Thread Rating:
  • 0 Vote(s) - 0 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
Fantasy दादा जी के साथ मेरी गरम फैंटेसी
#1
हेलो मेरा नाम पूजा हे में कन्नौज की रहने वाली हूं 2025 में मेरा 12th हुआ था,में देखने में कुछ खास नहीं हूं नोर्मल हूं सांवला रंग हे पतला शरीर हे बूब्स 30B हे मेरे गांड़ भी ज्यादा बाहर नहीं हे
मतलब नोर्मल शरीर हे मेरा,मेरे घर में मेरे पापा मम्मी ओर छोटा भाई हे में,पापा की किराने की दुकान हे,उसी से घर चलता हे।

मेरे बहुत से शौक हे लेकिन घर पर नहीं कर सकती में सिर्फ सलवार कुर्ता ही पहनती हूं घर पर इसके अलावा कुछ भी नहीं पूरी पाबंदी हे कि शरीर का कोई भी हिस्सा मुझ ओर हाथ के पंजे के अलावा कुछ दिखे न ,मुझे भी स्टाइलिश कपड़े पहनने का बहुत मन करता हे सेक्सी टाइप ब्रा पैंटी,स्मॉल स्कर्ट,टैंक टॉप ,ये सब पहनने का बहुत मन करता हे लेकिन आजादी नहीं थी।मैने अपने घर पर बोला कि मुझे तैयारी करनी हे दिल्ली जाना हे वाहन अच्छी कोचिंग कोई तैयार नहीं हुआ फिर बहुत मनाया नहीं माने मेरे एक टीचर हे मैने उनको बताया तैयारी के लिए तो उन्होंने पापा को समझाया तब पापा बहुत मुश्किल से मान गए फिर 1 महीने बाद पूरी तैयारी करके में मम्मी ओर पापा दिल्ली पहुंच गए एक अच्छी सी कोचिंग पता की ओर एडमिशन ले लिया फिर एक अच्छा ओर सस्ता होटल देखा बना में शिफ्ट हों गई 2 दिन तक मम्मी पापा रुके रहे सब कुछ काम खत्म करके फीस जमा करके ओर सब सामान खरीद के दे लिया फिर दोनों लोग चले गए घर।

मैने हॉस्टल में देखा लड़कियां पैंटी पहन कर पूरे हॉस्टल में घुमा करती थी कोई शर्म नहीं थी क्योंकि हॉस्टल में कोई लड़का नहीं आता था फिर मेरे भी रंग बदलने लगे में भी स्टाइलिश कपड़े खरीदने लगी सरोजनी मार्केट से सस्ते सस्ते बहुत छोटे छोटे ब्रा पैंटी शॉर्ट्स टीशर्ट लेकिन सिर्फ हॉस्टल में ही पहन सकते थे होटल्स बाहर पहन कर जाना माना था और शाम को 8 के बाद जाना माना था होस्टल वाले घर फोन कर देते थे छोटी छोटी बात पर मैने सोचा यहां भी वही पाबंदी जो घर में थी तो क्या फायदा याह आन का ।

फिर मैने हॉस्टल बदलने का सोचा में कोचिंग के बाद रोज दोपहर में कमरा देखने जाती थी 3—4 दिन देखने के बाद बहुत दूर एक घर मिला छोटा सा घर था मैने गेट खटखटाया अंदर से एक दादा जी आए 60 के आ पास उमर होगी थोड़े मोटे थे बहुत बड़ी सफेद दाढ़ी थी ।लेकिन ठीक थे मैने पूछा कमरा हे आपके घर में बोले हां हे वो मुझे कमरा दिखाने अंदर ले गए गेट के 1 फ्लोर पर एक कमरा था मैने कमरा देखा रुपए पूछे सब बात होने के बाद मैने उनको एडवांस दे दिया फिर उन्होंने मेरे बारे में पूछा कौन हो कान्हा से आय हो कान्हा रहते हो क्या करते हे सब बात की फिर उन्होंने बताया मेरा नाम अहमद हे मेरी 2 बेटी हे उनकी शादी हो गईं हे पत्नी 15 साल पहले खतम हो गई थी में सरकारी टीचर था ,फिर काफी देर बात होने के बाद में हॉस्टल वापस आ गई।
फिर घर पर फोन करके बता दिया यहां खाना अच्छा नहीं मिलता में ओर कुछ लड़कियां हॉस्टल छोड़ कर दूसरी जगह शिफ्ट हो गई हे ।

अगले दिन समान ले कर में दूसरे हॉस्टल पहुंच गई समान सेट किया
थक गई थी सो गई फिर 2 घंटे बाद शाम को 4 बजे उठी और घर में मिनी स्कर्ट छोटी टीशर्ट पहन कर घूमने लगी ऊपर छत पर गई घर छोटा था सबसे नीचे दादा जी रहते उनका रूम हे और उसके ऊपर फ्लोर पर मेरा कमरा हे और छोटा हाल हे बस टॉयलेट बाथरूम सबसे नीचे दादा जिनके रूम के पास हे वाही किचेन भी हे और फ्रिज भी दादा जी ने बोला था मन हो तो किचेन में खाना बना सकती हो
शाम को खाना खाया थोड़ा सा स्टडी की ओर सो गई ।

अगले दिन में जल्दी उठ गई थी 4 बजे फिर नींद नहीं आ रही थी तो में ऊपर छत पर निकल गई पूरा अंधेरा था दूर दूर तक कोई नहीं हल्की हल्की ठंडी हवा चल रही थी में शॉर्ट्स और टीशर्ट पहनी थी मेरे अंदर शरारत आई की कपड़े उतार दूं फिर सोचा किसी ने देख लिया तो फिर ध्यान से आस पास देखा कि कोई नहीं हे ये मेरा पहली बार था खुले में ऐसा करने जा रही थी मैने शॉर्ट्स उतरी आस पास देखा फिर टीशर्ट उतार दी में सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी थोड़ा सा आस पास घूमी डर भी लग रहा था फिर धीरे से पैंटी भी उतार दी ठंडी ठंडी हवा जैसे ही चूत पर लग रही थी अलग ही सुकून था फिर बहुत हिम्मत करके ब्रा भी उतार दी बहुत डर लग रहा था फिर भी 2 मिनट तक घूमी फिर जल्दी से कपड़े पहने और वापस रूम आ गई लेकिन मजा बहुत आई थोड़ी देर लेती रही फिर ब्रश किया और तैयार होने लगी कोचिंग जाने के लिए नहा कर आई और ब्रा पहनी टीशर्ट पहनी फिर पैंटी पहनी फिर स्कर्ट पहनी जो घुटने से थोड़ा नीचे तक थी ओर कोचिंग चली गई में सबसे पीछे बैठी थी मेरे बगल में कोई नहीं था में पोर्न देख रही थी बोरिंग क्लास चल रही थीं में गरम हो गई में फिंगरिंग करने लगी फिर मेरे मन में आया पैंटी उतर के करती हूं कौन स्कर्ट के नीचे झांक के देखेगा मैंने आस पास देखा और धीरे धीरे पैंटी निकाल कर बैग में रख ली
अब में बिना पैंटी के क्लास में थी में खुल कर बैठी थी पैर फैला कर अच्छा लग रहा था फिर थोड़ी देर तक फिंगरिंग करती रही फिर क्लास खत्म हो गई मैंने पैंटी नहीं पहनी और चली घर के लिए चल दिए रस्ते में ऐसा लग रहा था जैसे सभी मुझे ही देख रहे थे बिना पैंटी के थोड़ा अजीब तो लग रहा था पहली बार रोड पर ऐसे चल रही थी तो अच्छा भी लग रहा था कि कुछ अलग किया मैने। फिर में रस्ते में कपड़ों की दुकान पर गई सेक्सी पैंटी ली जिसमें सिर्फ आगे से चूत छुपती हे पीछे से डोरी जाती हे ओर भी बहुती सारी ली जाली दार पैंटी ली ब्रा ली और फिर में 12 बजे दोपहर कमरे पर आ गई कपड़े बदले सब उतर दिया छोटी सी टीशर्ट पहन लिया ओर छोटी सी स्कर्ट जो घुटने से भी ऊपर थी ब्रा पैंटी नहीं पहनी ओर कुछ खाया फिर वैसे ही सो गई 3 बजे उठी तो नीचे टॉयलेट गई टॉयलेट से निकल कर जब हाथ धोने के लिए गई तो देखा दादा जी मुझे देख रहे हे मुझे लगा कहीं इनको पता तो नहीं चल गया कि मैंने पैंटी ब्रा नहीं पहनी। कुछ शक हुआ तो में चली गई ओर कमरे में आकर अपने आपको देखा आगे पीछे सब कुछ तो सही था शायद ऐसे ही देख रहे थे ।फिर में लेटे लेटे मोबाइल चला रही थी तो मेरी नजर अचानक से खिड़की पर गई तो देखा दादा जी कोने से मुझे देख रहे हे मुझे अचानक डर लगा मैने कोई हरकत नहीं की वैसे ही लेती रही थोड़ी देर देर बाद वो चले गए में सोच में पड़ गई ये मुझे क्यों देख रहे थे मैने सोचा मुझे लाइन तो नहीं मार रहे ।

रात को 1 बजे मुझे मेरी आंख खुली मुझे प्यास लगी ठंडा पानी नहीं था उस टाइम में नंगी सो रही थी मैने एक नॉर्मल पैंटी पहन ली और टीशर्ट पहन ली और चल दी नीचे मैने सोचा 1 मिनट लगेगा पानी लेने में दादा जी सो रहे होंगे क्या दिक्कत में फ्रिज खोल कर पानी लेने लगी 
तो मैने देखा फ़्रिज के बगल मे दादा जी के कमरे का गेट खुला हे ओर हल्की हल्की लाइट जल रही तो मे थोडा सा फ़्रिज के पास से हट कर देखने लगी तो दादा अपने पलन्ग पर नहीं थे मे तुरन्त वापस आ कर फ़्रिज खोली ओर बोतल निकाल ही रही थी की फ़्रिज ओर कमरे के सामने बाथरुम था दादा जी अचानक वहां से निकले हाल मे लाइट जल रही मे तुरन्त पीछे मुडी तो देखा दादा पेसाब या लेटरिन्ग गए होंगे ओर हल्का ओर बहुत डिला नेकर पहने थे मे उनको देख रही थी ओर वो मुझे छोटी टीशर्ट उसमें से मेरे निप्पल खड़े थे ओर पैन्टी मे 5 sec तक तो समझ ही नही आया क्या करु मे तुरन्त बोतल ली ओर भाग गई सीधे कमरे मे गई लेट गई इतनी तेज धक धक हो रही थी पहली बार किसी ने मुझे येसा देखा था समझ नी आ रहा था क्या करु ओर सोचते सोचते मेरी आंख लग गई ओर मे सो गई सुबह 5 बजे मेरी आंख खुली मुझे फिर वही याद आ गया अंदर से शर्म भी लग रही थी ओर अच्छा भी लग रहा था किसी ने नंगा देखा लेकिन दादा जी ने कोई जवान लड़का होता तो अच्छा लगता फिर सोचा तो क्या होगा ये भी तो लड़के ही हे और यही सोचते सोचते मेरी चूत गीली हो गई में उठी और ऊपर छत पर चली गई हॉफ टीशर्ट और पैंटी पहने थी ऊपर अंधेरा था 2 मिनट टहली ओर आस पास देखा कोई हे तो नहीं पूरी नंगी हो गई ओर जमीन में लेट गई बहुत मस्त हवा चल रही थी मजा आ रही थी फिर मेरे अंदर जोश आया दादा जी को ओर गरम करूंगी में नीचे आई ब्रश किया और नहाने के गई दादा जी कमरे में थे मुझे देख रहे थे कि में बाथरूम में हूं मैने नहाया और अपनी ब्रा पैंटी उसी टोटी में धूल के रख दी और टॉवेल ऊपर टीशर्ट पहनी नीचे पिंक पैंटी पहनी ओर टॉवेल लपेट लिया फिर सोचा दादा जी ने देख तो लिया अब क्या दिक्कत मने जान बुझ कर टॉवेल ढीली बांध दी और गेट खोला तेज आवाज से दादा जी तुरंत देखने लगे में घूम कर खड़ी हुई और झुक कर साबुन ओर बाल्टी उठाने के बहाने टॉवेल धीरे से खोल दी बाटली उठा का जैसे खड़ी हुई टॉवल गिर गई उनके सामने में फिर से पैंटी में आ गई अब में जल्दी जल्दी उन्हीं के सामने खड़े होकर टॉवेल बांध दी और कमरे में आ गई बहुत मजा आई 
फिर में कोचिंग चली गई लौट के आई तो तुरंत बाथरूम में गई तो देखा बॉथरूम में मेरी ब्रा पैंटी नहीं थी मैने देखा आस पास नहीं हे मैने सोचा दादा जी ने पक्का चुरा ली में बोली नहीं फिर ऊपर छत पर गई तो देखा धूप पे सुख रही थी समझ गई दादा जी ने डाली हे 
फिर में कपड़े लेकर कमरे में आ गई में बहुत गरम हो गई थी में पूरे कपड़े उतरे फिर थ्रोग़ पैंटी पहनी जिसमें पीछे डोरी होती हे और अंगे छोटा सा कपड़ा ओर स्कर्ट पहनी ऊपर नेट वाली सेक्सी ब्रा पहनी ओर टीशर्ट पहनी ओर बैग लेकर बाहर निकल गई घूमने मार्केट घूमी में सोच रही थी कोई मुझे टच करे छेड़े में मेट्रो में गई भीड़ वाली जगह में घुसी और फायदा नहीं फिर में बस स्टैंड से खड़ी हो गई 7 बज गई थे हल्का हल्का अंधेरा हो गया था घर के लिए आ रही थी एक बस आई बहुत भरी थी लोग लटके थे में घुस गई उसमें सब लेबर मिस्त्री ऐसे लोग थे काम करने वाले मेरे दिमाग में उस टाइम कुछ नहीं चल रहा था सेक्स के बारे में बस घर पहुंचना था जल्दी लेट हो रही थी भीड़ म किसी ने मेरी गांड़ पर टच किया मैने सोचा भीड़ में धोखे से लग गया होगा फिर से हुआ मैने पीछे देखा एक आदमी था बहुत लंबा चौड़ा कोई लेबर था कपड़े भी गंदे थे में फिर आगे देखने लगी फिर से वही हुआ में कुछ नहीं बोली मेरी टीशर्ट छोटी थी ओर स्कर्ट भी छोटी थी थोड़ा पेट दिख रहा था उसने मेरे पीठ पर उंगलियां फेर दी मेरी जान निकल गई करंट आ लगा मुझे भी अच्छा लग रहा था जब में कुछ नहीं बोला तो वो पूरा खुल गया मेरे साथ मेरे गान मसलने लगा मेरी आंख बंद हो गई फिर धीरे धीरे स्कर्ट ऊपर उठाई और पैंटी ढूंढने लगा उसको मिली नहीं जब जी की दरारों में उंगली डाली तो पैंटी की डोरी मिल गई मेरे कान में धीरे से कहता हे कितने रुपए लेती हो रंडी भरी बस में चुदवाने के लिए आई हो सेक्सी पैंटी पहन कर ये सुन कर मुझे बहुत अजीब लगा कि में सच में रंडी लग रही क्या उसने फिर धीरे धीरे मेरे चूत पर उंगली ले गया पूरी गीली थी मेरे से कहता कान में मेरे तरफ घूम जाओ चूत में उंगली करनी हे में धीरे धीरे घूम गई बस में इतनी भीड़ थी समझ ही नहीं आ रहा था अंधेरा भी था 8 बजने वाले थे में आंख बंद करके उसके मुंह के तरह आमने सामने खड़ी हो गई चिपक कर और मन ही मन मजे कर रही थी जो हो रहा होने दो वो उसने अपना लंड निकाला और मेरी स्कर्ट उठाई और पैंटी एक साइड की ओर डालने की कोशिश करने लगा लेकिन जा नहीं रहा था फिर वो हिलाने लगा और एक हाथ से उंगली डाल कर चला रहा था चूत में अलग ही सुकून था और जैसे ही उसका निकलने वाला था मेरी पैंटी खोली और उसी में पानी भर दिया जैसे ही पानी उतर कर चूत की दरारों में लगा बहुत गरम था अब वो कहता हे कमरे में मिलो नंबर दो अपना में कुछ नहीं बोली धीरे धीरे आगे निकल गई ओर अपने स्टॉप पर उतर गई
रात के 8 बज गय थे तेजी से रुम पर गई ओर जल्दी से कपडे उतारे ओर धिरे से पैन्टी उतारी ओर देखी पैन्टी मे लन्ड का पानी भरा था चिपचिपा था ओर मेरी चुत पर चिपचिपा पानी लगा था मे बहुत गर्म हो गई मेरा मन हुआ की पैन्टी को चाट लु उसके लन्ड का पानी पी जाऊं फिर में नंगी लेट गई ओर चूत पर उंगली चलानी लगी उसका लंड का पानी भी मेरे चूत पर था अलग ही मजा आ रहा था फिर में बहुत जोश में आ गई तो मैने पैंटी उठाई और मुंह पर रख कर पूरा पानी चाट गई जो पैंटी पर लगा था फिर मैने दूसरा कपड़ा उठाया और चूत को साफ किया स्कर्ट पहनी हॉफ टीशर्ट पहनी अपनी नीचे बाथरूम गई टॉयलेट लिया साफ किया ।

बाहर जब निकल कर आई तो देखा दादा जी बाहर खड़े थे मैने उनसे कहा दादा जी ऊपर छत पर एक्सरसाइज कर सकती हूं जाकर सुबह आंख नहीं खुलती जल्दी कहते हैं हां जाओ दादा जी मेरे निप्पल देख रहे थे खड़े थे ओर जांघ देख रहे थे में ऊपर कमरे में आई तो दूसरी वही गंदी वाली पैंटी फिर पहन ली जिसमें पानी लगा था और टीशर्ट भी हॉफ थी आधा पेट दिख रहा था में ऊपर आ गई मुझे पता था दादा जी ऊपर जरूर आएंगे 
10 मिनट बाद जीने पर किसी के आने कि आवाज सुनाई देने लगी मे तुरन्त उछलने लगी ओर दादा आ गए वो चोरी छिपे मेरे को देख रहे थे मेरी स्केर्ट भी उपर नीचे हो रही थी जिससे मेरी हल्की हल्की पैन्टी दिख रही मे गरम होती जा रही थी ब्रा पहनी नहीं थी तो दूध भी बहुत उछल रहे थे 5 में मिन एक्सरसाइज करने के बाद में जमीन में बैठ गई दादा जी मेरे से बात भी कर रहे थे घर परिवार की ओर में बैठ कर योग कर रही थी थोड़ी सी एक्सरसाइज करने के बाद में उठ कर बैठ गई जैसे टॉयलेट में बैठते हे मेरी पैंटी पूरी दिखने लगी दादा जी को पूरा साफ साफ दिख रहा था में बिल्कुल अनजान बनी थी मेरी हालत खराब थी फिर में उठी मैने कहा दादा जी ने जा रही प्यास भी लगी हे ओर सोने भी जाना हे ओर में सबसे नीचे फ्रिज। के पास आ गई ओर इंतजार करने लगी दादा जैसे ही जीने से नीचे आने लगे में मेने तुरन्त फ़्रिज खोल के पुरा झुक गई उसकी मेरी पूरी गान्ड दिख रही थी ओर थ्रोग़ पैन्टी थी सिर्फ आगे कपड़ा था पीछे कुछ था नहीं ओर जब दादा नीचे आय उन्होने पीछे से नजारा देखा देखते ही रह गय वो 2 -3 मिनट तक देखते रहे थोडी देर बाद में खडी हुई ओर पानी पीने लगी ओर जान बुझ कर अपने उपर पानी गिरा लिया जिससे शर्ट चिपक गई ओर दुध पुरे दिखने लगे तब तक दादा भी फ़्रिज के पास जा पहुचे मैने जान बुझ कर वन्हा से नही हटी ओर उन्ही के सामने पानी पिने लगी दादा मेरे दुध देख कर पागल हुए जा रहे थे मे भी गरम हो रही थी नजारा देख के फिर में चुप चाप ऊपर कमरे में आ गई ओर जल्दी से कपड़े निकालें और पूरी नंगी होकर लेट गई अब कोई डर भी नहीं था दादा जी देख लेंगे मैने खिड़की पूरी खोल दी में जाग रही थी सोच रही थी ओर क्या खेल करूं तब तक दादा जी आ गए खिड़की से देख रहे थे मुझे पूरा नंगा मैने कोई हरकत नहीं की चुप चाप लेती रही ओर कब सो गई पता ही नहीं चला अगले दिन में उठी और नहाने के लिए बाथरूम में गई नहाया और अपनी वही थ्रोग़ पैंटी और स्कर्ट गीली करके जमीन में डाल दिया जानबूझ कर ओर टॉवेल लपेट कर टीशर्ट पहन कर बाहर आ गई ओर कमरे में गई ओर ब्रा पहनी टीशर्ट पहनी स्कर्ट पहनी घुटने तक नॉर्मल पैंटी पहनी ओर तैयार होकर कोचिंग गई जाते टाइम रस्ते में मैने देखा था एक दादा ओर दादी रोड के किनारे सब्जी बेच रहे थे जमीन में बिछा कर मेरे मन में आया खेल किया जाय लेकिन 1-२ लोग सब्जी ले रहे थे तो ओर टाइम भी नहीं था में चली गई ओर क्लास ली और बाहर आ गई सब्जी वाले दादा के पास गई वाहन 1 लोग सब्जी ले रहे थे में वाही खड़ी हो गई मैंने सोचा ये चला जय तब खेल करूं दादा दादी मेरे सामने ही बैठे थे मैने कहा 250 ग्राम टमाटर दे दो दादी रखने लगी तराजू में तब तक वो आदमी चला गया में कहा टमाटर सही रखो दादी खराब खराब रख रहे हो दादी कहती हे खुद देख लो बेटा में यही चाहती थी खुद चेक करने के लिए में।बैठ गई मेरी पूरी पैंटी जांघ साफ साफ दिख रही थी दादा दादी दोनों देखने लगे में अनजान बनी थी 2 मिन बैठी रही बैठी बैठी मैने 1-२ सब्जी ओर ली रूपए दिए और आ गई बहुत मजा आ रही थी 
मेरे अंदर से डर खत्म हो रहा था ऐसा लग रहा था कितनी बड़ी मस्त छिनार रंडी हो गई हूं फिर में कमरे में आई ओर सोच रही थीं सुबह बाथरूम में थ्रोग़ पैंटी रखी थी दादा जी ने जरूर देखा होगा हालत खराब कर दी होगी मेरी पैंटी की में नीचे बाथरूम में गई तो कपड़े वहां नहीं थे में इधर उधर देखा फिर में धीरे धीरे दादा जी के कमरे में गई दादा जी नेकर पहने सो रहे थे मैने दादा जी को जगाया और कहा दादा जी मेरे कपड़े नहीं मिल रहे बाथरूम में थे दादा जी उठ के बैठ गए और कहने लगे वो सामने कुर्सी पर रखे हे में जब नहाने गया था कपड़े पड़े थे तो मैने धूल दिए थे मैने कहा सॉरी दादा जी में जल्दी में थी भूल गई थी दादा जी कहते हे अरे कोई बात नहीं बेटा तुम भी तो मेरी बेटी जैसी हो (मेरी बेटी की बेटी ) तुमसे 5 साल बड़ी हे कोई बात नहीं में फिर कुर्सी के पास गई स्कर्ट उठाई देखने लगी और पैंटी उठाई इतनी छोटी पैंटी सिर्फ डोरी ही थी आगे बस थोड़ सा कपड़ा था में उठा कर देखने लगी उन्हीं के सामने ओर कहा हां दादा जी सुख गईं हे मैने कपड़े उठाए ओर चलने लगी मेरी नजर जैस ही दादा जी के नेकर पर गई वो दादा जी का लंड खड़ा था में बाहर निकल आई फिर मैने उनको ज्यादा परेशान करने का नहीं सोचा में वापस आ गई सोचा क्या करूं मैने आज फिर से बस में जाने का प्लान सोचा लेकिन बस 6 बजे के बाद आएगी अभी तो 2 बजे थे मैने सोचा चलो आज मॉल में नंगी घूमती हूं एक बार मजा आएगा बिना पैंटी के में तुरंत ब्रा पहनी टीशर्ट पहनी फुल स्कर्ट पहनी ओर बैग में पैंटी रख ली और निकल गई मॉल ऑटो में बैठी हवा से मेरी स्कर्ट उड़ रही थी में।दबा कर बैठी थी दिन का टाइम था अगर हाथों से न पकड़ो तो पूरी स्कर्ट उड़ने लगेगी और पूरी नंगी हो जाऊंगी पूरी छूट दिखेगी रात होती तो जरूर करती सोच लिया रात में ये भी करूंगी फिर मॉल पहुंची मॉल में बिन पैंटी के घूम रही थी 
 आज मैने रिस्क लेने की सोची और डर भी नहीं लग रहा था नंगी होने का में वहां एक कपड़े की दुकान में चली गई| में कुछ ऐसा करना चाहती थी जिसके बारे में बहुत दिनों से प्लान कर रही थी| मै एक कपड़े की स्टोर में गई जहां लोग ज्यादा नहीं थे ओर ट्रायल रूम था थोड़ी देर तक में कपडे ढूंढती रही| उस स्टोर में ज़्यादातर कर्मचारियों लड़के ही थे|

तभी उस दुकान का एक लड़का मेरे पास आया और पुछा: "मैडम, क्या मैं आपकी कुछ सहायता कर सकता हूँ?"
मैने: नहीं, कुछ नहीं, मैं अपने लिए जीन्स और कुरता ढूंढ रही हूँ, कुछ मदद चाहियेगी तो आप को बता दूंगी|
लड़का: ओके मैडम|
ये कह के वो लड़का वहां से चला गया| कुछ देर में ने भी एक कुरता और जीन्स चुन ली लेकिन थोड़े छोटे साइज में| में ट्रायल रूम में चली गई। मैने गेट बंद कर दिया और अपने कपड़े उतार दिया। अब में एक स्टोर में पूरी नंगी थी, चाहे ट्रायल रूम में ही, लेकिन फिर भी ये बहुत उत्तेजित करने वाला पल था| हालाँकि मुझे पता था की जीन्स छोटे साइज ही है फिर भी मैने जीन्स को पहनने की कोशिश की| जैसा की पता ही था जीन्स मेरे जाघों से ऊपर चढ़ी ही नहीं|
मैने जीन्स उतार दी और थोड़ा ज़ोर से पुकारा: "सुनिए, कोई है?"
बाहर से वही एक लड़का: गेट के बाहर खड़ा हो गया बताइये में आपकी कैसे सहायता कर सकता हूँ?"
में : मैंने गलती से ये छोटे साइज की जीन्स चुन ली, क्या आप मुझे एक बड़े साइज की जीन्स ला के दे सकते हैं|

लड़का: हाँ क्यों नहीं मैडम| कोन से साइज की जीन्स लानी है?
में गेट के पीछे पूरी नंगी थी| मैंने थोड़ा सा गेट खोला अपना हाथ बाहर निकला और बोली: भैया, ये जीन्स ले लीजिए और इसी डिज़ाइन में बड़ा साइज ला दीजिये|
नंगे होके किसी अनजान आदमी से बात करने का पहला मौका था| मुझे अपने आज के कांड में बहुत मज़ा आ रहा था| जब वो लड़का जीन्स लेने चला गया तो मेंने कुरता पहन लिया| कुरता मेरे बदन पे बहुत टाइट था, मेरे दूध तो कुरता फाड़ के बाहर आने के बेताब थे| मेरे मटर जैसे निप्पल कुर्ते के ऊपर से बिलकुल साफ़ दिखाई दे रहे थे| कुरता मेरे घुटनो के थोड़ा सा ऊपर तक था, साइडों से कुर्ते का कटाव कमर तक था| मेरी चिकनी गोरी-२ जांघें ऊपर तक दिखाई दे रही थी|
सब प्लान के मुताबिक चल रहा था| बस कुरता ज़रुरत से ज़्यादा टाइट हो गया था| अब प्लान के हिसाब से मुझे इसी ड्रेस में उस लड़के से जीन्स लेनी थी| लेकिन मुझे डर था की कहीं ये कुरता फट ही ना जाए| लेकिन मैने अपने मन को पक्का किया और उस लड़के का इंतज़ार करने लगी|
लड़का कुछ देर में वापिस आया और उसने मुझे आवाज़ लगायी| में चाहती तो सिर्फ हाथ बाहर निकाल के जीन्स ले सकती थी लेकिन मैने गेट आधा से थोड़ा ज्यादा सा खोल दिया| मेरे सामने एक प्यारा-सा तकरीबन 18-19 साल का लड़का जीन्स लिए खड़ा था| लड़के का मुंह खुला हुआ था और वो मुझे सर से पाँव तक निहार रहा था। मैने उससे जीन्स लेने के लिए अपना हाथ बढ़ाया लेकिन वो लड़का तो जैसे पागल ही बन गया था| में थोड़ा और झुकी और जीन्स पकड़ ली| अब मेरा क्लीवेज और ज्यादा दिखाई देने लगा|

में: जीन्स दो ना भैया, क्या कर रहे हो?
लड़का (होश में आते हुए): हाँ ... हाँ ... मैडम ...
मेंने जीन्स उस लड़के के हाथ से ले ली और थोड़ा मायूसी दिखाती बोली: क्या भैया, देखो ना ये कुर्ती भी छोटी साइज की आ गयी है| क्या आप मेरे लिए प्लीज बड़े साइज कुर्ती भी ला देंगे?
लड़का अब तक होश संभाल चूका था| लड़के ने बातचीत को बढ़ाने के लिए बोला: क्या बात करती हैं मैडम? ये कुर्ती तो आप पे बहुत जंच रही है|
में: अरे भैया आप भी, देखो ना कितनी टाइट है हर तरफ से| ऐसा लगता ही किसी ने मुझे इस कुर्ती में ठूंस दिया हो|
लड़का (जाँघों को घूरते हुए): कुछ भी कहो मैडम, लेकिन अच्छी तो बहुत लग रही है
में (इशारा करते हुए): ये देखो, मेरे पिछवाड़े पे कितनी टाइट है| और देखो, और देखो, छाती पे भी कितनी कस गयी है| ज्यादा हिली तो कहीं फट ही ना जाये|
लड़का (मन में): तो हिल न मेरी छमकछल्लो
में: आप रुको एक मिनट|

ये कहते हुए मैने गेट बंद कर लिया और कुर्ती उतार दी| मैने बाहर हाथ निकल के कुर्ती दी और बोली: "भैया, इसी डिज़ाइन की लाना प्लीज"
लड़के के जाने के बाद मेंने जीन्स पहन ली और हाथ में अपनी टीशर्ट ले लिया| अब मेंने अपने प्लान को ओर रिस्क लेने की सोची 
थोड़ी देर में लड़के ने वापिस आ के मुझे आवाज़ दी| इस बार मैने सिर्फ जीन्स डाली हुई थी और ऊपर से अपने आप टीशर्ट पकड़ के ढक लिया था| मेंने गेट आधे से ज़्यादा खोल दिया| लड़के की आँखें फटी की फटी रह गयी| ऐसा लग रहा जैसे अभी उसकी आँखें बाहर निकल के गिर जाएँगी| लड़के को मेरी गोरी चिकनी पीठ पीछे लगे शीशे में बिना ब्रा की पट्टी के बिलकुल साफ़ दिखाई दे रही थी|
ऐसा नहीं था की में उस लड़के के सामने टॉपलेस थी लेकिन ये कुछ कम भी नहीं था| मेंने दोनों हाथ से टीशर्ट को अपने बदन से कस कर पकड़ा हुआ था| मेरा एक हाथ दूध के थोड़ा ऊपर था और दूसरा हाथ पेट के पास था| अब मुझे उस लड़के से कुर्ती लेने के लिए एक हाथ को टीशर्ट से हटाना था| अगर में अपना नीचे वाला हाथ हटाती तो मेरे दूध नीचे से दिखाई दे जाते और नाभि तो पूरी दिखाई दे रही थी अगर में अपना ऊपर का हाथ हटाती तो मेरे दूध बिलकुल ही नंगे हो जाने थे| कुछ सेकंड सोचने के बाद मैने अपना ऊपर वाला हाथ खिसका के बिलकुल अपने दूध पे रख लिया और दूसरा हाथ हटा के कुर्ती लेने के लिए आगे बढ़ा दिया| मेरा ऐसा करने से मेरे दूध थोड़ा दब गए और ऊपर से आधे से ज़्यादा दिखाई देने लगे| बस निप्पल ही दिखाई देने की कसर बची थी| नीचे से मेरा नंगा सपाट पेट देख के लड़के की हालत ख़राब होने लगी| लड़के ने ना चाहते हुए मुझे कुर्ती पकड़ा दी और पुछा: मैडम, कोई और सहायता? अभी के लिए थैंक्स भैया|

मुझे इस सब में बहुत मज़ा आया| मस्ती से मेरी आँखें लाल हो गयी थी| मेरी चुत बुरी तरह बहने लगी थी| मेरी हालत बहुत ख़राब हो गयी और सहना मुश्किल हो गया| मेंने फटाक से गेट बंद किया| मैने कुर्ती पहन के भी नहीं देखि| मैने जीन्स उतारी और वापिस से अपने कपड़े पहन लिए अब में जल्दबाज़ी में बाहर जाने लगी| पीछे से लड़के ने आवाज़ दी: क्या हुआ मैडम?
मैने कहा नहीं भैया, पसंद नहीं आया कुछ, कपडा भी अच्छा नहीं है और आपके रेट भी बहुत ज़्यादा हैं|
लड़का: मैं कुछ और कम रेट के कपडे दिखा देता हूँ, बिलकुल नए फैशन है मैडम|
लड़का किसी भी कीमत पे लड़का मेरे साथ कुछ और देर बिताना चाहता था|
लेकिन मैने कहा नहीं भैया, अभी देर भी बहुत हो गयी, फिर कभी आउंगी|
लड़का: आपकी ही दुकान है मैडम, जब चाहे आइये| अभी तो थोड़ा रुकिए ना, आपके लिए स्पेशल डिस्कोउंट भी हो जायेगा, आप कुछ और कपडे try करके तो देखिये|
में(मन में): ये चूतिया तो चिपक ही गया|
 नहीं भैया, फिर कभी|

उसके बाद में उस लड़के को अनसुना करके तेजी से दूकान से
निकल ली|
तब तक 6 बजने वाले थे 
में बस स्टॉप पहुंच गई 2-3 बस चली गई भीड़ ज्यादा नहीं थी में उसी बस का इंतजार करने लगी जब वो बस आई बहुत भीड़ थी में उसमें घुस गई सभी लेबर मिस्त्री भरे थे 
मैने स्कर्ट पहनी थी ब्रा भी पहनी थी ओर टाइट नॉर्मल पैंटी क्योंकि में चुदवाना नहीं चाहती थी नहीं तो अगर चूत फट गई तो घर कैसे आऊंगी ओर बस में घुस गई मेरी आंखे उसी लेबर को देख रही थी मुझे वो दिख गया वो पीछे खड़ा था वो मुझे देख के मुस्कुराया मे
जेसे तेसे करके उसके आदमी के पास पहुच गई ओर उसके आगे खडी हो गई 5 मिनट तो उसने कुछ नही किया फिर धिरे से मेरे कान मे कहता हे बहुत दिनो बाद आई मे कुछ नही बोली फिर वो धिरे धिरे अपना हाथ आगे लाया ओर मेरा पेट रगड़ने लगा ओर धिरे से अपना हाथ मेरी पैन्टी मे ले गया ओर चुत मे उन्गली डाल के हिलाने लगा ओर दुसरे हाथ से अपना लन्ड निकाल कर मेरी गान्ड मे रगड़ रहा था मेर बहुत मन था पैर खोल कर चुदवाने का लेकिन पैर खोलने की जगह नही थी मे चुप रही ओर वो लन्ड रगड़ता रहा ओर मेरे कान मे कहता हे मेरे ओर भी दोस्त हे उनको बुला दु मेने कहा हां बुला लो फिर उसने कहा मेरी तरह मुझ करो में घूम गई उसके तरफ मुंह करके खड़ी हो गई फिर उसने एक हाथ से स्कर्ट उठाई और पैंटी खोली और लंड हिलाने लगा और फिर अपने लंड पानी पैंटी के अंदर भर दिया फिर उसके ओर भी दोस्त आय सभी अंकल जैसे थे मेरे पापा के उम्र से बड़े थे सभी ने एक एक करके पैंटी के ऊपर से चूत सहला रहे थे ओर पानी पैंटी के अंदर डाल रहे थे फिर वही मेरे दुध के साथ खेलने लगा ओर लन्ड गान्ड मे रगड़ने लगा बहुत मजा आ रही थी सभी आस पास घेर के खड़े थे अब मेरी चुत तक गिली हो गई थी 
फिर मेरा स्टॉप आ गया में उतर गई फिर 5 मिनट बाद रुम मे पहुच कर सबसे पहले पुरे कपडे उतारे फिर धिरे से मेने पैन्टी उतारी बहुत सारा पानी था गाढा गाढा फिर मेने पुरी पैन्टी से एक एक बुन्द उंगली से निकाल कर कटोरी मे डाला लगभग 8-9 चम्मच के बराबर पानी था चूत ओर जांघ पर जो अभी भी बहुत सारा लगा था में लेट गई ओर रगड़ने लगी चूत बहुत गरम हो गई थी उंगली चाटने लगी फिर मैने वही कटोरी उठाई और अपने दूध पर थोड़ा डाला और चूत पर डाला और रगड़ रगड़ के चाटा इतना मस्त टेस्ट था फिर फिर वही पैंटी उठाई ओर चाटने लगी फिर ऐसे ही सो गई साफ भी नहीं किया
अगले दिन उठी 5 बजे मेरे दिमाग में बस चुदवाना ही दिख रहा था क्या करूं समझ नहीं आ रहा था में मोबाइल पर पोर्न वीडियो देखने लगी उसमें चुदवाने के बहुत सारे प्लान मिल गए ओर नए नए शौक मिल गए 
फिर में उठी और ब्रा पहनी पैंटी पहनी वही वाली ओर हॉफ टीशर्ट पहनी स्कर्ट पहनी ओर नीचे चली आई नहाने के लिए दादा जी टीवी देख रहे थे 7 बज गए थे में बाथरूम में गई ओर गेट बंद कर दिया ओर कपड़े उतरे में नंगी हों गई सभी कपड़े उतार कर एक साइड रख दिए कि गिले न हो फिर मैने पैंटी उठाई ओर चूत वाली जगह पर थोड़ी से पेशाब कर दी कि महक आय मुझे पता था दादा जी देखेंगे जरूर ओर नहा लिया ओर टॉवेल लपेट के चली गई कोचिंग
Like Reply
Do not mention / post any under age /rape content. If found Please use REPORT button.


Messages In This Thread
दादा जी के साथ मेरी गरम फैंटेसी - by Poojagupta9628 - 16-01-2026, 09:28 PM



Users browsing this thread: 1 Guest(s)