11-01-2026, 07:14 AM
(This post was last modified: 11-01-2026, 07:17 AM by Dhamakaindia108. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
हमारी आश्चर्यचकित चंद्रिका जैसे अचानक कीया और भागकर हवेली में बात कर गए और हम अपनी चुदाई जारी रखते हैं और शाम तक ऐश करते रहते हैं। इस दौरान चंद्रिका कक्ष अपने से कुछ नहीं। फिर बाद में हम दोनों मेरे कमरे में प्रतियोगी ही सो गये।
अगले दिन सुबह जब हम उठे तो मीठी-मीठी बोली कि वो चंद्रिका को समझाती है। फिर हम तीन अपना-अपना काम, निकल गये। उस दिन मुझे परीक्षा केंद्र पर देर तक रुकना पड़ा। शाम को जब चटनी-चाची और चंद्रिका अकेले थे तो चटनी-चाची और चंद्रिका के साथ एक-एक पैग पीने गए। तब चंद्रिका ने चटनी-चाटी से कहा, " बहना। मुझे माफ कर देना, मैं अंजन में जल्दी आ गई थी... मुझे बिल्कुल नहीं था कि तुम वो...!"
फुसफुसाते हुए बीच में ही बोली, "देखो, चंद्रिका! सैक्स केस में मैं बिल्कुल ओपन प्रॉसैट की हूं। बाउंसी-चुदवाने में मैं शर्म-हया नहीं रचती। मेरा मन करता है तो किसी भी तरह की मर्दाना लड़की हो सकती है! लेकिन मैं किसी ऐरे-गैरे के साथ चुदाई नहीं करती!"
चंद्रिका बोली, "गोलू कैसा है? आप रोज़-रोज़...!"
चटनी ने तपाक से कहा, "नहीं! रोज़-रोज़ नहीं! जब तक वह परीक्षा देती है तब तक लेकिन गोलू मुझे रोज़ चोदता है और वो भी कई दफ़ा। क्या तू बताए कि तू ज़िंदा है या थकी हुई ज़िंदगी गुज़ार रही है?
चंद्रिका बोली, "नहीं दीदी! सुजीत को दो साल हो गए... तब से बस ऐसे ही... दिल तो बहुत करता है... पर मिठाई नहीं हुई कभी... जब कभी दिल ज्यादा ही मचलता है तो... यू नो.. केला या बैंगन वैगरह डाल कर अपनी प्यास लगती है!"
यूसुफ़ चाची बोलीं, "छोड़ो ये बेकार की बातें! कब तक समाज की बेकारी की पाबंदियों से दर-दर की जवानी टूटती रहेगी... बस मुझे साफ़-साफ़ बताओ...जुहाना है गोलू से?"
"दिल तो करता है मगर..." चन्द्रिका ने हँसी-चाटी कहते हुए कहा, "ये अगर मगर कुछ नहीं... बस यही वरना नहीं...!" चंद्रिका ने सिर हिलाकर हां कह दिया।
उस दिन मैं परीक्षा केंद्र से काफी लेट आया था। रात को सैटेलाइट वक्ता चंद्रिका की बातें जो मुझे भावुक कर गईं। मैं तो खुद चंद्रिका को झटका देने के लिए बेकरार था। अगले दिन शाम को परीक्षा केंद्र से आने के बाद मैं मीठी चाय के साथ बैठकर शराब पी रहा था तो उन्होंने चंद्रिका को भी कंपनी में ऑफर के लिए बुलाया। चन्द्रिका आई तो मैं उसके हुस्न को देख ही रहा था।
जब से चंद्रिका कोलकाता आई है तो मैंने उसे हमेशा के लिए समकक्ष और कुर्ता-टॉप में ही देखा था। आज शायद पेटेंट चाची की सलाह से वह प्लास्टिक गुलाबी रंग की पेंटिंग सी स्क्रिमलेस नाइटी उसकी स्कॉलर हुई थी जिसमें से बेपनाह हुस्न चाक रह रहा था। साइंटिस्ट पे लाल बैलाक और गालों पे पिंक रूज और स्टाक में सफेद रंग के हाईली पेंसिल हील के कातिलाना सैंडल पहने हुए थे। चंद्रिका भी हमारे साथ शराब पीने लगी लेकिन चंद्रिका मेरी नजर नहीं मिली रही थी। मैं और मीठी-मीठी बातें कर रहे थे और चंद्रिका मित्र अपना पैग पी रही थीं। हमें दो-दो पग खतम मिले तो चंद्रिका के भाव से साफ था कि उन्हें आदर्श उदासीनता का एहसास हुआ। सौतेली चाची ने जानबूझ कर चंद्रिका के लिए तगड़े पैग बनाए थे। अब चंद्रिका हमारी बातें पे फ़्रैंक खिलखिलाते हुए हंस रही थीं। मुझे भी पिक्चर सुरूर था और खुद कोमल चाय भी नशे में यम रही थी। कातिलाना मार्शलहाट के साथ उन्होंने मुझसे आंख मार कर कहा तो मैंने बेशरम से पूछा, "क्या खतरनाक है चंद्रिका चाची? पसंद आया तुम्हें मेरा लंड? कल तो तुम शर्मा कर अंदर ही भाग गई हो!"
चंद्रिका ने शर्मा कर कहा, अपनी बहन की तरफ देखा तो मीठी-मीठी बातें करते हुए बोलीं, "हाय, देखो कैसी शर्मा रही है...! अरे शर्म हया छोड़ो... नहीं तो बस केले-बैंगन से काम चलाती रहती दोस्त जिंदगी... सच में गोलू! चंद्रिका तो बेकरार है दोनों लंड लेने के लिए!"
"हाँ गोलू! दो साल से अपनी आँखों से दबा रखा था... अब और नहीं हुआ... बहन की तरह प्लीज़ मेरी प्यास भी दो!" चंद्रिका ज़रा खुलते हुए बोली।
मैंने बोला, “क्यों शर्म कर रही हो मुझसे, बेकरार तो मैं इतने दिनों से हूं खूबसूरत हसीना को बकौल के लिए!”
ये रिपोर्ट ही चंद्रिका के गालों पर लाली आ गई। हमने एक-एक पैग और पिया तो फुल चाटी ने अपनी एसयूवी में चलने का संकेत दिया। मैं स्टालिन में नारियल की चटनी के साथ जबरदस्ती कमरे में गया और दो मिनट के बाद वो दोनों भी सैंडल खटखटी हुई नशे में झूमती कमरे में आ गए। नशे में होने की वजह से चंद्रिका की चाल में लड़की का चेहरा साफ नजर आ रहा था।
दोनों बिस्तर पर बैठ गए। मैं ज्वालामुखी चंद्रिका के पास आया और उसके गालों को छूने लगा। नशे की मस्ती के बावजूद भी वह बहुत शर्मा आ रही थी। मैं अपने पैर को लंबा करके पलंग बैठाया और चंद्रिका को गोद में खींच लिया और उसके चेहरे पर कुदाल कर उसके शरीर को अपनी गोद में ले लिया। फिर मैंने जीभ से उसकी मूठ चाटी और जीभ मुंह में बोलने का प्रयास किया लेकिन उसने मुंह नहीं खोला। “क्या हुआ चंद्रिका चाची? आपको अच्छा नहीं लग रहा क्या?” मैंने पूछा।
![[Image: Snap-Insta-to-591160014-1854820956103535...092259.jpg]](https://i.ibb.co/BKzsXpQd/Snap-Insta-to-591160014-18548209561035358-8584900739568939169-n-1-092259.jpg)
अगले दिन सुबह जब हम उठे तो मीठी-मीठी बोली कि वो चंद्रिका को समझाती है। फिर हम तीन अपना-अपना काम, निकल गये। उस दिन मुझे परीक्षा केंद्र पर देर तक रुकना पड़ा। शाम को जब चटनी-चाची और चंद्रिका अकेले थे तो चटनी-चाची और चंद्रिका के साथ एक-एक पैग पीने गए। तब चंद्रिका ने चटनी-चाटी से कहा, " बहना। मुझे माफ कर देना, मैं अंजन में जल्दी आ गई थी... मुझे बिल्कुल नहीं था कि तुम वो...!"
फुसफुसाते हुए बीच में ही बोली, "देखो, चंद्रिका! सैक्स केस में मैं बिल्कुल ओपन प्रॉसैट की हूं। बाउंसी-चुदवाने में मैं शर्म-हया नहीं रचती। मेरा मन करता है तो किसी भी तरह की मर्दाना लड़की हो सकती है! लेकिन मैं किसी ऐरे-गैरे के साथ चुदाई नहीं करती!"
चंद्रिका बोली, "गोलू कैसा है? आप रोज़-रोज़...!"
चटनी ने तपाक से कहा, "नहीं! रोज़-रोज़ नहीं! जब तक वह परीक्षा देती है तब तक लेकिन गोलू मुझे रोज़ चोदता है और वो भी कई दफ़ा। क्या तू बताए कि तू ज़िंदा है या थकी हुई ज़िंदगी गुज़ार रही है?
चंद्रिका बोली, "नहीं दीदी! सुजीत को दो साल हो गए... तब से बस ऐसे ही... दिल तो बहुत करता है... पर मिठाई नहीं हुई कभी... जब कभी दिल ज्यादा ही मचलता है तो... यू नो.. केला या बैंगन वैगरह डाल कर अपनी प्यास लगती है!"
यूसुफ़ चाची बोलीं, "छोड़ो ये बेकार की बातें! कब तक समाज की बेकारी की पाबंदियों से दर-दर की जवानी टूटती रहेगी... बस मुझे साफ़-साफ़ बताओ...जुहाना है गोलू से?"
"दिल तो करता है मगर..." चन्द्रिका ने हँसी-चाटी कहते हुए कहा, "ये अगर मगर कुछ नहीं... बस यही वरना नहीं...!" चंद्रिका ने सिर हिलाकर हां कह दिया।
उस दिन मैं परीक्षा केंद्र से काफी लेट आया था। रात को सैटेलाइट वक्ता चंद्रिका की बातें जो मुझे भावुक कर गईं। मैं तो खुद चंद्रिका को झटका देने के लिए बेकरार था। अगले दिन शाम को परीक्षा केंद्र से आने के बाद मैं मीठी चाय के साथ बैठकर शराब पी रहा था तो उन्होंने चंद्रिका को भी कंपनी में ऑफर के लिए बुलाया। चन्द्रिका आई तो मैं उसके हुस्न को देख ही रहा था।
जब से चंद्रिका कोलकाता आई है तो मैंने उसे हमेशा के लिए समकक्ष और कुर्ता-टॉप में ही देखा था। आज शायद पेटेंट चाची की सलाह से वह प्लास्टिक गुलाबी रंग की पेंटिंग सी स्क्रिमलेस नाइटी उसकी स्कॉलर हुई थी जिसमें से बेपनाह हुस्न चाक रह रहा था। साइंटिस्ट पे लाल बैलाक और गालों पे पिंक रूज और स्टाक में सफेद रंग के हाईली पेंसिल हील के कातिलाना सैंडल पहने हुए थे। चंद्रिका भी हमारे साथ शराब पीने लगी लेकिन चंद्रिका मेरी नजर नहीं मिली रही थी। मैं और मीठी-मीठी बातें कर रहे थे और चंद्रिका मित्र अपना पैग पी रही थीं। हमें दो-दो पग खतम मिले तो चंद्रिका के भाव से साफ था कि उन्हें आदर्श उदासीनता का एहसास हुआ। सौतेली चाची ने जानबूझ कर चंद्रिका के लिए तगड़े पैग बनाए थे। अब चंद्रिका हमारी बातें पे फ़्रैंक खिलखिलाते हुए हंस रही थीं। मुझे भी पिक्चर सुरूर था और खुद कोमल चाय भी नशे में यम रही थी। कातिलाना मार्शलहाट के साथ उन्होंने मुझसे आंख मार कर कहा तो मैंने बेशरम से पूछा, "क्या खतरनाक है चंद्रिका चाची? पसंद आया तुम्हें मेरा लंड? कल तो तुम शर्मा कर अंदर ही भाग गई हो!"
चंद्रिका ने शर्मा कर कहा, अपनी बहन की तरफ देखा तो मीठी-मीठी बातें करते हुए बोलीं, "हाय, देखो कैसी शर्मा रही है...! अरे शर्म हया छोड़ो... नहीं तो बस केले-बैंगन से काम चलाती रहती दोस्त जिंदगी... सच में गोलू! चंद्रिका तो बेकरार है दोनों लंड लेने के लिए!"
"हाँ गोलू! दो साल से अपनी आँखों से दबा रखा था... अब और नहीं हुआ... बहन की तरह प्लीज़ मेरी प्यास भी दो!" चंद्रिका ज़रा खुलते हुए बोली।
मैंने बोला, “क्यों शर्म कर रही हो मुझसे, बेकरार तो मैं इतने दिनों से हूं खूबसूरत हसीना को बकौल के लिए!”
ये रिपोर्ट ही चंद्रिका के गालों पर लाली आ गई। हमने एक-एक पैग और पिया तो फुल चाटी ने अपनी एसयूवी में चलने का संकेत दिया। मैं स्टालिन में नारियल की चटनी के साथ जबरदस्ती कमरे में गया और दो मिनट के बाद वो दोनों भी सैंडल खटखटी हुई नशे में झूमती कमरे में आ गए। नशे में होने की वजह से चंद्रिका की चाल में लड़की का चेहरा साफ नजर आ रहा था।
दोनों बिस्तर पर बैठ गए। मैं ज्वालामुखी चंद्रिका के पास आया और उसके गालों को छूने लगा। नशे की मस्ती के बावजूद भी वह बहुत शर्मा आ रही थी। मैं अपने पैर को लंबा करके पलंग बैठाया और चंद्रिका को गोद में खींच लिया और उसके चेहरे पर कुदाल कर उसके शरीर को अपनी गोद में ले लिया। फिर मैंने जीभ से उसकी मूठ चाटी और जीभ मुंह में बोलने का प्रयास किया लेकिन उसने मुंह नहीं खोला। “क्या हुआ चंद्रिका चाची? आपको अच्छा नहीं लग रहा क्या?” मैंने पूछा।
![[Image: Snap-Insta-to-591160014-1854820956103535...092259.jpg]](https://i.ibb.co/BKzsXpQd/Snap-Insta-to-591160014-18548209561035358-8584900739568939169-n-1-092259.jpg)


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