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Adultery मेरी खूबसूरत पत्नी खुशबू भोला भाला बुद्धू सा में और बहुत सारे ,., मर्द
नीचे लॉबी और डांस पार्टी एरिया में पहुँचते ही, सबकी नज़रें असलम और खुशबू पर टिक गईं।



[Image: In-Shot-20260106-190012823.gif]






लाइट्स डिम थीं,


म्यूजिक की बीट्स हवा में कंपन पैदा कर रही थीं,



हवा में वाइन और परफ्यूम की मिश्रित महक। असलम का तगड़ा बॉडी,

व्हाइट शर्ट में चमकता हुआ,



और खुशबू का पिंक सिल्क ड्रेस



स्लिट से झलकती जाँघें, नेकलाइन से उभरती छाती—दोनों की बॉडी लैंग्वेज परफेक्ट थी:



असलम का हाथ खुशबू की कमर पर,


वो उसे अपनी तरफ़ खींचता हुआ,



खुशबू का सिर उसके कंधे पर, हँसी की वो मीठी ध्वनि।


उनका बिहेवियर—असलम का राजसी अंदाज़,


खुशबू की रानी जैसी चाल—


केमिस्ट्री इतनी तीव्र कि हवा में बिजलियाँ-सी दौड़ रही लग रही।


हनीमून कपल्स घूर रहे थे,


कॉलेज लड़के आँखें फाड़े हुए,


स्टाफ मुस्कुरा रहा था।


“वाह… वो कपल… कितने हॉट…” किसी ने फुसफुसाया।



लेकिन डिस्कोथीक की तरफ़ बढ़ते ही वो चमक तेज़ हो गई


एक भव्य इमारत, बाहर से पूरी तरह कांच से ढकी हुई,


जैसे कोई विशालकाय क्रिस्टल पैलेस।



वो कांच इतना साफ़ और पारदर्शी था कि बाहर खड़े लोग अंदर का हर दृश्य देख सकते थे


रंग-बिरंगी लाइट्स की झलक, डांस फ्लोर पर घूमती बॉडीज़,

म्यूजिक की बीट्स जो कांच से टकराकर कंपन पैदा कर रही थीं।


लेकिन वो कांच एक दीवार था


अंदर की दुनिया ऊँची, चमकदार, अमीरों की;



बाहर की दुनिया नीची, साधारण, आउट ऑफ़ लीग महसूस कराने वाली।



डिस्कोथीक हाई-एंड था—सॉफ्ट वुडन फ्लोर, गोल्डन चैंडेलियर्स जो क्रिस्टल की तरह चमक रहे थे, बार काउंटर पर चमचमाती बॉटल्स, और एयर में वो लक्ज़री परफ्यूम की महक जो बाहर वालों को जलन दिला देती। म्यूजिक की धुनें बाहर तक गूँज रही थीं—बीट्स इतनी तीव्र कि दिल की धड़कन से ताल मिला लेतीं, लेकिन कांच की वो दीवार सब कुछ दूर रखती।





मैं असलम और खुशबू के साथ पहुँचा था


मेरा मन उत्तेजना से भरा था,


लेकिन गिल्ट की वो राख अभी भी सुलग रही थी। तभी मैनेजर आया


एक स्मार्ट सूट वाला आदमी, मुस्कुराता हुआ, लेकिन आँखों में वो प्रोफेशनल सख्ती।




“सर… मैडम… वेलकम… लेकिन सॉरी… ये डिस्कोथीक हाई-एंड है… प्राइवेट… नौकरों की एंट्री नहीं… सिक्योरिटी चेक… सिर्फ़ गेस्ट्स…”





मैनेजर ने विनम्रता से कहा, लेकिन शब्दों में वो दीवार साफ़ थी।



असलम ने सिर हिलाया,



“ठीक है सर… हम समझ गए…” लेकिन खुशबू ने मुझे देखाउसकी आँखों में वो ममता थी, लेकिन साथ ही वो शैतानी चमक।

खुशबू ने मेरे कंधे पर हाथ रखा,


बहुत प्यार से, लेकिन आवाज़ में वो दुख था



जैसे वो सच में शर्मिंदा हो।


“ओह जान अमित… सॉरी ना… हम तो शर्मिंदा हो गए… तुझे अंदर नहीं ले जा पाएँगे… ये तो प्राइवेट है… लेकिन तू बाहर ही रुको ना… कांच से सब देख लेना… हम डांस करेंगे… तू फोटोज ले लेना… तेरा कैमरा तो हमेशा तैयार है ना?



हम तेरे लिए ही तो सब कर रहे हैं… तू बस खुश रह… इंतज़ार करना… बाद में मिलेंगे…”




उसकी आवाज़ इतनी मीठी थी, जैसे कोई मालकिन अपने पालतू को सांत्वना दे रही हो



लेकिन अंदर से वो सोच रही थी,



‘बेचारा… बाहर खड़ा… कांच की दीवार के पीछे… हम अंदर… राजा-रानी…’



असलम ने भी हाथ बढ़ाया, मेरे कंधे पर थपथपाया उसका स्पर्श मज़बूत था, लेकिन दोस्ताना।



“हाँ भाई… सॉरी यार… तू बाहर ही… लेकिन देखना… हम तेरी बीवी को डांस करते… मजा आएगा… तू फोटोज ले… बाद में दिखाना… ठीक है?”



उसके शब्दों में वो हल्का तंज था, लेकिन मुस्कान के पीछे।

मैं भारी मन से रुका



ना चाहते हुए भी, लेकिन गिल्ट और रोल ने दबा दिया।



‘हाँ… मेरा रोल… बाहर… फोटोज लेना…’ मन में जलन थी



‘मैं अंदर क्यों नहीं?’ लेकिन परवाह किए बिना, मैंने सिर हिलाया,



“हाँ… हाँ… जाओ… मजा करो… मैं बाहर ही… फोटोज ले लूँगा…”



वो दोनों हाथ में हाथ डाले अंदर चले गए—कांच का दरवाज़ा बंद होते ही, वो दुनिया मेरे लिए बंद हो गई। मैं बाहर खड़ा रहा, कांच से झाँकता हुआ—दिल भारी, लेकिन उत्तेजना का वो ट्विस्ट… ‘वो अंदर… डांस… असलम के साथ…’









अंदर जाते ही, डिस्कोथीक की लाइट्स ने उन्हें घेर लिया


रंग-बिरंगी, घूमती हुई, बीट्स इतनी तीव्र कि हड्डियाँ कँपकँपा देतीं। म्यूजिक की धुनें हवा में कंपन पैदा कर रही थीं, वाइन की तीखी महक, सिगारेट का धुआँ, और पसीने की हल्की-हल्की नमकीन गंध—सब मिश्रित होकर एक मादक माहौल बना रही। असलम और खुशबू जैसे राजा-रानी प्रवेश कर गए






मैं बाहर कांच से झाँक रहा था—दिल भारी, लेकिन उत्तेजना चरम पर। ‘वो… असलम के साथ… चमक रही है… मेरा काम…’ संतुष्टि थी, लेकिन खालीपन गहरा।






उसकी पिंक सिल्क ड्रेस की शाइनी फिनिश लाइट्स में चमक रही थी,


नेकलाइन डीप V-शेप से छाती का उभार झलक रहा था,


सिल्क का नरम स्पर्श हवा में सरसराता हुआ,


स्लिट से जाँघें हर स्टेप पर नाच रही थीं।



असलम का हाथ उसकी कमर पर,


बॉडी लैंग्वेज डोमिनेंट—


वो उसे अपनी तरफ़ खींचता,

[Image: In-Shot-20260106-185508090.gif]


मैंने ही खुशबू को वहां ड्रेस पहनाया था..

. इसलिए मुझे उसे ड्रेस की खूबी बड़ी अच्छे से पता थी कि ....जैसे ही वहां अपने पैर ऊपर नीचे करके डांस करेगी..... उसके अंदर पहने हुए पेटी मुझे आसानी से दिख जाएगी .....मैं बस उसी झलक के इंतजार में वही बाहर खड़ा हुआ यह देख रहा था.....

मैं बस उसे पल का इंतजार किया करता था कि जब खुशबू असलम से चिपक कर डांस करें और मुझे उसके अंदर पहनी हुई पेटी अच्छे से देखने को मिल जाए...

खुशबू हँसकर उसके सीने पर सिर टिकाती।


उनका बिहेवियर परफेक्ट था

असलम का राजसी अंदाज़, कमर पकड़कर घुमाना,


खुशबू की रानी जैसी चाल, कूल्हों की मोहक लहर—


केमिस्ट्री इतनी तीव्र कि हवा में बिजलियाँ-सी दौड़ रही लग रही।


मर्दों की नज़रें खुशबू की बॉडी पर टिकी थीं


किसी का मुंह सूख गया, किसी की आँखें फटीं, मन में कल्पना घूम रही


‘वाह… ये लड़की… सिल्क में लिपटी… गांड हिल रही… छाती उछल रही… काश…’


लेकिन खुशबू बिंदास और कॉन्फिडेंट थी


कदमों में वो स्वाभाविक लहर, चाल में वो मोहकता, आँखों में वो चमक—क्योंकि जानती थी कि असलम जैसा रियल मर्द उसके साथ है।



‘ये सब घूर रहे हैं… लेकिन मैं असलम की हूँ… वो मेरा शौहर… ये पावर… उफ्फ…’



वो मन ही मन सोच रही थी, असलम के होल्ड में और चिपक गई।



असलम ने उसे डांस फ्लोर पर ले जाकर घुमाया,


सिल्क की सरसराहट म्यूजिक से ताल मिला रही, और सबकी नज़रें चिपक गईं



उनकी केमिस्ट्री, वो चिपकाव, वो हँसी… सब कुछ परफेक्ट।








डांस फ्लोर पर पहुँचते ही, माहौल एक भयावह, मादक तूफान बन गया था


जैसे कोई जीवंत, साँस लेने वाला राक्षस सबको निगल लेना चाहता हो।


लाइट्स की रंग-बिरंगी धाराएँ हवा में नाच रही थीं, नीली चमक जो त्वचा पर सिहरन पैदा कर देती, लाल लहरें जो खून की गर्माहट को भड़का देतीं, बैंगनी छायाएँ जो रहस्यमय उत्तेजना भर देतीं, हरी झलकें जो एक जंगली, प्राकृतिक भूख जगातीं



हर कलर की लहर फ्लोर पर सरक रही थी, लोगों की त्वचा पर चिपक रही थी,


जैसे कोई रंगीन ज्वाला सबको जला रही हो। म्यूजिक की बीट्स इतनी तीव्र थीं कि हड्डियाँ कँपकँपा देतीं


बास का गहरा धमाका सीने में घुसकर दिल को दबा देता, ड्रम की थापें साँसों को तेज़ कर देतीं, हाई नोट्स कान में गूँजकर सिर को चकरा देते,



जैसे कोई जादू की लहर हर कोशिका को उत्तेजित कर रही हो। हवा गर्म और भारी थी



वाइन की तीखी, मीठी महक मिश्रित होकर सिगारेट के धुएँ की कड़वाहट से, पसीने की नमकीन गंध से, और परफ्यूम की राजसी मादकता से



सब कुछ एक दूसरे में घुलकर एक नशे की तरह साँसों में उतर रहा था, नाक में घुसकर सिर भन्ना देता, साँस लेते ही सीने में एक सिहरन दौड़ जाती, जैसे हर साँस वासना का इंजेक्शन हो।




डांस फ्लोर पर लोग थे


कपल्स चिपककर नाच रहे थे,


बॉडीज़ रगड़ रही थीं,


सिल्क और साटन की सरसराहट,

पसीने की चिपचिपी फील


, हँसी की मीठी ध्वनियाँ—


किसी लड़की की चीख़,


“ओह्ह… जोर से!”


किसी लड़के की गरज,


“आ… चिपक…”



सब कुछ एक कामुक सिम्फनी बना रहा, हवा में वो गर्माहट—पसीने से नम, लेकिन उत्तेजक, जैसे हर साँस में वासना घुली हो। कोने में सॉफा एरिया—लेदर के नरम कुशन,

जहाँ कपल्स चिपककर बैठे थे,

हाथों का सहलाना,

होंठों का स्पर्श—


सब कुछ दिख रहा था,


लेकिन कांच की दीवार से बाहर वालों के लिए बस एक सपना, एक जलन भरा सपना।







खुशबू को अच्छे से वाकिफ़ था कि बाहर कांच की दीवार के पीछे अमित खड़ा होकर सब देख रहा




वो जानबूझकर असलम से और चिपक गई,



उसके सीने पर सिर टिका दिया,


कमर उसके हाथों में लपेट ली।



“असलम जी… ये बीट्स… कितनी तेज़… मुझे और चिपका लो…”




[Image: In-Shot-20260106-185528313.gif]



असलम ने मुस्कुराकर उसे और कस लिया,



“हाँ जान… चिपक… सब देख रहे हैं… लेकिन तू मेरी है…”



वो बोला, और अल्कोहल का ग्लास उठाया


खुशबू ने भी एक घूँट लिया, वाइन की तीखी, मीठी गर्माहट गले से उतरकर सीने में फैल गई, सिर चकराने लगी, लेकिन एंजॉयमेंट बढ़ गया।




“ये वाइन… कितनी हॉट… जैसे तुम्हारा टच…” खुशबू हँसी, और नशे में डूबकर असलम से चिपक गई—





अल्कोहल की वो गर्माहट बॉडी में फैल रही थी, सिर हल्का, लेकिन वासना चरम पर।

असलम को ये मौका मिला तो वो फायदा उठाने से नहीं चूका


पब्लिक में, सबके सामने, वो जानबूझकर खुशबू से चिपककर डांस करने लगा।



उसके हाथ खुशबू की कमर पर,



बॉडी को अपनी तरफ़ दबाता हुआ—



सिल्क का नरम स्पर्श उसके पाम्स पर रगड़ रहा था,


खुशबू की छाती उसके सीने से चिपक गई,


हर बीट पर दबाव बढ़ता।



“जान… ये सिल्क… कितना स्लिपरी… डांस में रगड़… उफ्फ…”



[Image: In-Shot-20260106-185917254.gif]


वह पिक सिल्की ड्रेस में खुशबू ने जो हाथ में शादी का जोड़ा पहना था वह चार चांद लग रहा था.






असलम गरजा, और खुशबू की गांड पर हल्का-सा थप्पड़ मारा


चटाक की आवाज़ म्यूजिक में घुल गई, लेकिन सबने सुनी।



“असलम जी… हाँ… थप्पड़ मारो… सब देख रहे हैं… लेकिन मैं तुम्हारी हूँ…”



खुशबू चीख़ी,


लेकिन हँसकर,


और असलम ने उसे घुमाया,



उसके होंठों पर किस कर दिया



गहरा, जीभें लिपटती हुईं,


वाइन का स्वाद मुँह में फैल गया।
खुशबू और असलम ने इतना डीप लिप किस किया के खुशबू की लाल रंग की लिपस्टिक सारी असलम के होंठ पर लग गई.......





असलम ने फिर छाती दबाई



हाथ सिल्क के ऊपर से सरकता हुआ


, निप्पल्स की शेप महसूस करते हुए—


“ये छाती… मेरी… डांस में दबाऊँगा…”



वो फुसफुसाया, और खुशबू ने सहयोग दिया,


सीने को आगे किया,



“हाँ… दबाओ… सबके सामने… अमित देख रहा होगा… लेकिन मजा आ रहा है…”



असलम ने गांड मसली


उँगलियाँ सिल्क पर दबाव डालतीं,


थप्पड़ की चटाक—

[Image: In-Shot-20260106-185903195.gif]



“ये गांड… मेरी… रगड़ूँगा…”


सबके सामने,


लेकिन जताने के लिए कि पति-पत्नी हैं।





खुशबू पूरा सहयोग दे रही थी


नशे में डूबी,


अल्कोहल की गर्माहट बॉडी में फैल रही थी,


सिर हल्का, लेकिन वासना चरम पर।



वो असलम से चिपककर घूमी, कमर मोड़कर गांड रगड़ी,


“असलम जी… और जोर से… थप्पड़… दबाओ… सब देख रहे हैं… लेकिन मैं तुम्हारी बीवी हूँ…”



वो चीख़ी, हँसकर, और असलम ने छाती दबाई,




“हाँ… मेरी बीवी… ये सब मेरा हक…”



वो गरजा मैं बाहर से देख रहा था—उसका रोमांच चरम पर,



(लेकिन मेरी और खुशबू की जो पिछली कन्वर्सेशन हुई थी .....वहां पर खुशबू ने सबकॉन्शियसली मेरे दिमाग में ऐसा सब कुछ डाल दिया था .......कि किसी भी तरह का शक और सवाल करने की मेरी कैपेबिलिटी ही नहीं रही थी ......मैं अपने आप को ही समझ रहा था कि......" यह तो बहुत सामान्य सी बात है अब disco है .....और जाएंगे कपल अगर अंदर तो ....साथ में चिपक कर डांस तो करेगी ही ना.....)





Mai कांच की दीवार के ठीक बाहर खड़ा था, उसके हाथ कैमरा पकड़े हुए थे, लेकिन क्लिक का बटन दबाने का हौसला ही नहीं हो रहा था।



डिस्कोथीक की लाइट्स बाहर से भी चमक रही थीं




नीली, लाल, बैंगनी की धाराएँ कांच पर सरक रही थीं, जैसे कोई रंगीन आग बाहर तक फैल रही हो, लेकिन वो दीवार सब कुछ रोक रही थी।


हवा में म्यूजिक की बीट्स गूँज रही थीं—बास का गहरा धमाका सीने में कंपन पैदा कर रहा था, ड्रम की थापें पैरों तले फ्लोर को कँपा रही थीं, और हाई नोट्स कान में घुसकर सिर को भन्ना दे रहे थे। हवा गर्म और भारी थी





जय उसके बगल में खड़ा था,


बीयर का कैन हाथ में,


आँखें कांच पर टिकी हुईं।


“भाई अमित… देख… तेरी मैडम… उफ्फ… कितनी चमक रही है… सिल्क में लिपटी… डांस फ्लोर पर… साहब के साथ चिपकी… वो थप्पड़… चटाक… सुना?

गांड पर… हा हा… साहब तो जानवर हैं


रे… मैडम की छाती दबा रहे हैं…


नेकलाइन से उभर आई…

तू बाहर खड़ा… लेकिन मजा आ रहा है ना?”



जय की आवाज़ में वो अश्लील उत्साह था, आँखें चमक रही थीं।



अमित ने हल्के से मुस्कुराया—मन में रोमांच की एक लहर दौड़ गई, लेकिन साथ ही वो बाहरीपन—‘हाँ… मैं बाहर… वो अंदर…’


लेकिन जय के कमेंट्स सुनकर उत्तेजना बढ़ गई, जैसे कोई गंदी सच्चाई सुनकर मजा आ रहा हो।





अंदर, डांस फ्लोर पर खुशबू असलम से चिपककर घूम रही थी



सिल्क ड्रेस की सरसराहट म्यूजिक की बीट्स से ताल मिला रही थी,


लाइट्स उसके चेहरे पर नाच रही थीं,


पिंक सिल्क पर रंगीन छायाएँ सरक रही थीं।



असलम का हाथ उसकी कमर पर, बॉडी को दबाता हुआ—हर थाप पर छाती उसके सीने से रगड़ रही थी,



सिल्क की चिकनाहट त्वचा पर फिसल रही।


“जान… ये बीट्स… तेरी साँसों से ताल मिला रही हैं… चिपक… और चिपक…”


असलम गरजा, और खुशबू ने सहयोग दिया, कमर मोड़कर गांड रगड़ी—




“हाँ… रगड़ो… सब देख रहे हैं… लेकिन मजा… उफ्फ…”



असलम ने छाती दबाई—हाथ सिल्क के ऊपर से सरकता, निप्पल्स की शेप महसूस करते हुए—






“ये… मेरी… दबाऊँगा…”


खुशबू चीख़ी,


“दबाओ… जोर से… अमित देख रहा होगा… लेकिन मैं तुम्हारी…”


गांड पर थप्पड़—चटाक की आवाज़, सिल्क पर कंपन— “ये… मेरी… मसलूँगा…” असलम ने कहा, और खुशबू ने पीछे मुड़कर होंठ चूमे—“हाँ… मसलो… पति-पत्नी हैं हम… सबके सामने…”




मैं बाहर से देख रहा था


कांच पर हाथ रखे, साँसें भाप बना रही—रोमांच इतना कि नीचे लंड टाइट हो गया,


लेकिन बाहरीपन का दर्द सीने को चीर रहा था।




‘वो… इतनी खुश… चंचल… मस्ती में… असलम के साथ… मेरे साथ कभी नहीं…



’ खुशबू का चेहरा चमक रहा था,


हँसी की वो लहरें, उत्साह की वो चमक



जैसे वो आज़ाद हो गई हो।



अमित के साथ वो कभी इतनी बिंदास नहीं रहती—हमेशा संकोच, लेकिन असलम के साथ…



वो उड़ रही थी।


‘मैं… बाहर… वो अंदर…’


जय ने कहा,



“भाई… देख… मैडम की thirkan… कमर मोड़ रही… सिल्क रगड़ रही… साहब की बॉडी से… उफ्फ… छाती दब गई… गांड पर थप्पड़… चटाक… … कितनी रंडी लग रही है… मजा आ रहा है ना?”




मैं मुस्कुराया, रोमांच की लहर दौड़ गई—‘हाँ… मजा…’ लेकिन आँखें नम हो गईं।



की तभी असलम ने देखा वह जो कुछ 4 कॉलेज के लड़के थे



जो सुबह से खुशबू के ऊपर अपनी नजर लगाए हुए थे


वह लोग भी पूरे नशे में थे और वहीं पर डांस कर रहे थे


और जैसे कोशिश कर रहे थे या किसी मौके के इंतजार में थी कि वह कैसे खुशबू के करीब आए और उसके साथ डांस करें



असलम एक रियल मर्द था


उसे अच्छे से पता था कि जब तक वह वहां रहेगा सारी स्थिति उसके नियंत्रण में रहेगी


उसने उन चार लोगों को इशारों से खुशबू के पास आकर डांस करने के लिए कहा



उन लोगों को तो जैसे ऐसा महसूस हुआ कि उन लोगों की लॉटरी निकल गई


इशारा करने की ही देर थी कि तुरंत ही वह चार लोग खुशबू के एकदम करीब आकर चिपक कर उसके साथ डांस करने लगे



खुशबू भी तुरंत ही समझ गई कि यह सारा प्लान असलम का ही है


वैसे भी उसे किसी भी तरह से डरने की जरूरत नहीं थी


जब तक वहां पर असलम था


और उसने मन ही मन यह सोचा कि वह प्रेक्टिस ही कर ले


क्योंकि वापस जाकर भी अमित के बाकी के दोस्तों के साथ भी उसे आज नहीं तो कल हम बिस्तर होना ही है


तो वह इस स्थिति का अच्छे से फायदा उठाकर मजा कर लेना चाहती थी


उसे यह बात का भी अच्छे से पता था कि यह सारी घटना भी अमित बाहर खड़े हुए देख रहा होगा बेचारा लेकिन कुछ कर नहीं आएगा या कुछ बोल नहीं पाएगा



वो उत्साहित होकर आगे बढ़ी, बिना विरोध, बल्कि खुद को पेश करते हुए


“आओ… डांस करते हैं…”



[Image: In-Shot-20260106-185735246.gif]



लड़कों की तो लॉटरी लग गई—वो चिल्लाए,


“वाह बेबी!” और खुशबू को चारों तरफ़ से घेर लिया।



चारों लड़के—तेज़, मस्कुलर, शराब के नशे में—खुशबू को घेर लिया,


[Image: In-Shot-20260106-185634278.gif]




म्यूजिक की बीट्स पर। एक ने कमर में हाथ डाल दिया


उँगलियाँ सिल्क पर सरकतीं,


कमर को मसलते हुए—


“बेबी… तेरी कमर… कितनी पतली… मसल दूँ?”



दूसरा छाती के हिस्से को सहलाने लगा


हाथ नेकलाइन पर सरकता,


उभार को दबाता—



“उफ्फ… ये छाती… सिल्क के नीचे… कितनी सॉफ्ट…”



तीसरा जाँघों के साथ मस्ती करने लगा


स्लिट में हाथ डालकर, जाँघों को रगड़ता



“ये जाँघें… स्मूथ… डांस में रगड़…” चौथा गांड को दबा रहा था

[Image: In-Shot-20260106-185619945.gif]




उगलियाँ सिल्क पर दबाव डालतीं,


थप्पड़ मारता

“गांड… किलर… दबा दूँ?”


खुशबू सबको सब कुछ करने दे रही थी—हँसकर, चिपककर, थिरकन लेते हुए

“हाँ… दबाओ… मसलो… मजा आ रहा है…”


पूरी मस्ती से इंजॉय कर रही थी, नशे में डूबी, असलम की नज़रों में।

असलम मुस्कुराता रहा,


‘हाँ… तैयार हो जा… शहर में सलीम, रहीम… सबके साथ…’




और न जाने क्यों शायद यह पूरा इत्तेफाक था..... लेकिन जब खुशबू उन चार लड़कों के साथ डांस कर रही थी ......तब मेरी कल्पना में तो मैं अपने ही दोस्त सलीम असलम रहीम को ही वहां पर उन लोगों की जगह पर देखा था ....वह कल्पना.... वह इत्तेफाक ....मुझे बहुत ही ज्यादा रोमांचित कर रहा था.......



थोड़ी देर वहां पर इसी तरह से उन सबके साथ डांस करने के बाद और थोड़ा थक कर जब


डिस्कोथीक से बाहर निकलते ही,
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RE: मेरी खूबसूरत पत्नी खुशबू भोला भाला बुद्धू सा में और बहुत सारे ,., मर्द - by Namard pati - 07-01-2026, 11:49 AM



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