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Adultery Jawan Patni ka Naajayaz Sambandh
#5
एक औलाद के लिए तरसते हम पति पत्नी ने किस तरह समझौता करते हुए एक साजिश रची और पति के दोस्त को फंसा कर मेरे साथ सेक्स करवा लिया। काम निकलने के बाद उसको डरा धमका कर भगा भी दिया।

हमारा काम अभी भी पूरा नहीं हुआ था, और हमें ये साजिश फिर से रचनी थी।

हमारी जो मोडस ऑपरेंडी था उसके हिसाब से हम एक ही मर्द को दो बार नहीं फंसा सकते थे वरना पकड़े जाते। अब हमने सोच लिया था कि एक के बाद एक दो तीन लोगो को फंसाना होगा, जिससे मेरे गर्भधारण की संभावना बढ़ जाये। साथ ही साथ बाकी की बातों का भी ध्यान रखना था, हमें अपना अगला शिकार काफी आसानी से मिल गया।

आपको याद होगा मेरे पति अशोक रात को रहने के लिए अपने ऑफिस के सहकर्मी के यहाँ गए थे, जो कि हमारे घर के पास ही रहता था। वो एक दो बार हमारे घर आ चूका था। उसका नाम रौनक था और 22 साल का बैचलर लड़का था। मुझसे 3 साल ही छोटा था।

रौनक बहुत ही शरीफ लड़का था, पति की तरह लंबा था। शायद उसकी शराफत की वजह से उसको फंसाना थोडा मुश्किल होता पर उसको डराना उतना ही आसान होता, तो फिर हमने उसी को चुना।

हमें इतना तो पता था कि सुबह के वक्त किया हुआ सेक्स प्रेग्नेंट होने के लिए ज्यादा फायदेमंद होता हैं। हमने इसी समय के हिसाब से अपना प्लान बनाना शुरू किया। पिछले प्लान की कामयाबी के बाद हमारा हौसले बुलंद थे।

रौनक रोज सुबह जॉगिंग के लिए हमारे घर के पास वाले गार्डन में आता हैं। हमें इसी वक्त उसको पकड़ना था। शनिवार और रविवार को छुट्टी होती हैं तो हमने रविवार की सुबह का प्लान बनाया।

रविवार सुबह जल्दी उठ हमने सारा सेटअप कर लिया था। सुबह सात बजे के करीब दूध वाला थैली दरवाज़े के बाहर टांग कर बेल बजा कर चला जाता हैं। पति ने बाहर जाकर चेक किया दूध आ गया था, उन्होंने दूध वही छोड़ा और अंदर आकर रौनक को फ़ोन घुमाया।

रौनक को फ़ोन पर बताया कि उसकी एक मदद चाहिए। पति ने उसको बताया कि वो शनिवार को ही आउट ऑफ़ स्टेशन के लिए निकल गए थे और आज सुबह आने वाले थे पर अब दोपहर तक ही पहुंचेंगे। सुबह से वाइफ को यानि मुझे फ़ोन कर रहे हैं पर फ़ोन लग नहीं रहा हैं। शायद वाइफ पीहर जाने का प्लान बना रही थी तो शायद सच में चली गयी हैं और ट्रेवल कर रही हैं इसलिए फ़ोन नहीं लग रहा।

उनको रौनक से ये मदद चाहिए कि दूध वाला थैली लगा कर गया हैं तो वो आकर डोरमेट के नीचे छिपा कर रखी चाबी से दरवाज़ा खोले और दूध अंदर फ्रीज में रख दे, ताकि दोपहर पति के आने तक दूध खराब न हो जाये।

रौनक वैसे भी जॉगिंग पे निकलने ही वाला था और हमारे घर की तरफ ही आने वाला था तो उसने हां कर दी। हमने जल्दी से पोजीशन लेनी शुरू कर दी।

मैंने पहले से इस दिन के लिए लिए ख़रीदा हुआ पारदर्शी गाउन पहन लिया जो घुटनो तक ही आता था। गाउन के अंदर कुछ नहीं पहना था तो थोड़ा बहुत अंदर का सामान दिख रहा था।

मैं हॉल में सोफे के पास नीचे कारपेट पर लेट गयी। एक पाँव सोफे के ऊपर और एक जमीन पर था, जिससे मेरे दोनों टांगो के बीच के गैप से सब कुछ दिख रहा था। पति ने मेरी टांगो कि पोजीशन चेक कर ली जिससे जो भी दरवाज़े के अंदर आये उसे सबसे पहले मेरे टांगो के बीच का खुला दरवाज़ा दिखे।

सेंटर टेबल पर शराब की लगभग खाली बोतल, एक गिलास और साथ में चखना रख दिया। ताकि कोई भी आये तो उसे लगे कि मैं शराब के नशे में धुत हूँ। मैं शराब नहीं पीती पर थोड़ी सी अपने होठों पर और थोड़ी अपने कपड़ो पर छिड़क ली ताकि शरीर से शराब की बदबू आये।

पति अब अंदर बेडरूम में गए और हमारे वॉक इन क्लोसेट में छुप गए।

कुछ मिनटों के बाद ही ताला खुलने की आवाज़ आयी। मैंने आँखें इस तरह बंद की कि सामने से लगे वो बंद हैं पर पलकों के नीचे थोड़े गैप से थोड़ा दीखता रहे। ये भी थोड़ी रिहर्सल के बाद पति से टेस्ट करवा के किया हुआ था।

अब दरवाज़ा खुला और रौनक हाथ में दूध की थैली लिए अंदर घुसा और उसकी नज़रे मुझ पर पड़ी। उसकी आँखें मेरी दोनों टांगो के बीच पड़ी थी जो कि उसके खुले मुँह से लग गया था, उसको मेरा हरा भरा माल दिख रहा था। वो तेजी से चलता हुआ मेरे पास आया।

मेरी आँखें बंद देख कर मुझे आवाज़ लगाई। उसने अब टेबल पर पड़ी शराब और चखना देख कर अंदाज़ा लगा लिए था कि क्या माजरा हैं। उसने एक बार पाँव तो एक बार हाथ हिला कर उठाने की कोशिश की।

फिर वो मेरे पैर की तरफ आकरबैठ गया और मेरी टांगो के बीच के माल को घूरने लगा। उसकी आँखों में प्यास थी। थोड़ी देर घूरने के बाद वो वो आगे आया और मेरे पारदर्शी गाउन के अंदर के अंग देख कर मेरे बदन पर जगह जगह हाथ लगा कर मुझे झकझोर कर उठाने की कोशिश करने लाग। उठाने की कोशिश कम पर मेरे बदन को महसूस करने की कोशिश ज्यादा थी।

वैसे तो बहुत शरीफ बनता हैं पर था तो एक मर्द, वो भी एक बैचलर। ऊपर से सामने तिजोरी खुली पड़ी थी तो उसका ईमान डोल गया था। तभी उसका फ़ोन बजा। उसने दूध उठाया और किचन की तरफ जाते हुए फ़ोन पर बात करने लगा।

किचन से लौटते वक्त थोड़ा पानी गिलास में ले आया और थोड़ा मेरी आँखों पर छिड़कने लगा। मैंने आँखें मिचमिचाई और फिर वैसे ही बंद कर दी।

तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई। मैं थोड़ा घबराइ कि इस वक्त तो कोई आता नहीं। इस चीज का तो हमने कोई काउंटर प्लान ही नहीं बनाया था। मैं अगर उठ जाती तो प्लान फ़ैल हो सकता था। तब तक रौनक ने दरवाज़ा खोल दिया और एक दूसरे लड़के को अंदर ले लिया। मैंने देखा ये तो उसका रूममेट संदीप हैं।

मैंने लेटे रहने में ही भलाई समझी। अब संदीप मेरी टांगो के बीच घूर रहा था और रौनक को बोल रहा था क्या माल हैं यार। आज तो लॉटरी लग गयी। चल इसको पूरी नंगी कर देते हैं और मजे ले लेते हैं ये तो वैसे भी नशे में हैं कुछ पता नहीं चलेगा।

रौनक ने उसको मना किया और बोला कि अंदर बैडरूम में सुला देते हैं और उठाने की कोशिश करते हैं। रौनक ने मेरे कंधो के नीचे हाथ डाला उठाने के लिए और संदीप ने सोफे पर पड़ी मेरी टांग नीचे की और टाँगे उठा ली। इससे मेरा गाउन कमर की तरफ खिसक गया और मेरे नीचे के अंग बाहर दिखने लगे। दोनों हसने लगे और ऐसे ही मुझे उठा कर बैडरूम में ले आये।

मेरी पति पहले ही अंदर छुपे थे और अब तक दो लोगो की आवाज़े सुन चुके थे। बाहर आ नहीं सकते क्यों कि खुद झूठे साबित हो जाते इसलिए क्लोसेट के अंदर से ही चुपचाप सब देखना था।

मुझे बिस्तर पर लेटाने के बाद संदीप ने मेरा गाउन थोड़ा और ऊपर कर दिया और मेरे नीचे के नाजुक अंग पर हाथ फेरने लगा। फिर अपनी ऊँगली बाहर की सतह पर रगड़ने लगा। मुझे कुछ कुछ होने लगा।

संदीप को देख कर रौनक के भी हौसले बढ़ गए। वो हलके पारदर्शी गाउन के ऊपर से ही मेरे वक्षो को देख पा रहा था तो उनको दबाने लगा और संदीप को बोला कि बड़े जबरदस्त हैं ये तो। संदीप को भी एक्साइटमेन्ट हुआ और अपने दूसरे फ्री हाथ से मेरा एक वक्ष दबाने लगा।

संदीप बदमाश निकला, उसने रौनक को बोला कि ये गाउन निकालने के बाद दबाने का ज्यादा मजा आएगा। रौनक ने अब मेरा गाउन ऊपर की तरफ खींच कर सर से बाहर निकाल लिया। अब मेरे शरीर पर एक कपडा नहीं। संदीप तब तक लगातार अपनी ऊँगली मेरे नीचे रगड़ रहा था।

अब उसने अपनी ऊँगली मेरे छेद में घुसाना शुरू किया। मेरा पानी बनने लगा था तो उसकी ऊँगली फिसलते हुए अंदर चली गयी। वो तो उसको और भी अंदर डालना चाहता था पर ऊँगली छोटी थी तो ऐसे ही अंदर ऊँगली फिरा कर मजे लेने लगा।

रौनक इस बीच मेरे दोनों वक्षो को अपने हाथों में ले कर मसल रहा था और मेरे निप्पलों से खेल रहा था। मेरा तो अब मूड बन चूका था। एक का सोचा था पर यहाँ तो दो दो को चुपचाप हैंडल करना था।

रौनक ने अब मेरे दोनों वक्षो को छोड़ा और अपने नीचे के कपडे उतार दिए। अब वह मेरे सीने पर बैठ गया। उसका पिछवाड़ा मेरे वक्षो की गद्दी पर बैठा था। अपना लंड मेरे मुँह के पास लाया और अपने हाथ से मेरा मुँह थोड़ा खोल कर अपना कड़क लंड अंदर डालने लगा।

उसने एक झटका मारा और लंड मेरे मुँह में घुसा दिया। उसकी मोटाई बहुत ज्यादा थी जिससे मेरा पूरा मुँह भर गया कि हवा पानी निकलने की भी जगह नहीं थी। फिर उसने लंड थोड़ा बाहर निकाल कर और भी जोर के झटके से मेरे गले तक उतार दिया। थोड़ा और अंदर डालता तो मेरी सांस ही बंद हो जाती।

एक तरफ वो मेरे मुँह में झटके मारे जा रहा था तो दूसरी तरफ नीचे के छेद में संदीप ऊँगली कर रहा था। मेरा मुँह अब खारा होने लगा था जैसे नमकीन गुनगुनी शिकंजी पी ली हो। मैंने मन ही मन सोचा ये क्यों वीर्य बर्बाद कर रहा हैं, जहा जरुरत हैं वहा डाले।

संदीप ने अब अपनी ऊँगली बाहर निकाल दी। उसने अपने कपडे उतार दिए थे। थोड़ी ही देर में मेरी दोनों टाँगे ऊपर की और उठा कर अपने कंधो पर रख दी थी। एक मांस का लोथड़ा मैंने अपने नीचे के छेद के पास टकराता महसूस किया। ये संदीप का लंड था। जिसके लिए ये सारी मेहनत की थी उसकी घडी आ गयी थी।

कुछ सेकंड तक संदीप अपने लंड से डंडे की तरह मेरे नीचे के नाज़ुक अंग पर मारता रहा जिससे चटाक चटाक आवाज़े आने लगी।

अब वो मेरी चूत के बाहर की अंदरूनी दीवारों पर लंड रगड़ने लगा। मेरी सिसकिया नहीं निकल पा रही थी क्यों की मुँह में रौनक का लंड था। संदीप ने थोड़ी देर ऐसे ही तड़पाया फिर अपना लंड मेरे छेद के मुहाने पर लगा दिया।

अब संदीप अपने लंड को एक इंच अंदर डाल कर बाहर निकाल रहा था। थोड़ी देर ऐसे ही करने से मेरी तड़प और बढ़ने लगी। तब तक रौनक ने अब झटके मारना बंद कर दिया था और ऐसे ही मेरे मुँह में लंड डाल कर बैठा रहा।

संदीप अब एक इंच की बजाय 2 इंच तक लंड अंदर बाहर करने लगा। मैं अब तड़पने लगी। ऐसे ही खेलते रहने के बाद उसने अब धीरे धीरे ओर भी अंदर उतरना शुरू कर दिया।

अब वो पूरा मेरे अंदर था क्यों कि उसकी बॉडी मेरे नीचे टकरा गयी थी। मुझे अंदाज़ा हो गया कि उसका लंड मेरे पति के मुकाबले थोड़ा पतला और छोटा ही था, जिससे मुझे ज्यादा कुछ महसूस नहीं हो रहा था। वो अंदर अठखेलिया कर रहा था और मझे जैसे गुदगुदी हो रही थी।

मेरी कोई प्रतिक्रिया नहीं देख कर संदीप को शायद गुसा आ गया और वो जोर जोर से अंदर झटके मारते वक़्त अपना शरीर मेरे शरीर से टकरा रहा था।

वो इतनी ताकत से मार रहा था कि मुझे चोट लग रही थी। दर्द के मारे मेरी बॉडी नीचे से छटपटाने लगी। पर उसको कोई रहम नहीं आया और एक जानवर की तरह झटके मारता रहा।

मेरा दर्द असहनीय सा हो रहा था पर मैं उठ नहीं सकती थी क्यों कि काम पूरा होने से पहले ही खेल ख़त्म हो जाता। मैंने जैसे तैसे सहन करना जारी रखा। पता ही नहीं चला कब धीरे धीरे दर्द कम होता गया या फिर मुझे अंदर जो मज़ा आने लगा था जिससे दर्द का अह्सास कम लग रहा था।

अब रौनक ने लंड मेरे मुँह से बाहर निकाला और पास में बैठ कर मेरे वक्षो को मलता हुआ संदीप को देखने लगा जो कि लगा पड़ा था। अब हम दोनों का पानी छूटने लगा था। चटाक चटाक की आवाज़े अब धीरे धीरे फचाक फचाक में बदलने लगी थी। मेरे मुँह से अब आह निकलने लगी, थोड़ी बहुत दर्द के मारे और थोड़ी मजे की वजह से।

संदीप का जोश और बढ़ गया। थोड़ी ही देर में मेरा सारा पानी छूट गया और उसके 2 मिनट बाद संदीप ने भी आ… ऊ… करते हुए अपना सारा पानी मेरे अंदर खाली कर दिया।

इसके बाद वो रुक गया और लंड अंदर ही रखे थोड़ी देर बैठा रहा। मुझे दर्द से थोड़ी राहत मिली। अब उसने अपना अंग मेरे अंदर से बाहर निकाल दिया। मेरी टाँगे अपने कंधो से उतार कर नीचे सुला दी।

संदीप के झाड़ते ही मैंने चैन की सांस भी पूरी नहीं ली थी कि कुछ ही सेकंड में अब रौनक मेरी दोनों टांगो को चौड़ा कर बीच में आकर बैठ गया। मैं भी चाहती थी कि दो लोग करेंगे तो बच्चा होने की सम्भावना बढ़ जाएगी परन्तु थोड़ा ब्रेक तो मुझे भी चाहिए था।

उसने मेरा साइड में पड़ा गाउन उठाया और मेरी योनी पर लगा पानी साफ़ करने लगा जो संदीप छोड़ कर गया था। अब उसने अपना लंड पकड़ कर मेरे छेद में डालना शुरू किया।

थोड़ी देर पहले उसका मुँह में लेने से ही मुझे उसकी मोटाई का अंदाजा था। मुँह में बड़ी मुश्किल से समां रहा था तो नीचे के छोटे छेद में कैसे जायेगा ये सोच मैं घबरा गयी।

वैसा ही हुआ, दो इंच भी अंदर नहीं गया और अटक गया, मेरी तो हालत खराब हो गयी इतने में ही। उसने थोड़ा जोर लगाने की कोशिश की पर कामयाब नहीं हुआ, उल्टा मुझे दर्द हुआ और थोड़ी चीख निकल गयी।

संदीप ने पीछे से उसको बोला कि सारा लुब्रीकेंट तो तूने साफ़ कर दिया अब सूखे में कैसे जाएगा, पहले गीला कर।

उसने अपना लंड पूरा बाहर खींच लिया। मैंने चैन की सांस ली। अब उसने झुक कर अपने होठ मेरे योनी के होठों पर लगा दिए। थोड़ी देर चूमने के बाद अपनी जबान ऊपर से नीचे रगड़ने लगा चूत की दरार पर।

ऐसे ही वो अपनी खुरदरी गीली जुबान दरार में फेराता रहा तो मुझे मज़ा आने लगा। थोड़ी देर में उसने अपनी जबान रोल की और अंदर छेद में डाल कर जीभ लपलपाने लगा। मेरी तो झुरझुरी छूट गयी। अंदर एक करंट दौड़ गया।

कुछ मिनटों तक ऐसे ही मुझे वो करंट लगाता रहा फिर सीधा बैठ गया। मेरे अंदर अच्छा खासा गीला हो गया था। थोड़ी देर पहले ही छूटी थी और अब उसने फिर मेरा मूड बना दिए था। अब उसने अपना लंड धीरे धीरे प्यार से अंदर घुसाना शुरू किया।

उसकी मोटाई इतनी ज्यादा थी कि मेरा छोटा छेद उसको सहन नहीं कर पा रहा। मुझे बहुत दर्द हुआ, ऐसे मोटे लंड का ये पहला अनुभव था।

मेरी जागरण वाली कहानी में मोहित के लंड से भी ये थोड़ा मोटा था। मुझे डर लगा कही मेरी चूत फट ही ना जाए।

अगले कुछ सेकंड में उसका लगभग 6 इंच से भी लम्बा रहा होगा लंड मेरे अंदर था। हालांकि वो बहुत प्यार से अंदर डाल रहा था पर मैं तो दर्द से एक बार फ़िर चीख रही थी। अब रौनक ने अपना लंड वैसे ही धीरे धीरे करते पूरा बाहर निकाल लिया।

बाहर निकालते ही एक बार फिर पहले की तरह पूरा अंदर घुसा दिया। ऐसे 8 -10 बार रौनक ने ऐसे पूरा बाहर और फिर पूरा अंदर डाला। पता नहीं कैसा खेल खेल रहा था वो।

पति क्लोसेट के पीछे छिपे थे, कही मेरा दर्द देख कर बाहर ना जाये। सारा भांडा फुट जायेगा ऐसे तो। पर सब देख सुन कर भी वो सहन करते रहे अंदर से।

अब रौनक मेरे पास आकर लेट गया। मेरा हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचने लगा, उधर से संदीप ने मेरी टाँगे और कमर उठा कर मुझे धकेलते हुए रौनक पर सुला दिया। नीचे रौनक था और उसके ऊपर पीठ के बल मैं लेटी थी।

रौनक ने अपना हाथ नीचे ले जा कर अपना लंड एक बार फिर मेरे अंदर डालना शुरू किया। उसके पुरा अंदर जाने के बाद उसने अंदर बाहर धीरे धीरे झटका मारना शरू कर दिया।

संदीप मेरे पास आकर बैठ गया और मेरी नाभी और उसके आस पास चूमने लगा। मेरा बदन वहां से थर थर कापने लगा। संदीप ने अब अपनी एक ऊँगली मेरी चूत के थोड़ा ऊपर रख मलने लगा।

उधर रौनक लगातार झटके मार रहा था जबकि संदीप लगातार मेरे पेट पर चूमते हुए मेरी उत्तेजना बढ़ा रहा था। मुझे मजा तो बहुत आ रह था पर जल्दी से ये सब ख़त्म करना था क्यों कि दर्द सहन नहीं हो रहा था।

अब धीरे धीरे रौनक ने झटको की रफ़्तार बढ़ा दी, तब संदीप ने पेट चूमना बंद किया और मेरे वक्षो को मसलने लगा। एक हाथ से वक्ष तो दूसरे हाथ की ऊँगली से मेरी चूत के ऊपर की तरफ मालिश कर रहा था।

रौनक बहुत देर तक करता रहा पर उसक तो ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था जबकि मेरा तो अच्छा ख़ासा पानी छूटने लगा था। इससे पहले कि मैं दोबारा छूट जाती रौनक ने लंड बाहर निकाल दिया। मुझे पता था कि उसका अभी हुआ नहीं हैं।

रौनक ने मुझे अपने ऊपर से उतार कर उल्टी लेटा दिया और मेरे दोनों पाँव पकड़ कर बिस्तर से नीचे लटका दिए जब की कमर के ऊपर का हिस्सा पलंग पर था। उसने मेरी एक टांग पकड़ कर शरीर टेढ़ा किया और एक टांग ऊपर 90 डिग्री पर खड़ी कर दी जब की दूसरी टांग नीचे जमीन पर।

मैंने अब टेडी होकर लेटी थी। मेरी दोनों टाँगे विपरीत दिशा में थी जिससे छेद पूरा खुल गया था। रौनक ने अपना एक पाँव मोड़ कर पलंग के किनारे पर टिकाते हुए अपना लंड मेरे अंदर एक बार फिर घुसा दिया।

उधर संदीप मेरे चेहरे के पास आया और मेरे गालो को दबा कर मुँह खोलते हुए अपना नरम चूसा पड़ा लंड मेरे मुँह में डाल दिया। इधर संदीप मेरे मुँह में नरम छोटा लंड अंदर बाहर कर रहा था तो नीचे के छेद में रौनक अपना मोटा लंड झटके मारते हुए दर्द के साथ आनंद दे रहा था।

नीचे अब मेरे पानी के रिसने के साथ ही रौनक का पानी भी आ मिला था और फचाक फचाक की आवाज़े कमरे में गूंजने लगी। इन सब के दौरान मेरी आँखें लगातार बंद थी और पलकों के नीचे झिर्री से थोड़ा बहुत देख रही थी।

संदीप ने अपना लंड मेरे मुँह में लगाए रखते हुए मेरे वक्षो को दबाना शुरु कर दिया। साथ ही बेरहमी से मेरे निपल दबा रहा था। ऊपर और नीचे दोनों तरफ बराबर दर्द हो रहा था।

रौनक के चरम के नजदीक पहुंचते हुए इतनी जोर के झटके मारे कि मेरी तो जान ही निकल गयी थी। उसके मोटे लंबे लंड में इतना पानी भरा था कि सब मेरे अंदर खाली होने लगा था। फिर उसने एक जोर की हुंकार भरी और उसका किला ढह गया।

रौनक ने काम ख़त्म कर कपडे पहनना शुरू कर दिया था पर संदीप अभी भी अपना नरम लंड मेरे मुँह में फिरा रहा था। रौनक ने उसको भी कपडे पहनने की हिदायत दी। फिर दोनों ने मिलकर मुझे मेरा गाउन फिर से पहना दिया और सीधा लेटा दिया।

संदीप ने बोला चल निकलते हैं, पर रौनक ने कहा बाहर से पानी का गिलास ले कर आ, इनको उठाना तो पड़ेगा। संदीप पानी ले आया और रौनक को दिया। उसने उंगलिया गीली कर हल्का हल्का पानी मरे मुँह पर दो बार छिड़का। मैंने अपनी आँखें मिचमिचाई और फिर बंद कर ली।

संदीप झल्लाया ला मुझे दे और अगले ही सेकंड मेरे मुँह पर बहुत सारा पानी आकर गिरा। उसने तो पूरा गिलास ही मुँह पर उंढेल दिया। थोड़ा पानी नाक में भी चला गया तो मेरी सांस रुक गयी और मैं तुरंत खांसते हुए बैठ गयी। अपना मुंह हाथों से पौंछते हुए उनकी तरफ आश्चर्य से देखा जैसे पहली बार देखा हो।

मैं जिस हड़बड़ाहट से उठी दोनों झेंप गए। तुरंत अपनी सफाई देने लगे कि मैं वहां बाहर नशे में पड़ी थी तो वो लोग मुझे अंदर ले आये और पानी छिड़क कर उठाने की कोशिश कर रहे थे।

मैंने दोनों को अविश्वास की नजरो से देखा। रौनक ने बोला कि अशोक का फ़ोन आया था आप फ़ोन नहीं उठा नहीं थी तो मुझे देखने के लिए भेजा था। वो बोले अब हम चलते हैं आप आराम करो।

अब नाटक के दूसरे भाग की बारी थी। मैंने अपने हाथ से अपना पेट पकड़ा, बदन में दर्द तो वैसे भी थोड़ा हो ही रहा था तो ओर दर्द के भाव लाते हुए उनसे कहा एक मिनट रुको, तुमने क्या किया यहाँ। वो घबरा गए। हकलाते हुए बोले कुछ नहीं बस आपको लेटाया और पानी छिड़का।

मैं आवाज़ में दर्द लाते हुए उन पर चिल्लाने लगी, मुझे बेवक़ूफ़ मत बनाओ, तुमने मेरे साथ कुछ तो गलत किया हैं। चारो तरफ नज़रे फेराते हुए एक दो जो भी हलकी फुलकी गाली आती थी देते हुए कहा तुम लोगो ने मेरे अंदर कोई तो डंडा या ऐसी कोई चीज़ डाली हैं।

दोनों की सिट्टी पिट्टी घूम हो गयी। मैंने चिल्लाना जारी रखा, सच सच बोलो क्या किया तुम लोगो ने, मैं अभी सबको इकठ्ठा करती हूँ। दोनों हाथ जोड़ कर माफ़ी मांगते हुए बोले डंडा नहीं डाला,, वो हमने,, हमने खुद ही सेक्स किया था आपको ऐसी हालत में देख कर बहक गए थे। पर आप हमको माफ़ कर दो हमारा करियर जस्ट शुरू ही हुआ हैं सब बर्बाद हो जायेगा।

मैंने उनको डराना जारी रखा, तुम लोगो ने मेरी ऐसी वैसी फोटो वीडियो निकाली हैं न, ताकि बाद में मुझे बदनाम कर सको। दोनों गिड़गिड़ाने लगे, फ़ोन मेरी तरफ बढ़ा कर बोले आप हमारा फ़ोन चेक कर लो कुछ नहीं हैं। मैंने दोनों के फ़ोन लिए और चेक करने लगी, हालांकि मुझे पता था की कुछ फोटो वीडियो नहीं लिया हैं।

मैंने फोन लौटाते हुए कहा अकेली देख कर जबरदस्ती कर रहे थे। मेरे पति को पता चल गया तो तुम्हारा खैर नहीं। तुम्हारे खिलाफ केस चलेगा। मुझे बदनाम करने की कोशिश कर रहे हो तुम दोनों।

दोनों घुटनो के बल बैठ गए, और हाथ जोड़ कर बोले ऐसा कुछ नहीं हैं। हम किसी को कुछ नहीं कहेंगे। हम तो वैसे भी अपने होम टाउन के पास ट्रांसफर लेने वाले हैं। अपना छोटा भाई समझ कर माफ़ कर दो दीदी।

मैंने कहा दीदी बोल के ऐसा काम करते हो। मैं ये कपडे संभल कर रखने वाली हूँ जिसमे तुम्हारा सीमेन लगा हैं, अगर मैं कभी मुसीबत में फंसी तुम्हारी वजह से तो ये सबूत हैं तुमको नहीं छोडूंगी। फिर एक दो गाली देकर कहा दोनों यहाँ से जल्दी से फुट लो और कभी मेरे सामने मत आना।

दोनों फिर दुम दबा कर भाग गए। मैंने बाहर जाकर चेक किया वो जा चुके थे। मैं बैडरूम में आयी और पति को कहा कि बाहर आ जाओ रास्ता साफ़ हैं।

पति बाहर आये और मेरी तारीफ़ करने लगे सब गड़बड़ हो जाती अगर तुम संभालती नहीं तो। हमने सोचा ही नहीं कि दोनों दोस्त आ जायेंगे।

खैर हमने तो एक बार में एक को फंसाने का प्लान किया था पर एक साथ दो मुर्गे फंस गए, हालांकि मेरी हालत बहुत खराब हुई थी। दो तीन दिन तक शरीर में बहुत दर्द रहा। इस तरह हमारी साजिश का दुसरा पड़ाव पूरा हुआ।
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Jawan Patni ka Naajayaz Sambandh - by THAMMA - 12-01-2026, 07:12 PM
RE: Jawan Patni ka Naajayaz Sambandh - by THAMMA - 13-01-2026, 11:58 AM
RE: Jawan Patni ka Naajayaz Sambandh - by Wilson - 13-01-2026, 12:03 PM
RE: Jawan Patni ka Naajayaz Sambandh - by THAMMA - 13-01-2026, 12:29 PM
RE: Jawan Patni ka Naajayaz Sambandh - by THAMMA - 13-01-2026, 12:47 PM
RE: Jawan Patni ka Naajayaz Sambandh - by THAMMA - 13-01-2026, 01:56 PM



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