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Incest खेल ससुर बहु का
#27
अब आगे...............

सुबह राजासाहब लॉन मे चाइ पीते हुए अख़बार पढ़ रहे थे। मेनका वही उनसे कुछ 24 फीट की दूरी पर मालियों को कुछ समझा रही थी। राजासाहब ने अख़बार के कोने से उसे देखा, पीले रंग की साडी मे वो बहुत सुंदर लग रही थी। राजासाहब उसका साइड प्रोफाइल देख रहे थे जिस वजह से उसके बड़ी छातियो  और  गांड के उभार का पूरा पता चल रहा था। आज पहली बार राजासाहब ने उसके फिगर को ढंग से देखा  और  रीयलाइज़ किया की खूबसूरत होने के साथ-साथ  मेनका बहुत सेक्सी  भी है।


तभी मेनका का हाथ अपने माथे पर गया, माली उसके आदेशानुसार लॉन के दूसरे कोने पर चले गये थे। आस-पास कोई नौकर नही था, सभी किसी ना किसी काम मे लगे थे। मेनका को चक्कर आ रहा था, अचानक उसकी आँखों के सामने अंधेरा छा गया।

राजासाहब ने उसे गिरते देखा और बिजली की फुर्ती से उसे ज़मीन पर गिरने से पहले ही सामने से अपनी बाहों मे थाम लिया, "क्या हुआ, दुल्हन?" वो उसे इस तरह से पकड़े थे कि दूर से कोई देखता तो समझता कि दोनो गले लग रहे हैं। उन्होने नीचे उसके चेहरे को थपथपाया। मेनका ने आँखें खोली तो देखा कि उसके ससुर ने उसे गिरने से रोक लिया था।कितना आराम लग रहा था उसे इन मज़बूत बाहों मे, हिफ़ाज़त महसूस हो रही थी, उसने सहारे के लिए राजासाहब के कंधों को पकड़ लिया। उसका दिल किया कि बस ऐसे ही उन बाहों के सहारे खड़ी रहे, राजासाहब की शर्ट के उपर के दो बटन खुले थे  और  उनके चौड़े, बालों भरे सीने का कुछ हिस्सा नज़र आ रहा था। मेनका ने सिर झुकाया और उनके सीने मे अपना मुँह छुपा लिया। उनकी मर्दाना खुसबु उसे मदहोश करने लगी।

राजासाहब की नज़र नीचे पड़ी तो पारदर्शी आँचल मे से उन्हे ब्लाउस के गले से झँकता मेनका का मस्त क्लीवेज नज़र आया जो कि उनके सीने से दबने के कारण और उभर के ऊपर आ गया था। उनके हाथ ब्लाउस के नीचे से उसकी नंगी पीठ और कमर पर थे और उसकी कोमलता महसूस कर रहे थे। राजासाहब का लंड खड़ा हो गया था जिसे सटे होने के कारण मेनका ने भी अपने पेट पे महसूस किया  और वो अपने ससुर से थोड़ा और सॅट गयी। दोनो का दिल कर रहा था कि ऐसे ही पूरी उम्र खड़े रहे पर तब तक नौकर-नौकरानी भागते हुए वहा आने लगे थे। राजासाहब ने एक हाथ अपनी बहू की कमर से हटा कर उसके चेहरे को उपर उठाया, "होश मे आओ दुल्हन।"

नौकरानियों की मदद से मेनका को उन्होने उसके कमरे तक पहुचाया और विश्वा को डॉक्टर बुलाने को कहा। राजासाहब ने अपने मिल स्टाफ की सुविधा के लिए जो हॉस्पिटल बनाया था उसकी देख-रेख की ज़िम्मेदारी डॉक्टर,सिन्हा की थी। उनकी बीवी डॉक्टर लता भी उसी हॉस्पिटल गायनेकोलोजी डिपार्टमेंट देखती थी। विश्वा का फोन मिलते ही वो तुरंत महल पहुचि  और मेनका का चेक-अप करने लगी। थोड़ी देर बाद वो राजासाहब और विश्वा के पास आई, "बधाई हो राजासाहब, आप दादा बनाने वाले हैं।"

"क्या...?सच! डॉक्टर साहिबा आपने तो हमारा मन खुश कर दिया। दुल्हन बिल्कुल ठीक तो हैं ना?"

"हा, राजासाहब। आपकी इजाज़त हो तो मैं कुंवर-कुँवारानी से ज़रा एक साथ बात कर लूँ?"

"हा,हा। ज़रूर। जाइए कुंवर।"

 
मेनका के बेडरूम मे पहुच कर उन्होने कहा,"कुँवरनी बिल्कुल ठीक हैं,कुंवर। बस आप इनका रेग्युलर चेक-अप करवाते रहिए। बस एक बात का ख़याल रखे। अभी कमसे कम 45 डेज़ तक आप दोनो फिज़िकल रिलेशन्स मत बनाइएगा।ये होने वाली मा के लिए बहुत ज़रूरी है। एक डॉक्टर होने के नाते मेरा फ़र्ज़ था कि मैं आपको ये बता दूं होप यू डिड्न'ट माइंड इट।"

"
नो नोट ऐट ऑल, डो. आंटी। आपने बचपन से हमे देखा है, आप इतना फॉर्मल होकर हमे शर्मिंदा कर रही हैं।"


विश्वा राजासाहब के कहने पर डॉक्टर को छोड़ने बाहर तक आया।

"
कुंवर, आपकी तबीयत तो बिल्कुल ठीक है ना?", विश्वा की आँखें देख कर डॉक्टर लता को कुछ शक़ हुआ था।

"
हा,आंटी ऐसा क्यू लगा आपको?"

"
बस ऐसे ही कोई परेशानी हो तो आप जानते हैं कि आपके डॉक्टर अंकल और मैं हमेशा मौजूद हैं।"

"
हा, आंटी। आप फ़िक्र ना करें।"


जब से मेनका प्रेग्नेंट हुई थी राजासाहब तो उसका और ख़याल रखने लगे थे। अगर उसे एक फूल भी उठाकर यहा से वहा रखते देखते तो नौकरों को डाँटने लगते। उसे अपने हाथों से काम तो पहले भी नही करना पड़ता था और अब तो लगता था कि राजासाहब का बस चलता तो उसे हर वक़्त बिठा कर ही रखते। पर विश्वा वैसे का वैसा था बस अब उसे चोद नही सकता था। पर मेनका को उसकी चिंता होती थी, इधर वो उसे और अजीब लगने लगा था। राजासाहब जर्मन कंपनी से डील मे बिज़ी थे। अब पेपर  और शुगर दोनो मिल्स मे हिस्सेदारी अकेली वो जर्मन कंपनी खरीद रही थी।

ऐसे मेनका की प्रेग्नेन्सी को एक महीना पूरा हो गया।

"
दुल्हन, जर्मन डील के लिए हमे 2-3 दिनों के लिए शहर जाना पड़ेगा? पीछे आप अपना ख़याल रखिएगा। और हाँ कोई भी काम बिल्कुल नही करना है, बस हुक्म देना है। सारे नौकरों को भी हमने ताकीद कर दी है।"

"
आप हुमारी चिंता मत करिए, पिताजी। आप बस डील के टर्म्स ध्यान से फाइनलाइज करिएगा। वो क्लॉज़ ज़रूर डलवाइएगा जिसमे मेन्षंड है कि उनके स्टाफ के ग्रूप मे आने के बाद भी हमारे एग्ज़िस्टिंग एंप्लायीस को 6 महीने तक नही हटाया जा सकता, केवल हटाने के लिए शॉर्टलिस्ट किया जा सकता है। और हा, उनकी कॉंपेन्सेशन अमाउंट भी अभी ही फाइनल कर लीजिएगा।", राजासाहब के कार मे बैठते मेनका बोली।

"
ओके, दुल्हन। अब अंदर जाकर आराम कीजिए।"

"
कार मे बैठे-बैठे राजासाहब सोच रहे थे कि वो कितने किस्मतवाले हैं कि मेनका जैसी बहू मिली। और फिर वोही ख़याल आया उन्हे, "अगर वो उनकी पत्नी होती तो?"

पर उन्होने अपना सर झटका और कुछ पेपर्स देखने लगे।

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"
कैसा चल रहा है? चिड़िया को दाने की आदत लग गयी?"

"
हा, अब तो पंछी एक दिन भी बिना दाने के नही रह पाता। इतने ही दीनो मे ऐसा आदि हो जाएगा मैने तो सोचा ही नही था।"

"
तो अब उसे थोड़ा तड़पाओ। कुछ दीनो के लिए दानो की सप्लाइ रोक दो। थोड़ा तडपेगा तो जो हम कहेंगे वो करेगा।"

"
ओके।"


और जब्बार और कल्लन उर्फ विकी की बात ख़तम हो गयी।

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चलिए मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ

तब तक के लिए मैत्री की ओर से



जय भारत
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RE: खेल ससुर बहु का - by maitripatel - 17-01-2026, 01:49 PM



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