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Ayesha ki khubsurat badlao
#3
अनुमति की जंग और रात की आग

Sham का वक्त था, सूरज डूब चुका था और घर में हल्की-हल्की रोशनी जल रही थी। आयशा किचन में खड़ी थी, रोटियां सेंक रही थी। गर्म तवे पर रोटी रखते हुए उसकी उंगलियां थोड़ी जल रही थीं, लेकिन उसका मन कहीं और था। सहेलियों की बातें उसके कानों में गूंज रही थीं

नौकरी कर ले, बाहर निकल, नए लोग मिलेंगे।" वो सोच रही थी, "हां, मैं क्यों हमेशा घर की चार दीवारों में कैद रहूं? मैं भी पढ़ी-लिखी हूं, कुछ कर सकती हूं। बोरियत से तो मर ही जाती हूं रोज।" लेकिन इरफ़ान को मनाना आसान नहीं था।

वो जानती थी कि इरफ़ान पुराने ख्यालात का आदमी है – औरत घर संभाले, बाहर की दुनिया मर्दों के लिए। फिर भी, आयशा ने फैसला कर लिया था कि आज बात करेगी।इरफ़ान घर लौटा, उसके कंधे झुके हुए थे, ऑफिस की थकान चेहरे पर साफ दिख रही थी। वो सोफे पर बैठ गया, जूते उतारे। आयशा ने उसे पानी का ग्लास दिया, फिर चाय बनाकर लाई। "

कैसा रहा दिन?" आयशा ने पूछा, हल्की मुस्कान के साथ। इरफ़ान ने चाय का घूंट लिया, "बस, वही रूटीन। मीटिंग्स, काम। तू बताना, क्या किया आज?" आयशा ने छोटी-मोटी बातें बताईं – घर की सफाई, खाना बनाना, सहेलियों से मिलना। लेकिन उसके मन में वो सवाल घूम रहा था।

Dinner टेबल पर दोनों बैठे। आयशा ने चिकन करी परोसी, रोटियां, सलाद। इरफ़ान खाने लगा, लेकिन आयशा की प्लेट में ज्यादा कुछ नहीं था – वो नर्वस थी। आखिरकार, वो बोली, "इरफ़ान... मैं कुछ कहूं?"
उसकी आवाज हल्की कांप रही थी। इरफ़ान ने सिर उठाया, भौंहें चढ़ाईं। "हां, बोलो। क्या बात है?" आयशा ने गहरी सांस ली। "मैं... नौकरी करना चाहती हूं। घर में अकेली रहती हूं, बहुत बोर होती हूं। बाहर निकलूं, कुछ काम करूं। तू तो ऑफिस जाता है, मैं यहां क्या करूं सारा दिन?"

वो धीरे-धीरे बोली, आंखें झुकाकर, जैसे डर रही हो इरफ़ान के गुस्से से।इरफ़ान का चेहरा बदल गया। वो रोटी का टुकड़ा मुंह में रखकर रुक गया। "

नौकरी? क्यों? घर में क्या कमी है आयशा? मैं अच्छा कमाता हूं, तुझे क्या जरूरत बाहर जाने की? बाहर की दुनिया में क्या-क्या लोग हैं, तुझे पता नहीं। औरत का काम घर संभालना है। मैं नहीं मानूंगा।"

उसकी आवाज सख्त थी, जैसे कोई अंतिम फैसला सुना रहा हो। आयशा का दिल डूब गया। वो चुप हो गई, लेकिन अंदर से जल रही थी। "क्यों नहीं? मैं भी इंसान हूं, मेरी भी चाहतें हैं।"

लेकिन वो कुछ नहीं बोली, बस खाना खत्म किया। इरफ़ान उठा, टीवी ऑन किया, और न्यूज देखने लगा। आयशा बर्तन साफ करने लगी, लेकिन उसके मन में प्लान बन रहा था। वो जानती थी इरफ़ान की कमजोरी –

वो उसे खुश रखना चाहता था, खासकर रात के समय। अगर वो उसे संतुष्ट कर दे, तो शायद मान जाए।रात के 10 बजे हो चुके थे। कमरे की लाइट हल्की थी, सिर्फ बेडसाइड लैंप जल रहा था। इरफ़ान बिस्तर पर लेटा था, फोन स्क्रॉल कर रहा था। आयशा बाथरूम से नहाकर आई। आज वो एक पतली, सिल्की नाइट गाउन पहनी थी

– गुलाबी रंग की, जो उसके गोरे जिस्म पर चिपक रही थी। गाउन का फैब्रिक इतना पतला था कि उसके कर्व्स हल्के से नजर आ रहे थे – उसकी पतली कमर, चौड़ी हिप्स, और स्तनों का उभार। आयशा शर्मीली थी, हमेशा से। वो कभी बोल्ड नहीं होती, लेकिन आज जरूरत थी। वो धीरे से बिस्तर पर आई, इरफ़ान के बगल में लेट गई।

इरफ़ान ने फोन रखा, उसे देखा। "आज कुछ अलग लग रही हो," उसने मुस्कुराकर कहा, हाथ आयशा की कमर पर रखा।आयशा शरमाई, लेकिन पीछे नहीं हटी। वो जानती थी कि ये मौका है। इरफ़ान ने उसे अपनी तरफ खींचा, गले लगाया। उसके होंठ आयशा के होंठों पर रखे – पहले हल्का किस, फिर गहरा। आयशा ने आंखें बंद कीं, जवाब दिया। उसके मन में राहुल का खयाल आया, लेकिन वो दबा दिया।

"आज इरफ़ान को खुश करना है," वो सोची। इरफ़ान का हाथ उसके गाउन पर सरका, धीरे-धीरे ऊपर किया। आयशा की सांसें तेज हो गईं। वो शर्मीली थी, इसलिए ज्यादा कुछ नहीं कहती, बस महसूस करती। इरफ़ान ने गाउन की स्ट्रिंग खोली, गाउन नीचे सरका दिया।

आयशा के स्तन नंगे हो गए – गोल, मुलायम, 34C साइज़ के, गुलाबी निप्पल्स जो ठंडी हवा से सख्त हो रहे थे। इरफ़ान ने एक स्तन पर हाथ रखा, धीरे से दबाया। आयशा की सिसकी निकली,
"ओह... इरफ़ान।"इरफ़ान ने स्तन मसला – पहले हल्के से, उंगलियों से निप्पल को सहलाया। आयशा को एक अजीब सा सुख महसूस हुआ – गर्मी उसके शरीर में फैल रही थी। वो शर्मीली थी,
इसलिए ज्यादा मोअन नहीं कर रही, लेकिन उसका शरीर प्रतिक्रिया दे रहा था। इरफ़ान ने दूसरे स्तन को मुंह में लिया, चूसा – जीभ से निप्पल को घुमाया। आयशा की कमर थोड़ी ऊपर उठी, "आह... धीरे..." वो बड़बड़ाई। इरफ़ान ने जारी रखा – एक स्तन दबाता, दूसरे को चूसता। आयशा के निप्पल्स अब लाल हो गए थे, सख्त और संवेदनशील। हर चूसने पर वो महसूस कर रही थी – जैसे बिजली की लहर दौड़ रही हो उसके स्तनों से नीचे तक।

"ये कैसा फील है... इतना गर्म," वो सोच रही थी। इरफ़ान ने दोनों स्तनों को साथ में मसला – हाथों से दबाया, जैसे आटा गूंथ रहा हो। आयशा की सांसें तेज़, वो इरफ़ान के बालों में उंगलियां फेरने लगी।करीब 10 मिनट तक इरफ़ान आयशा के स्तनों से खेलता रहा – दबाता, चूसता, काटता हल्के से। आयशा शर्म से लाल हो गई थी, लेकिन रोक नहीं रही थी। उसके नीचे पाकीज़ा चूत में हल्की नमी आ गई थी। इरफ़ान का हाथ अब नीचे सरका – आयशा की जांघों पर।

वो गाउन पूरी तरह उतार दिया। आयशा नंगी हो गई – उसका गोरा जिस्म, चिकनी त्वचा, पतली कमर (28 इंच), चौड़ी हिप्स (36 इंच), और पैर लंबे, मुलायम। इरफ़ान ने उसकी जांघों को सहलाया – अंदर की तरफ, जहां त्वचा सबसे नरम थी। आयशा की सिसकी निकली, वो पैर सिकोड़ने लगी। "इरफ़ान... शर्म आ रही है।" लेकिन इरफ़ान ने नहीं रुका। उसका हाथ आयशा की पाकीज़ा चूत पर पहुंचा – गुलाबी, साफ, अब गीली। वो उंगली से सहलाया – क्लिटोरिस पर हल्के से दबाया। आयशा की कमर उछली,

"ohhhh ishhhhhhhhh... क्या कर रहे हो?"इरफ़ान ने उंगली अंदर डाली – धीरे-धीरे, अंदर-बाहर। आयशा को दर्द और सुख दोनों महसूस हुए – जैसे कोई आग जल रही हो अंदर। वो शर्मीली थी, इसलिए ज्यादा कुछ नहीं कह रही, लेकिन उसके मोअन्स बढ़ रहे थे।

इरफ़ान ने स्पीड बढ़ाई – दो उंगलियां डालीं, घुमाईं। आयशा की चूत गीली हो गई, आवाज़ आने लगी – चप-चप। "आह... इरफ़ान... बस..." वो बड़बड़ाई, लेकिन शरीर साथ दे रहा था। करीब 15 मिनट तक इरफ़ान आयशा के नीचे के हिस्से से खेलता रहा – उंगलियां, सहलाना, दबाना। आयशा अब गर्म हो चुकी थी, उसकी सांसें तेज़, पसीना चेहरे पर। लेकिन वो शर्मीली थी, इसलिए इरफ़ान के लंड को मुंह में नहीं लेना चाहती थी।

Wo हाथ से संतुष्ट करने का सोच रही थी।इरफ़ान ने अपना पजामा उतारा। उसका लंड बाहर आया – कटा हुआ, 5 इंच लंबा, मोटाई औसत, अब पूरी तरह सख्त। आयशा ने शरमाते हुए देखा, फिर हाथ बढ़ाया। वो लंड को पकड़ा – गर्म, सख्त, जैसे लोहे की रॉड। वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी –

पहले हल्के से, फिर थोड़ा तेज़। इरफ़ान सिसकारी, "आह... आयशा... अच्छा लग रहा है।" आयशा शर्म से आंखें बंद कर लीं, लेकिन जारी रखी। वो लंड के सिर को उंगली से सहलाती, फिर पूरे को मसलती। इरफ़ान का शरीर कांप रहा था। आयशा ने धीरे से कहा, "इरफ़ान... नौकरी की बात...

प्लीज मान जाओ ना।" इरफ़ान ने कहा, "नहीं... आयशा... आह..." लेकिन उसकी आवाज कमजोर हो रही थी। आयशा ने स्पीड बढ़ाई – हाथ तेज़ चलाया, लंड को मरोड़ा हल्के से। इरफ़ान अब चरम के करीब था। "प्लीज... हां कहो," आयशा ने फिर कहा, हाथ नहीं रोका।इरफ़ान ने सांस फूलते हुए कहा, "ठीक है... हां... कर ले नौकरी।"

आयशा मुस्कुराई, लेकिन रुकी नहीं। वो जारी रखी – हाथ ऊपर-नीचे, तेज़। इरफ़ान झड़ गया – गर्म सीमेन आयशा के हाथ पर। वो थककर लेट गया, सांस लेते हुए। आयशा ने हाथ साफ किया, फिर इरफ़ान को गले लगा लिया। वो बहुत खुश थी – अनुमति मिल गई। "थैंक यू इरफ़ान," वो बोली। इरफ़ान ने हंसकर कहा, "तू मानती नहीं है ना। लेकिन सावधानी से।"

आयशा ने हां कहा, लेकिन उसके मन में उत्साह था। रात भर वो सोचती रही – नौकरी, बाहर की दुनिया, नए लोग। शायद राहुल जैसा कोई। उसकी पाकीज़ा चूत अभी भी गर्म थी, लेकिन वो संतुष्ट थी।अगले दिन सुबह आयशा जल्दी उठी। इरफ़ान ऑफिस चला गया। आयशा ने सहेलियों को फोन किया। "आओ घर, अच्छी खबर है।

" फातिमा और ज़ारा आधे घंटे में आईं। तीनों ड्रॉइंग रूम में बैठीं, चाय पीते हुए। आयशा ने सब बताया – इरफ़ान से कैसे मांगा, रात की बात (हल्के से, बिना ज्यादा डिटेल्स), और अनुमति मिलना। "मैं बहुत खुश हूं! अब नौकरी ढूंढूंगी।"फातिमा ने ताली बजाई, "वाह आयशा, तूने तो कमाल कर दिया! इरफ़ान को मना लिया। अब जल्दी ढूंढ।" ज़ारा ने हंसकर कहा, "अगर नौकरी ढूंढनी है तो ऑनलाइन ढूंढो। Net  पर रेज्यूमे अपलोड कर। फैशन स्टोर या कॉलेज टीचर की जॉब मिल जाएगी। और हां, वहां कोई हैंडसम लड़का मिल जाए तो बताना!"आयशा शरमाई, लेकिन हंस पड़ी। "ठीक है, ऑनलाइन ट्राई करूंगी।" सहेलियां चली गईं, आयशा ने लैपटॉप ऑन किया। अब जॉब सर्च शुरू होने वाला था।

Part 4,5,6

नई शुरुआत और रात की तपिशअगली सुबह आयशा जल्दी उठी। इरफ़ान अभी सो रहा था, लेकिन आयशा का मन उत्साह से भरा था। अनुमति मिल चुकी थी, अब नौकरी ढूंढने का वक्त था। वो किचन में गई, चाय बनाई, और लैपटॉप ऑन किया। इरफ़ान उठा, चाय पी, और ऑफिस चला गया।


"सावधानी से रहना," उसने जाते हुए कहा। आयशा ने हां में सिर हिलाया, लेकिन उसके मन में नई दुनिया का ख्वाब था। वो ऑनलाइन गई – Net पर अकाउंट बनाया। उसने अपना रेज्यूमे तैयार किया: नाम – आयशा खान, उम्र 28, एजुकेशन – बी.ए. इन आर्ट्स, एक्सपीरियंस – होममेकर, लेकिन स्किल्स में लिखा – कम्युनिकेशन, ऑर्गनाइजेशन, क्रिएटिविटी। वो फैशन डिजाइन या इवेंट असिस्टेंट जैसी जॉब्स ढूंढ रही थी।


"कुछ आसान, जहां बाहर निकल सकूं," वो सोच रही थी।कई जॉब्स देखीं – कुछ रिटेल स्टोर की, कुछ कॉलेज टीचर की। उसने 5-6 जॉब्स पर अप्लाई किया, रेज्यूमे अपलोड किया। "अब इंतजार," वो बोली और लैपटॉप बंद किया।


दिन गुजरा – घर के काम, सहेलियों से फोन पर बात। "ट्राई कर रही हूं," उसने ज़ारा को बताया। शाम को इरफ़ान लौटा, लेकिन आयशा का फोन चुप था। रात को सोते हुए वो सोच रही थी, "कुछ मिलेगा ना?"


अगले दिन सुबह 10 बजे आयशा की रूटीन चल रही थी – झाड़ू लगाना, कपड़े धोना। तभी फोन बजा। अननोन नंबर। वो उठाई। "हैलो, आयशा खान?" दूसरी तरफ एक प्रोफेशनल आवाज। "हां, बोलिए।"


"हम 'EventMasters India' से बोल रहे हैं। आपका रेज्यूमे देखा। इवेंट असिस्टेंट की पोजीशन के लिए इंटरव्यू के लिए आ सकती हैं? कल 11 बजे?" आयशा की आंखें चमक उठीं। "हां... हां, जरूर। एड्रेस क्या है?" उन्होंने एड्रेस दिया – अहमदाबाद के बिजनेस डिस्ट्रिक्ट में। आयशा ने थैंक यू कहा और फोन रखा।


वो उछल पड़ी – "मिल गई! ऑफर नहीं, लेकिन इंटरव्यू!" लेकिन उसे क्या पता था कि ये कंपनी EventMasters India थी – एक बड़ी इवेंट मैनेजमेंट फर्म। और इसमें राहुल शर्मा काम करता था। राहुल की अपनी छोटी कंपनी 'Sharma Events' इस बड़ी कंपनी से सब-कॉन्ट्रैक्ट लेती थी – छोटे इवेंट्स हैंडल करने के लिए। राहुल ने आयशा का रेज्यूमे देखा था – नाम देखकर लगा कोई रैंडम कैंडिडेट, लेकिन उसे क्या पता कि ये वही आयशा है जिसकी आंखें कैफे में उससे टकराई थीं। उसने HR को कहा था, "इंटरव्यू बुलाओ, लगती है फिट।"


आयशा दौड़ी, इरफ़ान को फोन लगाया। इरफ़ान मीटिंग में था, लेकिन कॉल बैक किया। "क्या हुआ आयशा?" आयशा ने बताया, "इरफ़ान, एक कंपनी से कॉल आया। इंटरव्यू के लिए बुलाया है कल। EventMasters India – इवेंट असिस्टेंट की जॉब।"

इरफ़ान की आवाज उदास हो गई। "अच्छा... लेकिन इतनी जल्दी? तुझे एक्सपीरियंस नहीं है। और बाहर जाना... ठीक रहेगा?" वो चिंतित था, घर की औरत बाहर काम करे, ये उसे पसंद नहीं था। आयशा ने कहा, "प्लीज, ट्राई करने दो। और हां, अगर कन्फर्म हुई तो सैलरी 50,000 रुपये महीना।" इरफ़ान के होष उड़ गए। "क्या? 50,000? वो तो मेरी सैलरी से आधी है! घर का खर्चा आसान हो जाएगा।"


वो अंदर-अंदर खुश हो गया – पैसे की बात ने उसका मन बदल दिया। "ठीक है, जा इंटरव्यू दे। लेकिन सावधानी से।" आयशा खुश हो गई। शाम को इरफ़ान घर लौटा, तो वो मुस्कुरा रहा था। "अच्छा है, एक्स्ट्रा इनकम आएगी।"रात हो गई। कमरे में हल्की रोशनी, पंखे की ठंडी हवा। इरफ़ान बिस्तर पर लेटा था, आयशा बाथरूम से नहाकर आई।

आज वो एक सेक्सी नाइटड्रेस पहनी थी – काली, लेस वाली, जो उसके कर्व्स को हाइलाइट कर रही थी। इरफ़ान ने देखा, उसकी आंखें चमकीं। "आज क्या बात है? खुशी में हो?" आयशा शरमाई, लेकिन पास आई। "हां, तुम्हारी वजह से।" इरफ़ान ने उसे खींचा, गले लगा लिया। उसके होंठ आयशा के गले पर – हल्के किस। आयशा की सांसें तेज हो गईं। इरफ़ान का हाथ उसके पीठ पर, फिर कमर पर। वो नाइटड्रेस की स्ट्रिंग खोलने लगा। धीरे-धीरे ड्रेस नीचे सरकी।


आयशा के स्तन नंगे – गोल, भरे हुए, गुलाबी निप्पल्स। इरफ़ान ने एक पर हाथ रखा, दबाया – मुलायम मांस उसके हाथ में दबा, आयशा को एक मीठा दर्द हुआ। "ओह... इरफ़ान," वो सिसकारी। इरफ़ान ने निप्पल को उंगलियों से मसला – घुमाया, खींचा हल्के से। आयशा की कमर थोड़ी मुड़ी, सुख की लहर दौड़ी। वो शर्मीली थी, लेकिन आज खुशी में शामिल हो रही थी।इरफ़ान ने आयशा को बिस्तर पर लिटाया। उसके स्तनों पर झुका, एक को मुंह में लिया। जीभ से निप्पल चाटा – गोल-गोल, फिर चूसा जोर से।


आयशा की सिसकी निकली, "आह... धीरे..." लेकिन उसका हाथ इरफ़ान के सिर पर, दबा रही थी। इरफ़ान ने दूसरे स्तन को हाथ से मसला – दबाया, निप्पल को पिंच किया। हर दबाव पर आयशा महसूस कर रही थी – गर्मी, उत्तेजना, जैसे उसके स्तन जल रहे हों। 10 मिनट तक इरफ़ान स्तनों से खेलता रहा – चूसता, काटता हल्के से, मसलता।


आयशा की सांसें तेज, पसीना माथे पर। उसकी पाकीज़ा चूत में हलचल शुरू हो गई – गीली हो रही थी। इरफ़ान का हाथ नीचे सरका – आयशा की जांघों पर। वो जांघें सहलाया – अंदर की मुलायम त्वचा, जहां हर स्पर्श से आयशा कांप उठती। "इरफ़ान... वहां..." वो शरमाई। इरफ़ान ने उंगली आयशा की चूत पर रखी – गुलाबी, गीली, गर्म। वो क्लिटोरिस को सहलाया – हल्के से दबाया, घुमाया। आयशा की कमर उछली, "ओह... क्या कर रहे हो?" सुख की लहर उसके पूरे शरीर में।इरफ़ान ने उंगली अंदर डाली – धीरे, क्योंकि आयशा टाइट थी। अंदर-बाहर किया, धीमे-धीमे।


आयशा मोअन कर रही थी, "आह... इरफ़ान... अच्छा लग रहा है।" इरफ़ान ने स्पीड बढ़ाई – दो उंगलियां, घुमाईं, दबाया। आयशा की चूत से पानी बह रहा था, चप-चप की आवाज। 15 मिनट तक इरफ़ान ने foreplay किया – चूत सहलाना, उंगलियां, जांघें चूमना। आयशा अब तैयार थी, उसका शरीर गर्म, तड़प रहा था। इरफ़ान ने अपना पजामा उतारा – उसका लंड बाहर – 5 इंच, सख्त, लाल सिर। आयशा ने देखा, शरमाई। वो शर्मीली थी, मुंह में नहीं लेती, लेकिन आज मनाने के लिए हाथ बढ़ाया। लंड पकड़ा – गर्म, पल्सेटिंग। धीरे-धीरे ऊपर-नीचे किया। इरफ़ान सिसकारी,

"आह... आयशा... जारी रखो।"आयशा ने स्पीड बढ़ाई – हाथ से मसला, सिर सहलाया। इरफ़ान का शरीर कांप रहा था। "ओह... अच्छा... और तेज़।" आयशा ने किया – मरोड़ा हल्के से, ऊपर-नीचे तेज़। इरफ़ान चरम पर। आयशा ने कहा, "इरफ़ान... नौकरी के लिए शुक्रिया।"

इरफ़ान झड़ गया – सीमेन आयशा के हाथ पर। वो थककर लेट गया। लेकिन आयशा अभी प्यासी थी। वो इरफ़ान के ऊपर आई, लंड पकड़ा, जो अभी सॉफ्ट था। हाथ से सहलाया, फिर अपनी चूत पर रगड़ा। इरफ़ान फिर सख्त हो गया। आयशा ने धक्का मारा – लंड अंदर। "आह..." दोनों की सिसकी। आयशा ऊपर-नीचे होने लगी – धीरे, फिर तेज़। उसके स्तन उछल रहे थे, इरफ़ान ने पकड़े, मसले।

20 मिनट तक सेक्स चला – पोजीशन्स बदले, डॉगी, मिशनरी। आयशा ऑर्गेज्म पर पहुंची – चीखी, "ओह इरफ़ान!" इरफ़ान भी झड़ गया। वे थककर लेटे, आयशा खुश hui thi lekin chudai se nahi Balki naukari Milne ki khusi m

भाग 7: इंटरव्यू की घड़ी और पार्टी की

रौनकसुबह की पहली किरण आयशा के कमरे में घुसी, लेकिन वो पहले से तैयार थी।
आज इंटरव्यू का दिन था।
वो उठी, बाथरूम गई, नहाई, और फिर ***** की चादर बिछाई।
***** पढ़ते हुए वो ***** मांग रही थी – "******, मुझे सफलता दे। मुझे सही राह दिखा।"***** खत्म होने के बाद वो थोड़ा शांत हुई।
फिर वो तैयार होने लगी।
आज वो फुल हिजाब और बुर्का पहनी – काला बुर्का, जो उसके पूरे शरीर को ढक रहा था, लेकिन चेहरा दिख रहा था।

वो आईने में खुद को देखी – "इरफ़ान ने इजाजत दी है, तो मैं अपनी इज्जत से खिलवाड़ नहीं करूंगी।हमेशा वफादार रहूंगी अपने शौहर के प्रति।"
उसके मन में एक दृढ़ संकल्प था।

वो जानती थी कि बाहर की दुनिया अलग है, लेकिन वो खुद को संभाल लेगी।
रूटीन पूरी की – इरफ़ान के लिए नाश्ता बनाया, चाय दी।इरफ़ान ने कहा, "सफल हो जा, लेकिन याद रखना, घर की जिम्मेदारी भी है।"
आयशा ने मुस्कुराकर हां कहा।
इरफ़ान ऑफिस चला गया।
आयशा ने अपना पर्स लिया – रेज्यूमे की कॉपी, आईडी, और कुछ पैसे।वो घर से निकली, ऑटो लिया, और एड्रेस की तरफ चली।
रास्ते में वो सोच रही थी – "कैसी होगी कंपनी? लोग कैसे होंगे? लेकिन मैं तैयार हूं।"
ऑटो शहर की व्यस्त सड़कों से गुजरा – ट्रैफिक, हॉर्न, लोग भागते-दौड़ते।
आयशा की आंखें बाहर देख रही थीं, लेकिन मन में उत्तेजना थी।ऑफिस पहुंची – EventMasters India का बड़ा बिल्डिंग, ग्लास का फेसाड, मॉडर्न लुक।
वो अंदर गई, सिक्योरिटी से बात की।

"इंटरव्यू के लिए आई हूं, आयशा खान।"

सिक्योरिटी ने चेक किया, फिर लॉबी में बैठने को कहा।लॉबी बड़ी थी – सोफे, मैगजीन्स, कॉफी मशीन।

आयशा एक कोने में बैठ गई, बुर्का संभालते हुए।
वो इधर-उधर देखने लगी।

लॉबी में कई लोग थे – कर्मचारी आ-जा रहे थे।उसकी नजरें लड़कों पर पड़ीं।
वहां कई हैंडसम लड़के थे – ज्यादातर लग रहे थे, क्योंकि उनके नाम या लुक से।
वो ऑफिस ड्रेस में थे – शर्ट, पैंट, टाई, कुछ जींस में।

एक लड़का पास से गुजरा – लंबा, फिट, मुस्कुराता हुआ।आयशा ने नजरें झुका लीं, लेकिन मन में सोचा, "कितने स्मार्ट लगते हैं। लेकिन मैं क्यों देख रही हूं?"
फिर और लड़के दिखे – एक ग्रुप में बात कर रहे थे, हंसते हुए।
ज्यादातर नाम वाले – राहुल, अजय, विक्रम जैसे।

सिर्फ एक-दो *****, वो भी मॉडर्न।आयशा सोचने लगी, "यहां मिक्स्ड क्राउड है। लेकिन लड़के इतने कॉन्फिडेंट।"

फिर उसकी नजर लड़कियों पर गई।

वहां कई लड़कियां थीं – ज्यादातर मॉडर्न कपड़ों में।

शॉर्ट स्कर्ट, टॉप, कुछ ट्रांसपेरेंट ब्लाउज।एक लड़की पास से गुजरी – उसका टॉप पारदर्शी था, ब्रा की स्ट्रैप दिख रही थी, और क्लिवेज झलक रहा था।
आयशा की आंखें फैल गईं।

"ये क्या? इतना खुला? नौकरी के बहाने शरीर दिखाना?"
दूसरी लड़की – शॉर्ट ड्रेस, जांघें नंगी, हाई हील्स।उसका ब्लाउज टाइट, स्तन उभरे हुए, क्लिवेज साफ।

आयशा मन ही मन बोली, "कितनी बेशर्म हैं ये लड़कियां। अपना जिस्म दिखाकर क्या हासिल कर रही हैं?

मैं तो कभी ऐसा नहीं करूंगी। मैं बुर्का में हूं, सुरक्षित।"

लेकिन उसे क्या पता था कि आगे चलकर वो खुद बदल जाएगी – मॉडर्न कपड़े, खुले विचार।लेकिन अभी वो पवित्र थी, बुर्का में लिपटी, अपने शौहर की वफादार।
वो सोच रही थी, "ये दुनिया अलग है, लेकिन मैं नहीं बदलूंगी।"

करीब 15 मिनट बाद HR ने बुलाया।

"आयशा खान, इंटरव्यू के लिए आइए।"वो उठी, बुर्का ठीक किया, और रूम में गई।
इंटरव्यू रूम – बड़ा टेबल, कुर्सियां, कंप्यूटर।

इंटरव्यूअर बैठा था – राहुल शर्मा।

आयशा अंदर गई, सलाम किया। "Good Morning Sir Rahul ne kaha। बैठिए।

आयशा बैठी, लेकिन बुर्का में उसका फिगर हल्का सा नजर आ रहा था – कर्व्स, हाइट।
राहुल की नजरें उस पर ठहर गईं।
वो सोचने लगा, "ये फिगर... इतना परफेक्ट। क्या बॉडी होगी इसके अंदर।"उसके मन में गर्मी दौड़ गई – वो कल्पना करने लगा, बुर्के के नीचे का जिस्म।
लेकिन वो प्रोफेशनल रहा।

"आपका रेज्यूमे देखा। होममेकर हैं, लेकिन स्किल्स अच्छे लगते हैं।

हमारी कंपनी इवेंट्स ऑर्गनाइज करती है – वेडिंग्स, कॉर्पोरेट, पार्टीज।असिस्टेंट के रूप में क्या कर सकती हैं?"

आयशा ने जवाब दिया, लेकिन बातचीत के दौरान गर्मी लगी।

वो धीरे से अपना नकाब (फेस कवर) हटाया – चेहरा दिखा।

गोरा रंग, बड़ी आंखें, गुलाबी होंठ।राहुल की नजरें उस पर पड़ीं – और वो चौंक गया।
"ये तो वही लड़की... कैफे वाली!"
उसका दिल जोर से धड़का।
"इतना खूबसूरत चेहरा... अगर चेहरा ऐसा है तो जिस्म कितना खूबसूरत होगा?"वो कल्पना करने लगा –

आयशा के स्तन, कमर, जांघें।

उसके अनकट लंड में हलचल हुई, लेकिन वो कंट्रोल किया।
"आपकी क्वालिफिकेशन अच्छी है।

जॉइन कब कर सकती हैं?"
आयशा ने कहा, "मंडे से।"राहुल ने कहा, "आपकी जॉब पक्की। मंडे आइए।"
आयशा खुश हो गई, शुक्रिया कहा, और निकल गई।

घर लौटी, सबसे पहले इरफ़ान को फोन किया।
"इरफ़ान, जॉब मिल गई! मंडे से जॉइनिंग।"इरफ़ान खुश हुआ, "वाह, बधाई। लेकिन सावधानी से।"

फिर सहेलियों को बताया।
फातिमा और ज़ारा आईं – "वाह आयशा, कमाल कर दिया!"
वो खुश थीं। "पार्टी चाहिए!" ज़ारा ने कहा।"सैटरडे नाइट?" आयशा ने हां कहा।
सहेलियां चली गईं।

सैETDEडे नाइट पार्टी – आयशा ने तैयारी की।
खाना बनाया – चिकन बिरयानी, कबाब, सलाद, स्वीट में गुलाब जामुन, जूस।घर सजाया – बैलून्स, लाइट्स।

सहेलियां आईं – फातिमा, ज़ारा, और दो और।
सबने बधाई दी।
पार्टी शुरू – खाना खाया, हंसी-मजाक।दौरान में ज़ारा ने कहा, "आयशा, नौकरी में कोई हैंडसम मर्द मिले तो नजदीकी बढ़ा ले।"

आयशा ने कहा, "नहीं, मैं पाकीज़ा बेगम हूं। ऐसा नहीं करूंगी।
अपने शौहर के प्रति वफादार रहूंगी।"

फातिमा ने हंसकर कहा, "देखना, समय बताएगा।हमारी एक दोस्त थी – हिजाबी, पवित्र।
उसका नाम रुबीना था।
वो भी तेरी तरह शादीशुदा थी, *****  gharane से।
हमेशा हिजाब पहनती, घर संभालती, पढ़ती।लेकिन एक दिन नौकरी शुरू की – एक बड़ी कंपनी में असिस्टेंट।

वहां एक लड़का मिला – नाम था अमित।

पहले तो सिर्फ काम की बातें, लेकिन धीरे-धीरे नजदीकियां बढ़ीं।
अमित स्मार्ट था, केयरिंग, और रुबीना को स्पेशल फील करवाता।रुबीना पहले विरोध करती, लेकिन अमित की बातें, उसकी मुस्कान – सबने उसे बदल दिया।
वो हिजाब कम पहनने लगी

, मॉडर्न कपड़े ट्राई करने लगी।

एक दिन अमित ने प्रपोज किया, रुबीना ने हां कह दी।

उसने अपने शौहर को धोखा दिया – तलाक लिया, और अमित से शादी कर ली।अब वो पूरी मॉडर्न है – शॉर्ट ड्रेस, पार्टीज, सब कुछ।
पुराना जीवन भूल गई।"

आयशा ने कहा, "मैं नहीं बदलूंगी। इज्जत से समझौता नहीं।"

सहेलियां हंसीं, "वक्त बताएगा।"पार्टी खत्म हुई, लेकिन वो स्टोरी आयशा के मन में चिपक गई।
रात को सोच रही थी, "क्या लोग सच में बदल जाते हैं lekin mai nhi badlungi


भाग 8: पहला दिन ऑफिस और रात की अधूरी चाहतें

रात का सन्नाटा घर पर छाया हुआ था। आयशा बिस्तर पर लेटी हुई थी, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। इंटरव्यू की सफलता की खुशी उसके मन में थी – जॉब मिल गई, मंडे से जॉइनिंग।

लेकिन वो स्टोरी जो सहेलियों ने सुनाई थी, वो उसके दिमाग में घूम रही थी। "क्या मैं भी बदल जाऊंगी? नहीं, मैं पाकीज़ा हूं, वफादार रहूंगी।" इरफ़ान उसके बगल में सो रहा था, लेकिन आयशा का शरीर अभी भी उत्तेजित था। पार्टी की थकान थी, लेकिन मन में एक तड़प।

वो करवट बदली, इरफ़ान की तरफ मुड़ी। "शायद आज फिर..." वो सोची। इरफ़ान की सांसें नियमित थीं, लेकिन आयशा ने धीरे से अपना हाथ उसकी छाती पर रखा। इरफ़ान की आंखें खुलीं। "क्या हुआ आयशा? नींद नहीं आ रही?" उसने पूछा। आयशा शरमाते हुए बोली, "हां... थोड़ा... तुम्हारे पास आना चाहती हूं।"

इरफ़ान मुस्कुराया, उसे अपनी बाहों में खींच लिया।इरफ़ान ने आयशा को गले लगाया, उसके बालों में उंगलियां फेरने लगा। आयशा की सांसें तेज हो गईं। वो शर्मीली थी, लेकिन आज खुशी में वो ज्यादा खुल रही थी। इरफ़ान के होंठ उसके गले पर – हल्का किस, फिर चूमते हुए नीचे सरका। आयशा की नाइट गाउन पतली थी, उसके नीचे कुछ नहीं। 

इरफ़ान ने गाउन ऊपर किया, आयशा के स्तनों को छुआ। उसके स्तन –

 गोल, भरे हुए, मुलायम जैसे रुई के गोले। इरफ़ान ने एक पर हाथ रखा, धीरे से दबाया। आयशा को एक मीठी सी सिहरन हुई – जैसे कोई गर्म लहर उसके शरीर में दौड़ गई हो। "ओह इरफ़ान... धीरे," वो बड़बड़ाई। इरफ़ान ने निप्पल को उंगलियों से सहलाया –

 गुलाबी निप्पल सख्त हो गया, जैसे कोई बटन दबा हो। हर सहलाने पर आयशा महसूस कर रही थी – सुख की छोटी-छोटी लहरें, जो उसके स्तन से नीचे की तरफ जा रही थीं। इरफ़ान ने दूसरे स्तन को मुंह में लिया, जीभ से चाटा – गोल-गोल, फिर चूसा। आयशा की कमर थोड़ी ऊपर उठी, "आह... अच्छा लग रहा है।"

 इरफ़ान ने चूसना जारी रखा – जोर से, फिर हल्के से काटा। आयशा को दर्द और सुख का मिश्रण – जैसे कोई आग सुलग रही हो उसके निप्पल्स में। वो इरफ़ान के सिर को दबा रही थी, उंगलियां उसके बालों में।करीब 10 मिनट तक इरफ़ान आयशा के स्तनों से खेलता रहा – एक को चूसता, दूसरे को मसलता। हर चूसने पर आयशा की मोअन्स बढ़ रही थीं – "ओह... इरफ़ान... और..." उसके स्तन अब लाल हो गए थे, निप्पल्स सूजे हुए, संवेदनशील। हर स्पर्श पर वो कांप उठती। इरफ़ान का हाथ नीचे सरका – आयशा की कमर पर, फिर जांघों पर। 

वो जांघें सहलाने लगा – बाहर की तरफ, फिर अंदर। आयशा की जांघें मुलायम, गोरी, जैसे रेशम। हर सहलाने पर वो पैर सिकोड़ती, "इरफ़ान... शर्म आ रही है।" लेकिन इरफ़ान नहीं रुका। उसका हाथ आयशा की ***** चूत पर पहुंचा – 

गुलाबी, साफ, अब हल्की गीली। वो क्लिटोरिस को सहलाया – हल्के से दबाया। आयशा की चीख निकली, "आह... वहां..." सुख की तेज लहर दौड़ी, उसके पूरे शरीर में।

इरफ़ान ने उंगली अंदर डाली – धीरे, क्योंकि चूत टाइट थी। अंदर-बाहर किया, धीमे-धीमे। आयशा की सांसें रुक-रुक कर आ रही थीं, "ओह... इरफ़ान... क्या कर रहे हो?" वो महसूस कर रही थी –

 उंगली की हर मूवमेंट, गर्मी, दबाव। इरफ़ान ने स्पीड बढ़ाई – दो उंगलियां, घुमाईं। आयशा की चूत से पानी बहने लगा, चप-चप की आवाज। वो कमर हिला रही थी, सुख में डूबी। 20 मिनट तक इरफ़ान ने foreplay किया –

 चूत सहलाना, उंगलियां डालना, जांघें चूमना। आयशा अब पूरी गर्म थी, तड़प रही थी।इरफ़ान ने अपना पजामा उतारा

 – उसका लंड बाहर आया, 5 इंच, सख्त, लाल सिर। आयशा ने देखा, शरमाई। वो शर्मीली थी, मुंह में नहीं लेती, लेकिन हाथ बढ़ाया।

 लंड पकड़ा – गर्म, सख्त, जैसे जलती लकड़ी। वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी – पहले हल्के से, फिर थोड़ा तेज़। इरफ़ान सिसकारी, "आह... आयशा... अच्छा है।"

 आयशा ने सिर को सहलाया, मसला। हर मूवमेंट में इरफ़ान कांप रहा था। वो स्पीड बढ़ाई – हाथ तेज़, मरोड़ा। इरफ़ान चरम पर, "ओह... और..." आयशा ने जारी रखा – 10 मिनट तक हैंडजॉब, हर स्ट्रोक डिटेल्ड। आखिर इरफ़ान झड़ गया –

 गर्म सीमेन आयशा के हाथ पर। लेकिन आयशा अभी प्यासी थी। वो इरफ़ान के ऊपर आई, लंड पकड़ा, सहलाया। फिर अपनी चूत पर रगड़ा – गीली, गर्म। लंड फिर सख्त हुआ। आयशा ने धक्का मारा – अंदर। "आह..." दोनों की चीख। आयशा ऊपर-नीचे होने लगी – धीरे, फिर तेज़।

 उसके स्तन उछल रहे, इरफ़ान ने पकड़े, मसले। हर धक्के पर आयशा महसूस कर रही थी – लंड का दबाव, भरा हुआ फील, सुख की लहरें। लेकिन इरफ़ान जल्दी थक गया – 10 मिनट में झड़ गया। आयशा ऑर्गेज्म के करीब थी, लेकिन पहुंची नहीं। वो प्यासी रह गई, लेकिन खुश थी – जॉब की वजह से। "कल ऑफिस," वो सोचकर सो गई। 
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Ayesha ki khubsurat badlao - by razaraj2 - 15-01-2026, 01:48 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by Meandme - 15-01-2026, 05:06 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by razaraj2 - 15-01-2026, 07:24 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by razaraj2 - 15-01-2026, 06:58 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by Meandme - 15-01-2026, 11:01 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by razaraj2 - 15-01-2026, 11:29 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by Vampire - 16-01-2026, 06:26 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by Vamp - 16-01-2026, 06:30 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by razaraj2 - 16-01-2026, 07:41 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by razaraj2 - 17-01-2026, 08:01 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by razaraj2 - 17-01-2026, 08:28 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by razaraj2 - 17-01-2026, 08:32 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by Sahazaem - 17-01-2026, 09:52 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by Meandme - 17-01-2026, 11:23 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by Meandme - 18-01-2026, 05:08 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by Meandme - 18-01-2026, 10:35 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by Paramour. - 19-01-2026, 06:06 AM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by KGB - 19-01-2026, 11:22 AM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by pragya_rao - 19-01-2026, 12:19 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by Meandme - 19-01-2026, 08:08 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by Sahazaem - 20-01-2026, 10:56 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by Kobir99 - 21-01-2026, 12:02 AM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by Kobir99 - 22-01-2026, 10:47 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by Sahazaem - 23-01-2026, 10:29 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by Sahazaem - 10-02-2026, 10:14 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by Sahazaem - 14-02-2026, 01:31 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by Sahazaem - 15-02-2026, 01:21 PM
RE: Ayesha ki khubsurat badlao - by Redangela - 30-04-2026, 10:42 AM



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