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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#38
राजू ने हाथों में ढेर सारा तेल लिया और सरिता की मखमली गुंदाज जांघों को आराम आराम से मस्त सहलाने लगा. सरिता को भी बहुत अच्छा अहसास होने लगा. वो अपनी दोनों आंखें बंद करके मजा ले रही थीं. सरिता का इस तरह का मादक जिस्म देखकर राजू का लंड अपने पूरे आकार में आ गया था.सरिता आंखें बंद करके राजू के हाथ से मालिश का मस्त आनन्द लेने में लग गईं. सरिता की गोरी सुडोल जाँघे देख राजू के मुँह में पानी आ गया और वो सोचने लगा की उफ्फ ये गोरा बदन, ये कामुक अदाएं, ये बड़े कोमल रसीले स्तन, क्या जवानी है मालकिन की …ऐसी कामुक महिला मिल जाए तो पूरी रात रंगीन हो जाए, पूरा बदन मसल मसल के चूसने चाटने में मजा आ जाएगा .

[Image: FB-IMG-1591717193652.jpg]
इसी बीच सरिता की नाइटी जांघों से कूल्हे तक ऊपर चढ़ गई थी. नाइटी के कमर तक सरकते ही राजू को नंगी फुली हुई चूत दिखायी दी ..राजू को पता नहीं था की मालकिन ने पैंटी जानभुझ निकाल रखी थी या पहनती ही नहीं थीं. नीचे राजू का लंड अपना फन उठाने लगा. सरिता की चूत देख राजू घबरा गया और उसके हाथ कांपने लगे।
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 10-01-2026, 04:29 PM



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