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Adultery अनीता सिंह -- किरदार निभाना (Role Play)
मास्टर बेडरूम जारी-2
 
राज अब और इंतज़ार करने के मूड में नहीं था। उसने अनीता की योनि से अपनी उंगलियां बाहर निकालीं, जो पूरी तरह उसके काम-रस से सनी हुई थीं। राज झटके से खड़ा हुआ और उसने अनीता को थोड़ा और नीचे की ओर झुका दिया।
 
अनीता ने बिस्तर के सिरहाने  को दोनों हाथों से मजबूती से पकड़ लिया ताकि वह गिर न जाए। इस स्थिति में उसकी गाँड  ऊँची उठी हुई थी और पीछे खड़े दोनों मर्दों को उसकी पूरी नग्नता का सबसे कामुक नजारा पेश कर रही थी। उसकी जांघों के बीच से उसकी गीली और गुलाबी योनि का मुहाना अब पीछे से भी साफ झलक रहा था।
 
बाहर खड़े करीम की हालत अब ऐसी थी कि उसका दम घुटने लगा था। बेहतर नजारा पाने के लिए उसने धीरे से दरवाजे को और धकेल दिया। अब दरवाजा इतना खुल चुका था कि करीम दोनों आँखों से बिना किसी बाधा के अपनी मालकिन के गोरे बदन की नुमाइश देख सकता था। उसका 10 इंच का काला लंड उसके हाथ में पत्थर की तरह सख्त था और वह पागलों की तरह उसे ऊपर-नीचे सहला रहा था।
 
राज ने अपनी पैंट की जिप खोली और अपना 7 इंच का सख्त लंड बाहर निकाला। वह सीधे अनीता की गीली दरार के मुहाने पर जाकर टिक गया।
 
राज (करीम के खुरदरे लहजे में): "मालकिन, बहुत देर से ई करीम उंगलियों से खेल रहा था... पर अब ई असली लंड आपकी प्यास बुझाएगा। आज करीम आपकी ई गुफा की गहराई नापेंगे हम!"
 
राज ने अपनी कमर को एक जोरदार झटका दिया और अपना पूरा लंड एक ही बार में अनीता की योनि के भीतर उतार दिया।
 
अनीता: (एक लंबी और दर्दभरी चीख मारते हुए) "आह्ह्ह्ह्ह! करीम... उह्ह... मर गई! सिसss... ये क्या... इतना बड़ा... उह्ह... तुम तो फाड़ दोगे मुझे! करीम... आह्ह... करीम... धीरे... आह!"
 
 
राज ने अब रफ़्तार बढ़ा दी है। कमरे में मांस से मांस टकराने की 'थप-थप' की आवाज़ें गूँजने लगी हैं। अनीता के नंगे और सुडौल स्तन हर धक्के के साथ किसी गेंद की तरह ऊपर-नीचे उछल रहे हैं।
 
राज: (अनीता को बिस्तर पर जोर से पटकते हुए और अपनी कल्पना के चरम पर पहुँचते हुए) "बताओ मालकिन... कैसा लग रहा है अपने इस काले नौकर का झटका? आ रहा है मजा? ई काला करीम आपको पूरा भर रहा है कि नहीं?"
 
अनीता: (आँखें बंद किए, सिसकियाँ लेते हुए और बिस्तर की चादर को अपनी मुट्ठियों में बुरी तरह भींचते हुए) "आह्ह... करीम... क्या कर रहे हो तुम? रुको... तुम्हें... तुम्हें ज़रा भी शर्म नहीं आती? अपनी बेटी जैसी मालकिन के साथ ऐसा करते हुए तुम्हें डर नहीं लगता?"
 
अनीता: "उह्ह... आह! पर... पर ये इतना अच्छा क्यों लग रहा है? क्यों मेरा पूरा बदन पिघल रहा है? करीम... आह! और तेज़... और ज़ोर से! मार डालो अपनी मालकिन को अपनी इस ताकत से! हाँ... वहीं! आह!"
 
राज ने उसकी चीखों की परवाह किए बिना अपनी रफ्तार बढ़ा दी। वह पीछे से अनीता की गाँड पर थपेड़े मार रहा था। हर धक्के के साथ अनीता का पूरा शरीर आगे की ओर झूल जाता और उसके वक्ष आइने में पागलों की तरह ऊपर-नीचे होते हुए दिखाई देते।
 
अनीता अब सिसक रही थी,  पर राज की हर मार उसे एक अनोखे सुख की चरम सीमा पर ले जा रही थी। कमरे में केवल गोरे मांस के टकराने की 'चटाक-चटाक' की आवाज़ें और अनीता की बेकाबू आहें गूँज रही थीं।
 


दरवाज़े के बाहर:
 
करीम अब एक अलग ही किस्म के गुरूर और हवस में डूबा हुआ था। जब उसने देखा कि राज का 7 इंच का लंड अनीता के भीतर गया और वह दर्द व मजे के मारे चीख उठी, तो करीम के चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान आ गई। उसने अपने हाथ में थामे हुए उस काले और खूंखार 10 इंच के अंग को देखा, जो मोटाई में राज के औजार से करीब डेढ़ गुना ज्यादा चौड़ा था।
 
करीम: (हाँफते हुए, पसीने में तर-बतर) "अरे मोर मैया! मेमसाब तो साहब के 7 इंच के डंडे में ही 'हाय-तौबा' मचाने लगीं। जे हाल है इनका... अगर कहीं हमरा ई 10 इंच का मुसल इनके भीतर चला गया, तो ई तो सचमुच मर ही जाएंगी! साहब का तो इनके सामने 'बच्चा' लग रहा है।"
 
करीम की आँखें अनीता की योनि पर जमी थीं जो राज के हर धक्के के साथ बाहर की ओर खिंच रही थी। उसे अपनी मर्दानगी पर बड़ा नाज हो रहा था।
 
करीम: (दबी आवाज़ में खुद से बुदबुदाते हुए) "मेमसाब की ई नाजुक गुफा हमरा ई काला पहाड़ झेल ही नहीं पाएगी। साला मोटाई देख रहे हो... ई तो मेमसाब को बीच से फाड़ देगा। अगर हम आज पेलने पर उतर आए, तो मालकिन अगले हफ्ते तक खड़ी नहीं हो पाएंगी। देखो तो कैसे रो रही हैं... अउर यहाँ हमरा कालिया उनके प्राण सोखने को बेताब है।"
 
अंदर राज की रफ्तार और बढ़ गई थी। वह अनीता की कमर को दोनों हाथों से जकड़कर उसे बेपनाह धक्के दे रहा था। अनीता के बाल बिखर चुके थे ।
 
राज (करीम के लहजे में): "का हुआ मालकिन? अभी तो खेल शुरू हुआ है और आप अभी से कांपने लगीं? अभी तो ई करीम आपका सारा गुरूर मिट्टी में मिला देगा। बोलिये... और चाहिए? और गहरा चाहिए?"
 
अनीता: (सिसकते हुए और सिसकारी भरते हुए) "आह्ह्ह... नहीं करीम... उह्ह... बस करो! सिसss... तुम बहुत... बहुत बड़े हो... उह्ह... फाड़ दोगे मुझे! राज... राज बचाओ मुझे... आह करीम, और तेज मारो!"
 
अनीता की यह विरोधाभासी बातें—जहाँ वह दर्द से कराह भी रही थी और और ज्यादा की मांग भी कर रही थी—करीम के दिमाग में आग लगा रही थीं।
 
करीम: "मेमसाब... आज तो साहब आपके साथ 'करीम' बनके खेल रहे हैं, पर जिस दिन असली करीम ने आपको पकड़ लिया ना... उस दिन आपको भगवान याद आ जाएंगे। ई 10 इंच का मसाला जब आपकी अंतड़ियों तक पहुंचेगा, तब आपको पता चलेगा कि असली नौकर की सेवा का मज़ा क्या होता है!"
राज ने अब अनीता को बालों से पकड़कर उसका सिर पीछे खींचा और उसकी गर्दन पर दांत गड़ाते हुए एक और जोरदार धक्का मारा, जिससे अनीता की एक तीखी चीख पूरे कमरे में गूँज गई।
 
राज (करीम के लहजे में): "मालकिन... अब हम रुकने वाले नहीं हैं! आज आपकी ई गुफा को अपने रस से भर देंगे। देखिये कैसे आप तड़प रही हैं... ई करीम का जोर अब बर्दाश्त नहीं होगा आपसे!"
 
अनीता का शरीर अब मरोड़ खाने लगा था। उसकी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा और उसकी योनि की मांसपेशियां राज के लंड को पागलों की तरह भींचने लगीं। वह अपने चरम के बिल्कुल करीब थी।
 
अनीता: (गला फाड़कर चीखते हुए) "आह्ह्ह्ह! करीम... उह्ह... मैं जा रही हूँ! सिसss... और तेज! मारो आह्ह्ह, आ गया... मेरा निकल रहा है करीम! आह्ह्ह्ह!"
 
अनीता का बदन एक आखिरी बार बुरी तरह झटक कर शांत हुआ, उसकी योनि से गरम रसों का सैलाब फूट पड़ा जिसने राज के लंड को और भी फिसलन भरा बना दिया। अनीता के इस झटके ने राज का बांध भी तोड़ दिया। उसकी कमर तेजी से चलने लगी और उसने एक आखिरी, गहरा धक्का मारकर अपना पूरा लंड अनीता की गहराई में जड़ दिया।
 
राज: "आह्ह्ह्ह... मालकिन! ले लो... ई करीम का सारा प्यार ले लो! उह्ह्ह!"
 
राज का 7 इंच का अंग अनीता के भीतर अपनी गरम पिचकारियां छोड़ने लगा। वह अपनी मालकिन के भीतर अपनी पूरी मर्दानगी खाली कर रहा था।
 
दरवाजे के बाहर, असली करीम के लिए यह नजारा उसकी सहनशक्ति से परे था। जब उसने अनीता को अपनी आँखों के सामने झड़ते हुए देखा और फिर साहब को अपना रस छोड़ते देखा, तो उसका 10 इंच का काला औजार भी जवाब दे गया।
 
करीम: (हाँफते हुए, चेहरे पर पागलपन के भाव) "अरे मोर मैया... मेमसाब तो गई! उई माँ... साला साहब ने तो पूरा अंदर ही भर दिया। अउर अब... अब हमरा भी नहीं रुकेगा! आह्ह्ह... मेमसाब... ई देखिये... ई आपके नाम का जहर निकल रहा है!"
 
करीम ने अपनी मर्दानगी को एक आखिरी बार जोर से झटका दिया और उसके मोटे औजार से सफेद, गाढ़ा वीर्य  फुहारों की तरह निकलने लगा। वह सारा रस नीचे जमीन पर पड़ी उसकी धोती पर गिरने लगा। करीम की धोती सफेद धब्बों से भर गई, जैसे उस पर दही की मलाई गिर गई हो। वह दीवार के सहारे टिका हुआ हाँफ रहा था, उसकी आँखें अब भी कमरे के भीतर जगी उस राख को देख रही थीं।
 
कमरे के भीतर, राज अब अनीता के ऊपर ही ढह गया था। दोनों पसीने से लथपथ थे और उनकी भारी साँसों की आवाज़ शांत होते कमरे में गूँज रही थी।
 
अनीता की साँसें अभी स्थिर भी नहीं हुई थीं। उसने अपनी मदहोश आँखों से आइने की ओर देखा और उसका कलेजा मुँह को आ गया।
 
दरवाजा, जो करीम के चरमोत्कर्ष के दौरान उसके धक्के से और खुल गया था, अब एक बड़ी दरार बन चुका था। और उस दरार के पीछे... साफ़ दिख रहा था—एक विशाल, पसीने से तर-बतर काला चेहरा और जलती हुई भूखी आँखें।
 
अनीता: (मन ही मन, दहशत और कंपकंपी के साथ) 'हे भगवान! वह क्या है? वह... वह आँखें है? कोई वहाँ खड़ा है? क्या वह... क्या वह सच में करीम है?'
 
अनीता का चेहरा सफेद पड़ गया। उसे अहसास हुआ कि वह पूरी तरह नग्न है, उसकी टाँगें अभी भी फैली हुई हैं और उसका शरीर राज (जो नकली करीम बना था) के रसों से लथपथ है।
 
अनीता: (मन ही मन) 'वह मुझे देख रहा है... उसने सब देख लिया। उसने मुझे पागलों की तरह उसका नाम चिल्लाते हुए सुना... उसने मेरी नग्नता देखी। हे ईश्वर... मैं उसे अब कल सुबह कैसे मुँह दिखाऊँगी? वह नीच नौकर मेरी गरिमा के परखच्चे उड़ा चुका है।'
 
दरार के उस पार, करीम की आँखें आइने के जरिए सीधे अनीता की आँखों से टकराती हैं। करीम अपनी नज़रें नहीं हटाता। उसके चेहरे पर एक काली, शैतानी और हवस भरी मुस्कान फैल गई, जो साफ़ कह रही थी— "मालकिन, अब खेल शुरू हुआ है।"
 
अनीता के भीतर शर्म, दहशत और एक अजीब सी अनाम उत्तेजना की लहर दौड़ गई। उसे अपनी नंगी जांघों और सुडौल स्तनों पर करीम की उस गंदी नज़र का बोझ महसूस होने लगा।
 
करीम: (अत्यंत धीमी आवाज़ में, खुद से बुदबुदाते हुए) "अनीता बेटी... साला, हमरी तो आज किस्मत ही खुल गई। तुम हमरा नाम ले-ले के साहब के नीचे तड़प रही थीं, और हमने अपनी इन आँखों से तुम्हारी जवानी का उ हर कोना देख लिया जो अब तक साड़ी के पीछे छुपा था।"
 
करीम की नज़र अब अनीता की उस गीली योनि पर थी जिसे राज ने अभी-अभी शांत किया था।
 
करीम: (अपनी आँखों में हवस की चमक लिए) "साला, जे दूध जैसा गोरा बदन और जे सुडौल गांड... अब तो हम जान गए हैं कि तुम्हें 'करीम' नाम से ही कितनी आग लगती है। साहब तो सो जाएंगे, पर अब जे काला करीम तुम्हें कैसे सोने देगा? कल जब साहब काम पे जाएंगे, तब हम तुम्हें बताएंगे कि जिस करीम को तुम पुकार रही थीं, उ साक्षात तुम्हारे सामने खड़ा है। बड़ा मजा आएगा मालकिन... जब हम सचमुच का धचका मारेंगे।"
 
अनीता थर-थर कांपते हुए झपटकर चादर उठाती है और अपने बदन पर लपेट लेती है। उसकी नजरें अभी भी दरवाजे की उस दरार पर टिकी हैं, जहाँ से करीम अब धीरे से पीछे हट रहा था। राज अभी भी बिस्तर पर लेटा अपनी सांसें सामान्य कर रहा था, वह इस बात से बेखबर था कि असली शैतान दरवाजे के ठीक पीछे खड़ा था।
 
अनीता: (हड़बड़ाते हुए और फटी आवाज़ में) "बस... बस बहुत हुआ राज! अब यह खेल बंद करो... प्लीज, अब और नहीं!"
 
राज: (बिस्तर पर लेटे-लेटे लंबी और गहरी साँसें लेते हुए, अपनी मदहोश आँखों से अनीता को देखते हुए) "अनीता... क्या हुआ? तुम तो अभी करीम-करीम पुकारते हुए पागल हो रही थीं... अचानक ये चादर क्यों लपेट ली? अभी तो मैं तुम्हें एक बार और..."
 
राज धीरे से उठकर बैठता है और अनीता के नंगे कंधे पर हाथ रखने की कोशिश करता है, पर अनीता झटके से पीछे हट जाती है। उसकी आँखों में अब वह कामुकता नहीं, बल्कि एक गहरा खौफ था, क्योंकि वह जानती थी कि कल की सुबह उसके लिए एक नया और खतरनाक मोड़ लेकर आने वाली है।
 
वह कुछ बोलने ही वाली थी कि तभी राज के मोबाइल की तेज़ रिंगटोन ने कमरे की खामोशी को चीर दिया।
 
राज: (चिढ़ते हुए) "धत् तेरे की! इस वक्त किसका फोन आ गया? ।"
 
राज फोन उठाता है और गंभीर हो जाता है।
 
राज: (फोन पर) "हाँ... जी, मैं समझ गया। मैं बस अभी निकलता हूँ।"
 
राज फोन काटता है और जल्दी-जल्दी अपने कपड़े पहनने लगता है। वह अनीता की आंखों में छिपे खौफ को देख नहीं पाता।
 
राज: "अनीता, मुझे अचानक ऑफिस निकलना होगा। बहुत जरूरी काम आ गया है। तुम सो जाओ और आराम करो, ठीक है?"
 
 
अनीता: (मन ही मन, चीखते हुए) 'नहीं राज! मुझे अकेला छोड़कर मत जाओ। वह बाहर खड़ा है... उसने सब देख लिया है! वह शैतान हमें सुन रहा था!'
 
राज अनीता के माथे को चूमता है और कमरे से बाहर निकल जाता है। राज के जाते ही अनीता कांपते हाथों से अपनी फटी हुई नीली पैंटी के टुकड़े और बिखरे कपड़े समेटने लगती है।
 
अनीता कमरे का दरवाजा अंदर से बंद करने के बाद फर्श पर बैठ जाती है और अपने चेहरे को हथेलियों में छिपा लेती है।
 
अनीता: (सिसकते हुए, खुद से) "हे भगवान! उसने सब सुन लिया होगा... कि मैं उसका नाम लेकर राज को कह रही थी कि मुझे और जोर से मसलो। उसने सुना होगा कि मैंने उसे अपनी छातियों का रस पीने के लिए कहा... आह, मैं कितनी गिर गई हूँ!"
 
अनीता: (शर्म से जलते हुए) "अब मैं करीम का सामना कैसे करूंगी? जब भी वह मेरे सामने आएगा, मुझे पता होगा कि उसके गंदे दिमाग में मेरी वही नंगी तस्वीरें घूम रही होंगी। अब वह मेरी इज्जत नहीं करेगा... वह मुझे उस औरत की तरह देखेगा जो अपने नौकर के शरीर के लिए तड़प रही है।"
 
पूरा बंगला उसे अब डरावना लगने लगा। राज तो जा चुका था, और अब उसे इस अजनबी, विशाल और हवसी नौकर के साथ इस बड़े घर में अकेले रहना था, जो अब उसका सबसे गहरा और सबसे गंदा राज़ जान चुका था।
Deepak Kapoor
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RE: अनीता सिंह -- किरदार निभाना (Role Play) - by Deepak.kapoor - 15-01-2026, 02:28 AM



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