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Adultery अनीता सिंह -- किरदार निभाना (Role Play)
मास्टर बेडरूम जारी
 
अनीता की उत्तेजना अब सातवें आसमान पर थी। राज ने अनीता के एक तने हुए निप्पल को अपने मुँह में खींचकर किसी भूखे जानवर की तरह चूसना शुरू किया ही था कि अनीता का पूरा शरीर कांप उठा। उसने राज के बालों को अपनी मुट्ठियों में जकड़ लिया और उसका सिर अपनी छाती के पर और भी जोर से भींच दिया।
 
अनीता: (हाफते हुए और तीखी सिसकारी भरते हुए) "आह्ह... करीम! उह्ह... जल्दी करो! और जल्दी... तुम्हारे मालिक राज कभी भी दफ्तर से आते होंगे। अगर उन्होंने हमें इस हाल में देख लिया ना... तो अनर्थ हो जाएगा करीम! वो तुम्हें जान से मार देंगे!"
 
अनीता की आवाज़ में डर का नाटक था, पर हवस का समंदर उफान पर था।
 
राज, जो अब पूरी तरह करीम के किरदार में डूब चुका था, ने अनीता की बात सुनकर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली। उसने अपना चेहरा ऊपर उठाया, उसकी आँखों में वासना की लाली थी और होंठ अनीता के दूधिया बदन के रस से भीगे हुए थे।
 
राज (करीम के लहजे में): "अरे मालकिन, ई करीम तो कब से अपनी जान हथेली पे लेके घूम रहा है। आपको पाने के लिए तो ई जान भी हाजिर है... अउर अगर मालिक देख भी लेंगे, तो ई सुख भोगते हुए मरना मंजूर है हमें। हाय दैया! का चीज़ बनाई है भगवान ने... का मस्त अउर कड़े चूचे हैं आपके! मन करता है बस इन्हें ऐसे ही चूसता रहूँ... सारा जनम इन्हीं के बीच गुज़ार दूँ।"
 
यह कहते हुए उसने फिर से अपनी जीभ अनीता के उभरे हुए निप्पल पर फेरी।
 
अनीता ने अपनी आँखें मूंद लीं। करीम की यह गंदी और देहाती बातें उसके कानों में पिघले हुए सीसे की तरह उतर रही थीं, जो उसकी कामेच्छा को और भड़का रही थीं।
 
अनीता: "देर मत करो... जल्दी से अपनी मालकिन की प्यास बुझाओ और यह सारा रस पी जाओ... आह्ह, आज निचोड़ लो मुझे करीम!"
 
राज ने उसके निप्पल को अपने दाँतों के बीच हल्का सा दबाया, जिससे अनीता के मुँह से एक चीख निकल गई। उसने अपना चेहरा थोड़ा पीछे हटाया, उसकी साँसें अनीता के गीले मांस पर लग रही थीं।
 
राज (करीम के लहजे में): "अरे अनीता बिटिया... ई जल्दी-जल्दी का क्या रट लगा रखी है? आज जल्दी का कौनों काम नहीं है। आज ई करीम सब कुछ एकदम आराम-आराम से करेगा, चख-चख के... चाहे इसके लिए हमारी जान ही काहे न चली जाए। मालिक आवें या मौत आवे, आज हम आपकी ई देह को पूरा पूज के रहेंगे।"
 
अनीता उसकी आँखों में देखते हुए हाँफ रही थी। राज के हाथों ने अब उसके वक्षों को छोड़कर नीचे की ओर रेंगना शुरू किया। उसकी उंगलियाँ अनीता की त्वचा पर रेंगती हुई उसकी कमर और पेट के पास पहुँच गईं।
 
राज (करीम): "अनीता बिटिया, जब आप साड़ी पहन के में घूमती हो ना... तो ई आपकी नंगी मखमली कमर अउर ई गहरा धुन्नी देख के हमारा ईमान डोल जाता है। जी करता है कि अपना सारा होश खो दूँ और इसे बस चाटता रहूँ... दिन-रात बस इसी खजाने में मुँह गड़ाए रहूँ।"
 
यह कहते ही राज ने अपनी जगह बदली और अनीता के उभरे हुए पेट पर झुक गया। उसने अपनी जीभ बाहर निकाली और अनीता की नाभि के चारों ओर एक गीला घेरा बनाना शुरू किया।
 
अनीता: "ओह्ह... करीम! उह्ह... वहाँ नहीं... आह्ह, क्या कर रहे हो! सिसss... कितना गीला लग रहा है!"
 
राज ने उसकी बात अनसुनी कर दी और अपनी जीभ को अनीता की गहरी नाभि के भीतर डाल दिया। वह किसी प्यासे जानवर की तरह उसकी नाभि को चाट रहा था, जैसे वहां कोई अमृत छुपा हो।
राज (करीम): (मदहोशी में बुदबुदाते हुए) "का गजब खुशबू है आपकी मालकिन... ई नाभि है कि शहद का कुआँ? आज तो ई करीम इसी गड्ढे में डूब के मर जाएगा। देखिये तो, कैसे मखमल जैसी चिकनी देह है आपकी..."
 
अनीता का हाथ अब राज के सिर पर था, वह कभी उसके बालों को खींचती तो कभी उसके सिर को अपने पेट पर और जोर से दबाती। राज की जीभ के लंबे और गीले स्पर्श उसके पेट की कोमल त्वचा पर बिजली दौड़ा रहे थे। जब राज ने अपनी नाक उसकी नाभि में रगड़ी, तो अनीता का पूरा शरीर धनुष की तरह ऊपर को उठ गया।
 
अनीता: "आह्ह करीम... तुम... तुम बहुत गंदे हो! उह्ह... पर कितना सुख दे रहे हो... तुम्हारी ई देहाती बातें मुझे पागल कर रही हैं... आह्ह, चाटो उसे... और अंदर तक... !"
 
राज की उंगलियाँ अब अनीता की कमर के किनारों को मजबूती से भींच रही थीं, जिससे उसके गोरे मांस पर उँगलियों के गहरे निशान पड़ रहे थे। वह अपनी जीभ से अनीता के पूरे पेट पर कामुक कलाकारी कर रहा था, और उसकी हर चाट पर अनीता की सिसकारियां कमरे की खामोशी को चीर रही थीं।
 


दरवाजे के बाहर: असली करीम पसीने से लथपथ हो चुका था। वह विशालकाय आदमी दरवाजे के सहारे टिका हुआ था और उसके पैर कांप रहे थे। वह अपनी आँखों देखी पर यकीन नहीं कर पा रहा था।
 
करीम: (दबी जुबान में और कांपते हुए) "अरे मोर मैया! मेमसाब तो हमें एकदम सचमुच का अपना यार बना ली हैं। 'जल्दी करो करीम... मालिक आ जाएंगे करीम'... उई माँ! जे सुन के तो हमरा कलेजा फटा जा रहा है। साहब तो मेमसाब की छातियों को ऐसे चूस रहे हैं जैसे कोई सदियों का भूखा बछड़ा हो।"
 
तभी उसने देखा कि राज (जो करीम बना हुआ था) अनीता के पेट और नाभि की ओर बढ़ा। करीम की साँसें जैसे रुक ही गईं। अनीता का वह गोरा, सपाट और मखमली पेट, जिसे करीम अक्सर छुप-छुप कर साड़ी के पल्लू के सरकने पर निहारा करता था, अब उसके मालिक के मुँह के नीचे था।
करीम: (हाँफते हुए, अपनी लुंगी के ऊपर से ही खुद को सहलाते हुए) "मेमसाब... कसम से अगर हम भीतर होते, तो सचमुच का दूध निकाल लेते आज! आपकी ई पुकार साला हमरा खून खौला रही है। अउर ई पेट... उफ़! साला हम तो सपना में सोचते थे कि ई जो सोने जैसी नाभि है, उसमें एक बार अपनी उँगली डाल दें... पर यहाँ तो साहब अपनी जीभ से मेमसाब का पूरा पेट चाट-चाट के तर कर रहे हैं। देखो तो कैसे कुलबुला रही हैं मेमसाब... जैसे नागिन की पूंछ पे पैर पड़ गया हो!"
 
अंदर से आती अनीता की सिसकारियां करीम के कानों में उतर रही थीं। जब उसने देखा कि राज अनीता की नाभि में अपनी नाक रगड़ रहा है, तो करीम का हाथ अपनी लुंगी पर और तेजी से चलने लगा।
 
करीम: "अरे बाप रे... साला ई धुन्नी है कि स्वर्ग का दरवाजा! मेमसाब तो एकदम पागल भई जा रही हैं। अगर आज हम अंदर होते, तो ई मखमली पेट पे अपनी पूरी मर्दानगी न्योछावर कर देते। मेमसाब, आज तो आपने इस गरीब नौकर को जीते-जी नर्क अउर स्वर्ग दोनों दिखा दिया... आपकी ई पुकार और ई कांपता हुआ बदन... हमसे अब और बर्दाश्त ना होत है!"
 
करीम की नज़रें उस दरार से अनीता के अधनंगे बदन पर जमी थीं। वह लंबी सुंदरी जो सिर्फ एक नीली पैंटी में खड़ी अपने नौकर का नाम ले रही थी, करीम के लिए किसी अफीम के नशे की तरह थी। उसका अपना अंग अब उसकी लुंगी को फाड़ने के लिए बेताब था।
 


 
अनीता के मखमली पेट और नाभि की पूजा करने के बाद उसकी नज़रें नीचे की ओर उतरीं, जहाँ एक महीन नीली रेशमी पैंटी अनीता की कामुकता को ढकने की नाकाम कोशिश कर रही थी। वह पैंटी अनीता की उत्तेजना के रस से पूरी तरह भीग चुकी थी और उसके गोरे बदन पर चिपक गई थी।
 
राज के हाथ अब अनीता की गदरायी हुई गाँड पर जा टिके। उसने अपनी उंगलियों से उन मांसल नितम्बों को बेरहमी से भींचा, जिससे अनीता के मुँह से एक तीखी आह निकल गई।
 
राज (करीम के लहजे में): "मालकिन, आज जे नीला पर्दा भी नहीं रहेगा... बहुत छुपा लिया आपने खुद को। आज साहब के आने से पहले हमें सब कुछ देख लेने दीजिये... आपकी इस जवानी का एक-एक कोना निहार लेने दीजिये! ई आपकी भारी गाँड और ई भीगी हुई पैंटी... साला हमरा धीरज जवाब दे रहा है।"
 
अनीता: (उत्तेजना में हाँफते हुए) "आह... करीम! ये तुम क्या कह रहे हो? तुम पागल हो गए हो... उह्ह... मेरी पैंटी... राज देख लेंगे तो क्या होगा? वो मुझे छोड़ेंगे नहीं... रुक जाओ करीम!"
 
अनीता का विरोध राज को और भी हिंसक बना रहा था। राज ने अपने दोनों मजबूत हाथों से उसकी नीली रेशमी पैंटी के किनारों को पकड़ा।
 
राज: "आज कोई नहीं बचेगा मालकिन... आज तो हम अपनी सीमा पार करेंगे! अपनी अनीता बिटिया को आज हम एकदम कुंवारी कली की तरह उघाड़ के दम लेंगे।"
 
राज ने अपने हाथों में पूरी ताकत भरी और एक ही झटके में पैंटी को बीच से चीर दिया। कमरे में 'चर्ररर' की आवाज़ गूँजी। नीले रेशम के दो टुकड़े होकर अलग जा गिरे।
 
बाहर खड़ा असली करीम यह नज़ारा देख काँप उठा। उसकी आँखों के सामने उसकी मालकिन अब पूरी तरह नग्न थी। उसने देखा कि कैसे फटी हुई पैंटी के वे नीले टुकड़े बिस्तर के पास बेजान गिरे थे। करीम का मन चीख-चीख कर कह रहा था कि काश वो हाथ उसके होते जिसने उस रेशमी कपड़े को अनीता के बदन से अलग किया था। वह अपनी लुंगी के अंदर हाथ डालकर पागलों की तरह खुद को सहलाने लगा।
 
अनीता: (बेपनाह मजे और उत्तेजना में चीखते हुए) "आह्ह्ह! करीम... तुमने तो इसे फाड़ ही दिया... उह्ह... तुम कितने बदतमीज़ नौकर हो! अपनी अनीता बिटिया की पैंटी फाड़ डाली... देखो, अब मैं तुम्हारे सामने पूरी नंगी हूँ... सब देख लो करीम... जो देखना है देख लो! अब तो कुछ नहीं बचा!"
 
राज ने अनीता की लंबी और चिकनी टांगों को पकड़कर पूरी तरह फैला दिया। अब अनीता की पूरी नग्नता, उसकी गोरी जाँघों के बीच के वे गुलाबी होंठ राज और बाहर खड़े करीम दोनों की नज़रों के सामने थे। वह हिस्सा उत्तेजना से पूरी तरह गीला होकर चमक रहा था।
 
राज (करीम): (अनीता की जाँघों के अंदरूनी हिस्से पर अपनी उँगलियाँ फेरते हुए) "मालकिन, आपकी यह जगह कितनी स्मूथ और साफ़ है... हमने कभी सोचा भी नहीं था कि आपकी इस गुफा का नज़ारा इतना खूबसूरत होगा। हाय दैया! ई तो एकदम गुलाब की पंखुड़ी जैसा है। आज तो करीम इस जगह का सारा शहद पी जाएगा... एक बूंद भी नहीं छोड़ेगा!"
 
अनीता: (सिसकते हुए और राज के सिर को अपनी जाँघों के बीच नीचे की ओर धकेलते हुए) "आह्ह... करीम! उह्ह... अब बातें मत करो, ... अपनी जुबान से अपनी मालकिन की प्यास बुझाओ करीम! चाट लो मुझे... पूरी तरह से!"
 
राज ने अब और इंतज़ार नहीं किया। उसने अपना चेहरा अनीता की टांगों के बीच गड़ा दिया और अपनी जीभ की नोक से उसके उस नाजुक और गुलाबी हिस्से को सहलाना शुरू किया। जैसे ही उसकी गर्म जीभ ने अनीता के काम-बिंदु को छुआ, अनीता का बदन तन गया और उसके मुँह से एक ऐसी चीख निकली जिसने बाहर खड़े करीम का खून खौला दिया।
 
राज की जीभ अब पूरी रफ्तार से अनीता की गहराई को चाट रही थी, वह 'करीम' बनकर अपनी मालकिन के बदन का सारा रस सोख लेना चाहता था। अनीता की टांगे राज के कंधों पर कसी हुई थीं और वह मदहोशी में अपना सिर इधर-उधर पटक रही थी।
 
अनीता: (चीखते हुए और सिसकारियां भरते हुए) "उह्ह... करीम... आह्ह... और तेज़ करीम! अपनी जुबान से मुझे पागल कर दो। आज अपनी मालकिन को तड़पाना छोड़ दो... ज़ोर से चाट करीम... और ज़ोर से! आज सारा रस पी जा!"
 
 
बाहर खड़ा करीम यह देख कर सुध-बुध खो बैठा। उसे ऐसा लग रहा था कि उसकी अपनी जुबान अनीता के उस मखमली हिस्से पर चल रही है।
 
 
करीम: (पागलपन में बुदबुदाते हुए) "मेमसाब... आह! कल... कल जब साहब दफ्तर जाएंगे, तब हम आपको बताएंगे कि फाड़ना किसे कहते हैं और चाटना किसे। आज आप साहब को करीम समझ रही हैं, कल असली करीम आपको अपनी असलियत दिखाएगा।"
 
उसका विशाल वजूद काँप रहा था—उत्तेजना, डर और भयंकर जलन का एक ऐसा सैलाब उसके अंदर उमड़ रहा था।
 
अनीता ने अपना कूल्हा ऊपर उठाया और अपनी जांघों से राज के सिर को पूरी ताकत से भींच लिया। उसका शरीर झटके ले रहा था।
 
बेडरूम के भीतर का नज़ारा किसी दहकती भट्टी जैसा है। राज, जो पूरी तरह 'करीम' के रोल में डूबा हुआ है, अनीता की जाँघों के बीच अपना चेहरा गड़ाए हुए उसके बदन के रसों को चख रहा है। कमरे में केवल चाटने और अनीता की सिसकारियों की आवाज़ें गूँज रही हैं।
 
राज: (अनीता के रसों का स्वाद लेते हुए, भारी और दबी आवाज़ में) "उह्ह... मालकिन... जे रस तो बहुत मीठा है। कसम से, आज तो करीम आपको सुखा के ही छोड़ेगा। एक-एक बूँद निचोड़ लेगा!"
 
अनीता ने मदहोशी में राज के सिर को अपनी जाँघों के बीच और ज़ोर से जकड़ लिया है। उसका बदन कमान की तरह तन गया है।
 
अनीता: (हाँफते हुए) "आह्ह... करीम! चाट... और ज़ोर से चाट! अपनी इस प्यासी मालकिन को तृप्त कर दे। आह! सब पी जा करीम!"
 
असली करीम दरवाज़े की दरार से यह सब देख रहा है। पसीने की धार उसके माथे से गिरकर उसकी आँखों में जा रही है, पर वह अपनी नज़रें नहीं हटा पा रहा।
 
करीम: (दबी आवाज़ में, हाँफते हुए) "अरे मोर मैया! मेमसाहब चिल्ला रही हैं 'करीम चाट... जोर से चाट'... जे सुन के तो हमारा लंड फट के बाहर आ जाएगा। ऐसा लग रहा है जैसे मेमसाहब हमें ही अपनी टांगो के बीच दबा के सुख ले रही हों।"
 
राज अब घुटनों के बल अनीता की फैली हुई नंगी गोरी टाँगों के बीच था। उसका पूरा चेहरा अनीता के काम-रसों से भीगा हुआ था और कमरे की मद्धम रोशनी में चमक रहा था। राज की आँखों में एक चमक थी। उसने धीरे से अनीता की कमर पकड़ी और उसे उल्टा घुमा दिया।
 
जैसे ही अनीता पलटी, राज की निगाहें उसकी  गाँड पर टिक गईं। वह इतनी भरी हुई, इतनी चिकनी और बेदाग थी कि राज की साँसें भारी हो गईं। गोरे मांस का वह उभार किसी मखमली पहाड़ की तरह लग रहा था। राज पूरी तरह से करीम के किरदार में डूब चुका था, उसने अपने हाथ अनीता के नितम्बों पर रखे और उन्हें जोर से भींचा।
 
राज (करीम के लहजे में): "अनीता बिटिया... आपकी ई गाँड तो कयामत है! सच कहते हैं, जब भी आप साड़ी पहन के रसोई में आती थीं और ई मटके जैसी गाँड हिलती थी, तो हमरा दिल करता था कि इसे दबोच लूँ... इसे जी भर के चाट जाऊँ। आज तो ई करीम अपनी सारी हसरतें पूरी करेगा।"
 
यह कहते ही राज ने झुककर अनीता के एक कूल्हे पर अपने दाँतों से हल्का सा काटा और फिर अपनी गर्म जीभ उस गोरी त्वचा पर फिराने लगा।
 
अनीता: (सिसकते हुए) "आह्ह... करीम! उह्ह... तेरे को शर्म नहीं आती अपनी बेटी जैसी मालकिन को ऐसा बोलते हुए? आह... तुम बहुत नीच नौकर हो करीम... सिसss... !"
 
दरवाजे के बाहर खड़ा असली करीम अब पागलों जैसी स्थिति में था। वह रसोई में काम करते समय अक्सर अनीता की गाँड को निहारा करता था। कभी-कभी तो करीम जानबूझकर उसके पीछे से गुजरता और हल्का सा अपना हाथ या कोहनी उसके कूल्हों से छुआ देता था। उस एक पल के स्पर्श के लिए वह रात भर जागता था।
आज जब उसने अपने मालिक को वही शब्द बोलते और वही काम करते देखा जो वह अपने सपनों में करता आया था, तो उसका शरीर पसीने से नहा गया।
 
करीम: (हाँफते हुए, अपनी लुंगी के भीतर हाथ डालकर पागलों की तरह खुद को सहलाते हुए) "अरे बाप रे! साहब तो हमारे मन की बात बोल रहे हैं। हम तो रसोई में बस छूने को तरसते थे, और यहाँ तो साहब ने मालकिन को एकदम घोड़ी बना दिया है। देखो तो... कैसे उस गोरे मांस को मसल रहे हैं। मेमसाब भी कैसी रंडी जैसा व्यवहार कर रही हैं... अपने नौकर को खुद ही अपनी देह परोस दी है!"
 
अंदर राज अब अनीता के दोनों नितम्बों को अपने हाथों से फैला चुका था। उसने अपनी जीभ को अनीता की गाँड की दरार में ऊपर से नीचे तक फेरा।
 
राज (करीम): "आज तो ई मलाई का कोना-कोना चखेंगे हम... मालकिन, आपकी ई देह तो किसी अफीम से कम नहीं है।"
 
राज ने अब अपनी 'सेवा' को और भी गहरा करने का फैसला किया
 
राज (करीम के लहजे में): "अनीता बिटिया, अब खड़े-खड़े ई सेवा का आनंद लीजिये। हमें तो ई नज़ारा देख के ऐसा लग रहा है कि जैसे स्वर्ग की अप्सरा हमारे सामने खड़ी हो। ई जो आपकी भारी गाँड हमारे हाथों में कुलबुला रही है ना... कसम खुदा की, आज इसे हम पूरी तरह से लाल कर देंगे।"
 
दरवाजे के बाहर खड़ा असली करीम अब पूरी तरह से हैवानियत की हदें पार कर चुका था। उसकी आँखों के सामने जो नजारा था, वैसा उसने अपनी जिंदगी के सबसे गंदे सपनों में भी नहीं सोचा था। अनीता खड़ी थी, जिससे उसकी विशाल और मखमली गाँड का पूरा नज़ारा सीधे करीम की आँखों के सामने था।
 
लेकिन सिर्फ इतना ही नहीं, कमरे के सामने लगे विशाल आइने की वजह से करीम को अनीता का अगला हिस्सा भी साफ दिख रहा था। वह दरार से देख पा रहा था कि कैसे राज का मुँह उसकी मालकिन के कूल्हों में धंसा हुआ है, और आइने में उसे अनीता के लटकते हुए भारी चूचे और उसकी गुलाबी योनि साफ़ नज़र आ रही थी।
 
करीम का विशाल शरीर अब और काबू में नहीं था। उसकी साँसें किसी धौंकनी की तरह चल रही थीं। उसने कांपते हाथों से अपनी पुरानी सूती लुंगी की गांठ खोली।
 
करीम: (बुदबुदाते हुए, गला पूरी तरह सूख चुका था) "अरे मोर मैया... जे का देख लिया! सामने से ई मलाई जैसी गाँड अउर शीशे में मेमसाब का उ ई गुलाबी फूल... हाय दैया! ई तो हमको पागल कर देगा!"
 
करीम ने अपनी लुंगी नीचे गिरा दी। उसकी जाँघों के बीच से उसका 10 इंच का काला और मोटा लंड  किसी भूखे नाग की तरह बाहर निकल आया। वह लंड  इतना विशाल और खड़ा था कि करीम के पेट को छू रहा था।
 
उसने अपना एक हाथ अपनी मर्दानगी पर रखा और उसे तेजी से ऊपर-नीचे सहलाने लगा। उसकी नजरें अंदर राज के चेहरे और अनीता के मांसल बदन पर जमी थीं।
 
करीम: (हाँफते हुए) "मेमसाब... कसम खुदा की, आज अगर हम भीतर होते तो आपका ई गुलाबी फूल चीर के रख देते! साहब तो बस चाट रहे हैं, हम तो अपना ई 10 इंच का लठ गाड़ देते आपके भीतर। देखो तो कैसे थरथरा रही हैं... जैसे कोई घोड़ी गरम हो गई हो। आह्ह मेमसाब... आज तो करीम अपना सारा पानी यहीं दरवाजे पे ही निकाल देगा!"
 
अंदर राज ने अब अपनी पकड़ और मजबूत कर ली थी। उसने अनीता की कमर को दोनों हाथों से भींच दिया।
 
राज (करीम के किरदार में): "का हुआ मालकिन? काहे इतना कांप रही हो? अभी तो करीम ने अपनी असली ताकत दिखाई भी नहीं है। ई गोरी और चिकनी देह आज हमारे ही नीचे दबेगी।"
 
अनीता ने आइने में खुद को देखा—उसका चेहरा लाल था, आँखें चढ़ी हुई थीं और उसका नौकर (राज) उसके पीछे पागल हुआ जा रहा था।
 
अनीता: (हाँफते हुए और उसे धक्का देने की नाकाम कोशिश करते हुए) "आह्ह... करीम! तेरे को ज़रा भी शरम नहीं आती मेरी गाँड चाटने से? छी... कितनी गंदी बात कर रहा है तू! गंदा कहीं का... आह्ह... मर जाऊँगी मैं!"
 
बाहर खड़ा करीम अब अपने 10 इंच के लंड  को इतनी जोर से सहला रहा था कि उसकी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा। वह अपनी मालकिन की चीखें सुन-सुन कर अपने हाथ की रफ़्तार बढ़ाता जा रहा था।
 


 
अंदर राज अब अनीता पर दोहरा हमला कर चुका था। जहाँ उसका मुँह और होंठ अनीता की गाँड की दरार पर मजबूती से जमे हुए थे, वहीं उसका एक हाथ अनीता की टांगों के बीच से होकर उसकी गीली योनि तक पहुँच चुका था। राज ने अपनी उंगलियों को उस गरम और चिपचिपे हिस्से के भीतर गहराई तक उतार दिया।
 
राज (करीम के लहजे में): "अनीता बिटिया... देखो तो ई कुआँ कितना पानी छोड़ रहा है! हमारी उँगलियाँ तो एकदम फिसल रही हैं भीतर। आज तो ई करीम आगे अउर पीछे, दोनों तरफ से आपको बेहाल कर देगा।"
 
राज की उंगलियाँ अनीता के भीतर बेरहमी से अंदर-बाहर हो रही थीं, जबकि उसके होंठ पीछे से गोरे मांस को चूस रहे थे। यह 'टू-वे अटैक' अनीता के लिए बर्दाश्त से बाहर था।
 
अनीता: (चीखते हुए और अपनी पीठ को कमान की तरह मोड़ते हुए) "आह्ह्ह... करीम! उह्ह... मार डालोगे क्या!... आह, मैं फटने वाली हूँ!"
 
बाहर खड़ा करीम अब पागलों की तरह अपने 10 इंच के लंड को सहला रहा था। उसकी आँखें अनीता की उन उंगलियों वाली हरकत और आइने में दिखते उसके कांपते हुए स्तनों पर जमी थीं।
करीम: (फुसफुसाते हुए) "मेमसाब... चिल्लाओ अउर जोर से चिल्लाओ! आज तो साहब आपको कच्चा चबा जाएंगे। अउर जे हमरा कालिया... जे भी आपके भीतर जाने को तड़प रहा है। काश... काश हम अंदर होते तो ई उँगलियों की जगह अपना जे मोटा डंडा आपके भीतर उतार देते!"
 
राज ने अब अपनी उंगलियों की रफ्तार और बढ़ा दी थी। वह अनीता के गीलेपन को पूरी मुट्ठी में भरकर मसल रहा था, जिससे कमरे में 'चप-चप' की कामुक आवाज़ें गूँज रही थीं। अनीता के घुटने अब जवाब दे रहे थे, पर राज की पकड़ उसे गिरने नहीं दे रही थी।
Deepak Kapoor
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RE: अनीता सिंह -- किरदार निभाना (Role Play) - by Deepak.kapoor - 11-01-2026, 06:09 AM



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