09-01-2026, 08:21 PM
अब आखिरकार, आरोही बाथरूम से बाहर निकली, उसके कदम लड़खड़ा रहे थे। शर्म और थकान से उसका शरीर भारी हो गया था। अभी-अभी जो हुआ था, वह उसके लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था। पेशाब रोकने की वह लंबी जद्दोजहद, और राहुल की टीजिंग, और फिर उसके सामने विवशता में पेशाब करना—सब कुछ उसके मन में घूम रहा था।
इस पूरी घटना ने आरोही को तोड़ दिया था। लेकिन एक सवाल जो उसे खाए जा रहा था कि वह गीली क्यों हो गई? यह सोचते हुए,उसकी आंखें अभी भी नम थीं, और चेहरा लाल। लेकिन कहीं अंदर एक अजीब सी राहत भी थी। दबाव खत्म हो गया था, पेट का निचला हिस्सा और योनि के आस-पास क्षेत्र हल्का लग रहा था।
वह चुपचाप किचन की ओर बढ़ी, लेकिन राहुल, जो उसे किसी शिकार की तरह देख रहा था। उसने कड़क आवाज में उसे रोक लिया। "इधर आओ, आरोही। थोड़ी देर आराम कर लो।" लेकिन उसकी आवाज में अब पहले जैसी कठोरता नहीं थी, बल्कि एक हल्की सी नम्रता थी। वह चाहें दिखावे की ही रही हो। आरोही ने सिर झुका लिया और उसके पास गई। क्योंकि विरोध तो पहले ही क्या करती, उसने तो जानबूझकर कांट्रैक्ट किया था कि वह नोंची जाएगी। लेकिन आज की घटना से उसके मन में शर्म की जगह टूटे हुए डर ने ले ली। तो चली गई।
राहुल सोफे पर बैठा था, उसने आराम से आरोही का हाथ पकड़कर उसे अपनी गोद में खींच लिया। जैसा स्पष्ट है कि आरोही विरोध करने की हालत में नहीं थी, लेकिन शर्म कैसे रोक ले। तो थोड़ी असहज थी लेकिन वह हिली नहीं। वह चुपचाप बैठ गई। उसके नितंब राहुल की जांघों पर टिक गए, और राहुल का हाथ उसकी कमर पर सरक गया।
"अब बताओ, कैसा लगा?" राहुल ने कान के पास फुसफुसाते हुए पूछा। आरोही की सांस तेज हो गई। उसने बोला “क्या?”
“अरे वही मूतना और धार मारते हुए मेरे सामने मूतना। वैसे मूतती बड़ा सुरीला हो। कभी अमित ने तुम्हें मुतवाया है।” राहुल बोला
आरोही कहती है "सर... प्लीज, मत पूछो।"
लेकिन राहुल ने उसका चेहरा पकड़कर ऊपर किया। "नहीं, बताओ। पूरा डिटेल से। कैसे मूता तुम? शुरू से बताओ। और फिर बताना कि तुम्हारे पति ने तुम्हारी सुरीली मूताई कितनी बार देखी सुनी है।"
आरोही की आंखें चौड़ी हो गईं। वह एक सिंपल घरेलू औरत थी, ऐसी बातें तो कभी सोची भी नहीं थीं। एक आध बार पेशाब को लेकर पति के साथ हंसी मजाक हुआ है। लेकिन ऐसे सामने पेशाब करना और पति का उसको अपने सामने मूतने के लिए कहना तो सोचा भी नहीं था। लेकिन, इस समय आरोही, राहुल की गोद में बैठी, उसकी मजबूत बाहों में कैद, वह अपनी स्थिति और राहुल के वर्चस्व से विवश थी।
"सर... मैं... नहीं बोल पाउँगी..... बहुत शर्म आती है।"
राहुल ने हंसकर कहा, "शर्म? अभी तो मेरे सामने धार मारकर मूती हो, एकदम सरसराते हुए। बोलो, नहीं तो फिर सोच लेना। अभी यहीं सजा मिलेगी। गांड़ खोलकर खड़ी रहना पड़ेगा। क्या ज्यादा शर्म भरा होगा?"
राहुल के डोमिनेंस से पहले ही टूट चुकी आरोही इस धमकी के बाद तो कुछ कह ही नहीं पाई। और आरोही ने आंखें बंद कर लीं और हकलाते हुए शुरू किया।
"मुझे... बहुत जोर लगी थी।”
“क्या लगी थी? टट्टी लगी थी? चुदाई या गांड़ मराई की चुल्ल लगी थी, क्या लगा था? ठीक बोल।” राहुल थोड़ा भारीपन से बोला।
आरोही की तो गांड़ ही फट गई।
“जी पेशाब लगी थी। बहुत....जोर से लगी थी... पेट फूल रहा था। मैं... बाथरूम में गई। आपने कहा था... सलवार उतारो। मैंने... नाड़ा खोला, सलवार नीचे सरकाई। फिर... पैंटी।"
राहुल की आंखें चमक रही थीं।
"और?” चूँकि आरोही थम गई थी तो राहुल ने बोला।
“फिर आपने कहा की मेरे सामने पेशाब करो। तो मैंने किया।”
“मैंने पेशाब का कब बोला था? और तूने कैसे मूता यह तो बताया ही नहीं। ठीक से बता?” राहुल ने आरोही के नितंब के एक भाग को गोल-गोल मसलते हुए कसकर दबाया और पूछा।
“आआआआआआआ...............उचचचचचच...... इइइइइससससससससस.......। सर आपने मूतने को बोला था। तो मैंने मूता।” आरोही सिसकते हुए, घबराते हुए सारा बोल गई। जो शायद होश में कभी सोच नहीं पाती। वह आज एक दूसरे पुरुष के सामने बोलना पड़ रहा है।
“चूत में कैसा लग रहा था?"
आरोही का चेहरा और लाल हो गया।
"टाइट... टाइट थी। दबाव से... कस गई थी। मैं... आपके सामने बैठी फर्श पर। आप डांट रहे थे... जल्दी करो। फिर... मैंने... मूतना शुरू किया। छर-छर की आवाज आई। बहुत... राहत मिली। लेकिन शर्म... बहुत शर्म आई। आपने कहा सुरीला मूतती हूँ।"
राहुल संतुष्ट होकर मुस्कुराया। "गुड गर्ल। बहुत अच्छे पूरा बताया। देखो, कितना आसान था। चूत है मूतने और चुदने के लिए ही।"
और उसने आरोही के होंठों पर अपना होंठ रख दिया—एक लंबा, गहरा किस। उसके होंठ आरोही को चूस रहे थे, जीभ अंदर सरक रही थी। आरोही की सांसें रूक रहीं थीं, लेकिन वह हिली नहीं। किस पांच मिनट तक चला, राहुल के हाथ उसकी पीठ पर घूम रहे थे।
फिर वह रुका और बोला, "चलो अब खाना बनाओ।"
आरोही उठी, उसके पैर अभी भी कमजोर थे। लेकिन वह किचन में गई। थकान थी, लेकिन राहत भी। "कम से कम पति के सामने मूतने का भूल गया," वह सोच रही थी, और सोचने में मूत जैसे शब्द आने पर वह चौंक गई।
वह सब्जियां काटने लगी, चूल्हा जलाया। राहुल अंदर से देख रहा था। थोड़ी देर बाद वह आया, हाथ में फिर एक ग्लास जूस। "पी लो, थकान उतरेगी।"
आरोही ने देखा—वही हर्बल जूस, लेकिन इस बार ज्यादा।
"सर... अभी-अभी तो..." लेकिन राहुल ने ग्लास थमा दिया।
"पी लो। काम में मदद मिलेगी।" आरोही ने पी लिया, तीन घूंट में पूरा खत्म। जूस का तरल पेट में गया, और वह जानती थी कि इससे क्या होगा। लेकिन अभी तो सब ठीक था। वह खाना बनाती रही—दाल, सब्जी, रोटी।
राहुल पास में खड़ा था, उसे देखते हुए। "तुम्हारी कमर कितनी पतली है। काम करते हुए अच्छी लग रही हो।"
वह आरोही की कमर छूने लगा, लेकिन आरोही ने हल्के से हटाया। "सर... काम करने में परेशानी होगी।"
राहुल हंसा—"ठीक है। लेकिन एक और ग्लास पी लो। गर्मी है।" उसने जूस का ग्लास दिया, ठंडा। आरोही ने पी लिया, लेकिन अब पेट में तरल का एहसास होने लगा।
"फिर से?" वह सोच रही थी।खाना बनाते-बनाते आधा घंटा बीत गया। आरोही ने दाल बनाई, सब्जी भुनी। लेकिन अब पेशाब की हल्की सी जरूरत महसूस हो रही थी।
"अभी नहीं, रुक सकती हूं," वह खुद से बोली। राहुल फिर आया, इस बार एक छोटा ग्लास जूस का। "पी लो, लास्ट वाला।" आरोही ने मना किया—"सर, बस। पेट भरा है।" लेकिन राहुल ने जोर दिया—"पी लो, नहीं तो सजा मिलेगी।"
आरोही डर गई और पी लिया। अब दबाव बढ़ने लगा। पेट फूल रहा था, और नीचे, योनि और मूत्रग्रंथी की मांसपेशियां कस रही थीं। वह काम तेज करने लगी, लेकिन राहुल उसे परेशान करने लगा।
"क्या हुआ? फिर पैर हिला रही हो? कहीं फिर से मूतने का जोर तो नहीं लगी?"
उसने चिढ़ाते मारते हुए आरोही के निचले पेट पर हाथ रखा और हल्के से दबाया।
आरोही की सिसकारी निकली—"उंह... सर, मत करो। हां, लगी है।"
राहुल हंसा—"फिर से? कितनी जल्दी लग जाती है तुम्हें। रोक लो। खाना पहले बनाओ।"
आरोही ने काम जारी रखा, लेकिन अब पैर जोड़कर खड़ी थी। राहुल उसके पीछे आया, कमर पकड़ी—"देखो, तुम्हारी गांड हिल रही है। मूत रोकने की कोशिश कर रही हो क्या?" वह नितंबों को दबाया और मसलने लगा।
आरोही—"आह... सर, प्लीज।" इसी खाना बन गया। आरोही ने प्लेट लगाई, लेकिन अब दबाव अपने चरम पर था।
वह मिन्नत करने लगी—"सर, प्लीज... बाथरूम जाने दो। बहुत जोर की लगी है।"
राहुल ने मुस्कुराकर कहा—"तू इतना मूतती हो? चलो आज कुछ तूफानी करते हैं।"
यह कहकर राहुल ने किनार पड़े स्टूल की ओर इशारा किया। और बोला—“इस पर पैर रखकर सिंक में चढ़ जा और मूत।”
आरोही चौंक गई—"क्या? सिंक में? नहीं सर... गंदा हो जाएगा।"
लेकिन राहुल ने डांट दिया—"करो वही। नहीं तो सजा।" आरोही की आंखों में विवशता साफ दिखती थी। मजबूरी में वह सिंक के पास गई, सिंक काउंटर वाला था। वैसे पेशाब का दबाव इतना था कि लीक होने वाला था। उसने एक बार मिन्नत की दृष्टि से राहुल की ओर देखा। लेकिन राहुल के तेवर कड़े थे। आरोही ने राहुल के तेवर देखकर डरते हुए अपने पैर स्टूल पर रखकर सिंक के टॉप पर चढ़ गई। फिर राहुल ने सलवार खोलने का इशारा पूरी सख्ती के साथ किया।
"जल्दी करो!" राहुल डांटा। आरोही ने सलवार का नाड़ा खोला, नीचे सरकाया। फिर पैंटी। राहुल देख रहा था—"अच्छे से नीचे गांड़ दिखनी चाहिए? ऐसे कैसे मूतेगी।"
आरोही झुकी, निशाना बनाया। क्योंकि उसके मन में कहीं पेशाब बाहर ना गिरे। और सिंक में पेशाब करना वह भी लड़की के लिए कितना मुश्किल है। भले ही सिंक काउंटर वाली हो। आरोही कैसे करके अपने घुटने मोड़ती है, गांड़ पीछे की तरफ निकलती है। उसे डर भी लग रहा था कि सिंक टूट ना जाए या वह पीछे गिर ना जाए। जगह बहुत थोड़ी सी थी।
तभी राहुल पीछे आया, उसकी नितंब सहलाने लगा—"कितनी कसी हुई है।"
आरोही की सिसकारी निकली—"उंह... सर, मत..."
लेकिन तभी राहुल ने उसके एक नितंब एक थप्पड़ मारा। और थप्पड़ पड़ते ही आरोही—आहहहह..............सीसीसीसीसीसी..........।
जोर से सिसकारी भरती है और उसकी योनि से पेशाब—छर्र-छर्र........ सुर्रर्रर्रर्र.......... की संगीत से सिंक में गिर रहा था।
आरोही की सेक्स लाइफ भी समान्य से कम थी। लाइट बंद करके लेट जाना और टांग उठाकर धक्के खा लेना। आरोही को याद भी नहीं थी कि कभी उसके पति ने उसे पूरा नंगा किया भी था या नहीं। यहाँ तो वह इस समय दूसरे पुरुष के सामने नितंब लटकाए हुए सिंक में पेशाब कर रही थी। और अपने को शीशे में देख रही थी।
राहुल टीज कर रहा था—"देखो, कितना मूत रही है। जानेमन तुम्हारी मूत तो शराब जैसी है। अगर शराब पीता तो तेरी मूत मिलाकर पीता। चूत से कितना मूत निकाल रही है। गंदी लड़की।"
राहुल के शब्द आरोही को जाने क्यों उत्तेजक से लग रहे थे। वह समझ नहीं पा रही थी कि क्यों उसके स्तन हल्के से कड़े हो गए जबकि उसे गुस्सा होना चाहिए था। वह अपने लाल चेहरे को शीशे में देखकर और जोर से सिसकारी भरती है—आहहहहहहहह......
राहुल उसके नितंब पर हाथ रखे-रखे ही पेशाब की धार की ओर देखते हुए, मुस्कुराता है। और बोलता—“वाह बड़ी तेज धार मारती हो। देखो कहीं सिंक में छेद ना कर देना। नहीं तो पैसे काट लूँगा।”
बहुत देर से रूके हुए पेशाब, और इस छेड़-छाड़ के कारण आरोही को दोहरा आनंद और चैन आता है जिससे उसकी आंखें हल्की सी मुंद जाती हैं। और वह राहुल की बात सुनकर चौंककर नीचे देखती है। फिर शर्मा सी जाती है।
“वाह बड़ा विश्वास है अपनी धार पर। वैसे बड़ा अच्छा मूतती हो। लेकिन लगता है तुम्हारे पति ने तुम्हारी ठुकाई ठीक से नहीं की है। नहीं तो छेद और चौड़ा होता। क्यों क्या कहती हो?” राहुल ने आरोही के नितंब को सहलाते हुए पूछा।
आरोही एकदम चुप्प थी।
तभी आरोही—“आह नहीं............... सीसीसीसीसीससीसी..................” अचानक से आरोही जोर से आह और सिसकारी लेते हुए हल्का सा डगमगाई और उसकी पेशाब की थोड़ी सी धार जमीन और राहुल के पैर पर गिरी।
असल में हुआ यह था कि आरोही से पूछते हुए राहुल ने नितंब सहलाते हुए पता नहीं कब अपनी एक उंगली आरोही के पिछले छेद यानी गुदा में घुसा दी।
इसी के चलते आरोही डगमगा गई और पेशाब की धार नीचे गिर गई। अब आरोही जैसी लड़की जिसकी सेक्स लाइफ यूँ ही थी। उसे एक ही दिन में किसी दूसरे के सामने पेशाब करना और फिर अब गुदा में ऊँगली। बहुत ज्यादा था। इसीलिए रोकते-रोकते यह हो गया। वैसे राहुल ने संभाल लिया था नहीं तो आरोही गिर भी सकती थी।
राहुल—“अरे जानेमन, मेरे ऊपर ही मूत दिया। गांड़ में उंगली से यह हाल है, लंड डालने पर तो पूरे घर में कूदती फिरोगी।” और राहुल ने यह बोलते हुए भी गुदा से उंगली निकाली नहीं बल्कि घुमाना शुरू कर दिया।
आरोही की हालत तो इतनी खराब हो गई थी कि वह पैरों में गिरी सलवार और पैंटी तक नहीं उठा पाई। फिर राहुल ने आरोही की गांड़ से ऊँगली निकाली और बोला—”अपनी चूत तो धो लो। या मूत टपकाती रहोगी।”
आरोही गुदा में ऊँगली की इस घटना से इतना हड़बड़ा गई कि वह फौरन सिंक पर चढ़कर अपनी योनि धोती है। और फिर आकर बिना किसी शर्म के पैंटी सही करके पहनती है। राहुल कपड़ा लाकर पैर और जमीन पोंछने के लिए कहा।
आरोही चुपचाप सफाई कर देती है। आरोही जब जाने लगती है तो राहुल—“अरे जानेमन तेरी गांड़ में मेरी ऊँगली गई थी। इसे भी धुल दे।” आरोही—उफ यह कितना गंदा बोलता है। क्या जरूरत थी ऊंगली करने की—यह सोचते हुए आरोही की योनि गीली भी हो जाती है।
फिर हाथ धुलवा देने के बाद राहुल आरोही को कहता है कि बाथरूम जाना चाहे तो जा सकती है। राहुल अपना काम करने लगता है।
आरोही—“अब बाथरूम भेज रहा है। सारी गंदगी करने के बाद। इसके दिमाग में ऐसे ख्याल कैसे आते हैं किसी लड़की को परेशान करने के।”
फिर आरोही पहले सिंक और फिर बाथरूम की फर्श साफ करती है। और अपनी गुदा को भी साफ करती है, लेकिन ऊंगली की बात सोचकर उसे झुरझुरी सी आने लगती और फिर एक वर्जित उत्तेजना उसमें संचार होने लगता है। जिसे आरोही झटकना चाहती है।
फिर आगे और कुछ नहीं होता है। जिससे इन घटनाओं से थकी आरोही को चैन मिलता है।
लेकिन आगे क्या हो सकता है यह उधेड़-बुन उसके दिमाग में चलती है। क्योंक राहुल तो फेटिश और यौन मामलों का एक्सपर्ट था और आरोही एकदम कुछ नहीं जानने वाली। अब आरोही जैसे फल का कितना रस राहुल कैसे-कैसे निकालेगा और चखेगा यही शायद कहानी है।
इस पूरी घटना ने आरोही को तोड़ दिया था। लेकिन एक सवाल जो उसे खाए जा रहा था कि वह गीली क्यों हो गई? यह सोचते हुए,उसकी आंखें अभी भी नम थीं, और चेहरा लाल। लेकिन कहीं अंदर एक अजीब सी राहत भी थी। दबाव खत्म हो गया था, पेट का निचला हिस्सा और योनि के आस-पास क्षेत्र हल्का लग रहा था।
वह चुपचाप किचन की ओर बढ़ी, लेकिन राहुल, जो उसे किसी शिकार की तरह देख रहा था। उसने कड़क आवाज में उसे रोक लिया। "इधर आओ, आरोही। थोड़ी देर आराम कर लो।" लेकिन उसकी आवाज में अब पहले जैसी कठोरता नहीं थी, बल्कि एक हल्की सी नम्रता थी। वह चाहें दिखावे की ही रही हो। आरोही ने सिर झुका लिया और उसके पास गई। क्योंकि विरोध तो पहले ही क्या करती, उसने तो जानबूझकर कांट्रैक्ट किया था कि वह नोंची जाएगी। लेकिन आज की घटना से उसके मन में शर्म की जगह टूटे हुए डर ने ले ली। तो चली गई।
राहुल सोफे पर बैठा था, उसने आराम से आरोही का हाथ पकड़कर उसे अपनी गोद में खींच लिया। जैसा स्पष्ट है कि आरोही विरोध करने की हालत में नहीं थी, लेकिन शर्म कैसे रोक ले। तो थोड़ी असहज थी लेकिन वह हिली नहीं। वह चुपचाप बैठ गई। उसके नितंब राहुल की जांघों पर टिक गए, और राहुल का हाथ उसकी कमर पर सरक गया।
"अब बताओ, कैसा लगा?" राहुल ने कान के पास फुसफुसाते हुए पूछा। आरोही की सांस तेज हो गई। उसने बोला “क्या?”
“अरे वही मूतना और धार मारते हुए मेरे सामने मूतना। वैसे मूतती बड़ा सुरीला हो। कभी अमित ने तुम्हें मुतवाया है।” राहुल बोला
आरोही कहती है "सर... प्लीज, मत पूछो।"
लेकिन राहुल ने उसका चेहरा पकड़कर ऊपर किया। "नहीं, बताओ। पूरा डिटेल से। कैसे मूता तुम? शुरू से बताओ। और फिर बताना कि तुम्हारे पति ने तुम्हारी सुरीली मूताई कितनी बार देखी सुनी है।"
आरोही की आंखें चौड़ी हो गईं। वह एक सिंपल घरेलू औरत थी, ऐसी बातें तो कभी सोची भी नहीं थीं। एक आध बार पेशाब को लेकर पति के साथ हंसी मजाक हुआ है। लेकिन ऐसे सामने पेशाब करना और पति का उसको अपने सामने मूतने के लिए कहना तो सोचा भी नहीं था। लेकिन, इस समय आरोही, राहुल की गोद में बैठी, उसकी मजबूत बाहों में कैद, वह अपनी स्थिति और राहुल के वर्चस्व से विवश थी।
"सर... मैं... नहीं बोल पाउँगी..... बहुत शर्म आती है।"
राहुल ने हंसकर कहा, "शर्म? अभी तो मेरे सामने धार मारकर मूती हो, एकदम सरसराते हुए। बोलो, नहीं तो फिर सोच लेना। अभी यहीं सजा मिलेगी। गांड़ खोलकर खड़ी रहना पड़ेगा। क्या ज्यादा शर्म भरा होगा?"
राहुल के डोमिनेंस से पहले ही टूट चुकी आरोही इस धमकी के बाद तो कुछ कह ही नहीं पाई। और आरोही ने आंखें बंद कर लीं और हकलाते हुए शुरू किया।
"मुझे... बहुत जोर लगी थी।”
“क्या लगी थी? टट्टी लगी थी? चुदाई या गांड़ मराई की चुल्ल लगी थी, क्या लगा था? ठीक बोल।” राहुल थोड़ा भारीपन से बोला।
आरोही की तो गांड़ ही फट गई।
“जी पेशाब लगी थी। बहुत....जोर से लगी थी... पेट फूल रहा था। मैं... बाथरूम में गई। आपने कहा था... सलवार उतारो। मैंने... नाड़ा खोला, सलवार नीचे सरकाई। फिर... पैंटी।"
राहुल की आंखें चमक रही थीं।
"और?” चूँकि आरोही थम गई थी तो राहुल ने बोला।
“फिर आपने कहा की मेरे सामने पेशाब करो। तो मैंने किया।”
“मैंने पेशाब का कब बोला था? और तूने कैसे मूता यह तो बताया ही नहीं। ठीक से बता?” राहुल ने आरोही के नितंब के एक भाग को गोल-गोल मसलते हुए कसकर दबाया और पूछा।
“आआआआआआआ...............उचचचचचच...... इइइइइससससससससस.......। सर आपने मूतने को बोला था। तो मैंने मूता।” आरोही सिसकते हुए, घबराते हुए सारा बोल गई। जो शायद होश में कभी सोच नहीं पाती। वह आज एक दूसरे पुरुष के सामने बोलना पड़ रहा है।
“चूत में कैसा लग रहा था?"
आरोही का चेहरा और लाल हो गया।
"टाइट... टाइट थी। दबाव से... कस गई थी। मैं... आपके सामने बैठी फर्श पर। आप डांट रहे थे... जल्दी करो। फिर... मैंने... मूतना शुरू किया। छर-छर की आवाज आई। बहुत... राहत मिली। लेकिन शर्म... बहुत शर्म आई। आपने कहा सुरीला मूतती हूँ।"
राहुल संतुष्ट होकर मुस्कुराया। "गुड गर्ल। बहुत अच्छे पूरा बताया। देखो, कितना आसान था। चूत है मूतने और चुदने के लिए ही।"
और उसने आरोही के होंठों पर अपना होंठ रख दिया—एक लंबा, गहरा किस। उसके होंठ आरोही को चूस रहे थे, जीभ अंदर सरक रही थी। आरोही की सांसें रूक रहीं थीं, लेकिन वह हिली नहीं। किस पांच मिनट तक चला, राहुल के हाथ उसकी पीठ पर घूम रहे थे।
फिर वह रुका और बोला, "चलो अब खाना बनाओ।"
आरोही उठी, उसके पैर अभी भी कमजोर थे। लेकिन वह किचन में गई। थकान थी, लेकिन राहत भी। "कम से कम पति के सामने मूतने का भूल गया," वह सोच रही थी, और सोचने में मूत जैसे शब्द आने पर वह चौंक गई।
वह सब्जियां काटने लगी, चूल्हा जलाया। राहुल अंदर से देख रहा था। थोड़ी देर बाद वह आया, हाथ में फिर एक ग्लास जूस। "पी लो, थकान उतरेगी।"
आरोही ने देखा—वही हर्बल जूस, लेकिन इस बार ज्यादा।
"सर... अभी-अभी तो..." लेकिन राहुल ने ग्लास थमा दिया।
"पी लो। काम में मदद मिलेगी।" आरोही ने पी लिया, तीन घूंट में पूरा खत्म। जूस का तरल पेट में गया, और वह जानती थी कि इससे क्या होगा। लेकिन अभी तो सब ठीक था। वह खाना बनाती रही—दाल, सब्जी, रोटी।
राहुल पास में खड़ा था, उसे देखते हुए। "तुम्हारी कमर कितनी पतली है। काम करते हुए अच्छी लग रही हो।"
वह आरोही की कमर छूने लगा, लेकिन आरोही ने हल्के से हटाया। "सर... काम करने में परेशानी होगी।"
राहुल हंसा—"ठीक है। लेकिन एक और ग्लास पी लो। गर्मी है।" उसने जूस का ग्लास दिया, ठंडा। आरोही ने पी लिया, लेकिन अब पेट में तरल का एहसास होने लगा।
"फिर से?" वह सोच रही थी।खाना बनाते-बनाते आधा घंटा बीत गया। आरोही ने दाल बनाई, सब्जी भुनी। लेकिन अब पेशाब की हल्की सी जरूरत महसूस हो रही थी।
"अभी नहीं, रुक सकती हूं," वह खुद से बोली। राहुल फिर आया, इस बार एक छोटा ग्लास जूस का। "पी लो, लास्ट वाला।" आरोही ने मना किया—"सर, बस। पेट भरा है।" लेकिन राहुल ने जोर दिया—"पी लो, नहीं तो सजा मिलेगी।"
आरोही डर गई और पी लिया। अब दबाव बढ़ने लगा। पेट फूल रहा था, और नीचे, योनि और मूत्रग्रंथी की मांसपेशियां कस रही थीं। वह काम तेज करने लगी, लेकिन राहुल उसे परेशान करने लगा।
"क्या हुआ? फिर पैर हिला रही हो? कहीं फिर से मूतने का जोर तो नहीं लगी?"
उसने चिढ़ाते मारते हुए आरोही के निचले पेट पर हाथ रखा और हल्के से दबाया।
आरोही की सिसकारी निकली—"उंह... सर, मत करो। हां, लगी है।"
राहुल हंसा—"फिर से? कितनी जल्दी लग जाती है तुम्हें। रोक लो। खाना पहले बनाओ।"
आरोही ने काम जारी रखा, लेकिन अब पैर जोड़कर खड़ी थी। राहुल उसके पीछे आया, कमर पकड़ी—"देखो, तुम्हारी गांड हिल रही है। मूत रोकने की कोशिश कर रही हो क्या?" वह नितंबों को दबाया और मसलने लगा।
आरोही—"आह... सर, प्लीज।" इसी खाना बन गया। आरोही ने प्लेट लगाई, लेकिन अब दबाव अपने चरम पर था।
वह मिन्नत करने लगी—"सर, प्लीज... बाथरूम जाने दो। बहुत जोर की लगी है।"
राहुल ने मुस्कुराकर कहा—"तू इतना मूतती हो? चलो आज कुछ तूफानी करते हैं।"
यह कहकर राहुल ने किनार पड़े स्टूल की ओर इशारा किया। और बोला—“इस पर पैर रखकर सिंक में चढ़ जा और मूत।”
आरोही चौंक गई—"क्या? सिंक में? नहीं सर... गंदा हो जाएगा।"
लेकिन राहुल ने डांट दिया—"करो वही। नहीं तो सजा।" आरोही की आंखों में विवशता साफ दिखती थी। मजबूरी में वह सिंक के पास गई, सिंक काउंटर वाला था। वैसे पेशाब का दबाव इतना था कि लीक होने वाला था। उसने एक बार मिन्नत की दृष्टि से राहुल की ओर देखा। लेकिन राहुल के तेवर कड़े थे। आरोही ने राहुल के तेवर देखकर डरते हुए अपने पैर स्टूल पर रखकर सिंक के टॉप पर चढ़ गई। फिर राहुल ने सलवार खोलने का इशारा पूरी सख्ती के साथ किया।
"जल्दी करो!" राहुल डांटा। आरोही ने सलवार का नाड़ा खोला, नीचे सरकाया। फिर पैंटी। राहुल देख रहा था—"अच्छे से नीचे गांड़ दिखनी चाहिए? ऐसे कैसे मूतेगी।"
आरोही झुकी, निशाना बनाया। क्योंकि उसके मन में कहीं पेशाब बाहर ना गिरे। और सिंक में पेशाब करना वह भी लड़की के लिए कितना मुश्किल है। भले ही सिंक काउंटर वाली हो। आरोही कैसे करके अपने घुटने मोड़ती है, गांड़ पीछे की तरफ निकलती है। उसे डर भी लग रहा था कि सिंक टूट ना जाए या वह पीछे गिर ना जाए। जगह बहुत थोड़ी सी थी।
तभी राहुल पीछे आया, उसकी नितंब सहलाने लगा—"कितनी कसी हुई है।"
आरोही की सिसकारी निकली—"उंह... सर, मत..."
लेकिन तभी राहुल ने उसके एक नितंब एक थप्पड़ मारा। और थप्पड़ पड़ते ही आरोही—आहहहह..............सीसीसीसीसीसी..........।
जोर से सिसकारी भरती है और उसकी योनि से पेशाब—छर्र-छर्र........ सुर्रर्रर्रर्र.......... की संगीत से सिंक में गिर रहा था।
आरोही की सेक्स लाइफ भी समान्य से कम थी। लाइट बंद करके लेट जाना और टांग उठाकर धक्के खा लेना। आरोही को याद भी नहीं थी कि कभी उसके पति ने उसे पूरा नंगा किया भी था या नहीं। यहाँ तो वह इस समय दूसरे पुरुष के सामने नितंब लटकाए हुए सिंक में पेशाब कर रही थी। और अपने को शीशे में देख रही थी।
राहुल टीज कर रहा था—"देखो, कितना मूत रही है। जानेमन तुम्हारी मूत तो शराब जैसी है। अगर शराब पीता तो तेरी मूत मिलाकर पीता। चूत से कितना मूत निकाल रही है। गंदी लड़की।"
राहुल के शब्द आरोही को जाने क्यों उत्तेजक से लग रहे थे। वह समझ नहीं पा रही थी कि क्यों उसके स्तन हल्के से कड़े हो गए जबकि उसे गुस्सा होना चाहिए था। वह अपने लाल चेहरे को शीशे में देखकर और जोर से सिसकारी भरती है—आहहहहहहहह......
राहुल उसके नितंब पर हाथ रखे-रखे ही पेशाब की धार की ओर देखते हुए, मुस्कुराता है। और बोलता—“वाह बड़ी तेज धार मारती हो। देखो कहीं सिंक में छेद ना कर देना। नहीं तो पैसे काट लूँगा।”
बहुत देर से रूके हुए पेशाब, और इस छेड़-छाड़ के कारण आरोही को दोहरा आनंद और चैन आता है जिससे उसकी आंखें हल्की सी मुंद जाती हैं। और वह राहुल की बात सुनकर चौंककर नीचे देखती है। फिर शर्मा सी जाती है।
“वाह बड़ा विश्वास है अपनी धार पर। वैसे बड़ा अच्छा मूतती हो। लेकिन लगता है तुम्हारे पति ने तुम्हारी ठुकाई ठीक से नहीं की है। नहीं तो छेद और चौड़ा होता। क्यों क्या कहती हो?” राहुल ने आरोही के नितंब को सहलाते हुए पूछा।
आरोही एकदम चुप्प थी।
तभी आरोही—“आह नहीं............... सीसीसीसीसीससीसी..................” अचानक से आरोही जोर से आह और सिसकारी लेते हुए हल्का सा डगमगाई और उसकी पेशाब की थोड़ी सी धार जमीन और राहुल के पैर पर गिरी।
असल में हुआ यह था कि आरोही से पूछते हुए राहुल ने नितंब सहलाते हुए पता नहीं कब अपनी एक उंगली आरोही के पिछले छेद यानी गुदा में घुसा दी।
इसी के चलते आरोही डगमगा गई और पेशाब की धार नीचे गिर गई। अब आरोही जैसी लड़की जिसकी सेक्स लाइफ यूँ ही थी। उसे एक ही दिन में किसी दूसरे के सामने पेशाब करना और फिर अब गुदा में ऊँगली। बहुत ज्यादा था। इसीलिए रोकते-रोकते यह हो गया। वैसे राहुल ने संभाल लिया था नहीं तो आरोही गिर भी सकती थी।
राहुल—“अरे जानेमन, मेरे ऊपर ही मूत दिया। गांड़ में उंगली से यह हाल है, लंड डालने पर तो पूरे घर में कूदती फिरोगी।” और राहुल ने यह बोलते हुए भी गुदा से उंगली निकाली नहीं बल्कि घुमाना शुरू कर दिया।
आरोही की हालत तो इतनी खराब हो गई थी कि वह पैरों में गिरी सलवार और पैंटी तक नहीं उठा पाई। फिर राहुल ने आरोही की गांड़ से ऊँगली निकाली और बोला—”अपनी चूत तो धो लो। या मूत टपकाती रहोगी।”
आरोही गुदा में ऊँगली की इस घटना से इतना हड़बड़ा गई कि वह फौरन सिंक पर चढ़कर अपनी योनि धोती है। और फिर आकर बिना किसी शर्म के पैंटी सही करके पहनती है। राहुल कपड़ा लाकर पैर और जमीन पोंछने के लिए कहा।
आरोही चुपचाप सफाई कर देती है। आरोही जब जाने लगती है तो राहुल—“अरे जानेमन तेरी गांड़ में मेरी ऊँगली गई थी। इसे भी धुल दे।” आरोही—उफ यह कितना गंदा बोलता है। क्या जरूरत थी ऊंगली करने की—यह सोचते हुए आरोही की योनि गीली भी हो जाती है।
फिर हाथ धुलवा देने के बाद राहुल आरोही को कहता है कि बाथरूम जाना चाहे तो जा सकती है। राहुल अपना काम करने लगता है।
आरोही—“अब बाथरूम भेज रहा है। सारी गंदगी करने के बाद। इसके दिमाग में ऐसे ख्याल कैसे आते हैं किसी लड़की को परेशान करने के।”
फिर आरोही पहले सिंक और फिर बाथरूम की फर्श साफ करती है। और अपनी गुदा को भी साफ करती है, लेकिन ऊंगली की बात सोचकर उसे झुरझुरी सी आने लगती और फिर एक वर्जित उत्तेजना उसमें संचार होने लगता है। जिसे आरोही झटकना चाहती है।
फिर आगे और कुछ नहीं होता है। जिससे इन घटनाओं से थकी आरोही को चैन मिलता है।
लेकिन आगे क्या हो सकता है यह उधेड़-बुन उसके दिमाग में चलती है। क्योंक राहुल तो फेटिश और यौन मामलों का एक्सपर्ट था और आरोही एकदम कुछ नहीं जानने वाली। अब आरोही जैसे फल का कितना रस राहुल कैसे-कैसे निकालेगा और चखेगा यही शायद कहानी है।


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)