10-01-2026, 08:27 PM
उनके झड़ने के बाद मैं करीब पंद्रह -मिनट तक चोदता रहा। फिर मेरा लंड भी खुशबू चाची की चूत में झड़ गया। मेरे लंड का पानी जब पूरा उनकी चूत में गिर गया तो मैंने लंड को बाहर निकाला। उनकी चूत खुलकर अंदर की गहरायी दिखा रही थी। हम दोनों जोर-जोर से साँसें ले रहे थे। फिर हम दोनों लिपट कर सो गये।
करीब तीन बजे मेरी आँख खुली तो खुशबू चाची सिर्फ सैंडल पहने बिल्कुल नंगी मुझसे लिपटी हुई सो रही थीं। मैंने फिर से उनकी चुदाई की और सुबह भी दफ़्तर जाने से पहले उनकी चुदाई की।
अब तो ये रोज़ का सिलसिला हो गया। हम रोज रात को शराब के एक-दो पैग पीकर चुदाई करने लगे। खुशबू चाची तो मेरे लंड पर फ़िदा हो चुकी थी और वह बेहद चुदासी थीं। हर वक्त चुदाई के मूड में रहती थीं। हम दोनों हर रात एक ही बिस्तर पर नंगे सोते और अलग-अलग तरह से चुदाई करते। कईं बार तो आफिस के लिये निकलने वाली होती तो जाते-जाते भी अपनी सलवार और पैंटी नीचे खिसकाकर झटपट चोदने को कहतीं। हर दूसरे दीन मैं उनकी गाँड भी मारता था। जब भी हम दोनों में से किसी को चुदाई का मन होता, घर के किसी भी हिस्से जैसे कि किचन, बाथरूम, ड्राइंग रूम में कहीं भी चुदाई शुरू हो जाती। शुक्रवार और शनिवार को तो हम जम कर शराब पीते और नशे में धुत्त होकर खूब चुदाई करते।
एक दिन खुशबू चाची की चचेरी बहन चंद्रिका कुछ दिनों के लिये आयी। चंद्रिका बत्तीस साल की थी । वह असम में किसी कॉलेज में प्रोफेसर थी और कोलकाता में किसी कॉलेज फंक्शन के लिये महीने भर के लिये आयी थी। वह करीब पाँच फुट चार इंच लंबी थी और उसका जिस्म ज्यादा मोटा भी नहीं था और ज्यादा पतला भी नहीं था। चंद्रिका बेहद खुबसूरत थी और ज्यादातर जींस और कुर्ता-टॉप पहनती थी । सब से ज्यादा आकर्षक उसकी गाँड थी। ऊँची हील की सैंडल पहनकर जब वह चलती थी तो टाईट जींस में उसकी गाँड मटकती देखकर मेरा लंड भी नाचने लगता था।
उसकी और खुशबू चाची की बहुत पटती थी लेकिन शुरू-शुरू में थोड़ी शर्म की वजह से चंद्रिका मुझसे दूर रहती थी और ज्यादा बात भी नहीं करती थी। कभी-कभी शाम को खाने से पहले ड्रिंक्स में चंद्रिका हमारा साथ देती थी लेकिन औपचारिक बातें ही करती थी। चंद्रिका के आने से अब मैं और खुशबू चाची पहले की तरह खुलकर कभी भी या कहीं भी चुदाई नहीं कर सकते थे। लेकिन रात को खुशबू चाची अपने कमरे में मेरे साथ सोती थी और हम खूब चुदाई करते।
एक दिन जब मैं परीक्षा केंद्र पर पहुँचकर एक घंटा ही हुआ था कि खुशबू चाची का फोन आया। मुझे थोड़ी हैरानी हुई क्योंकि खुशबू चाची ने पहले कभी इस तरह परीक्षा केंद्र पर मुझे फोन नहीं किया था और वह भी तो सुबह मेरे सामने ही तो आफिस जाने के लिये निकली थीं। जब मैंने फोन उठाया तो उन्होंने बताया कि किसी वजह से उनके आफिस में छुट्टी हो गयी है और वह घर वापस जा रही हैं। खुशबू चाची ने मुझे भी परीक्षा छोड़कर घर आने को कहा क्योंकि चंद्रिका कि गैर-मौजूदगी में शाम तक ऐश करने का ये अच्छा मौका था। मैंने कहा, “ठीक है चाची… लेकिन मुझे घर पहुँचने में दो घंटे लगेंगे ।”
खुशबू चाची बोली, “मैं रास्ते में कैंटीन से घर का कुछ सामान और व्हिस्की वगैरह खरीदते हुए जाऊँगी… जल्दी आना गोलू … मुश्किल से ऐसा मौका मिला है!”
मैं साढ़े ग्यारह तक घर पहुँच गया तो देखा कि खुशबू चाची पूरे मूड में थीं। एम-टी-वी चैनल पर कोई भड़कता हुआ म्यूज़िक एलबम देखते हुए खुशबू चाची सोफे पर बैठी शराब पी रही थीं। उन्हें देख कर ऐसा लग रहा था जैसे कि आते ही पीने बैठ गयी थीं क्योंकि खुशबू चाची ने सुबह जो सलवार-सूट पहना था, इस वक्त भी वही सुबह वाली कमीज़ और ऊँची पेन्सिल हील की बारीक पट्टियों वाली सैंडल पहनी हुई थी जबकि उनकी सलवार इस वक्त सोफे के पास फर्श पर पड़ी थी।
मैंने अंदर आते ही कहा, “ये कया चाची... आप तो सुबह ही शराब पीने बैठ गयीं और मेरा भी इंतज़ार भी नहीं किया!”
खुशबू चाची बोलीं, “गोलू! पिछले वीकेंड भी चंद्रिका की वजह से ना तो दिल खोल कर शराब पी और ना ही जमकर चुदाई की और अगले तीन-चार हफ्ते हमें एहतियात बरतनी पड़ेगी। इसलिये आज सारी कसर निकालने का इरादा है...!”
ये कहते हुए वो सोफे से उठकर झूमती हुई मेरे नज़दीक आयी और मेरे गले में बाँहें डाल कर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये। ऊँची हील के सैंडलों में खुशबु चाची के लड़खड़ाते कदमों और बहकती ज़ुबान से साफ था कि वो काफी शराब पी चुकी थीं और नशे में धुत्त थीं। मैं जब भी खुशबू चाची को ऊँची हील की सैंडल पहने इस तरह नशे में लड़खड़ाते हुए देखता था तो मेरा लंड बेकाबू हो जाता था।
मैंने उन्हें चूमते हुए सोफे पर वापस बिठाया और खुद एक पैग पीने के बाद अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया। इतने में खुशबु चाची ने भी अपनी सलवार और ब्रा उतार कर एक तरफ फेंक दी और पैरों में सैंडलों के अलावा मादरजात नंगी होकर फिर मुझसे लिपट गयीं। फिर हमारी चुदाई सोफ़े पर ही शुरू हो गयी। मैं सोफे पर पीछे टिक कर लेटा था और मेरे पैर ज़मीन पर थे। खुशबू चाची मुझ पर सवार हो गयी थी। मेरा ज़ालिम लंड उनकी चूत में घुसकर फंसा हुआ था। वह कुल्हे उठा-गिरा कर मेरा लंड अपनी चूत में अंदर-बाहर कर रही थी। उनकी चूचियाँ मेरे मुँह के ऊपर थीं और मैं उनके निप्पल चूस रहा था। शराब के नशे और चुदाई की मस्ती में खुशबु चाची जोर-जोर से सिसकारियाँ भर रही थीं।
इतने में मेरी नज़र दरवाज़े की तरफ पड़ी तो देखा चंद्रिका वहाँ खड़ी-खड़ी हैरानी से स्तंभित सी हमें देख रही थी। मैंने चुदाई नहीं रोकी और बोला, “अरे चंद्रिका चाची... आप कब आयीं?”
खुशबू चाची ने भी उसे देखा तो चुदाई चालू रखते हुए कहा, “आजा चंद्रिका... शरमा मत!”
करीब तीन बजे मेरी आँख खुली तो खुशबू चाची सिर्फ सैंडल पहने बिल्कुल नंगी मुझसे लिपटी हुई सो रही थीं। मैंने फिर से उनकी चुदाई की और सुबह भी दफ़्तर जाने से पहले उनकी चुदाई की।
अब तो ये रोज़ का सिलसिला हो गया। हम रोज रात को शराब के एक-दो पैग पीकर चुदाई करने लगे। खुशबू चाची तो मेरे लंड पर फ़िदा हो चुकी थी और वह बेहद चुदासी थीं। हर वक्त चुदाई के मूड में रहती थीं। हम दोनों हर रात एक ही बिस्तर पर नंगे सोते और अलग-अलग तरह से चुदाई करते। कईं बार तो आफिस के लिये निकलने वाली होती तो जाते-जाते भी अपनी सलवार और पैंटी नीचे खिसकाकर झटपट चोदने को कहतीं। हर दूसरे दीन मैं उनकी गाँड भी मारता था। जब भी हम दोनों में से किसी को चुदाई का मन होता, घर के किसी भी हिस्से जैसे कि किचन, बाथरूम, ड्राइंग रूम में कहीं भी चुदाई शुरू हो जाती। शुक्रवार और शनिवार को तो हम जम कर शराब पीते और नशे में धुत्त होकर खूब चुदाई करते।
एक दिन खुशबू चाची की चचेरी बहन चंद्रिका कुछ दिनों के लिये आयी। चंद्रिका बत्तीस साल की थी । वह असम में किसी कॉलेज में प्रोफेसर थी और कोलकाता में किसी कॉलेज फंक्शन के लिये महीने भर के लिये आयी थी। वह करीब पाँच फुट चार इंच लंबी थी और उसका जिस्म ज्यादा मोटा भी नहीं था और ज्यादा पतला भी नहीं था। चंद्रिका बेहद खुबसूरत थी और ज्यादातर जींस और कुर्ता-टॉप पहनती थी । सब से ज्यादा आकर्षक उसकी गाँड थी। ऊँची हील की सैंडल पहनकर जब वह चलती थी तो टाईट जींस में उसकी गाँड मटकती देखकर मेरा लंड भी नाचने लगता था।
उसकी और खुशबू चाची की बहुत पटती थी लेकिन शुरू-शुरू में थोड़ी शर्म की वजह से चंद्रिका मुझसे दूर रहती थी और ज्यादा बात भी नहीं करती थी। कभी-कभी शाम को खाने से पहले ड्रिंक्स में चंद्रिका हमारा साथ देती थी लेकिन औपचारिक बातें ही करती थी। चंद्रिका के आने से अब मैं और खुशबू चाची पहले की तरह खुलकर कभी भी या कहीं भी चुदाई नहीं कर सकते थे। लेकिन रात को खुशबू चाची अपने कमरे में मेरे साथ सोती थी और हम खूब चुदाई करते।
एक दिन जब मैं परीक्षा केंद्र पर पहुँचकर एक घंटा ही हुआ था कि खुशबू चाची का फोन आया। मुझे थोड़ी हैरानी हुई क्योंकि खुशबू चाची ने पहले कभी इस तरह परीक्षा केंद्र पर मुझे फोन नहीं किया था और वह भी तो सुबह मेरे सामने ही तो आफिस जाने के लिये निकली थीं। जब मैंने फोन उठाया तो उन्होंने बताया कि किसी वजह से उनके आफिस में छुट्टी हो गयी है और वह घर वापस जा रही हैं। खुशबू चाची ने मुझे भी परीक्षा छोड़कर घर आने को कहा क्योंकि चंद्रिका कि गैर-मौजूदगी में शाम तक ऐश करने का ये अच्छा मौका था। मैंने कहा, “ठीक है चाची… लेकिन मुझे घर पहुँचने में दो घंटे लगेंगे ।”
खुशबू चाची बोली, “मैं रास्ते में कैंटीन से घर का कुछ सामान और व्हिस्की वगैरह खरीदते हुए जाऊँगी… जल्दी आना गोलू … मुश्किल से ऐसा मौका मिला है!”
मैं साढ़े ग्यारह तक घर पहुँच गया तो देखा कि खुशबू चाची पूरे मूड में थीं। एम-टी-वी चैनल पर कोई भड़कता हुआ म्यूज़िक एलबम देखते हुए खुशबू चाची सोफे पर बैठी शराब पी रही थीं। उन्हें देख कर ऐसा लग रहा था जैसे कि आते ही पीने बैठ गयी थीं क्योंकि खुशबू चाची ने सुबह जो सलवार-सूट पहना था, इस वक्त भी वही सुबह वाली कमीज़ और ऊँची पेन्सिल हील की बारीक पट्टियों वाली सैंडल पहनी हुई थी जबकि उनकी सलवार इस वक्त सोफे के पास फर्श पर पड़ी थी।
मैंने अंदर आते ही कहा, “ये कया चाची... आप तो सुबह ही शराब पीने बैठ गयीं और मेरा भी इंतज़ार भी नहीं किया!”
खुशबू चाची बोलीं, “गोलू! पिछले वीकेंड भी चंद्रिका की वजह से ना तो दिल खोल कर शराब पी और ना ही जमकर चुदाई की और अगले तीन-चार हफ्ते हमें एहतियात बरतनी पड़ेगी। इसलिये आज सारी कसर निकालने का इरादा है...!”
ये कहते हुए वो सोफे से उठकर झूमती हुई मेरे नज़दीक आयी और मेरे गले में बाँहें डाल कर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये। ऊँची हील के सैंडलों में खुशबु चाची के लड़खड़ाते कदमों और बहकती ज़ुबान से साफ था कि वो काफी शराब पी चुकी थीं और नशे में धुत्त थीं। मैं जब भी खुशबू चाची को ऊँची हील की सैंडल पहने इस तरह नशे में लड़खड़ाते हुए देखता था तो मेरा लंड बेकाबू हो जाता था।
मैंने उन्हें चूमते हुए सोफे पर वापस बिठाया और खुद एक पैग पीने के बाद अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया। इतने में खुशबु चाची ने भी अपनी सलवार और ब्रा उतार कर एक तरफ फेंक दी और पैरों में सैंडलों के अलावा मादरजात नंगी होकर फिर मुझसे लिपट गयीं। फिर हमारी चुदाई सोफ़े पर ही शुरू हो गयी। मैं सोफे पर पीछे टिक कर लेटा था और मेरे पैर ज़मीन पर थे। खुशबू चाची मुझ पर सवार हो गयी थी। मेरा ज़ालिम लंड उनकी चूत में घुसकर फंसा हुआ था। वह कुल्हे उठा-गिरा कर मेरा लंड अपनी चूत में अंदर-बाहर कर रही थी। उनकी चूचियाँ मेरे मुँह के ऊपर थीं और मैं उनके निप्पल चूस रहा था। शराब के नशे और चुदाई की मस्ती में खुशबु चाची जोर-जोर से सिसकारियाँ भर रही थीं।
इतने में मेरी नज़र दरवाज़े की तरफ पड़ी तो देखा चंद्रिका वहाँ खड़ी-खड़ी हैरानी से स्तंभित सी हमें देख रही थी। मैंने चुदाई नहीं रोकी और बोला, “अरे चंद्रिका चाची... आप कब आयीं?”
खुशबू चाची ने भी उसे देखा तो चुदाई चालू रखते हुए कहा, “आजा चंद्रिका... शरमा मत!”


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