17-01-2026, 08:28 PM
(This post was last modified: 23-05-2026, 01:07 PM by razaraj2. Edited 4 times in total. Edited 4 times in total.)
# भाग 11: देर रात की मीटिंग्स और बढ़ती चाहतेंसमय की धारा में दिन बहते चले गए।
आयशा की जिंदगी अब एक नए रूटीन में ढल चुकी थी – सुबह उठना, घर के काम, ऑफिस जाना, शाम को लौटना, और रात को इरफ़ान के साथ वक्त बिताना।
लेकिन इन दिनों घर की आर्थिक हालत खराब होती जा रही थी।
इरफ़ान की कंपनी में कटौती हो रही थी, सैलरी लेट आ रही थी, और घर का खर्चा बढ़ता जा रहा था। आयशा की सैलरी अब घर के लिए जरूरी हो गई थी – किराया, बिजली बिल, राशन, सब कुछ उस पर निर्भर।
इरफ़ान अक्सर कहता, "तुम्हारी जॉब अच्छी है, जारी रखो। हमारी हालत सुधरेगी।"
आयशा हां कहती, लेकिन मन में चिंता रहती।
ऑफिस में भी चीजें बदल रही थीं – राहुल की नजरें अब और तेज हो गई थीं। पिछले दो महीनों में राहुल की प्यास आयशा को लेकर दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थी।
हर मीटिंग में वो आयशा को घूरता, उसके चेहरे की हर मुस्कान को नोटिस करता, उसके बुर्के के नीचे के कर्व्स को इमेजिन करता।
"ये औरत... मेरी होनी चाहिए," वो मन ही मन कहता।
आयशा सबके साथ घुलमिल गई थी – सुनैना से दोस्ती, नेहा से मजाक, प्रिया से गॉसिप। लेकिन राहुल उसे पाना चाहता था, किसी भी कीमत पर।
एक दिन राहुल के बॉस विक्रम ने फिर बुलाया।
"राहुल, प्रोग्रेस?" विक्रम ने पूछा।
राहुल ने कहा, "बढ़ रही है सर, लेकिन धीरे।" विक्रम ने मुस्कुराकर कहा, "फिर बड़ा कदम उठाओ। एक बड़ा प्रोजेक्ट है – वेडिंग इवेंट, क्लाइंट बड़ा। आयशा को लीड दो।"
राहुल की आंखें चमकीं, "हां सर, वो लेट नाइट्स होंगी।"
विक्रम ने कहा, "बिलकुल। उसे घर से दूर रखो, काम में डुबाओ।"
राहुल ने प्लान बनाया – आयशा को प्रोजेक्ट असाइन किया। अगले दिन ऑफिस में राहुल ने आयशा को केबिन बुलाया।
"आयशा, ये नया प्रोजेक्ट – बड़ा वेडिंग इवेंट। तुम लीड करोगी।"
आयशा खुश हुई, "थैंक यू सर, लेकिन मैं नई हूं..."
राहुल ने कहा, "तुम कर सकती हो। लेकिन लेट नाइट्स होंगी, प्लानिंग के लिए।" आयशा ने हां कहा, "ठीक है, घर को मैनेज कर लूंगी।"
लेकिन घर की हालत खराब थी – इरफ़ान ने कहा, "कर लो, पैसे की जरूरत है।"
पहली लेट नाइट – शाम 7 बजे से शुरू।
आयशा और राहुल केबिन में – प्लानिंग, डिस्कशन्स। राहुल करीब बैठा, आयशा की तरफ झुका।
"ये डेकोरेशन कैसा?" उसने स्क्रीन दिखाई, हाथ आयशा के कंधे से सटा।
आयशा की हल्की सिहरन, लेकिन काम पर फोकस।
राहुल की प्यास – "ये खुशबू... इतनी करीब।" रात 10 बजे खत्म – आयशा उठी, "सर, घर जाना है।"
राहुल ने कहा, "रात हो गई, मैं ड्रॉप कर दूं?"
आयशा ने मना किया, "नहीं सर, ऑटो ले लूंगी।"
राहुल ने जोर दिया, "खतरा है, आओ।" आयशा मानी नहीं, घर चली गई।
अगले दिन फिर लेट नाइट – वही रूटीन।
राहुल फिर पूछा, "ड्रॉप?"
आयशा फिर मना। लेकिन तीसरे दिन बारिश – रात 11 बजे।
ऑटो नहीं मिला।
राहुल ने कहा, "अब तो आओ, भीग जाओगी।"
आयशा मानी, कार में बैठी। कार में – राहुल ड्राइव, आयशा बगल।
राहुल की नजरें – आयशा के बुर्के पर, कर्व्स इमेजिन।
"तुम्हारी कमर... स्तन... जांघें," वो सोचता।
आयशा चुप, लेकिन असहज। घर पहुंची, थैंक यू कहा।
ये रूटीन बन गया – हर लेट नाइट राहुल ड्रॉप करता।
कार में बातें – पर्सनल।
राहुल आयशा को घूरता, उसके ज ISM की बनावट इमेजिन – "गोरा जिस्म, मुलायम त्वचा।" एक दिन राहुल ने प्लान बनाया – गिफ्ट।
कार में बैठते वक्त, "आयशा, ये तुम्हारे लिए।"
एक पैकेट दिया।
आयशा ने मना किया, "नहीं सर, क्यों?" राहुल ने कहा, "बस, प्रोजेक्ट की सक्सेस के लिए। खोलो।"
आयशा ने मना किया, लेकिन जिज्ञासा से ले लिया।
घर जाकर खोला – एक खूबसूरत साड़ी, लाल रंग, सिल्की।
आयशा को बहुत अच्छी लगी – "कितनी सुंदर।" अगले दिन राहुल ने पूछा, "गिफ्ट कैसा?"
आयशा ने कहा, "अच्छा, थैंक यू।"
राहुल ने कहा, "पहनकर ऑफिस आओ।"
आयशा ने मना किया, "नहीं सर, मैं बुर्का..." राहुल ने जोर दिया, "प्लीज, एक दिन।"
आयशा मानी, "ठीक है।"
अगले दिन – आयशा साड़ी पहनी, ऊपर बुर्का।
ऑफिस पहुंची, बुर्का उतारा – सब देखते रह गए। साड़ी में आयशा – कर्व्स उभरे, कमर दिखती, स्तन का उभार।
सब तारीफ – "वाह आयशा, स्टनिंग!"
राहुल की प्यास बढ़ी – "ये जिस्म... मेरा।"
उसने केबिन बुलाया, "तुम बहुत सुंदर लग रही हो।" आयशा शरमाई, "थैंक यू सर।"
राहुल करीब आया, कंधे पर हाथ रखा – गर्म स्पर्श।
फिर चूमने की कोशिश – होंठ करीब।
आयशा पीछे हटी, "नहीं सर!" घर चली गई। घर पर गिल्ट – "ये क्या?" ***** की, तौबा।
सहेलियों की स्टोरी याद – "कहीं मैं भी..."
इरफ़ान से कहा, "जॉब छोड़ दूं?"
इरफ़ान ने मना किया, "हालत खराब है, जारी रखो।" रात सेक्स – इरफ़ान के साथ, लेकिन राहुल का खयाल – प्यास बनी रही।
आयशा की जिंदगी अब एक नए रूटीन में ढल चुकी थी – सुबह उठना, घर के काम, ऑफिस जाना, शाम को लौटना, और रात को इरफ़ान के साथ वक्त बिताना।
लेकिन इन दिनों घर की आर्थिक हालत खराब होती जा रही थी।
इरफ़ान की कंपनी में कटौती हो रही थी, सैलरी लेट आ रही थी, और घर का खर्चा बढ़ता जा रहा था। आयशा की सैलरी अब घर के लिए जरूरी हो गई थी – किराया, बिजली बिल, राशन, सब कुछ उस पर निर्भर।
इरफ़ान अक्सर कहता, "तुम्हारी जॉब अच्छी है, जारी रखो। हमारी हालत सुधरेगी।"
आयशा हां कहती, लेकिन मन में चिंता रहती।
ऑफिस में भी चीजें बदल रही थीं – राहुल की नजरें अब और तेज हो गई थीं। पिछले दो महीनों में राहुल की प्यास आयशा को लेकर दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थी।
हर मीटिंग में वो आयशा को घूरता, उसके चेहरे की हर मुस्कान को नोटिस करता, उसके बुर्के के नीचे के कर्व्स को इमेजिन करता।
"ये औरत... मेरी होनी चाहिए," वो मन ही मन कहता।
आयशा सबके साथ घुलमिल गई थी – सुनैना से दोस्ती, नेहा से मजाक, प्रिया से गॉसिप। लेकिन राहुल उसे पाना चाहता था, किसी भी कीमत पर।
एक दिन राहुल के बॉस विक्रम ने फिर बुलाया।
"राहुल, प्रोग्रेस?" विक्रम ने पूछा।
राहुल ने कहा, "बढ़ रही है सर, लेकिन धीरे।" विक्रम ने मुस्कुराकर कहा, "फिर बड़ा कदम उठाओ। एक बड़ा प्रोजेक्ट है – वेडिंग इवेंट, क्लाइंट बड़ा। आयशा को लीड दो।"
राहुल की आंखें चमकीं, "हां सर, वो लेट नाइट्स होंगी।"
विक्रम ने कहा, "बिलकुल। उसे घर से दूर रखो, काम में डुबाओ।"
राहुल ने प्लान बनाया – आयशा को प्रोजेक्ट असाइन किया। अगले दिन ऑफिस में राहुल ने आयशा को केबिन बुलाया।
"आयशा, ये नया प्रोजेक्ट – बड़ा वेडिंग इवेंट। तुम लीड करोगी।"
आयशा खुश हुई, "थैंक यू सर, लेकिन मैं नई हूं..."
राहुल ने कहा, "तुम कर सकती हो। लेकिन लेट नाइट्स होंगी, प्लानिंग के लिए।" आयशा ने हां कहा, "ठीक है, घर को मैनेज कर लूंगी।"
लेकिन घर की हालत खराब थी – इरफ़ान ने कहा, "कर लो, पैसे की जरूरत है।"
पहली लेट नाइट – शाम 7 बजे से शुरू।
आयशा और राहुल केबिन में – प्लानिंग, डिस्कशन्स। राहुल करीब बैठा, आयशा की तरफ झुका।
"ये डेकोरेशन कैसा?" उसने स्क्रीन दिखाई, हाथ आयशा के कंधे से सटा।
आयशा की हल्की सिहरन, लेकिन काम पर फोकस।
राहुल की प्यास – "ये खुशबू... इतनी करीब।" रात 10 बजे खत्म – आयशा उठी, "सर, घर जाना है।"
राहुल ने कहा, "रात हो गई, मैं ड्रॉप कर दूं?"
आयशा ने मना किया, "नहीं सर, ऑटो ले लूंगी।"
राहुल ने जोर दिया, "खतरा है, आओ।" आयशा मानी नहीं, घर चली गई।
अगले दिन फिर लेट नाइट – वही रूटीन।
राहुल फिर पूछा, "ड्रॉप?"
आयशा फिर मना। लेकिन तीसरे दिन बारिश – रात 11 बजे।
ऑटो नहीं मिला।
राहुल ने कहा, "अब तो आओ, भीग जाओगी।"
आयशा मानी, कार में बैठी। कार में – राहुल ड्राइव, आयशा बगल।
राहुल की नजरें – आयशा के बुर्के पर, कर्व्स इमेजिन।
"तुम्हारी कमर... स्तन... जांघें," वो सोचता।
आयशा चुप, लेकिन असहज। घर पहुंची, थैंक यू कहा।
ये रूटीन बन गया – हर लेट नाइट राहुल ड्रॉप करता।
कार में बातें – पर्सनल।
राहुल आयशा को घूरता, उसके ज ISM की बनावट इमेजिन – "गोरा जिस्म, मुलायम त्वचा।" एक दिन राहुल ने प्लान बनाया – गिफ्ट।
कार में बैठते वक्त, "आयशा, ये तुम्हारे लिए।"
एक पैकेट दिया।
आयशा ने मना किया, "नहीं सर, क्यों?" राहुल ने कहा, "बस, प्रोजेक्ट की सक्सेस के लिए। खोलो।"
आयशा ने मना किया, लेकिन जिज्ञासा से ले लिया।
घर जाकर खोला – एक खूबसूरत साड़ी, लाल रंग, सिल्की।
आयशा को बहुत अच्छी लगी – "कितनी सुंदर।" अगले दिन राहुल ने पूछा, "गिफ्ट कैसा?"
आयशा ने कहा, "अच्छा, थैंक यू।"
राहुल ने कहा, "पहनकर ऑफिस आओ।"
आयशा ने मना किया, "नहीं सर, मैं बुर्का..." राहुल ने जोर दिया, "प्लीज, एक दिन।"
आयशा मानी, "ठीक है।"
अगले दिन – आयशा साड़ी पहनी, ऊपर बुर्का।
ऑफिस पहुंची, बुर्का उतारा – सब देखते रह गए। साड़ी में आयशा – कर्व्स उभरे, कमर दिखती, स्तन का उभार।
सब तारीफ – "वाह आयशा, स्टनिंग!"
राहुल की प्यास बढ़ी – "ये जिस्म... मेरा।"
उसने केबिन बुलाया, "तुम बहुत सुंदर लग रही हो।" आयशा शरमाई, "थैंक यू सर।"
राहुल करीब आया, कंधे पर हाथ रखा – गर्म स्पर्श।
फिर चूमने की कोशिश – होंठ करीब।
आयशा पीछे हटी, "नहीं सर!" घर चली गई। घर पर गिल्ट – "ये क्या?" ***** की, तौबा।
सहेलियों की स्टोरी याद – "कहीं मैं भी..."
इरफ़ान से कहा, "जॉब छोड़ दूं?"
इरफ़ान ने मना किया, "हालत खराब है, जारी रखो।" रात सेक्स – इरफ़ान के साथ, लेकिन राहुल का खयाल – प्यास बनी रही।


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