राहुल की नजरें आयशा के गले पर – वो हल्का सा नकाब हटाकर बैठी थी, गोरा गला चमक रहा था।
"ये गला... चूमकर काटना है," वो सोचता, लंड सख्त, पैंट में दबाव।
मीटिंग के बाद राहुल ने आयशा को रोका, "आयशा, थोड़ा डिस्कस।" आयशा रुकी, राहुल करीब आया – उसका शरीर आयशा से कुछ इंच दूर।
"ये पॉइंट... समझो," कहकर राहुल ने आयशा के कंधे पर हाथ रखा – हल्का दबाव, गर्म स्पर्श।
आयशा की सिहरन – "ये क्या?" लेकिन वो चुप रही, काम पर फोकस।
राहुल के मन में – "ये कंधा... नीचे कमर तक हाथ फेरना है, बुर्का उतारकर जिस्म देखना।" उसका लंड पूरी तरह सख्त – अनकट, मोटा, फोरस्किन पीछे खिंचती, सिर लाल, सीट से रगड़ता।
लेकिन वो कंट्रोल करता, "ठीक है, जाओ।"
शाम को लेट नाइट – आयशा और राहुल अकेले।
राहुल की प्यास – वो आयशा को देखता, उसके होंठों पर, फिर नीचे। "ये होंठ... चूसना है, गहरा किस," वो सोचता, लंड थ्रोब करता।
रात 10 बजे, राहुल ने कहा, "ड्रॉप?"
आयशा मानी, कार में।
ड्राइव – राहुल की नजरें आयशा के चेहरे पर, गले पर, उभार पर। "ये उभार... स्तन दबाकर चूसना है," वो इमेजिन करता, लंड पैंट में तंबू बनाता।
घर पहुंची, आयशा चली गई, लेकिन राहुल की तड़प – घर जाकर मास्टरबेट – आयशा की कल्पना में, लंड सहलाता, झड़ता।
अगले दिन फिर वही – ऑफिस में राहुल आयशा के पास आता, बात करता, स्पर्श की कोशिश।
एक दिन लंच में – राहुल आयशा के टेबल पर आया, "खाना साथ?" आयशा ने हां कहा, दोनों कैंटीन में।
राहुल की नजरें – आयशा के होंठों पर खाना खाते हुए।
"ये होंठ... मेरे लंड पर," वो सोचता, लंड हल्का सख्त।
बातें – "तुम्हारी लाइफ कैसी?" राहुल पूछता। आयशा बताती, "अच्छी, शौहर अच्छा है।"
राहुल का दिल जलता – "शौहर... उसे छोड़ देगी मेरे लिए।"
लेकिन प्यास बढ़ती – "उसे पाना है, जिस्म से, दिल से।"
शाम लेट नाइट – राहुल आयशा के करीब, कंधे सटाकर। उसकी सांस आयशा के कान पर – "ये अच्छा है ना?"
आयशा की गर्मी – "ये सांस... इतनी गर्म।"
राहुल का लंड सख्त – "ये कान... चूमना है, कान में फुसफुसाना।"
रात ड्रॉप – कार में राहुल की नजरें आयशा के जांघों पर। "ये जांघें... फैलाकर चूत चाटना है," वो इमेजिन, लंड रगड़ता स्टीयरिंग से।
घर जाकर राहुल की तड़प – प्रिया से सेक्स, लेकिन आयशा की कल्पना – "प्रिया नहीं, आयशा," सोचकर धक्के मारता, लेकिन संतुष्ट नहीं।
ये तड़प अब और बढ़ गई – राहुल नींद में आयशा का सपना देखता, जागकर मास्टरबेट।
ऑफिस में वो आयशा को देखकर कल्पना करता – बुर्का उतारना, स्तन दबाना, चूत में लंड डालना। उसका अनकट लंड हर दिन सख्त – ऑफिस में, घर में।
ये तड़प राहुल के बॉस गजेंद्र को पता चल गई।
गजेंद्र – एक सीनियर, चालाक, राहुल का मेंटर।
गजेंद्र ने नोटिस किया – राहुल का डिस्ट्रैक्शन, आयशा की तरफ देखना। एक दिन गजेंद्र ने राहुल को केबिन बुलाया।
"राहुल, बैठो। क्या बात है? तुम डिस्ट्रैक्ट लग रहे हो।"
राहुल ने टाला, "कुछ नहीं सर।"
गजेंद्र ने सीधे कहा, "आयशा? क्या तुम उसे पाना चाहते हो?" राहुल चौंका, लेकिन मान गया, "हां सर... वो... मुझे पसंद है।"
गजेंद्र ने कहा, "लेकिन तुम शादीशुदा हो – प्रिया से।"
राहुल ने कहा, "प्रिया मेरी बीवी है, लेकिन आयशा... मैं उसे पाना चाहता हूं। वो अलग है, उसकी सुंदरता, शरम... सब।"
गजेंद्र ने मुस्कुराकर कहा, "तो प्लान बनाओ। अगर पाना है तो उसके शौहर से अलग करो।" राहुल ने पूछा, "कैसे सर?"
गजेंद्र ने कहा, "दूर ले जाओ – यहां से। दो दिन बाद एक ट्रिप – अमेरिका, इवेंट मैनेजमेंट सीखने के लिए। तुम जाओ, और पार्टनर आयशा।"
राहुल की आंखें चमकीं, "हां सर... और रहना?"
गजेंद्र ने कहा, "एक ही अपार्टमेंट में – अकेले, दिन-रात साथ। मत बताना उसे, कहना जरूरी ट्रिप है।" राहुल ने कहा, "प्लान मस्त है सर... प्लीज।"
गजेंद्र ने हंसकर कहा, "करो, लेकिन सावधानी से।"
राहुल बाहर आया, मन में खुशी – "अमेरिका... अकेले आयशा के साथ। उसका जिस्म... पा लूंगा।"
उसका लंड सख्त – कल्पना में आयशा नंगी, उसके नीचे। अगले दो दिन – राहुल आयशा को प्रोजेक्ट में बिजी रखता, लेट नाइट्स।
आयशा थकती, लेकिन घर की हालत के लिए सहती।
ट्रिप की तैयारी – राहुल ने आयशा को बताया, "एक ट्रिप है, अमेरिका, लर्निंग के लिए। तुम मेरे साथ जाओगी।"
आयशा चौंकी, "सर, घर..." राहुल ने कहा, "जरूरी है, प्रोजेक्ट के लिए।"
आयशा ने इरफ़ान से बात की – "ट्रिप है, अमेरिका।"
इरफ़ान ने कहा, "जा, पैसे की जरूरत है।"
आयशा तैयार हुई, लेकिन मन में डर – "अकेले राहुल के साथ..." ट्रिप का दिन – एयरपोर्ट, फ्लाइट, अमेरिका पहुंच।
अपार्टमेंट – एक ही, दो बेडरूम, लेकिन कॉमन एरिया।
राहुल की प्यास – "अब... उसे पाऊंगा।"
हर सुबह वो ऑफिस आता, अपनी डेस्क पर बैठता, लेकिन उसकी आंखें आयशा के केबिन की तरफ जातीं।
उसका दिल कहता, "वो... वो मेरी होनी चाहिए।"
पिछले हफ्तों की लेट नाइट्स, कार ड्रॉप्स, हल्के स्पर्श – सबने उसकी प्यास को और भड़का दिया था। राहुल अब हर मीटिंग में आयशा को घूरता – उसके चेहरे की मुस्कान, होंठों की हल्की हरकत, बुर्के के नीचे छिपे कर्व्स।
"ये स्तन... कितने भरे होंगे, दबाने पर कैसा फील होगा," वो कल्पना करता, उसके अनकट लंड में हलचल होती, सख्त हो जाता।
ऑफिस में वो आयशा के पास जाता, बहाना बनाकर – "ये फाइल देखो," कहकर करीब आता, उसकी खुशबू सूंघता।
आयशा की खुशबू – हल्की, मिट्टी सी, जो राहुल को पागल कर देती। एक दिन मीटिंग में – राहुल प्रेजेंट कर रहा था, आयशा नोट्स ले रही थी।
राहुल की नजरें आयशा के गले पर – वो हल्का सा नकाब हटाकर बैठी थी, गोरा गला चमक रहा था।
"ये गला... चूमकर काटना है," वो सोचता, लंड सख्त, पैंट में दबाव।
मीटिंग के बाद राहुल ने आयशा को रोका, "आयशा, थोड़ा डिस्कस।" आयशा रुकी, राहुल करीब आया – उसका शरीर आयशा से कुछ इंच दूर।
"ये पॉइंट... समझो," कहकर राहुल ने आयशा के कंधे पर हाथ रखा – हल्का दबाव, गर्म स्पर्श।
आयशा की सिहरन – "ये क्या?" लेकिन वो चुप रही, काम पर फोकस।
राहुल के मन में – "ये कंधा... नीचे कमर तक हाथ फेरना है, बुर्का उतारकर जिस्म देखना।" उसका लंड पूरी तरह सख्त – अनकट, मोटा, फोरस्किन पीछे खिंचती, सिर लाल, सीट से रगड़ता।
लेकिन वो कंट्रोल करता, "ठीक है, जाओ।"
शाम को लेट नाइट – आयशा और राहुल अकेले।
राहुल की प्यास – वो आयशा को देखता, उसके होंठों पर, फिर नीचे। "ये होंठ... चूसना है, गहरा किस," वो सोचता, लंड थ्रोब करता।
रात 10 बजे, राहुल ने कहा, "ड्रॉप?"
आयशा मानी, कार में।
ड्राइव – राहुल की नजरें आयशा के चेहरे पर, गले पर, उभार पर। "ये उभार... स्तन दबाकर चूसना है," वो इमेजिन करता, लंड पैंट में तंबू बनाता।
घर पहुंची, आयशा चली गई, लेकिन राहुल की तड़प – घर जाकर मास्टरबेट – आयशा की कल्पना में, लंड सहलाता, झड़ता।
अगले दिन फिर वही – ऑफिस में राहुल आयशा के पास आता, बात करता, स्पर्श की कोशिश।
एक दिन लंच में – राहुल आयशा के टेबल पर आया, "खाना साथ?" आयशा ने हां कहा, दोनों कैंटीन में।
राहुल की नजरें – आयशा के होंठों पर खाना खाते हुए।
"ये होंठ... मेरे लंड पर," वो सोचता, लंड हल्का सख्त।
बातें – "तुम्हारी लाइफ कैसी?" राहुल पूछता। आयशा बताती, "अच्छी, शौहर अच्छा है।"
राहुल का दिल जलता – "शौहर... उसे छोड़ देगी मेरे लिए।"
लेकिन प्यास बढ़ती – "उसे पाना है, जिस्म से, दिल से।"
शाम लेट नाइट – राहुल आयशा के करीब, कंधे सटाकर। उसकी सांस आयशा के कान पर – "ये अच्छा है ना?"
आयशा की गर्मी – "ये सांस... इतनी गर्म।"
राहुल का लंड सख्त – "ये कान... चूमना है, कान में फुसफुसाना।"
रात ड्रॉप – कार में राहुल की नजरें आयशा के जांघों पर। "ये जांघें... फैलाकर चूत चाटना है," वो इमेजिन, लंड रगड़ता स्टीयरिंग से।
घर जाकर राहुल की तड़प – प्रिया से सेक्स, लेकिन आयशा की कल्पना – "प्रिया नहीं, आयशा," सोचकर धक्के मारता, लेकिन संतुष्ट नहीं।
ये तड़प अब और बढ़ गई – राहुल नींद में आयशा का सपना देखता, जागकर मास्टरबेट।
ऑफिस में वो आयशा को देखकर कल्पना करता – बुर्का उतारना, स्तन दबाना, चूत में लंड डालना। उसका अनकट लंड हर दिन सख्त – ऑफिस में, घर में।
ये तड़प राहुल के बॉस गजेंद्र को पता चल गई।
गजेंद्र – एक सीनियर, चालाक, राहुल का मेंटर।
गजेंद्र ने नोटिस किया – राहुल का डिस्ट्रैक्शन, आयशा की तरफ देखना। एक दिन गजेंद्र ने राहुल को केबिन बुलाया।
"राहुल, बैठो। क्या बात है? तुम डिस्ट्रैक्ट लग रहे हो।"
राहुल ने टाला, "कुछ नहीं सर।"
गजेंद्र ने सीधे कहा, "आयशा? क्या तुम उसे पाना चाहते हो?" राहुल चौंका, लेकिन मान गया, "हां सर... वो... मुझे पसंद है।"
गजेंद्र ने कहा, "लेकिन तुम शादीशुदा हो – प्रिया से।"
राहुल ने कहा, "प्रिया मेरी बीवी है, लेकिन आयशा... मैं उसे पाना चाहता हूं। वो अलग है, उसकी सुंदरता, शरम... सब।"
गजेंद्र ने मुस्कुराकर कहा, "तो प्लान बनाओ। अगर पाना है तो उसके शौहर से अलग करो।" राहुल ने पूछा, "कैसे सर?"
गजेंद्र ने कहा, "दूर ले जाओ – यहां से। दो दिन बाद एक ट्रिप – अमेरिका, इवेंट मैनेजमेंट सीखने के लिए। तुम जाओ, और पार्टनर आयशा।"
राहुल की आंखें चमकीं, "हां सर... और रहना?"
गजेंद्र ने कहा, "एक ही अपार्टमेंट में – अकेले, दिन-रात साथ। मत बताना उसे, कहना जरूरी ट्रिप है।" राहुल ने कहा, "प्लान मस्त है सर... प्लीज।"
गजेंद्र ने हंसकर कहा, "करो, लेकिन सावधानी से।"
राहुल बाहर आया, मन में खुशी – "अमेरिका... अकेले आयशा के साथ। उसका जिस्म... पा लूंगा।"
उसका लंड सख्त – कल्पना में आयशा नंगी, उसके नीचे। अगले दो दिन – राहुल आयशा को प्रोजेक्ट में बिजी रखता, लेट नाइट्स।
आयशा थकती, लेकिन घर की हालत के लिए सहती।
ट्रिप की तैयारी – राहुल ने आयशा को बताया, "एक ट्रिप है, अमेरिका, लर्निंग के लिए। तुम मेरे साथ जाओगी।"
आयशा चौंकी, "सर, घर..." राहुल ने कहा, "जरूरी है, प्रोजेक्ट के लिए।"
आयशा ने इरफ़ान से बात की – "ट्रिप है, अमेरिका।"
इरफ़ान ने कहा, "जा, पैसे की जरूरत है।"
आयशा तैयार हुई, लेकिन मन में डर – "अकेले राहुल के साथ..." ट्रिप का दिन – एयरपोर्ट, फ्लाइट, अमेरिका पहुंच।
अपार्टमेंट – एक ही, दो बेडरूम, लेकिन कॉमन एरिया।
राहुल की प्यास – "अब... उसे पाऊंगा।"


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