12-01-2026, 07:36 AM
चंद्रिका हंसते हुए धीरे से बोली, “नहीं-नहीं गोलू ! बस थोड़ा ऑउट ऑफ प्रैक्टिस हो गयी हूँ ना!”
मैंने फिर उसके होंठों पे अपने होंठ रख दिये और उसका नीचे वाला होंठ अपने होंठों के बीच ले कर चूसा तो चंद्रिका के जिस्म में झुरझुरी फ़ैल गयी और उसके दोनों निप्पल खड़े होने लगे। चंद्रिका भी अब मेरा साथ देने लगी और मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी और हम दोनों एक दूसरे की जीभें चूसने लगे। फिर मैं अपना हाथ उसके पेट से उसके मम्मों पर ले गया और नाइटी के ऊपर से सहलाने लगा। उसके मम्मों को सहलाते हुए मैं बोला, “ चंद्रिका जी, मम्मे तो बहुत बड़े-बड़े हैं और कठोर भी हैं!”
वो कुछ नहीं बोली। कुछ देर तक मम्मे सहलाने के बाद मैंने उसकी नाइटी के हुक खोल दिये और फ़िर से उसके होंठों को चूमने लगा और फिर उसके बोब्बों को दबाने और सहलाने लगा। मेरी उंगलियाँ छूते ही उसके निप्पल खड़े हो गये। इतने में मैंने महसूस किया कि खुशबू चाची मेरा बरमूडा मेरी टाँगों से नीचे खिसका रही है। फिर उन्होंने मेरा अंडरवीयर और टी-शर्ट भी उतार दी। मैंने भी चंद्रिका की नाइटी और ब्रा और पैंटी उसके जिस्म से अलग कर दी। खुशबू चाची तो पहले ही कब नंगी हो गयी थीं मुझे पता ही नहीं चला।
अब मैं बिल्कुल नंगा दो नंगी हसिनाओं के साथ एक ही बिस्तार पर मौजूद था। खुशबू चाची ने चॉकलेट रंग के पेंसिल हील के सैंडल पहने हुए थे और उनकी ननद चंद्रिका ने सफेद रंग के ऊँची हील के सैंडल। दोनों का नंगा हुस्न देखकर मैं तो पागल हो गया।
चंद्रिका को लिटा कर मैं उसकी चूत को सहलाने लगा और चूत में दो उंगलियाँ भी डाल दी। इतने में खुशबु चाची मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी। मैंने भी झुककर चंद्रिका की चूत पर अपने होंठ लगा दिये और उसकी चूत में जीभ डालकर चूसने लगा। चंद्रिका के होंठों से मस्ती में खुलकर सिसकरियाँ निकल रही थी और और वो टाँगें फैलाये हुए बिस्तर की चादर अपनी मुठियों में भींच रही थी।
खुशबू चाची के चूसने से मेरा लंड पत्थर की तरह सख्त हो गया था और चंद्रिका भी काफी गरम हो चुकी थी। वो अब बिल्कुल बेशरम होकर मस्ती में बोली, “ गोलू ऽऽ अब बर्दाश्ट नहीं हो रहा... प्लीज़ चोदो मुझे...!”
खुशबू चाची ने मेरे लंड अपने मुँह में से निकाला और बोली, “हाँ गोलू... अब चोद दो मेरी बहन को... देखो कैसे सब शर्म-ओ-हया छोड़कर चोदने के लिये गुज़ारिश कर रही है!”
मैं चंद्रिका के ऊपर आ गया और खुशबू चाची ने मेरा लंड को अपनी उंगलियों में पकड़कर अपनी बहन की चूत के मुहाने रख दिया। मेरे लंड के गरम सुपाड़े को अपनी चूत पर महसूस करके चंद्रिका और भी तड़प कर सिसक उठी। मेरे लंड को चंद्रिका की चूत पर दबाते हुए खुशबू चाची बोली, “फक इट अप गोलू ... पूरा लौड़ा अंदर तक...!”
मैंने एक जोर का धक्का मारा तो आधा लंड चंद्रिका की चूत में घुस गया। दर्द की वजह से चंद्रिका ज़ोर से चिल्लायी, “ऊऊऊईईईईई आआआहहह मेरे अल्लाह.... मरऽऽऽ गयीऽऽऽ!” अपनी बहन को दर्द से बेहाल होकर तड़पते देख खुशबू चाची चंद्रिका के पास जाकर उसके होंठों को चूमने लगी और उसके मम्मों को दबाने लगी। चंद्रिका की चींखें कुछ कम हुई तो मैंने फिर कसकर एक धक्का मारा तो पूरा लंड उसकी चूत में समा गया। चंद्रिका की चूत की कसी-कसी और गरम-गरम दीवारें मेरे लंड को जकड़े हुए थी।
चंद्रिका की तो फिर से चींख निकाल पड़ी और वो अपने सिर को इधर-उधर पटकते हुए चिल्लायी, “याऽऽ अल्लाहऽऽऽ... मेरे मालिक... इस जालिम लंड ने तो मेरी जान ही निकाल डाली... आआआईईईऽऽऽ!”
मैं कुछ देर उसकी चूत में पूरा लंड घुसाये पड़ा रहा और कुछ भी हर्कत नहीं की। खुशबू चाची अब भी अपनी बहन के मुँह में जीभ डालकर उसके होंठ चूम रही थी। जब चंद्रिका नॉर्मल हुई तो मैं अपने चूतड़ हिला कर धीरे-धीरे चोदने लगा। खुशबू चाची अब उसे चूमना छोड़कर चंद्रिका के बगल में लेटी हुई अपने हाथ से उसकी चूचियाँ और पेट पर सहला रही थी। चंद्रिका मस्ती में ज़ोर-ज़ोर से सिसकते हुए “आहह ऊँहह आँआँहह” कर रही थी। अपनी टाँगें उठा कर चंद्रिका ने मेरे पीछे कमर पर कैंची की तरह कस दीं और अपनी बाँहें मेरी बगलों में से मेरे कंधों पर कस दीं। “हाँ...ओहह मेरा खुदा... सो गुड... ओह डू इट... चोदो...!” बड़बड़ाते हुए चंद्रिका भी मेरे धक्कों के साथ-साथ अपने चूतड़ ऊपर उछालने की पूरी कोशिश कर रही थी।
थोड़ी ही देर में मैंने महसूस किया की खुशबू चाची अब मेरे पीछे थीं और मेरे चूतड़ों पर हाठ फिरा रही थीं। मैं भी लंबे-लंबे धक्के मारता हुआ अपना लंड चंद्रिका की चूत में अंदर-बाहर चोद रहा था। “ओहह गोलू... आँहहा... अल्लाह... मैं... मैं... गयी... आआहहह!” चंद्रिका ज़ोर से चींखी और अपनी टाँगें बहुत ज़ोर से मेरी कमर पर कस दीं और अपनी उंगलियों के नाखुन मेरे कंधों में गड़ा दिये। उसका बदन अकड़ गया और चंद्रिका की चूत ने मेरे लंड पर पानी छोड़ दिया।
मैंने चोदना नहीं रोका और अब मैं और भी लंबे-लंबे धक्के मारते हुए चोदने लगा। पूरा लंड बाहर खींच कर एक झटके में चंद्रिका की चूत में घुसेड़ने लगा। चंद्रिका भी फिर से मस्ती में आ गयी और नीचे से अपने चूतड़ उछालने लगी। थोड़ी ही देर में धक्कों की रफ़्तार और बढ़ने लगी। कमरे में चंद्रिका की “ऊँहहह आँहह” गूँज रही थी और उधर खुशबू चाची भी हमें जोश दिला रही थीं, “फक हर गोलू... और ज़ोर से चोद कुत्तिया को...!”
करीब पंद्रह-बीस मिनटों की चुदाई के बाद मैं ज़ोर से चंद्रिका से लिपट गया और उसने भी मुझे ज़ोर से जकड़ लिया। हम दोनों ही झड़ने के कगार पर थे। पहले चंद्रिका झड़ते हुए ज़ोरे से चींखी और मैंने भी पूरी ताकत से अपना लंड चंद्रिका की चूत में अंदर तक ठाँस दिया। मेरी लंड की गोटियाँ भी चंद्रिका के चूतड़ों के बीच की दरार में धंसी गयीं। अगले ही पल मेरा लंड उसकी चूत की गहरायी में पाँच-सात पिचकारियाँ मार कर झड़ गया। कुछ देर तक हम दोनों ऐसे ही लिपटे रहे। फिर जब मैंने आधा मुर्झाया हुआ लंड बाहर निकाला तो देखा उसकी चूत से वीर्य की धार बह रही थी। खुशबू चाची ने लपककर अपनी जीभ चंद्रिका की चूत पर लगा दी और उसमें से बहता हुआ मेरा वीर्य चाटने लगी। मेरा लंड भी खुशबू चाची ने चूसकर साफ किया और फिर उन्होंने चंद्रिका से पूछा, “आया ना मज़ा?”
चंद्रिका सिसकते हुए बोली, “या अल्लाह! इतने सालों से क्यों मैंने खुद को इतने मज़े से महरूम रखा?”
फिर मैंने खुशबू चाची को भी चोदा। चंद्रिका भी खुशबू चाची की तरह ही चुदासी निकली। चंद्रिका जितने दिन कोलकाता रही हम तीनों रात को एक ही बिस्तर में सोते और रोज-रोज मैं उन दोनों बहनों को चोदता। दोनों चुदक्कड़ बहनों ने मुझे चुदाई की मशीन बना कर रख दिया और दोनों मिलकर मेरा लंड निचोड़ कर रख देतीं थीं। कईं दफा तो दोनों नशे धुत्त होकर में मेरे लौड़े के लिये आपस में बिल्लियों की तरह लड़ने और गाली-गलौच तक करने लगती थीं।
चंद्रिका के जाने के बाद मैं भी अपने घर वापस आ गया लेकिन हर रात में खुशबु चाची और चंद्रिका चाची को याद करके और लंड को उसकी याद में हिलाया करता था ।
मैंने फिर उसके होंठों पे अपने होंठ रख दिये और उसका नीचे वाला होंठ अपने होंठों के बीच ले कर चूसा तो चंद्रिका के जिस्म में झुरझुरी फ़ैल गयी और उसके दोनों निप्पल खड़े होने लगे। चंद्रिका भी अब मेरा साथ देने लगी और मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी और हम दोनों एक दूसरे की जीभें चूसने लगे। फिर मैं अपना हाथ उसके पेट से उसके मम्मों पर ले गया और नाइटी के ऊपर से सहलाने लगा। उसके मम्मों को सहलाते हुए मैं बोला, “ चंद्रिका जी, मम्मे तो बहुत बड़े-बड़े हैं और कठोर भी हैं!”
वो कुछ नहीं बोली। कुछ देर तक मम्मे सहलाने के बाद मैंने उसकी नाइटी के हुक खोल दिये और फ़िर से उसके होंठों को चूमने लगा और फिर उसके बोब्बों को दबाने और सहलाने लगा। मेरी उंगलियाँ छूते ही उसके निप्पल खड़े हो गये। इतने में मैंने महसूस किया कि खुशबू चाची मेरा बरमूडा मेरी टाँगों से नीचे खिसका रही है। फिर उन्होंने मेरा अंडरवीयर और टी-शर्ट भी उतार दी। मैंने भी चंद्रिका की नाइटी और ब्रा और पैंटी उसके जिस्म से अलग कर दी। खुशबू चाची तो पहले ही कब नंगी हो गयी थीं मुझे पता ही नहीं चला।
अब मैं बिल्कुल नंगा दो नंगी हसिनाओं के साथ एक ही बिस्तार पर मौजूद था। खुशबू चाची ने चॉकलेट रंग के पेंसिल हील के सैंडल पहने हुए थे और उनकी ननद चंद्रिका ने सफेद रंग के ऊँची हील के सैंडल। दोनों का नंगा हुस्न देखकर मैं तो पागल हो गया।
चंद्रिका को लिटा कर मैं उसकी चूत को सहलाने लगा और चूत में दो उंगलियाँ भी डाल दी। इतने में खुशबु चाची मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी। मैंने भी झुककर चंद्रिका की चूत पर अपने होंठ लगा दिये और उसकी चूत में जीभ डालकर चूसने लगा। चंद्रिका के होंठों से मस्ती में खुलकर सिसकरियाँ निकल रही थी और और वो टाँगें फैलाये हुए बिस्तर की चादर अपनी मुठियों में भींच रही थी।
खुशबू चाची के चूसने से मेरा लंड पत्थर की तरह सख्त हो गया था और चंद्रिका भी काफी गरम हो चुकी थी। वो अब बिल्कुल बेशरम होकर मस्ती में बोली, “ गोलू ऽऽ अब बर्दाश्ट नहीं हो रहा... प्लीज़ चोदो मुझे...!”
खुशबू चाची ने मेरे लंड अपने मुँह में से निकाला और बोली, “हाँ गोलू... अब चोद दो मेरी बहन को... देखो कैसे सब शर्म-ओ-हया छोड़कर चोदने के लिये गुज़ारिश कर रही है!”
मैं चंद्रिका के ऊपर आ गया और खुशबू चाची ने मेरा लंड को अपनी उंगलियों में पकड़कर अपनी बहन की चूत के मुहाने रख दिया। मेरे लंड के गरम सुपाड़े को अपनी चूत पर महसूस करके चंद्रिका और भी तड़प कर सिसक उठी। मेरे लंड को चंद्रिका की चूत पर दबाते हुए खुशबू चाची बोली, “फक इट अप गोलू ... पूरा लौड़ा अंदर तक...!”
मैंने एक जोर का धक्का मारा तो आधा लंड चंद्रिका की चूत में घुस गया। दर्द की वजह से चंद्रिका ज़ोर से चिल्लायी, “ऊऊऊईईईईई आआआहहह मेरे अल्लाह.... मरऽऽऽ गयीऽऽऽ!” अपनी बहन को दर्द से बेहाल होकर तड़पते देख खुशबू चाची चंद्रिका के पास जाकर उसके होंठों को चूमने लगी और उसके मम्मों को दबाने लगी। चंद्रिका की चींखें कुछ कम हुई तो मैंने फिर कसकर एक धक्का मारा तो पूरा लंड उसकी चूत में समा गया। चंद्रिका की चूत की कसी-कसी और गरम-गरम दीवारें मेरे लंड को जकड़े हुए थी।
चंद्रिका की तो फिर से चींख निकाल पड़ी और वो अपने सिर को इधर-उधर पटकते हुए चिल्लायी, “याऽऽ अल्लाहऽऽऽ... मेरे मालिक... इस जालिम लंड ने तो मेरी जान ही निकाल डाली... आआआईईईऽऽऽ!”
मैं कुछ देर उसकी चूत में पूरा लंड घुसाये पड़ा रहा और कुछ भी हर्कत नहीं की। खुशबू चाची अब भी अपनी बहन के मुँह में जीभ डालकर उसके होंठ चूम रही थी। जब चंद्रिका नॉर्मल हुई तो मैं अपने चूतड़ हिला कर धीरे-धीरे चोदने लगा। खुशबू चाची अब उसे चूमना छोड़कर चंद्रिका के बगल में लेटी हुई अपने हाथ से उसकी चूचियाँ और पेट पर सहला रही थी। चंद्रिका मस्ती में ज़ोर-ज़ोर से सिसकते हुए “आहह ऊँहह आँआँहह” कर रही थी। अपनी टाँगें उठा कर चंद्रिका ने मेरे पीछे कमर पर कैंची की तरह कस दीं और अपनी बाँहें मेरी बगलों में से मेरे कंधों पर कस दीं। “हाँ...ओहह मेरा खुदा... सो गुड... ओह डू इट... चोदो...!” बड़बड़ाते हुए चंद्रिका भी मेरे धक्कों के साथ-साथ अपने चूतड़ ऊपर उछालने की पूरी कोशिश कर रही थी।
थोड़ी ही देर में मैंने महसूस किया की खुशबू चाची अब मेरे पीछे थीं और मेरे चूतड़ों पर हाठ फिरा रही थीं। मैं भी लंबे-लंबे धक्के मारता हुआ अपना लंड चंद्रिका की चूत में अंदर-बाहर चोद रहा था। “ओहह गोलू... आँहहा... अल्लाह... मैं... मैं... गयी... आआहहह!” चंद्रिका ज़ोर से चींखी और अपनी टाँगें बहुत ज़ोर से मेरी कमर पर कस दीं और अपनी उंगलियों के नाखुन मेरे कंधों में गड़ा दिये। उसका बदन अकड़ गया और चंद्रिका की चूत ने मेरे लंड पर पानी छोड़ दिया।
मैंने चोदना नहीं रोका और अब मैं और भी लंबे-लंबे धक्के मारते हुए चोदने लगा। पूरा लंड बाहर खींच कर एक झटके में चंद्रिका की चूत में घुसेड़ने लगा। चंद्रिका भी फिर से मस्ती में आ गयी और नीचे से अपने चूतड़ उछालने लगी। थोड़ी ही देर में धक्कों की रफ़्तार और बढ़ने लगी। कमरे में चंद्रिका की “ऊँहहह आँहह” गूँज रही थी और उधर खुशबू चाची भी हमें जोश दिला रही थीं, “फक हर गोलू... और ज़ोर से चोद कुत्तिया को...!”
करीब पंद्रह-बीस मिनटों की चुदाई के बाद मैं ज़ोर से चंद्रिका से लिपट गया और उसने भी मुझे ज़ोर से जकड़ लिया। हम दोनों ही झड़ने के कगार पर थे। पहले चंद्रिका झड़ते हुए ज़ोरे से चींखी और मैंने भी पूरी ताकत से अपना लंड चंद्रिका की चूत में अंदर तक ठाँस दिया। मेरी लंड की गोटियाँ भी चंद्रिका के चूतड़ों के बीच की दरार में धंसी गयीं। अगले ही पल मेरा लंड उसकी चूत की गहरायी में पाँच-सात पिचकारियाँ मार कर झड़ गया। कुछ देर तक हम दोनों ऐसे ही लिपटे रहे। फिर जब मैंने आधा मुर्झाया हुआ लंड बाहर निकाला तो देखा उसकी चूत से वीर्य की धार बह रही थी। खुशबू चाची ने लपककर अपनी जीभ चंद्रिका की चूत पर लगा दी और उसमें से बहता हुआ मेरा वीर्य चाटने लगी। मेरा लंड भी खुशबू चाची ने चूसकर साफ किया और फिर उन्होंने चंद्रिका से पूछा, “आया ना मज़ा?”
चंद्रिका सिसकते हुए बोली, “या अल्लाह! इतने सालों से क्यों मैंने खुद को इतने मज़े से महरूम रखा?”
फिर मैंने खुशबू चाची को भी चोदा। चंद्रिका भी खुशबू चाची की तरह ही चुदासी निकली। चंद्रिका जितने दिन कोलकाता रही हम तीनों रात को एक ही बिस्तर में सोते और रोज-रोज मैं उन दोनों बहनों को चोदता। दोनों चुदक्कड़ बहनों ने मुझे चुदाई की मशीन बना कर रख दिया और दोनों मिलकर मेरा लंड निचोड़ कर रख देतीं थीं। कईं दफा तो दोनों नशे धुत्त होकर में मेरे लौड़े के लिये आपस में बिल्लियों की तरह लड़ने और गाली-गलौच तक करने लगती थीं।
चंद्रिका के जाने के बाद मैं भी अपने घर वापस आ गया लेकिन हर रात में खुशबु चाची और चंद्रिका चाची को याद करके और लंड को उसकी याद में हिलाया करता था ।


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