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Adultery मेरी खूबसूरत पत्नी खुशबू भोला भाला बुद्धू सा में और बहुत सारे ,., मर्द
उसके शब्द डोमिनेंट थे

कॉन्फिडेंट, जैसे कोई रानी अपने नौकर को ऑर्डर दे रही हो—


लेकिन मीठे लहजे में, गिल्ट डालते हुए।



‘हाँ… मेरा रोल… हेल्पर… नौकर जैसा… बिना सवाल…’


मन में एहसास हुआ, शक एकदम खत्म हो गया—अब आगे सवाल करने का ख्याल ही नहीं आया। गिल्ट इतना था कि मैं सिर हिला दिया


, “हाँ… हाँ खुशबू जी… मैं… समझ गया… अब कभी नहीं पूछूँगा… तुम्हारी खुशी… बस… मैं… अपना रोल निभाऊँगा…”


सीने में वो भारीपन अब शांति में बदल गया,



खुशबू ने फिर अपना पक्ष रखा


अब थोड़ा और डिटेल में, लेकिन डोमिनेंट टोन में, ताकि कोई शक बाकी न रहे।


वो मेरी आँखों में देखकर बोली,


“और जान… और अगर तुम सोच रहे थे कि मैं जय को ऊपर क्यों बुलाया तो ये भी बता दूँ…


मैंने ऊपर से देखा था…

तू नीचे उन नौकरों के साथ एंजॉय कर रहा था…

जय, कमल…

सबके साथ हँस-मज़ाक…

मैंने सोचा, तुझे डिस्टर्ब न करूँ…

तू तो अब उनके साथ ही तो खुश है ना…


नीचे,

उन जैसे लोगों के साथ…

मैं तो ऊपर,

असलम जी जैसे  लोगों के साथ…


तुझे परेशान क्यों करूँ?


तू तो अब उनका ग्रुप है… नौकरों का…

मस्ती कर…

लेकिन हम…

हम ऊपर… …”

उसके शब्दों में वो इनडायरेक्ट तंज था


मुझे नीचा दिखाने का,


जैसे कह रही हो कि अब तू निचले तबके का है, असलम जैसे ऊँचे स्लिम मर्दों का नहीं

मन में एक चुभन हुई—


‘हाँ… मैं तो नीचे था… उनके साथ… लेकिन वो ऊपर…’ लेकिन गिल्ट इतना था कि विरोध नहीं कर पाया।




फिर वो बोली,


“और ब्रा-पैंटी… वो भी जानबूझकर जय के हाथों से भेजी… क्योंकि मुझे अच्छे से पता है… तुम मेरे पीछे कितना दीवाना है…

कितना पागल…

मेरी उतरी हुई चीजें छूकर,

सूंघकर तुझे रोमांच महसूस होता है ना?


मैंने सोचा… तुझे खुश करने के लिए… ये बहाना अच्छा रहेगा… तू अकेले में… वो महसूस कर… लेकिन खुश हो जा… ये सब तेरे लिए ही तो…”



उसके शब्द मीठे थे, लेकिन डोमिनेंट—जैसे वो मेरी कमजोरी को जानती हो,


और उसे हथियार बना रही हो।


‘हाँ… वो सही कह रही है… मुझे तो मजा आया था…’ मन में रोमांच की याद आई, शक और पिघल गया।

अंत में, वो कॉन्फिडेंट होकर, डोमिनेंट टोन में बोली,


“लेकिन अमित… अब हर बार ये एक्सप्लेनेशन नहीं दूँगी…

तुम्हें समझ जाना चाहिए…

तुम्हारा रोल क्या है इस हनीमून में…


तू हमारा नौकर है…

हेल्पर…

फोटोग्राफर…

जो भी कहें, वैसा कर…

बिना शक, बिना सवाल…

मैं और असलम जी पति-पत्नी हैं…

वैसा ही बर्ताव करेंगे…

ऊपर रहेंगे…

तुम नीचे…

सर्विस करेगा…

ये तुम्हारा काम है…

राजा-रानी का नौकर जैसा…

लेकिन प्यार से… समझा?


अब से कोई सवाल नहीं…


ये हमारी शादी के लिए…

तेरी खुशी के लिए… वरना… सब खत्म…"


” उसके शब्दों में वो कमांड थी, आँखों में वो सख्ती

लेकिन प्यार का आवरण। मन में एहसास हुआ


‘हाँ… मेरा रोल… नौकर जैसा… बिना सवाल…’ शक एकदम खत्म हो गया, अब आगे कभी सवाल करने का हौसला ही नहीं बचा। गिल्ट इतना था कि मैं सिर हिला दिया, “हाँ… समझ गया… अब कभी नहीं…”





खुशबू ने मुस्कुराकर मेरे गाल सहलाए



, “अच्छा लड़का…  कोई बात नहीं… अब चिंता मत करो… जाओ नीचे… रेस्ट कर लो… शाम को डांस पार्टी में मिलते हैं… मैं तुम्हारे लिए डांस करूँगी… तू बस खुश रह… यही मेरी खुशी है…”





खुशबू ने मेरे गाल सहलाए, उसका स्पर्श इतना नरम था कि वो गिल्ट की आग को और भड़का रहा था—


जैसे वो जानती हो कि मैं पहले ही खुद को दोषी मान चुका हूँ।


“ठीक है खुशबू जी… अब मैं… नीचे चला जाऊँगा…” मैंने धीमे से कहा, आँखें नीचे झुकाए, जैसे कोई बच्चा सज़ा कबूल कर रहा हो।




खुशबू ने मुझे दरवाज़े तक छोड़ा, लेकिन जाते-जाते उसके चेहरे पर वो शैतानी मुस्कान लौट आई—


वो जानती थी कि एक छोटा-सा “हड्डी का टुकड़ा” डाल देना है,

ताकि मेरा गिल्ट और खालीपन मीठे रोमांस में बदल जाए,

और मैं फिर से उसके जाल में फँस जाऊँ। वो मेरे कान के पास झुकी,

उसकी साँसें गर्म और परफ्यूम की खुशबू से भरी हुईं मेरे गाल पर लगीं, और फुसफुसाई,


“जान… जाते-जाते एक बात… पिछले दो दिन से तू मुझे देख-देखकर हीला रहा है ना?


वो फोटोज…


वो बीच वाली मस्ती…


तू अकेले में…

हिलाता रहता है…

आज मैं तुझे हिला दूँगी…



जब भी समय मिलेगा…"


लेकिन अभी तो पहले मुझे शाम की डांस पार्टी के लिए असलम जी के साथ जाने के लिए अच्छे से तैयार होना पड़ेगा… "

कपड़े!!!

, मेकअप…!!!!

सब…!!!!!


तो तू शाम को ऊपर आ जाना…!!!!


मुझे तैयार होने में हेल्प करने के लिए…!!!!


तू तो मेरा प्यारा हेल्पर है ना?

ठीक है?”




उसके शब्दों में वो मीठी शरारत थी—जैसे कोई मालकिन अपने पालतू को हड्डी फेंक रही हो।




“हिला दूँगी…”



ये शब्द मेरे कान में गूँज गए,


एक झटका-सा लगा—


शक का काँटा भूल गया, गिल्ट की जगह एक अचानक उत्तेजना ने ले ली।


‘वाह… वो जानती है… मेरी कमजोरी… शाम को ऊपर… तैयार होने में हेल्प… बिकिनी वाली झलक… उफ्फ…’


मैं तो जैसे पागलों की तरह खुश हो गया—



एक तरफ़ मैं अपने ही पत्नी पर शक कर रहा था, गिल्ट में डूबा हुआ था, दूसरी तरफ़ वो मेरी खुशी के लिए सामने से सोच रही है,


मुझे मजा देने का प्लान कर रही है।


मन में एक मीठी लहर दौड़ गई—



‘खुशबू… कितनी परफेक्ट है… शक के बाद भी… मेरे लिए… हेल्पर… लेकिन शाम को… वो…’




खालीपन भर गया, गिल्ट अब एक ट्विस्टेड रोमांस में बदल गया—


अपमान में ही वो उत्तेजना, जो नीचे लंड को हल्का-सा टाइट कर रही थी।


“हाँ… हाँ खुशबू जी… मैं आऊँगा… शाम को… हेल्प करूँगा…”


मैंने उत्साहित होकर कहा, आँखें चमक रही थीं, जैसे कोई बच्चा गिफ्ट पाकर।





खुशबू ने हल्के से हँसकर मेरे गाल पर एक चुम्बन दिया


उसके होंठों की नमी मेरी त्वचा पर लगी, एक मीठी सिहरन दौड़ गई।



“अच्छा लड़का… अब जाओ… इंतज़ार मत करना… शाम को…”


वो बोली, दरवाज़ा बंद करते हुए। मैं नीचे उतरता हुआ, मन में उसी का ख्याल घूम रहा था—



‘शक गलत था… वो मेरे लिए ही तो… शाम को… तैयार होने में… हेल्प… उफ्फ…’


गिल्ट अब एक मीठे अपराधबोध में बदल गया था, और खालीपन भर गया था उस रोमांच से जो शाम का वादा कर रहा था।





शाम ढल चुकी थी।


रिसोर्ट की लाइट्स धीरे-धीरे चमकने लगी थीं—सूरज का लालिमा समुद्र पर फैल रही थी,


जैसे कोई रक्तिम चादर,

और हवा में नमकीन महक मिश्रित होकर फूलों की हल्की-हल्की मादक खुशबू से बन गई थी,


जो नाक में घुसकर सिर चकरा देती।


वो खुशबू इतनी तीव्र थी कि साँस लेते ही सीने में एक मीठी सिहरन दौड़ जाती, जैसे कोई छिपा हुआ वादा।


लेकिन मेरे मन में वो खालीपन अभी भी घूम रहा था—


खुशबू की वो डोमिनेंट बातें,


“तेरा रोल… नौकर जैसा…”


हर शब्द एक काँटा बनकर सीने में चुभा हुआ था, हवा की हर लहर के साथ काँचता हुआ।



गिल्ट की आग बुझ चुकी थी, लेकिन राख अभी गर्म थी—

त्वचा पर एक चिपचिपी परत की तरह लग रही थी, पसीना नम था, साँसें भारी।


‘हाँ… मैं ही गलत था… वो मेरे लिए ही तो…’ मन में खुद को कन्विंस करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उत्तेजना का वो ट्विस्ट भी था


शाम को ऊपर जाने का वादा… तैयार करने में हेल्प… उफ्फ…


तभी मेरा फोन बजा—



“मालकिन”। ध्वनि इतनी तीखी थी कि कानों में गूँज गई,


दिल धक से हो गया, हाथ काँपते हुए उठाया—स्क्रीन पर उसका नाम चमक रहा था, जैसे कोई जादू का मंत्र।




“हेलो… खुशबू जी?” मेरी आवाज़ काँप रही थी, उत्साह और डर मिश्रित


गला सूखा हुआ, साँसें तेज़।

खुशबू की आवाज़ आई—



मीठी, लेकिन कमांडिंग,


जैसे कोई रानी अपने नौकर को बुला रही हो,


“जान अमित… शाम हो गई… ऊपर आ जाओ ना… डांस पार्टी के लिए तैयार होने में हेल्प चाहिए… असलम जी भी इंतज़ार कर रहे हैं… जल्दी आओ… दरवाज़ा खुला है…  शाम को तुझे हिला दूँगी… लेकिन पहले काम…”


उसकी आवाज़ में वो शरारत थी



, “हिला दूँगी…” ये शब्द कान में गूँज गए,


एक झटका-सा लगा—निचले हिस्से में हलचल हुई, साँसें और तेज़।


मैं तुरंत उठा, आईना देखा—


शर्ट स्ट्रेट की, चेहरा साफ किया, पसीना पोंछा—और ऊपर चला गया।




सूट का दरवाज़ा खुला था। मैं अंदर ग


और कमरा एक राजमहल जैसा लग रहा था


एसी की ठंडी हवा त्वचा पर लग रही थी, सिहरन पैदा कर रही,

सॉफ्ट गोल्डन लाइट्स कमरे को चमका रही थीं, जैसे कोई सुनहरा पर्दा, बड़े-बड़े किंग-साइज़ बेड पर सिल्क की चादरें बिछी हुईं, उनके नरम चमक पर रोशनी पड़ रही थी। हवा में गुलाब और चंदन की राजसी महक इतनी तीव्र थी कि नाक में घुसकर सिर भन्ना देती, साँस लेते ही एक राजसी एहसास होता।



असलम सोफे पर राजा की तरह बैठा था,


लूज व्हाइट शर्ट और पैंट में, एक हाथ में ग्लास


(शायद व्हिस्की का, बर्फ की खनक सुनाई दे रही थी), दूसरे में रिमोट—टीवी पर सॉफ्ट जज़ म्यूजिक चल रहा था, बीट्स दिल की धड़कन से ताल मिला रही। उसके चेहरे पर वो संतुष्ट मुस्कान थी, आँखों में वो मर्दाना अहंकार जो हवा में फैल रहा था



जैसे कमरा उसका साम्राज्य हो। वो मुझे देखकर मुस्कुराया, लेकिन उस मुस्कान में हक था


जैसे कोई साहब अपने नौकर को देख रहा हो, आवाज़ गहरी और कमांडिंग।



“अरे अमित भाई… आ गया… अच्छा… बैठ… खुशबू को तैयार कर दे… डांस पार्टी के लिए… अच्छे से…


मेकअप, !!!

ड्रेस… सब… !!!


ताकि वो चमक उठे…!!!!

तू तो जानता है ना… हमारी मैडम को कैसे हैंडल करना है… !!!

चल, शुरू कर…!!!

देर मत कर… पार्टी का समय हो रहा है…”



असलम का लहजा दोस्ताना था, लेकिन डोमिनेंट—हक जताते हुए, जैसे वो कमरे का मालिक हो, और मैं उसका अधीनस्थ, उसके शब्दों की गूँज कमरे की दीवारों से टकरा रही थी। मैंने सिर हिलाया,


“हाँ… हाँ असलम भाई… मैं… कर दूँगा… अच्छे से…” मन में अपमान की एक चुभन हुई—‘हाँ… तैयार कर दूँगा… जैसे नौकर…’ लेकिन उत्तेजना ने दबा दिया, साँसें तेज़ हो गईं।





खुशबू ने मुझे देखा, मुस्कुराई—उसकी आँखों में वो शैतानी चमक थी, जैसे वो जानती हो कि मैं उसके जाल में फँस चुका हूँ। वो एक लूज रॉब में थी, लेकिन उसके कर्व्स साफ़ झलक रहे थे


नीचे शायद ब्रा-पैंटी, बाल खुले, हवा में लहराते हुए एक सिल्की फील देते।



“चलो जान… बाथरूम में चलते हैं… वहाँ तैयार होऊँगी… तुम हेल्प कर लेना … असलम जी… आप आराम करो… मैं अमित से कह रही हूँ… शाम को डांस पार्टी के लिए… य…” वो बोली,


और मुझे अपने बड़े-से लग्ज़रियस बाथरूम में ले गई।



एक तरफ़ वॉक-इन क्लोसेट जैसा स्पेस, जहाँ ड्रेसेज लटक रही थीं,


उनके सिल्क के फोल्ड्स हवा में सरसराहट कर रहे थे। खुशबू ने दरवाज़ा बंद किया, लेकिन हल्का-सा खुला छोड़ दिया


जैसे जानबूझकर असलम को दिखाने के लिए, उसकी साँसें बाहर तक पहुँच रही हों।
उसने मुजे अपनी एक ड्रेस दिखाई

“देखो जान… ये ड्रेस… आज शाम के लिए… वन पीस… पिंक कलर की…

सिल्क मैटेरियल…!!!

कितनी सॉफ्ट… !!!

हाथ फेरो… !!!!
!
डांस पार्टी में असलम जी के साथ  डांस करूँगी… तो ये सिल्क… material होने के कारण काफी कंफर्टेबल रहेगा .....और तुम्हें तो पता है वैसे भी मैं अपने कॉलेज में डांस में चैंपियन थी...... तो असलम जी को भी अच्छा रहेगा.... मजा आएगा…!!!!



तुम देखो … कितनी शाइनी है… !!!!

नेकलाइन डीप…!!!

बैकलेस… !!!

स्लिट वाली… !!!

जाँघें झलकेंगी… !!!!


ये पहनूँगी…तुम हेल्प कर…!!!!

पहले ब्रा-पैंटी चेंज करनी है… !!!!

ताकि ड्रेस अच्छे से फिट हो… चल… शुरू कर તેં है …”

खुशबू ने रॉब खोला—नीचे वो काली लेस वाली ब्रा-पैंटी थी,


जो उसके कर्व्स को हाइलाइट कर रही थी,



त्वचा पर हल्की-हल्की चमक, हवा में वो परफ्यूम की महक और तेज़ हो गई। वो जानबूझकर धीरे-धीरे ब्रा का हुक खोली,



“जान… ये ब्रा… पुरानी है… नई पहननी है… तुम निकालो ना ander से … हुक खोल… धीरे से… स्ट्रैप्स सरका…”

मैंने हाथ बढ़ाया, ब्रा को सहलाया—नरम लेस, गर्म त्वचा, उसके निप्पल्स की हल्की शेप महसूस हुई, एक सिहरन दौड़ गई मेरी उँगलियों में।


‘ये मेरी पत्नी… लेकिन असलम के लिए…’


लेकिन रोल में खोया हुआ, मैंने निकाल दिया।


“हाँ… निकाल ली… सॉरी… अगर दर्द हुआ…”


मैंने धीमे से कहा। खुशबू हँसी,


“अरे जान… दर्द नहीं… मजा आया… अब नई ब्रा… ये देख… रेड सैटिन वाली… पुश-अप… ड्रेस के साथ मैच करेगी… तू पहना ओ ना … स्ट्रैप्स एडजस्ट करो … मेरी छाती को अच्छे से होल्ड करe wese…


असलम जी को डांस में छूने में आसानी हो…”



मैंने पहनाई, उसके निप्पल्स छूते हुए


‘मैं… हेल्पर हूँ… मालकिन को तैयार… कर रहा हूं लेकिन अपने आप को इसी बारे में नसीब वाला भी मानता हूं .....कि कम से कम इसी कारण सर मुझे मेरी ही पत्नी को हनीमून पर नंगा देखने का ....छूने का ....और हेल्प करने का मौका तो मिला......






उत्तेजना बढ़ गई,

साँसें तेज़, लेकिन अपमान भी





फिर पैंटी

खुशबू ने पुरानी उतारी,


“ये लो … साइड रख… नई pahenao…”

नई थोंग वाली,

रेड, सैटिन, चिकनी और स्लिपरी।


“ये डांस में… असलम जी के साथ चिपकूँगी… तो ये कम्फर्टेबल रहेगी… ...तुम पहनाव na.

....… कमर एडजस्ट करो....…


गांड को अच्छे से कवर करो …


लेकिन थोड़ा एक्सपोज भी…


” मैंने पहनाई,

उसकी जाँघें छूते हुए,


गांड की शेप महसूस करते हुए

नरम त्वचा,

सैटिन का चिकना स्पर्

मन में

‘ये मेरी… लेकिन…’


लेकिन रोल में खोया, मैंने कहा



, “परफेक्ट फिट… असलम भाई को पसंद आएगी… थोंग से गांड की शेप…’”



खुशबू ने हँसकर कहा,



“हाँ… तू तो अच्छा जानता है… उनकी पसंद… जब भी मैं आसपास होती हूं ...वो अपने हाथ पर कंट्रोल ही नहीं कर पाते हैं .....तुमने कितनी सारी फोटोस ली है..... हम दोनों की ......जहां वह हमारी गांड के साथ मस्ती मजाक करते रहता है .......गांड मसलेंगे तो… तू फोटोज में देखना…
अब ड्रेस…

तुम पहनाए …

ज़िप ऊपर कर…

स्लिट एडजस्ट…’


ड्रेस पहनाई


सिल्क का नरम स्पर्श उसके बॉडी पर चिपकता हुआ,

नेकलाइन डीप से छाती उभर आई,


स्लिट से जाँघें झलक रही,


सिल्क की वो चिकनाहट त्वचा पर रगड़ रही।



“हुक लगा… बैक एडजस्ट… सिल्क कितना सॉफ्ट है… …”


डायलॉग्स में वो जताती रही,



“जान… तू कितना अच्छा हेल्पर है… असलम जी खुश हो जाएँगे… देख… ये सिल्क… डांस में चिपकेगी… बॉडी पर लिपट जाएगी… मजा आएगा… तू फोटोज में देखना… कितना समर्पित है तू… मेरा प्यारा नौकर… ज़िप और ऊपर खींच… हाँ… ऐसे… छाती दब रही है… अच्छा…”





मैं पूरी शिद्दत से कर रहा था

अनजान,

परवाह किए बिना कि खुशबू दूसरे मर्द के लिए तैयार हो रही है।



‘हाँ… मेरा काम… मालकिन को खुश करना… साहब को…’


रोल में खोया, जैसे ये मेरा कर्तव्य हो, साँसें तेज़, हाथ काँपते हुए, लेकिन उत्तेजना में डूबा।



मेकअप में हेल्प—लिपस्टिक लगाई,

उसके होंठों पर रेड कलर चढ़ता हुआ,


चमकदार—


“ये रेड… असलम जी को पसंद… किस करने में चमकेगी…”


खुशबू हँसी



, “हाँ… डांस में किस करेगी तो… लेकिन असलम जी के होंठों पर लगेगी… तू तैयार कर रहा है… हा हा…”



तैयार हो गई


ड्रेस में चमक रही थी,


सिल्क की वो शाइनी फिनिश रोशनी में चमक रही।



“थैंक यू जान… अब जाओ… शाम को पार्टी में मिलते हैं… तू फोटोज लेना… लेकिन याद रख… अपना रोल…”






खुशबू ने बाथरूम का दरवाज़ा धीरे से खोला


कमरे की गोल्डन लाइट्स उसके पिंक सिल्क ड्रेस पर पड़ रही थीं,


जैसे कोई राजकुमारी का परिधान चमक रहा हो—ड्रेस इतनी टाइट और शाइनी कि उसके कर्व्स हर कोने से उभर आए थे,


नेकलाइन डीप V-शेप से छाती का हल्का-सा उभार दिख रहा था,


बैकलेस डिज़ाइन से पीठ की गोरी त्वचा चमक रही थी,



और साइड स्लिट से जाँघें झलक रही थीं,



हर कदम पर सिल्क की सरसराहट सुनाई दे रही। उसके बाल खुले,


हल्के कर्ल्स में लहराते हुए,


मेकअप परफेक्ट—


रेड लिप्स चमकदार,

आँखों में काजल की गहराई,


और हल्का ब्लश जो उसके गालों को और गुलाबी बना रहा था।



वो बाहर आई, कदमों की ठक-ठक कमरे की मार्बल फ्लोर पर गूँजी, और असलम की तरफ़ मुड़ी—जैसे कोई रानी अपने राजा को दिखा रही हो।





असलम सोफे पर बैठा था, ग्लास हाथ में, लेकिन जैसे ही खुशबू को देखा,


उसके हाथ से ग्लास फिसलने को हुआ—


बर्फ की खनक रुक गई,


आँखें खुली की खुली रह गईं,


जैसे कोई सपना सच हो गया हो



। “जान… तू… ये ड्रेस… उफ्फ… कितनी… कातिल लग रही है…”



वो गरजा, आवाज़ गहरी और भारी, कमरे की हवा में कंपन पैदा कर दी। उसके चेहरे पर वो रोमांच साफ़ झलक रहा था


आँखें चमक रही थीं, साँसें तेज़ हो गईं, नीचे शॉर्ट्स में हलचल महसूस हो रही थी।



मन ही मन वो सोच रहा था,



‘अल्लाह… ये  माल… सिल्क में लिपटी… डांस में चिपकेगी… रगड़ेगी… अमित बेचारा तैयार कर रहा था… लेकिन ये मेरी है… उफ्फ… आज रात तो…’



वो उठा, खुशबू के पास आया,


उसके कंधे पर हाथ रखा


उसकी उँगलियाँ सिल्क पर सरक रही थीं,


चिकनी फील महसूस कर रहा था।



“आ… करीब आ… ये स्लिट… जाँघें… नेकलाइन… सब कुछ… तू तो आग है जान… डांस पार्टी में सब जल जाएँगे… लेकिन मैं… मैं तो अभी…’



वो फुसफुसाया, और खुशबू के गाल पर हल्का-सा किस किया, उसके होंठों की गर्मी सिल्क के ऊपर से महसूस हो रही।



अब खुशबू और असलम एक दूसरे के साथ और मेरे सामने इतने कंफर्टेबल हो गए थे कि आराम से पति-पत्नी की तरह एक दूसरे को किस कर सकते थे जिसमें मुझे अब अजीब भी महसूस नहीं होता था.....






खुशबू ने शरमाते हुए,


लेकिन शैतानी मुस्कान के साथ असलम के सीने पर सिर टिका दिया,


“असलम जी… ये सब… तुम्हारे लिए ही तो… सिल्क… डांस में चिपकेगी… मजा आएगा…”




लेकिन उसकी नज़रें मुझ पर पड़ीं



मैं दरवाज़े के पास खड़ा था, हाथों में अब भी वो पुरानी ब्रा-पैंटी लटक रही थी

.
खुशबू को मुझ पर दया आई .....लेकिन उसने इस बात का भी फायदा उठाया ......उसने कहा



"क्या असलम जी !???हमारे बिचारे प्यार हेल्पर में आपकी आपके लिए मुझे इतना सजाया .....इतना अच्छे से तैयार किया ....उसके लिए टिप तो बनती है ना....!!!



असलम ने मुझे देखा, मुस्कुराया—उस मुस्कान में वो संतुष्टि थी, जैसे कोई राजा अपने नौकर को इनाम दे रहा हो।


असलम भी पूरे उत्साह में "हां हां क्यों नहीं!??




“अमित भाई… कमाल कर दिया तूने… खुशबू… चमक रही है… तू तो मास्टर है…

ये ड्रेस… ये मेकअप… सब परफेक्ट…


थैंक यू… ले… ये ले…


वो वॉलेट निकाला, दो हज़ार का नोट निकालकर मेरी तरफ़ बढ़ा दिया


नोट की कागज़ की खुरदुरी फील मेरी हथेली पर लगी, लेकिन मन में अपमान की चुभन—



‘ये मेरी बीवी को तैयार किया… और टिप… उसके दोस्त से…’


लेकिन परवाह किए बिना, मैंने ले लिया।



“थैंक यू असलम भाई… खुश… खुशी हुई…” मैंने कहा,



नोट जेब में डालते हुए—गिल्ट और रोमांच मिक्स हो गया, लेकिन संतुष्टि का एहसास हुआ—



‘मेरा काम… खुशबू और असलम दोनों खुश… यही तो मेरा रोल है…’ मन में एक मीठी लहर दौड़ गई, जैसे मैंने अपना कर्तव्य निभा लिया हो।






असलम ने खुशबू को गले लगाया,



“चल जान… नीचे चलें… डांस पार्टी इंतज़ार कर रही है…”


दोनों हाथ में हाथ डाले कमरे से बाहर निकले। मैं पीछे-पीछे चला गया—मन में संतुष्टि थी,



‘मेरा काम… अच्छा लगा… वो दोनों खुश…’ लेकिन कहीं अंदर वो खालीपन बाकी था।
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RE: मेरी खूबसूरत पत्नी खुशबू भोला भाला बुद्धू सा में और बहुत सारे ,., मर्द - by Namard pati - 07-01-2026, 11:46 AM



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