Thread Rating:
  • 10 Vote(s) - 1.6 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
Incest खेल ससुर बहु का
#29
और फिर वो दिन आया जिसने इन तीनो किरदारों की ज़िंदगी पूरी की पूरी बदल दी।


उस दिन मेनका अकेली ही डॉक्टर लता से मिलने गयी थी। चेक अप मे सब कुछ नॉर्मल था बस उन्होने अभी भी चुदाई से परहेज़ करने को कहा।

रात के एक बज रहे थे। मेनका ने कपड़े बदल कर नाइटी पहन ली थी। विश्वा का कही पता नही था। वो मोबाइल भी नही उठा रहा था। सारे नौकर महल के नियमानुसार महल से बाहर अपने क्वॉर्टर्स मे चले गये थे। मेनका को अब बहुत चिंता होने लगी। राजासाहब भी आज वापस नही आए थे ना ही उनका फोन आया था। ऐसे तो दिन मे कम से कम 4-5 बार फोन पे उससे उसका हाल लेते थे। मेनका को घबराहट होने लगी।

और विश्वा, वो देखिए वहा राजपुरा के बाहर हाइवे पे अपनी लेन्द्कृज़र दौड़ाता हुआ सेल पे किसी का नंबर ट्राइ कर रहा है। आइए ज़रा करीब से देखें चलें कार के अंदर।।।।

"डॅम इट! ये हरामजादा, मादरचोद विकी कहा मर गया। अपनी हालत खराब हो रही है और ये साला पता नही कहा अपनी गांड मरवा रहा है!", और अपनी गाड़ी आदिवासियों के गाव की ओर मोड़ दी।

"क्या साहब आजकल आप आते नही।", आदिवासी बंद काले शीशे के अंदर विश्वा से बोला। जवाब मे 3 इंच खिड़की नीचे हुई  और  200 रुपये बाहर आए। आदिवासी की  भोचे खिल गयी और उसने 4 बॉटल्स अंदर दे दी।


इंतेज़ार करते-करते कब मेनका की आँख लग गई, उसे पता भी नही चला। जब धड़ाक से कमरे का दरवाज़ा खुला तो वो चौंक कर उठी।

"कहा थे आप? मैं कितना परेशान थी।"
मैत्री की पेशकश.

विश्वा नशे मे चूर लड़खडाता हुआ अंदर आया। महुआ पूरी तरह उसके दिमाग़ पर हावी थी। उसे मेनका की कोई बात नही सुनाई दे रही थी बस उसका कातिल जिस्म नज़र आ रहा था। वो आगे बढ़ा  और  उसे खीच कर चूमने लगा, अपने हाथ उसकी स्तनों पर रख दिए।

"नही डॉक्टर ने मना किया है।"

"चुप। मादरचोद साली", और उसकी नाइटी उतारने लगा।

"नही, अभी आप होश मे नही हैं, जाइए आज से पहले तो आप कभी पी कर नही आए।", वो अपने को छुड़ाते हुए बोली।

"चुप,साली",विश्वा पागल हो गया" मैं जो मर्ज़ी करूँगा  और  अभी तुझे चोदुंगा। भाड़ मे जाए डॉक्टर।"

"नही”, मेनका उससे बचने के लिए भागी पर विश्वा ने उसे ज़बरदस्ती पकड़ कर उसकी नाइटी फाड़ दी।

"प्लीज़, अपने बच्चे के बारे मे तो सोचिए।" मेनका रोने लगी।


पर विश्वा ने पूरी नाइटी फाड़ कर फेक दी। नाइटी के नीचे कुछ नही था। मेनका भागते हुए कुछ ढूँदने लगी जिससे अपना नंगापन छुपा सके।

पर तभी विश्वा आगे बढ़ा और पीछे से उसे दबोच लिया और पेंट से अपना लंड निकाल कर वैसे ही घुसाना चाहा पर मेनका उसकी पकड़ से निकल भागी। विश्वा  इस हरकत से बौखला गया और लपक कर उसे फिर पकड़ा। इस बार मेनका ने उसके हाथ पे काट लिया।

अब तो वो गुस्से से पगला हो गया। उसने मेनका के बाल पकड़ कर उसे दो थप्पड़ लगाए और फिर उसे बेड पे धकेल दिया। मेनका पेट के बल पलंग के साइड पे इस तरह गिरी कि उसका पूरा पेट पलंग से ज़ोर से टकराया और उसके बदन मे दर्द की तेज़ लहर दौड़ गयी।

"मा...एयेए!" वो दर्द से चीखी "बचाओ," वो बस इतना ही कह पाई और फिर दर्द से वो बेहोश होने लगी। उसकी टांगो के बीच से खून की एक पतली धार उसकी जांघों पर फैलने लगी। ओर इस सबसे बेपरवाह नशे मे धुत विश्वा पीछे से उसकी चूत मे लंड डालने लगा, "ना..ही..प्लीज़..ईयीज़ी", मेनका कराही और जैसे ही लंड उसके अंदर गया और उसे लगा कि जैसे उसका बदन कोई चीर रहा है।
मैत्री की पेशकश.

"बचाओ", वो चीखी और उसी वक़्त भागते हुए राजा यशवीर कमरे मे दाखिल हुए। उन्होने विश्वा का कॉलर पकड़ कर उसे मेनका से अलग किया और एक ज़ोरदार थप्पड़ लगाया। विश्वा वही कोने मे बेहोश होकर ढेर हो गया।

"दुल्हन, आँखें खोलो?", मेनका को उठाते हुए बोले।

"आ..प..आ..ग...ये।", कह कर मेनका उन्हे पकड़ कर बेहोश हो गयी।


क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।

END of episode 12


चलिए फिर मिलते है एपिसोड 13 में तब तक के लिए

मैत्री की ओर से

जय भारत
Like Reply


Messages In This Thread
RE: खेल ससुर बहु का - by maitripatel - 17-01-2026, 01:56 PM



Users browsing this thread: 9 Guest(s)