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Adultery मेरी खूबसूरत पत्नी खुशबू भोला भाला बुद्धू सा में और बहुत सारे ,., मर्द
रात के 12:45 बजे का समय था।


रोमांच की आग, लेकिन गिल्ट की ठंडी चुभन, जैसे कोई मीठा जहर धीरे-धीरे फैल रहा हो।


‘ये सरप्रप्राइज… सुनना… लेकिन क्यों… खुशबू जी… असलम भाई…’


मन में कन्फ्यूजन का तूफान मच रहा था


‘क्यों बुलाया हमें… नौकरों को? क्या ये अपमान है? लेकिन… मजा… सुनने का…’



वो खुद को जस्टिफाई कर रहा था,


‘हनीमून है… नशे में… पति-पत्नी… मजा करेंगे… बुराई क्या?


मैं तो हेल्पर हूँ… सुनूँगा… उत्साहित हूँ…’


नीचे लंड फिर से टाइट हो गया, हाथ काँप रहे थे, लेकिन उत्साह की लहर दौड़ रही थी


कन्फ्यूजन गहरा था, लेकिन रोमांच इतना तीव्र कि साँसें तेज़ हो गईं।

खुशबू का मैसेज मेरे फोन पर आ गया था कि बाकी के नौकरों को लेकर ऊपर आ जाओ..... वह लोग भी उत्साह से .....और क्या होगा इस बात से अनजान..... मेरे साथ ऊपर आ गए और अब हम सब लोग कमरे के बाहर खड़े हैं....


कमरा एक राजसी, कामुक गुफा बन चुका था


एसी की ठंडी हवा त्वचा पर सिहरन पैदा कर रही थी, लेकिन अंदर की गर्माहट सब दबा रही थी,


डिम लाइट्स सिल्क चादरों पर सुनहरी चमक बिखेर रही थीं,


असलम ने दरवाज़ा बंद किया—क्लिक की आवाज़ गूँजी,


और खुशबू को दीवार से सटा लिया, उसके होंठों पर गहरा किस


“जान… तू मेरी जिंदगी है… तेरी ये आँखें… ये बॉडी… मैं तेरे लिए पागल हूँ… हर रात तुझे चोदने का सपना देखता हूँ…”



असलम की आवाज़ गहरी, प्रेम से भरी, लेकिन वासना की आग से जलती हुई।


खुशबू ने उसके होंठ काटे


“असलम जी… तू मेरा राजा… तेरी ये ताकत… तेरी ये मर्दानगी… मैं तेरे लिए पागल हूँ… तेरे बिना जी नहीं सकती… आज रात… पूरी तरह अपना बना लो…”


वो चीख़ी, आवाज़ इतनी जोर की कि आसपास के कमरों में गूँज गई, दीवारें कंपा दीं।


"हां डियर वैसे भी हमारा हनीमून है .....और हनीमून पर तो हम जैसे हॉट पति-पत्नी एक दूसरे में खो ही जाते हैं ....और एक दूसरे को पूरा प्यार से नहला ही देते हैं ना..    "असलम ने कहा



"बिल्कुल असलम जी मैं आपकी हूं और आप भी मुझे अपना बना ही लीजिए"

खुशबू ने भी एकदम रोमांटिक अंदाज में कहा



खुशबू और असलम दोनों अच्छे से जानते थे कि  अमित के साथ बाकी के नौकर भी दरवाजे के ऊपर खड़े यह सारी बात सुन रहे हैं






असलम ने उसे बेड पर पटक दिया,

ऊपर चढ़ गया मिशनरी पोजीशन में,

वैसे भी खुशबू नाइटी में थी हल्के-हल्के उसके नाइटी ऊपर करके उसकी छाती को निचोड़ने लगा...


खुशबू भी उसका पूरा साथ दे रही थी और उसका सर अपने छाती के ऊपर और दबा रही थी...


साथ ही साथ वह दोनों भूखे कुत्तों की तरह एक दूसरे को लिप किस कर रहे थे.....


वह दोनों जैसे बस इंतजार नहीं कर पा रहे थे एक दूसरे के साथ घुल मिल जाने में.....


खुशबू ने नीचे से असलम का अंडरवियर निकाल कर उसे पूरा नंगा कर दिया असलम ने भी लगभग वासना से भारी हुई अपनी दिमाग का काबू खोकर खुशबू की नाइटी फाड़ने जैसी हालत में कर दी.....




कंडोम पहना,


और अंदर घुसा


“उफ्फ… कितनी टाइट… मेरी जान… तू मेरी रानी… तेरी चूत… मेरे लिए बनी है… मैं तेरे लिए जीता हूँ…”




धक्के तेज़, बेड की चरचराहट गूँजी।


खुशबू चिल्लाई


“आह… असलम जी… फाड़ दो… जोर से… तेरा लंड… कितना तगड़ा… मैं तेरी दीवानी… चोदो… आह्ह्ह… मजा… तेरे प्रेम में डूब रही हूँ…”




उसकी चीखें इतनी जोर की कि बाहर तक गूँजीं,


आसपास के कमरों में लोग जाग गए।



असलम को मजा आ रहा था


हर धक्के में खुशबू की टाइटनेस, उसकी गर्माहट, चीखें—


“तेरी चीखें… मेरी दवा… तू मेरी पागल… मैं तेरा गुलाम…”


वो बोला, छाती चूसते हुए, निप्पल्स काटते



“ये छाती… मेरी… चूसूँगा हमेशा…”


“हाँ… चूसो… काटो… दर्द… मजा… तू मेरा सब कुछ…”


वह दोनों जैसे भूल ही गए हैं कि बाकी की कोई भी दुनिया है ....वह दोनों एक दूसरे में इतने खो गए हैं कि उन्हें इस वक्त एक दूसरे की बॉडी और सेक्स के अलावा कुछ देख ही नहीं रहा है.......

असलम जितनी जोर से धक्का देता खुशबू इतनी जोर से चिल्लाती और उतना ही असलम के पीछे से उसको और अंदर आने के लिए कहती जैसे वह उसे पूरे का पूरा ख जाना चाहती हो.....


असलम ने भी एक रियल मर्द होने के नाते खुशबू को निराश नहीं किया वह भी अपनी पूरी मर्दाना बॉडी मिशनरी पोजीशन में उसके ऊपर डालकर जोर-जोर से धक्का देने लगा...

खुशबू की च** इतना पानी छोड़ रही थी कि असलम जितना बड़ा और तगड़ा लैंड भी आराम से अंदर बाहर हो रहा था......





पोजीशन चेंज—डॉगी स्टाइल,


असलम ने गांड मारी



“ये गांड… मेरी… मसलूँगा… तू मेरी रानी… तेरे लिए पागल हूँ…”


थप्पड़ की चटाक



“हाँ… मसलो… थप्पड़ मारो… मैं तेरी गुलाम… चोदो… आह्ह्ह… फाड़ो… तेरे प्रेम में मर रही हूँ…”



खुशबू की चीखें और जोर की,


कमरे की दीवारें हिल रही थीं,


बाहर तक गूँज रही थीं।



असलम को मजा चरम पर


गांड की टाइटनेस, रगड़, चीखें


“तेरी गांड… जन्नत… तू मेरी जान… हर रात यही चाहता हूँ…”


वैसे भी असलम उसकी गांड के पीछे दीवाना था वह इतनी गोरी चिकनी सॉफ्ट और सुबह थी के पीछे से उसका नजारा देखकर ही असलम अपने आप को काबू नहीं कर पाया..... वहां उसके ऊपर थप्पड़ मारते मारते उसके बाल पीछे से खींचते खींचते असलम उसे घोड़े की तरह chod रहा था.....

खुशबू भी इन सारी घटनाओं में बिना किसी परेशानी से उसका साथ दे रही थी क्योंकि वह भी अपने आप को इतने दिनों बाद एक मर्द की सौbत में देखकर जन्नत जैसा महसूस कर रही थी


रिवर्स काउगर्ल


“घूम… thirक… तेरी कमर… मेरे लिए…”


खुशबू घूमी, गांड रगड़ी



“हाँ… देखो… मैं तेरी… चोदो… आह्ह्ह… तेरे लंड में पागल हूँ…”


चीखें इतनी जोर की कि आसपास के कमरों में लोग जाग गए, दीवारें कंप रही थीं।




6 राउंड—हर पोजीशन में प्रेम की बातें


“तू मेरी जिंदगी…”


“तू मेरा राजा…”

चीखें

“फाड़ दो… जोर से… तेरा लंड… जन्नत…”


असलम का मजा


“तेरी चीखें… मेरी दवा…” खुशबू एंजॉय—“तेरा स्पर्श… मेरी आग…”


उसे रात तकरीबन 2 घंटे में असलम ने छह बार अपना गाढ़ा वीर्य उसे बड़ी साइज के कंडोम में भर दिया होगा.....




बाहर—मैं और नौकरों .... मुझे तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है


यह मैं क्या सुन रहा हूं


मुझे तो मेरे कान के ऊपर यकीन ही नहीं हो रहा था


दिल बहुत ही तेजी से धड़क रहा था


और कन्फ्यूजन चरम सीमा के ऊपर था


खुशबू और असलम अंदर एक दूसरे के साथ क्या कर रहे हैं


वह देखने की हिम्मत भी नहीं हो रही थी


लेकिन जानने की उत्सुकता भी बहुत हो रही थी


खुशबू की "चिखें" मेरे कानों में अब तक गूंज रही थी


नर्वसनेस से मेरी पूरी बॉडी कैंप पर रही थी मैं जैसे पूरा ब्लैंक हो गया था.....


ना दिलो दिमाग में कुछ सवाल हो रहा था ना कोई जवाब मिल रहा था मैं बस जैसे वहां पर था ना था एक जैसा था.......


जबकि मेरे साथ आए हुए मेरे बाकी के नौकर दोस्तों के लिए तो यह अनुभव किसी जन्नत और लॉटरी लगने से क म नहीं था....


जाहिर सी बात है होटल में काम करते हुए उन लोगों को शायद ऐसे आगे बहुत अनुभव हुए होंगे लेकिन यह पूरी तरह से अलग था कमरे के अंदर की बातचीत हम लोग बहुत अच्छे से और आराम से सुन पा रहे थे.....


जय ने फुसफुसाया,


“भाई… सुन… मैडम की चीख… ‘फाड़ दो…’

साहब… ‘गांड…’ उफ्फ… सरप्राइज ये है… सुनने का मजा… तेरी mam… कितनी वाइल्ड…”



जय की आवाज़ में वो गंदा उत्साह था,


आँखें चमक रही, साँसें तेज़, जैसे कोई कुत्ता शिकार की गंध सूँघ रहा हो, बॉडी काँप रही।



कमल ने कान लगाया,


“हाँ… ‘रेड लिंगरी…’ ‘6 राउंड…’ भाई… साहब का स्टैमिना… मैडम की thirkan… सुन… चीख…” कमल उत्साहित था,


पसीना आ रहा,



“मजा… सरप्राइज… मैडम की बॉडी… अंदर… नंगी… हम तो बस सुन रहे… लेकिन कल्पना कर… गांड मसली जा रही…”



राज ने अमित का कंधा थपथपाया,



“भाई… तू लकी है… सरप्राइज… सुनना… मैडम की गांड… साहब मसल रहे… हा हा… हम तो बस सुन रहे… लेकिन तू… कभी अंदर था… कितना लकी…”





राज हँसा, लेकिन अमित मुस्कुराया—रोमांच बढ़ा


, ‘हाँ… सुनना… एंजॉय… बुराई क्या…’


लेकिन कन्फ्यूजन बाकी



‘क्यों हमें बुलाया… अपमान? नहीं… सरप्राइज… मजा…’


उत्साह ने दबा दिया, वो खुद को कन्विंस कर रहा था,


‘डांस पार्टी के बाद… नशे में… जाहिर है… मजा… शायद असलम और खुशबू होश खो चुके हैं.....

अंदर कमरे में—खुशबू और असलम का उन्माद




अमित का मन घूम रहा था


चीखें…

‘फाड़ दो’… ‘तेरा लंड’… 6 राउंड…’


कन्फ्यूजन गहरा, लेकिन उत्साह कहीं ना कहीं एक ऐसी चीज पाने की आशा या कोशिश करना जो शायद अमित के बस में नहीं थी.....

और अचानक ही उसे कुछ ऐसी घटना याद आ गई जो


उसके साथ पहले भी हो चुकी है


बहुत बार ऐसे ही तो

असलम

सलीम

रहीम वगैरा


जब अपनी गर्लफ्रेंड को अपने फार्म हाउस पर लेकर जाते थे


अमित बाहर खड़े होते ऐसे ही सब सुनता था


और अपने आप को खुश करता था


क्योंकि उसे वक्त भी वह फार्म हाउस पर आने वाली लड़कियां उसके पहुंच से बहुत बाहर थी


और आप शायद फिर उसी तरह की घटना का पुनरावर्तन हो रहा है


लेकिन अब तो वह लड़की उसकी ही पत्नी खुशबू है


और वहां अंदर वह अपने ही एक दोस्त के साथ है


अमित को जैसे ऐसा महसूस हो रहा था कि अगर जमीन उसे जगह दे तो वही अभी उसमें sama जाए










रात के करीब 2:00 बज चुके थे। डिस्कोथीक की मस्ती और उसके बाद कमरे में असलम-खुशबू का पलंग-तोड़ सेक्स अब अंतिम दौर में था।



बेड की चरचराहट धीमी पड़ गई थी,

सिल्क चादरें गीली और उलझी हुईं, हवा में पसीने, वाइन और सेक्स की वो तीखी,


नमकीन महक फैली हुई थी।


असलम और खुशबू दोनों थक चुके थे


साँसें भारी, बॉडी पर पसीने की चमक, लेकिन चेहरों पर वो संतुष्टि की मुस्कान।



असलम खुशबू के ऊपर लेटा था,


उसकी छाती पर सिर टिका, धीरे-धीरे साँस लेते हुए—


“जान… आज रात… तूने मुझे मार डाला… 6 राउंड… तेरी चीखें… अभी भी कानों में गूँज रही हैं…”


खुशबू ने हल्के से हँसकर उसके बाल सहलाए



“असलम जी… तूने तो मुझे फाड़ दिया… लेकिन मजा… उफ्फ… तेरे बिना जी नहीं सकती…”


दोनों थके हुए थे, बॉडी में वो मीठी थकान, लेकिन प्रेम की वो गर्माहट अभी भी बाकी।

खुशबू ने बेडसाइड टेबल से फोन उठाया



हाथ काँप रहे थे, लेकिन वो जानती थी कि बाहर अमित और नौकर अभी भी खड़े होंगे।



उसने मैसेज टाइप किया, आवाज़ में वो मीठी कमांड



“अमित… तुम नीचे सर्वेंट क्वार्टर में जाकर सो जाओ… सबको ले जाना… अभी जो कुछ हुआ, उसका एक्सप्लेन कल सुबह तुम्हें अपने आप पता चल जाएगा… बस इंतज़ार करना… गुड नाइट जान… ❤️”



मैसेज सेंट हुआ।


असलम ने मुस्कुराकर कहा, “अच्छा किया… बेचारा बाहर जल रहा होगा… लेकिन कल सरप्राइज…”


खुशबू हँसी, “हाँ… कल मजा आएगा…”

बाहर अमित का फोन बजा—मैसेज देखते ही उसका दिल धक से हो गया।



‘कल सुबह… अपने आप पता चलेगा… सरप्राइज…’



मन में कन्फ्यूजन का तूफान और तेज़ हो गया—



‘क्या हुआ अंदर… चीखें… 6 राउंड… XL कंडोम… और कल सरप्राइज?’ लेकिन मैसेज में वो दिलासा था, वो ❤️, जिसने उसे थोड़ा शांत किया।



वो जय, कमल और राज को बोला,



“चलो… नीचे… मैडम ने कहा… सोने…” लेकिन उसकी आवाज़ काँप रही थी,



मन ऊपर के कमरे में अटका हुआ था



‘अंदर क्या हो रहा होगा… अभी भी… थके होंगे… लेकिन…’ नीचे उतरते हुए उसका दिल और दिमाग ऊपर ही था—खुशबू की चीखें कानों में गूँज रही थीं, असलम की गरज, सिल्क की सरसराहट, बेड की चरचराहट—सब कुछ याद आ रहा था, रोमांच और कन्फ्यूजन मिश्रित।




सर्वेंट क्वार्टर में पहुँचकर सब अलग-अलग बेड पर लेट गए, लेकिन नींद कहाँ आनी थी।


जय ने सबसे पहले शुरू किया


अंधेरे में हाथ नीचे,


“भाई… सुन… मैडम की चीखें… ‘फाड़ दो’… साहब का XL… गांड मसली… छाती दबाई… उफ्फ… मैं तो हिला रहा हूँ…” कमल हँसा, “हाँ… ‘6 राउंड’… मैडम थक गई होंगी… लेकिन मजा… कल सरप्राइज क्या होगा?” राज बोला, “मैडम की गांड… सिल्क में… थप्पड़… चटाक… मैं तो सोच-सोचकर…” सब हँसे, अंधेरे में हाथों की हलचल की आवाज़ें—



हिलाने की, सिसकारियाँ दबी हुईं। अमित चुप था, लेकिन उसका मन ऊपर था



‘खुशबू जी… असलम भाई… चीखें… मजा…’ वो भी हिला रहा था, रोमांच चरम पर, लेकिन कन्फ्यूजन



“कल… सरप्राइज… क्यों बुलाया था हमें?” सब नौकर ऊपर हुई घटनाओं को याद करके, चीखें, थप्पड़, धक्के—सब कल्पना करके हिला रहे थे, मजा ले रहे थे, जैसे कोई मुफ्त का शो देख लिया हो
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RE: मेरी खूबसूरत पत्नी खुशबू भोला भाला बुद्धू सा में और बहुत सारे ,., मर्द - by Namard pati - 07-01-2026, 12:01 PM



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