08-01-2026, 06:05 PM
आरोही के मन में वह सवाल बार-बार घूम रहा था—"राहुल ने रोका क्यों? क्या कोई कारण है?"
वह किचन में खड़ी थी, हाथ में सब्जी का चाकू पकड़े, लेकिन ध्यान कहीं और था। पेशाब की जरूरत अभी हल्की थी, लेकिन राहुल की बात ने उसे असहज कर दिया। वह सोच रही थी कि शायद राहुल भूल गया होगा, या फिर कोई मजाक कर रहा है।
आज आरोही ने नाश्ते में राहुल के कहने पर दो ग्लास जूस भी पी लिया था।
और राहुल ने एक बोतल बोतल स्प्रिंग वॉटर भी पिला दी थी। आरोही ने भी सोचा नहीं कि आज राहुल कुछ अधिक लिक्विड पिला रहा है। इसीलिए प्रेशर भी अधिक था।
लेकिन कोई भी पेशाब कितनी रोक पाएगा इसीलिए आरोही फिर पूछ पड़ती है, “मुझे बाथरूम जाना है?”
“क्या करने जाना है?” राहुल ने पूछा।
थोड़ा खीझते हुए लेकिन कंट्रोल करते हुए बोलती है, “पेशाब करना है।”
राहुल बिना उसकी ओर देखे हुए बोला, “बाद में............ बाद में...........”
आरोही को थोड़ा अजीब तो लगा, लेकिन फिर भी वह काम करने लगी कुछ देर बाद जब पेशाब का जोर बढ़ा तो उसने फिर राहुल से पूछने का सोचा,लेकिन राहुल का चेहरा याद आया—वह सख्त मुस्कान, जो कह रही थी कि वह जानबूझकर ऐसा कर रहा है।
आरोही ने काम जारी रखा, सब्जियां काटती रही, लेकिन हर मिनट के साथ दबाव बढ़ता जा रहा था। उसके पेट में एक हल्की सी मरोड़ उठी, जैसे कोई गांठ बंध रही हो। "अभी तो बस थोड़ी सी लगी है, थोड़ी देर रुक सकती हूं," उसने खुद को तसल्ली दी।
लेकिन राहुल की आवाज कानों में गूंज रही थी—"अभी बाद में जाना, पहले काम करो।"
राहुल कमरे से बाहर आया, उसके हाथ में एक ग्लास था। वह हर्बल जूस था, वही जो वह रोज पिलाता था—हरे रंग का, थोड़ा कड़वा लेकिन एनर्जी देने वाला। वह आरोही के पास आया और ग्लास उसकी ओर बढ़ाया। "पी लो, काम में मदद मिलेगी। तुम थकी लग रही हो।"
आरोही ने ग्लास लिया, लेकिन मन में संकोच था। "सर, मुझे... पेशाब..." वह हकलाते हुए बोली, लेकिन राहुल ने बीच में ही काट दिया। "पी लो पहले। बात बाद में।"
आरोही ने जूस पी लिया, एक घूंट में आधा खत्म कर दिया। जूस का स्वाद मुंह में फैल गया, लेकिन उसके साथ ही पेट में तरल का एहसास हुआ।
"अब तो और जरूरत बढ़ जाएगी," वह सोच रही थी। राहुल मुस्कुराया—"अच्छी लड़की। अब काम खत्म करो।"
आरोही ने सब्जियां काटीं, लेकिन अब दबाव बढ़ रहा था। उसके पैर हल्के से हिल रहे थे, जैसे रोकने की कोशिश कर रही हो। राहुल पास में खड़ा था, उसे देखते हुए। "क्या हुआ? पैर क्यों हिला रही हो? कहीं मूत नहीं निकलने लगा?" राहुल ने हंसते हुए कहा, आवाज में एक ताना था।
आरोही का चेहरा लाल हो गया। "सर... ऐसी बातें...ना करें" वह शर्म, और परेशानी से बोली। लेकिन राहुल ने करीब आकर उसकी कमर पकड़ ली। "क्यों, मूतने में क्या शर्म? सब मूतते हैं। लेकिन तुम्हें तो रोकना है ना? देखते हैं कितनी देर रोक सकती हो। अभी थोड़ी देर में, मैं भी चल रहा हूँ तब मूत लेना।”
इतना सुनकर आरोही को थोड़ा सा डर लगा। क्योंकि राहुल के शब्दों से उसे थोड़ा सा भय लगा। “क्या यह मेरे को अपने साथ ले जाएगा।”
उसके शब्दों ने उसे और असहज कर दिया। तभी राहुल ने आरोही को घुमाया और उसके होंठों पर एक हल्का सा किस किया। आरोही की सांस रुक गई, लेकिन वह पीछे नहीं हटी। हट ही नहीं सकती थी, राहुल का डर भी तो था। राहुल के होंठ नरम थे, लेकिन किस में एक दबाव था।
"तुम्हारी आंखें कह रही हैं कि दबाव बढ़ रहा है। मूतने का मन कर रहा है ना?" राहुल ने किस तोड़कर कहा, और हंस दिया। आरोही ने सिर झुका लिया—"सर, प्लीज... जाने दो।" लेकिन राहुल ने मना कर दिया—"नहीं, अभी नहीं। पहले एक और ग्लास पी लो।" उसने दूसरा ग्लास भरकर दिया—इस बार पानी का, ठंडा और साफ। "पी लो, गर्मी तू तो अंदर से भी गर्म है, तभी ना गीली हो जाती है।"
आरोही ने मना करने की कोशिश की, लेकिन राहुल की आंखों में वह सख्ती थी। वह पी गई, हर घूंट के साथ पेट में तरल का बोझ बढ़ता जा रहा था। अब दबाव साफ महसूस हो रहा था—पेट फूल रहा था, और नीचे की मांसपेशियां कस रही थीं। राहुल आरोही को ड्राइंग रूम में ले गया। "बैठो, थोड़ी देर बातें करते हैं।"
आरोही बैठी, लेकिन पैर जोड़कर। राहुल उसके बगल में बैठा और उसकी जांघ पर हाथ रख दिया। "क्या हुआ? परेशान लग रही हो। कहीं मूत तो नहीं दिया?" उसने फिर ताना मारा, और आरोही की जांघ को दबाया। आरोही की सिसकारी निकली—"उंह... सर, प्लीज। बहुत तोज लगी है।" राहुल हंसा—"लगी है? क्या लगी है? बोलो ना साफ-साफ।
आरोही, बोलो—मुझे पेशाब लगी है।" आरोही शर्म से मर गई। वह जानती थी किर राहुल चाहता है वह मूतना शब्द बोले लेकिन वह एक घरेलू औरत थी, पति के सामने भी ऐसी बातें नहीं करती थी।
"सर... मैं... नहीं कह सकती।" लेकिन पेशाब के जोर में बोल देती है, “सर, मुझे मूतना है।
ठीक है, अब जाऊं, बता दिया ना” आरोही ने गिड़गिड़ाते हुए कहा।
“अरे, इतनी भी क्या जल्दी मैंने तो सुना है कि लड़कियाँ घंटों मूतना रोक सकती हैं। तुम्हारी ही टंकी इतनी कमजोर क्यों है?” राहुल ने फिर सवाल किया।
“प्लीज जाने दो ना।।।” अनसुना सा करते हुए आरोही अपनी दोनों टांगों को भींचते हुए बोलती है।
लेकिन राहुल ने उसका चेहरा पकड़कर ऊपर किया और फिर से किस किया, इस बार गहरा। उसके होंठ आरोही के होंठों को चूस रहे थे, और हाथ उसकी कमर पर सरक रहा था। किस के बीच में वह बोला—"पूरा बोलो, नहीं तो जाने नहीं दूंगा।"
आरोही की आंखों में बेबसी दिखने लगी—"सर, मुझे... मूतने का जोर लगी है। लेकिन योनि से पेशाब निकल जाएगा।"
राहुल संतुष्ट होकर हंसा—"अच्छी लड़की। लेकिन अभी नहीं। थोड़ी देर और रोको। देखते हैं तुम्हारी कैपेसिटी।" वह आरोही को फिर से जूस पिलाने लगा—इस बार एक छोटा ग्लास, लेकिन आरोही के लिए वह जहर जैसा था। "पी लो, हेल्दी है।" आरोही ने पी लिया, लेकिन अब दबाव असहनीय होने लगा था। उसके पैर कांप रहे थे, और वह बार-बार स्थिति बदल रही थी।
राहुल उसे टीज कर रहा था—"देखो, तुम्हारी जांघें कस रही हैं। मूत रोकने की कोशिश कर रही हो? कितनी क्यूट लग रही हो। अगर लीक हो गया तो? तुम्हें ही पोंछा लगाना होगा।"
उसने आरोही को गोद में बिठा लिया और उसके नितंबों को मसलने लगा। "तुम्हारी गांड कितनी टाइट है। मूत रोकने से और कस गई है।" आरोही की हालत खराब हो रही थी। दबाव अब पीक पर था—पेट फूल चुका था, और नीचे की मांसपेशियां थक रही थीं। वह मिन्नत करने लगी—"सर, प्लीज... जाने दो। मैं नहीं रोक सकती। दर्द हो रहा है।"
राहुल ने उसे किस किया, गहरा और लंबा। उसके होंठ आरोही के गले पर सरक गए, और वह काटने लगा। "थोड़ी देर और। तुम्हें सिखाना है कंट्रोल।"
आरोही रोने को हो गई—"सर, बहुत ज्यादा है। लीक हो जाएगा। प्लीज, मिन्नत करती हूँ।"
राहुल ने आखिरकार मान गया “ओफ्फोह........... तेरी टंकी वाकई खराब है। चल तुझे मूता कर लाता है” कहते हुए राहुल ने आरोही का हाथ थामा और लेकर बाथरूम ले जाने लगा।
“तुझे पेशाब रोकना भी सिखाना होगा। तेरे पति ने केवल तेरी मारी ही है। तुझे ढंग से मूताया भी नहीं।”
आरोही राहुल की भाषा और साथ चलने पर चौंक गई—"क्या? सामने? नहीं सर... मैं नहीं कर सकती। शर्म आती है।"
राहुल की आंखें सख्त हो गईं—"या तो सामने, या वापस कमरे में। और अगर लीक हुआ तो सजा मिलेगी।"
आरोही की आंखों में शर्म और परेशानी थी, लेकिन दबाव इतना था कि वह मान गई। राहुल उसे बाथरूम में ले गया। दरवाजा खुला रखा। और बोला "चलो, उतारो सलवार।"
आरोही हिचकिचाई—"सर... प्लीज, अकेले..." लेकिन राहुल ने धमकी दी—"वापस ले जाऊँ? बाहर बैठकर रोको?"
“वैसे तेरा मूतना है, मूतना है सुनकर मुझे भी पेशाब लग आई है। ऐसा कर तू तब तक सलवार खोल और कच्छी नीचे कर तब तक मैं मूत लेता हूँ।”
यह बोलकर राहुल अपना लोअर नीचे करके पेशाब करने लगा। और वहीं आरोही भौंचक्की सी खड़ी रह गई। एक मिनट के लिए तो वह पेशाब का जोर भूल गई। राहुल का लिंक उसके सामने था। उसने आँखें घुमा ली, लेकिन एक नजर में उसे वह बड़ा लगा।
तभी राहुल अपना पेशाब करना खत्म करके आता है। और आरोही को वैसे ही खड़े देखकर बोलता है, “मुझे पता था तुम्हें मूतना नहीं था। फर्जी बहाना कर रही थी। चलो यहाँ से।”
तभी आरोही को मानो होश आता है, “नहीं, मुझे बहुत जोर से प्रेशर आ रहा है। लेकिन आप जाएंगे तभी ना करूँगी।”
“क्यों मैंने कौन से तेरे छेद में कुछ डाल रखा है कि मेरे रहते नहीं मूत पाओगी। वैसे कुछ डलवाने का मन है क्या?” राहुल ने मुस्कुराते हुए पूछा।
आरोही ने सिर झुका लिया। वह कभी पति के सामने भी पूरी नंगी नहीं हुई थी, लेकिन अब मजबूरी थी। उसने धीरे से सलवार का नाड़ा खोला, और नीचे सरकाया। फिर पैंटी—सफेद, बढ़िया ब्रांड की राहुल के पैसों की।
राहुल देख रहा था, मुस्कुराते हुए। "कितनी प्यारी पैंटी लाई हो।” आरोही ने पैंटी उतारी, और टॉयलेट पर बैठने जा रही थी। लेकिन राहुल ने कड़क आवाज में रोका, “फर्श पर मूतना है। मेरे सामने मुँह करके।" आरोही चौंक गई लेकिन और क्या कर सकती थी। वह राहुल के सामने मुँह करके बैठ गई।
लेकिन मूत नहीं पा रही थी—शर्म से। राहुल ने ताना मारा—"क्या हुआ? मूत नहीं आ रही? या मेरे सामने शर्म आ रही है?”
खुलक बोलो बोलो, 'सर, मुझे मूतना है आपके सामने।'"
आरोही रोने लगी थी—"सर... प्लीज।" लेकिन दबाव ने जीत ली। उसने वह कहा, और फिर मूतना शुरू किया। आवाज गूंजी—सर्रर्रर्र,........................।
राहुल मुस्कुरा रहा था,"देखो, कितना सुरीला मूतती हो। पूरी बाढ़ ला दी है। अरे मूतकर मजा भी आ रहा होगा।"
आरोही शर्म से मर गई, क्योंकि एक चैन की सांस या आराम का अहसास तो पेशाब करने के साथ हो ही रहा था। क्योंकि काफी देर से रोकी हुई थी। पेशाब के बाद राहुल ने कहा—"पूरी फर्श भर मूत मारा चल अब साफ करो खुद को। दिखाओ कैसे करती हो।"
आरोही बिना पानी के कैसे अपनी योनि धोती? और राहुल के सामने कैसे उठे? आरोही कोई ट्रेंड कॉल गर्ल तो थी नहीं जो फैंटेसी पूरी करने के लिए कुछ भी कर दे।
वह झिझकते हुए राहुल से फिर मिन्नत करती है, “सर, पानी चाहिए, आप चले जाइए मैं साफ करके आती हूँ करके।”
लेकिन राहुल नहीं माना, और डांटते हुए कहा, “आज नहीं तो कल मुझसे गांड़ मरवानी है, और बड़ी शर्मिली बन रही हो?” राहुल की बात सुनकर आरोही की बची खुची हिम्मत भी टूट गई और वह उठी और पानी लाकर पहले अपनी योनि धुली और फिर उठी और पहले पैंटी फिर सलवार ऊपर करने लगी।
राहुल देखता रहा। और आरोही को पास बुलाया, और उसकी योनि पर हाथ रख दिया और बोला, “चेक कर रहा हूँ कि साफ है या नहीं। लेकिन यह तो गीली है चिपचिपी सी? यह क्यों?” आरोही इस पर क्या बोलती लेकिन राहुल की हरकत के कारण वह गीली हो ही गई थी।
लेकिन राहुल ने और ह्यूमिलिएट किया "कोई नहीं जानेमान एक दिन चिकनी करके लेंगे तेरी।"
आरोही ने कपड़े पहने, और बाहर आई। राहुल ने उसे गोद में बिठाया थोड़ा सहलाया—"अच्छी लड़की हो। अब काम करो।"
लेकिन आरोही आज की इस घटना से बहुत थक गई थी। वह सोच रही थी कि अभी आगे क्या होना है? आगे क्या करेगा?
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वह किचन में खड़ी थी, हाथ में सब्जी का चाकू पकड़े, लेकिन ध्यान कहीं और था। पेशाब की जरूरत अभी हल्की थी, लेकिन राहुल की बात ने उसे असहज कर दिया। वह सोच रही थी कि शायद राहुल भूल गया होगा, या फिर कोई मजाक कर रहा है।
आज आरोही ने नाश्ते में राहुल के कहने पर दो ग्लास जूस भी पी लिया था।
और राहुल ने एक बोतल बोतल स्प्रिंग वॉटर भी पिला दी थी। आरोही ने भी सोचा नहीं कि आज राहुल कुछ अधिक लिक्विड पिला रहा है। इसीलिए प्रेशर भी अधिक था।
लेकिन कोई भी पेशाब कितनी रोक पाएगा इसीलिए आरोही फिर पूछ पड़ती है, “मुझे बाथरूम जाना है?”
“क्या करने जाना है?” राहुल ने पूछा।
थोड़ा खीझते हुए लेकिन कंट्रोल करते हुए बोलती है, “पेशाब करना है।”
राहुल बिना उसकी ओर देखे हुए बोला, “बाद में............ बाद में...........”
आरोही को थोड़ा अजीब तो लगा, लेकिन फिर भी वह काम करने लगी कुछ देर बाद जब पेशाब का जोर बढ़ा तो उसने फिर राहुल से पूछने का सोचा,लेकिन राहुल का चेहरा याद आया—वह सख्त मुस्कान, जो कह रही थी कि वह जानबूझकर ऐसा कर रहा है।
आरोही ने काम जारी रखा, सब्जियां काटती रही, लेकिन हर मिनट के साथ दबाव बढ़ता जा रहा था। उसके पेट में एक हल्की सी मरोड़ उठी, जैसे कोई गांठ बंध रही हो। "अभी तो बस थोड़ी सी लगी है, थोड़ी देर रुक सकती हूं," उसने खुद को तसल्ली दी।
लेकिन राहुल की आवाज कानों में गूंज रही थी—"अभी बाद में जाना, पहले काम करो।"
राहुल कमरे से बाहर आया, उसके हाथ में एक ग्लास था। वह हर्बल जूस था, वही जो वह रोज पिलाता था—हरे रंग का, थोड़ा कड़वा लेकिन एनर्जी देने वाला। वह आरोही के पास आया और ग्लास उसकी ओर बढ़ाया। "पी लो, काम में मदद मिलेगी। तुम थकी लग रही हो।"
आरोही ने ग्लास लिया, लेकिन मन में संकोच था। "सर, मुझे... पेशाब..." वह हकलाते हुए बोली, लेकिन राहुल ने बीच में ही काट दिया। "पी लो पहले। बात बाद में।"
आरोही ने जूस पी लिया, एक घूंट में आधा खत्म कर दिया। जूस का स्वाद मुंह में फैल गया, लेकिन उसके साथ ही पेट में तरल का एहसास हुआ।
"अब तो और जरूरत बढ़ जाएगी," वह सोच रही थी। राहुल मुस्कुराया—"अच्छी लड़की। अब काम खत्म करो।"
आरोही ने सब्जियां काटीं, लेकिन अब दबाव बढ़ रहा था। उसके पैर हल्के से हिल रहे थे, जैसे रोकने की कोशिश कर रही हो। राहुल पास में खड़ा था, उसे देखते हुए। "क्या हुआ? पैर क्यों हिला रही हो? कहीं मूत नहीं निकलने लगा?" राहुल ने हंसते हुए कहा, आवाज में एक ताना था।
आरोही का चेहरा लाल हो गया। "सर... ऐसी बातें...ना करें" वह शर्म, और परेशानी से बोली। लेकिन राहुल ने करीब आकर उसकी कमर पकड़ ली। "क्यों, मूतने में क्या शर्म? सब मूतते हैं। लेकिन तुम्हें तो रोकना है ना? देखते हैं कितनी देर रोक सकती हो। अभी थोड़ी देर में, मैं भी चल रहा हूँ तब मूत लेना।”
इतना सुनकर आरोही को थोड़ा सा डर लगा। क्योंकि राहुल के शब्दों से उसे थोड़ा सा भय लगा। “क्या यह मेरे को अपने साथ ले जाएगा।”
उसके शब्दों ने उसे और असहज कर दिया। तभी राहुल ने आरोही को घुमाया और उसके होंठों पर एक हल्का सा किस किया। आरोही की सांस रुक गई, लेकिन वह पीछे नहीं हटी। हट ही नहीं सकती थी, राहुल का डर भी तो था। राहुल के होंठ नरम थे, लेकिन किस में एक दबाव था।
"तुम्हारी आंखें कह रही हैं कि दबाव बढ़ रहा है। मूतने का मन कर रहा है ना?" राहुल ने किस तोड़कर कहा, और हंस दिया। आरोही ने सिर झुका लिया—"सर, प्लीज... जाने दो।" लेकिन राहुल ने मना कर दिया—"नहीं, अभी नहीं। पहले एक और ग्लास पी लो।" उसने दूसरा ग्लास भरकर दिया—इस बार पानी का, ठंडा और साफ। "पी लो, गर्मी तू तो अंदर से भी गर्म है, तभी ना गीली हो जाती है।"
आरोही ने मना करने की कोशिश की, लेकिन राहुल की आंखों में वह सख्ती थी। वह पी गई, हर घूंट के साथ पेट में तरल का बोझ बढ़ता जा रहा था। अब दबाव साफ महसूस हो रहा था—पेट फूल रहा था, और नीचे की मांसपेशियां कस रही थीं। राहुल आरोही को ड्राइंग रूम में ले गया। "बैठो, थोड़ी देर बातें करते हैं।"
आरोही बैठी, लेकिन पैर जोड़कर। राहुल उसके बगल में बैठा और उसकी जांघ पर हाथ रख दिया। "क्या हुआ? परेशान लग रही हो। कहीं मूत तो नहीं दिया?" उसने फिर ताना मारा, और आरोही की जांघ को दबाया। आरोही की सिसकारी निकली—"उंह... सर, प्लीज। बहुत तोज लगी है।" राहुल हंसा—"लगी है? क्या लगी है? बोलो ना साफ-साफ।
आरोही, बोलो—मुझे पेशाब लगी है।" आरोही शर्म से मर गई। वह जानती थी किर राहुल चाहता है वह मूतना शब्द बोले लेकिन वह एक घरेलू औरत थी, पति के सामने भी ऐसी बातें नहीं करती थी।
"सर... मैं... नहीं कह सकती।" लेकिन पेशाब के जोर में बोल देती है, “सर, मुझे मूतना है।
ठीक है, अब जाऊं, बता दिया ना” आरोही ने गिड़गिड़ाते हुए कहा।
“अरे, इतनी भी क्या जल्दी मैंने तो सुना है कि लड़कियाँ घंटों मूतना रोक सकती हैं। तुम्हारी ही टंकी इतनी कमजोर क्यों है?” राहुल ने फिर सवाल किया।
“प्लीज जाने दो ना।।।” अनसुना सा करते हुए आरोही अपनी दोनों टांगों को भींचते हुए बोलती है।
लेकिन राहुल ने उसका चेहरा पकड़कर ऊपर किया और फिर से किस किया, इस बार गहरा। उसके होंठ आरोही के होंठों को चूस रहे थे, और हाथ उसकी कमर पर सरक रहा था। किस के बीच में वह बोला—"पूरा बोलो, नहीं तो जाने नहीं दूंगा।"
आरोही की आंखों में बेबसी दिखने लगी—"सर, मुझे... मूतने का जोर लगी है। लेकिन योनि से पेशाब निकल जाएगा।"
राहुल संतुष्ट होकर हंसा—"अच्छी लड़की। लेकिन अभी नहीं। थोड़ी देर और रोको। देखते हैं तुम्हारी कैपेसिटी।" वह आरोही को फिर से जूस पिलाने लगा—इस बार एक छोटा ग्लास, लेकिन आरोही के लिए वह जहर जैसा था। "पी लो, हेल्दी है।" आरोही ने पी लिया, लेकिन अब दबाव असहनीय होने लगा था। उसके पैर कांप रहे थे, और वह बार-बार स्थिति बदल रही थी।
राहुल उसे टीज कर रहा था—"देखो, तुम्हारी जांघें कस रही हैं। मूत रोकने की कोशिश कर रही हो? कितनी क्यूट लग रही हो। अगर लीक हो गया तो? तुम्हें ही पोंछा लगाना होगा।"
उसने आरोही को गोद में बिठा लिया और उसके नितंबों को मसलने लगा। "तुम्हारी गांड कितनी टाइट है। मूत रोकने से और कस गई है।" आरोही की हालत खराब हो रही थी। दबाव अब पीक पर था—पेट फूल चुका था, और नीचे की मांसपेशियां थक रही थीं। वह मिन्नत करने लगी—"सर, प्लीज... जाने दो। मैं नहीं रोक सकती। दर्द हो रहा है।"
राहुल ने उसे किस किया, गहरा और लंबा। उसके होंठ आरोही के गले पर सरक गए, और वह काटने लगा। "थोड़ी देर और। तुम्हें सिखाना है कंट्रोल।"
आरोही रोने को हो गई—"सर, बहुत ज्यादा है। लीक हो जाएगा। प्लीज, मिन्नत करती हूँ।"
राहुल ने आखिरकार मान गया “ओफ्फोह........... तेरी टंकी वाकई खराब है। चल तुझे मूता कर लाता है” कहते हुए राहुल ने आरोही का हाथ थामा और लेकर बाथरूम ले जाने लगा।
“तुझे पेशाब रोकना भी सिखाना होगा। तेरे पति ने केवल तेरी मारी ही है। तुझे ढंग से मूताया भी नहीं।”
आरोही राहुल की भाषा और साथ चलने पर चौंक गई—"क्या? सामने? नहीं सर... मैं नहीं कर सकती। शर्म आती है।"
राहुल की आंखें सख्त हो गईं—"या तो सामने, या वापस कमरे में। और अगर लीक हुआ तो सजा मिलेगी।"
आरोही की आंखों में शर्म और परेशानी थी, लेकिन दबाव इतना था कि वह मान गई। राहुल उसे बाथरूम में ले गया। दरवाजा खुला रखा। और बोला "चलो, उतारो सलवार।"
आरोही हिचकिचाई—"सर... प्लीज, अकेले..." लेकिन राहुल ने धमकी दी—"वापस ले जाऊँ? बाहर बैठकर रोको?"
“वैसे तेरा मूतना है, मूतना है सुनकर मुझे भी पेशाब लग आई है। ऐसा कर तू तब तक सलवार खोल और कच्छी नीचे कर तब तक मैं मूत लेता हूँ।”
यह बोलकर राहुल अपना लोअर नीचे करके पेशाब करने लगा। और वहीं आरोही भौंचक्की सी खड़ी रह गई। एक मिनट के लिए तो वह पेशाब का जोर भूल गई। राहुल का लिंक उसके सामने था। उसने आँखें घुमा ली, लेकिन एक नजर में उसे वह बड़ा लगा।
तभी राहुल अपना पेशाब करना खत्म करके आता है। और आरोही को वैसे ही खड़े देखकर बोलता है, “मुझे पता था तुम्हें मूतना नहीं था। फर्जी बहाना कर रही थी। चलो यहाँ से।”
तभी आरोही को मानो होश आता है, “नहीं, मुझे बहुत जोर से प्रेशर आ रहा है। लेकिन आप जाएंगे तभी ना करूँगी।”
“क्यों मैंने कौन से तेरे छेद में कुछ डाल रखा है कि मेरे रहते नहीं मूत पाओगी। वैसे कुछ डलवाने का मन है क्या?” राहुल ने मुस्कुराते हुए पूछा।
आरोही ने सिर झुका लिया। वह कभी पति के सामने भी पूरी नंगी नहीं हुई थी, लेकिन अब मजबूरी थी। उसने धीरे से सलवार का नाड़ा खोला, और नीचे सरकाया। फिर पैंटी—सफेद, बढ़िया ब्रांड की राहुल के पैसों की।
राहुल देख रहा था, मुस्कुराते हुए। "कितनी प्यारी पैंटी लाई हो।” आरोही ने पैंटी उतारी, और टॉयलेट पर बैठने जा रही थी। लेकिन राहुल ने कड़क आवाज में रोका, “फर्श पर मूतना है। मेरे सामने मुँह करके।" आरोही चौंक गई लेकिन और क्या कर सकती थी। वह राहुल के सामने मुँह करके बैठ गई।
लेकिन मूत नहीं पा रही थी—शर्म से। राहुल ने ताना मारा—"क्या हुआ? मूत नहीं आ रही? या मेरे सामने शर्म आ रही है?”
खुलक बोलो बोलो, 'सर, मुझे मूतना है आपके सामने।'"
आरोही रोने लगी थी—"सर... प्लीज।" लेकिन दबाव ने जीत ली। उसने वह कहा, और फिर मूतना शुरू किया। आवाज गूंजी—सर्रर्रर्र,........................।
राहुल मुस्कुरा रहा था,"देखो, कितना सुरीला मूतती हो। पूरी बाढ़ ला दी है। अरे मूतकर मजा भी आ रहा होगा।"
आरोही शर्म से मर गई, क्योंकि एक चैन की सांस या आराम का अहसास तो पेशाब करने के साथ हो ही रहा था। क्योंकि काफी देर से रोकी हुई थी। पेशाब के बाद राहुल ने कहा—"पूरी फर्श भर मूत मारा चल अब साफ करो खुद को। दिखाओ कैसे करती हो।"
आरोही बिना पानी के कैसे अपनी योनि धोती? और राहुल के सामने कैसे उठे? आरोही कोई ट्रेंड कॉल गर्ल तो थी नहीं जो फैंटेसी पूरी करने के लिए कुछ भी कर दे।
वह झिझकते हुए राहुल से फिर मिन्नत करती है, “सर, पानी चाहिए, आप चले जाइए मैं साफ करके आती हूँ करके।”
लेकिन राहुल नहीं माना, और डांटते हुए कहा, “आज नहीं तो कल मुझसे गांड़ मरवानी है, और बड़ी शर्मिली बन रही हो?” राहुल की बात सुनकर आरोही की बची खुची हिम्मत भी टूट गई और वह उठी और पानी लाकर पहले अपनी योनि धुली और फिर उठी और पहले पैंटी फिर सलवार ऊपर करने लगी।
राहुल देखता रहा। और आरोही को पास बुलाया, और उसकी योनि पर हाथ रख दिया और बोला, “चेक कर रहा हूँ कि साफ है या नहीं। लेकिन यह तो गीली है चिपचिपी सी? यह क्यों?” आरोही इस पर क्या बोलती लेकिन राहुल की हरकत के कारण वह गीली हो ही गई थी।
लेकिन राहुल ने और ह्यूमिलिएट किया "कोई नहीं जानेमान एक दिन चिकनी करके लेंगे तेरी।"
आरोही ने कपड़े पहने, और बाहर आई। राहुल ने उसे गोद में बिठाया थोड़ा सहलाया—"अच्छी लड़की हो। अब काम करो।"
लेकिन आरोही आज की इस घटना से बहुत थक गई थी। वह सोच रही थी कि अभी आगे क्या होना है? आगे क्या करेगा?
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